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ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
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  आत्महत्या या हत्या!
   
 
दो माह पूर्व दसवीं की परीक्षा देने वाली काशीपुर की पल्लवी १८ मई को अपने स्कूल की चारदीवारी के बाहर मृत पाई गई। मामला आत्महत्या का माना गया। पर द्घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्य कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। फिलहाल जांच अआिँाकारी अवकाश पर हैं। उनके आने पर ही पता लगेगी पल्लवी की मौत की असली वजहें

देवभूमि उत्तराखण्ड में लंबे समय से महिलाओं के प्रति बढ़ रही आपराधिक द्घटनाओं के माहौल में पल्लवी की मौत का मामला सामने आया है। पुलिस और परिजन इसे आत्महत्या बता रहे हैं पर साक्ष्य इस बात पर संदेह पैदा करते हैं। आत्महत्या की जो वजह

बताई जा रही है वह इसलिए विश्वसनीय नहीं लगती क्योंकि परीक्षा के बाद और रिजल्ट आने से पहले ही कैसे कोई छात्रा आत्महत्या कर लेगी। इसके बाद द्घटनास्थल पर मिले सबूत इशारा करते हैं कि कहीं यह महिलाओं के प्रति बढ़ रहा अपराध का नतीजा तो नहीं।

पंद्रह साल की पल्लवी काशीपुर (ऊधमसिंह नगर) के रहमखानी में रह रही थी। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेन्द्र मानस के चार पुत्र और दो पुत्रियों में सबसे छोटी पल्लवी को किसी चीज की कमी नहीं थी। वह सुख सुविधाओं में पल रही थी और जिंदगी में कुछ कर गुजरने की उम्मीदें पाले हुई थी। उसी उम्मीद को आगे बढ़ाते हुए उसने कुछ दिन पूर्व उत्तराखण्ड बोर्ड की दसवीं की परीक्षा दी थी। अभी उसका रिजल्ट आना बाकी था। लेकिन जिस स्कूल से वह जिंदगी को जीने की कला सीख रही थी उसी के नीचे उसके सपनों का अंत हो गया। १८ मई को तड़के पूरे काशीपुर में उस समय सनसनी फैली गयी जब मुरादाबाद रोड स्थित कूष्णा पब्लिक कॉलेजिएट (केपीसी) के नीचे दीवार से सटा हुआ पल्लवी का लहुलूहान शरीर मृत हालत में पड़ा मिला। साथ ही उसकी सहेली सुरभि भी बेहोशी की हालत में वहां पड़ी थी। दोनों को अस्पताल ले जाया गया। जिसमें पल्लवी की मौत हो गई लेकिन सुरभि अभी भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। सुरभि काशीपुर के ही आर्यनगर निवासी पूरन चंद्र की पुत्री है। पल्लवी और सुरभि १७ मई को दोपहर दो बजे द्घर से निकली और देर रात तक द्घर नहीं पहुंची। दोनों के परिजनों ने उन्हें खूब खोजा। अगले दिन १८ मई को यह द्घटना द्घट गई।

पुलिस ने इस मामले को आत्महत्या मानकर जांच की दिशा ही मोड़ दी। यही नहीं पुलिस ने उन लोगों से भी कुछ जानने की कोशिश नहीं की जहां वे गई थीं। पता चला है, कि मौत से पूर्व दोनों छात्राएं गौतम नगर, गिरीताल और रेलवे स्टेशन गई थीं। हालांकि जिस तरह इस मामले को आत्महत्या बताया जा रहा है वह समझ से परे है। ऐसी कोई बात भी निकलकर सामने नहीं आई जिससे यह कहा जा सके कि पल्लवी और सुरभि इसको लेकर परेशान थी और आत्महत्या जैसा आत्मद्घाती कदम उठाने को मजबूर हो गईं। पल्लवी की डेडबॉडी मिलते ही जिस तरह से आनन-फानन में उसका अंतिम संस्कार कराया गया और यह कहा गया कि उसने आत्महत्या की है यह परिजनों को शक के दायरे में लाता है। परिजनों को ऐसी क्या जल्दी थी कि बिना किसी जांच पड़ताल के चंद द्घंटों में वह मीडिया के सामने बयान देते हैं कि दोनों लड़कियां बोर्ड परीक्षा को लेकर तनाव में थी। इसके कारण ही उन्होंने आत्महत्या करने का फैसला लिया होगा। क्या कोई छात्रा परीक्षा परिणाम आने से पूर्व ही उसके रिजल्ट को लेकर आशंकित हो आत्महत्या कर सकती है? अमूमन रिजल्ट आने के बाद ही छात्रों के मन में ऐसे विचार आते हैं। लेकिन रिजल्ट आने से पहले ही कोई क्यों आत्महत्या करेगा यह मोजूं सवाल है।

भारतीय जनता पार्टी जिला ऊधमसिंह नगर के पूर्व अध्यक्ष नरेन्द्र मानस की पुत्री पल्लवी सोमवार १७ फरवरी को दोपहर करीब ढाई बजे अपनी सहेली सुरभि पुत्री पुरन चंद्र गुप्ता निवासी आर्यनगर के द्घर जाने की बात कहकर निकली थी। पल्लवी और सुरभि मुरादाबाद रोड स्थित कूष्णा पब्लिक कॉलेजिएट (केपीसी) में १०वीं कक्षा में साथ-साथ पढ़ी हैं। गत दिनों ही दोनों ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा भी साथ ही दी थी। शाम साढ़े पांच बजे तक द्घर नहीं पहुंचने पर पल्लवी के परिजनों ने उनकी तीसरी सहेली से बात की। गौतम नगर निवासी उस सहेली ने फोन पर बताया कि दोनों यहां से शाम होने से पूर्व ही जा चुकी हैं। १८ फरवरी की सुबह पांच बजे परिजनों को पल्लवी और सुरभि के कूष्णा पब्लिक कॉलेजिएट के पीछे खून से लथपथ पड़े होने की सूचना मिली। द्घटनास्थल पर पुलिस को पल्लवी मृत अवस्था में और सुरभि गंभीर हालत में मिली। दोनों को तत्काल राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया। वहां से पल्लवी को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया। जबकि सुरभि की गंभीर हालत देखते हुए पहले हल्द्वानी भेजा गया फिर वहां से उसे बरेली रेफर कर दिया गया। सुरभि को कई दिनों तक होश नहीं आया। जब वह बेहोशी की हालत में थी तभी उसके परिजनों ने यह कहकर मामले को उलझा दिया कि सुरभि ने अपनी सहेली पल्लवी के साथ आत्महत्या करने की सोची होगी। जिसमें पल्लवी तो मर गई लेकिन सुरभि बच गई।

हालांकि सुरभि के परिजनों ने पुलिस को नहीं बताया कि छात्राओं की आत्महत्या की वजह क्या थी? जब पुलिस टीम ने द्घटनास्थल का मुआयना किया तो उसने छात्राओं की छत से गिरने की आशंका की वजह से केपीसी स्कूल की छत का निरीक्षण किया। छत के दरवाजे पर अंदर से कुंडा लगा हुआ था। कुंडा खोलकर जब दरवाजे पर धक्का दिया गया तो वह नहीं खुला। कई पुलिसकर्मियों ने उसे जोर से धकेला तब जाकर वह खुला। छत पर जाकर देखा गया तो दरवाजे को बाहर से बंद करने के लिए कुछ ईंटें एवं टूटे हुए स्टूल लगे हुए थे। छत पर बनी एक कोठरी में एक बैग मिला। बैग पल्लवी का था। जिसमें पल्लवी के स्कूल की नोट बुक और एक छोटी कैंची मिली। वहीं पास में एक ब्लेड भी पड़ा हुआ था। छत के दक्षिण वाले किनारे पर मुढेर पर चढ़ने के लिए लगाई गई एक बैंच भी मिली। जहां पर बैंच लगी हुई थी मृत एवं द्घायल छात्राएं उसके नीचे मिली थीं।

बताया जाता है कि पल्लवी और सुरभि के चेहरे व शरीर पर चोटों के निशान भी पाए गये। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पेट में चोट लगने की बात सामने आई है। जो आत्महत्या की थ्योरी को ही गलत साबित करते हैं। सवाल यह उठता है कि कोई आत्महत्या करने वाला व्यक्ति क्या पहले अपने चेहरे और शरीर के अलावा पेट पर चोट मारेगा। हो सकता है दोनों छात्राएं किसी अनहोनी का शिकार हुई हों जिसका विरोध करने पर उन्हें शारीरिक यातनाएं दी गईं हों। पल्लवी की तो आंखों पर भी चोट के निशान थे। १७ मई की दोपहर ढाई बजे द्घर से निकली छात्राओं का मकसद अगर आत्महत्या करना ही था तो वह गौतमनगर, गिरीताल और रेलवे स्टेशन किस लिए गई थी। १७ मई का आधा दिन और पूरी रात (लगभग १५ द्घंटे) तक दोनों आत्महत्या का निर्णय लेने में ही लगी रही या रात को उनके साथ कुछ ऐसा हुआ कि मामले को आत्महत्या का रूप देना पड़ा? इस सवाल का जवाब कूष्णा पब्लिक कॉलेजिएट ही तीसरी मंजिल की उस छत पर है जहां फोरेसिंक एक्सपर्ट को दो कंडोम पड़े हुए मिले। इस छत को पुलिस ने आत्महत्या का केन्द्र बिन्दु माना है। छत पर बैंच का इस तरह रखा जाना कि जिससे लगे कि इन पर चढ़कर छात्राओं ने छलांग लगाई है संदेह पैदा करता है। जिस छत की बाउंड्री के नीचे बैंच लगाए गये हैं उसकी ऊंचाई २ से ढाई फुट है। ऐसे में आत्महत्या करने वाला कोई भी सख्श बैंच लगाने की बजाय सीधे नीचे छलांग लगा लेगा।

इसी के साथ छत की सीढ़ियों के दरवाजे की कुंडी का बाहर और भीतर दोनों ओर से बंद होना भी सवालिया निशान लगाता है। सवाल उठता है कि अगर छात्राएं छत पर थीं तो बाहर से कुंडी किसने लगाई? छात्राओं ने अंदर जाकर सीढ़ियों में खुलने वाले दरवाजों पर स्टूल आदि लगाकर उसे बंद कैसे किया? आत्महत्या करने जाने वाला कोई भी शख्स आत्महत्या करने से पहले दरवाजे को अवरोध लगाकर बंद क्यों करेगा। कॉलेजिएट की पूरी की पूरी बिल्डिंग रात के समय सुनसान होती है। यहां सवाल यह भी है कि दोनों छात्राएं वहां कैसे द्घुस गई जबकि वहां पर एक चौकीदार अलाउद्दीन हर वक्त तैनात रहता है। उसके होते हुए छात्राओं के तीसरी मंजिल पर पहुंचने का भी किसी को पता तक कैसे नहीं चला? कॉलेजिएट का तीन मंजिला भवन जिसकी ऊंचाई करीब ४५ फुट है से गिरी छात्राओं के सर में चोट न आना भी संदेह पैदा करता है। स्वाभाविक है कि जब कोई तीसरी मंजिल से छलांग लगायेगा और सीधे सड़क पर आकर गिरेगा तो क्या उसका सर नहीं फूटेगा? इन सवालों के जवाब अभी समय के गर्भ में छिपे हुए हैं। जिनका जवाब सुरभि ही दे सकती है। सुरभि फिलहाल बरेली हॉस्पिटल में है। जहां अभी वह गहरे सदमें से नहीं निकल सकी है। फिलहाल वह बात करने की स्थिति में भी नहीं है।

उधर दूसरी तरफ इस मामले का आईओ (जांच अधिकारी) काशीपुर के कोतवाल आरएस असवाल को बनाया गया है। लेकिन पुलिस सूत्रों से पता चला है कि जिस दिन से श्री असवाल को जांच का जिम्मा सौंपा गया है वह छुट्टी पर चले गए हैं। मामला चूंकि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े ऐसे नेता की पुत्री का है जो पूर्व में पार्टी का जिला अध्यक्ष रह चुका है। इसके चलते इस मामले की जांच में तेजी बरती जानी चाहिए थी लेकिन पुलिस प्रशासन का मामले को हल्के से लेना और जांच कार्यों में गंभीर न होना दर्शाता है कि वह इसे रफा-दफा करने के मूड में है। क्या पुलिस और परिजन नहीं चाहते कि मामले से रहस्य का पर्दा उठे?
ांेंी/जीमेनदकंलचवेजण्पद

   
 
   
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