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कोरियाई देशों के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दोनों देश लगातार एक दूसरे पर दबाव बनने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन हाल ही में दक्षिण |
कोरियाई नौसैनिक जहाज को उत्तर कोरिया की पनडुब्बी से दागे गए टोरपीडो ने डुबो दिया। इस द्घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी का बढ़ना स्वाभाविक है
कोरियाई देशों के रिश्तों की कड़वाहट किसी से छिपी नहीं है। दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस बार यह विवाद १२०० टन क्षमता वाले युद्धपोत चियोनेन पर पानी के भीतर उत्तर कोरियाई पनडुब्बी से दागे गए तारपीडो का निशाना बनाने को लेकर है। चियोनेन नामक युद्धपोत विवादित कोरियाई समुद्री सीमा के पास २६ मार्च को डुबा। इस द्घटना में ४६ नौसैनिक मारे गए थे। यह युद्धपोत विवादित अंतर कोरियाई सीमा के पास डुब गया था। जांचकर्ताओं के मुताबिक इसके पक्के सबूत हैं कि इस द्घटना में उत्तर कोरिया का हाथ है। समंदर से मिले उत्तर कोरियाई टारपीडो के टुकडे़ इसकी पुष्टि करते हैं। इस द्घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया ने पीला सागर इलाके में नवम्बर में हुई गोलीबारी का बदला लेने के लिए यह कार्रवाई की है।
दक्षिण कोरिया द्वारा उत्तर कोरिया पर अपने जंगी जहाज को डुबोने का खुलकर इल्जाम लगाए जाने के बाद कोरियाई प्रायद्वीप में मचा द्घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। दक्षिण कोरियाई युद्धपोत के डुबने से देश में आक्रोश है। वहीं उत्तर कोरिया ने चेतावनी दी है कि अगर दक्षिण कोरिया के युद्धपोत पर हमले के मामले में उसके खिलाफ बदले के इरादे से कोई कार्रवाई की गयी तो युद्ध की नौबत आ सकती है। हालांकि दक्षिण कोरिया ने युद्ध भड़कने के डर से सैनिक हमले की संभावना से इंकार किया है लेकिन सुरक्षा परिषद से उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग की है। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया पीला सागर में सीमा के बंटवारे को खारिज करता रहा है।
सरकार के पांच दिनों के राष्ट्रीय शोक की द्घोषणा के बावजूद दक्षिण कोरिया के लोगों में गुस्सा भरा है। लोग १९८७ के उस हमले को भी याद कर रहे हैं जब उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के एक यात्री विमान को उड़ान के दौरान गिरा दिया था। उस हमले में ११५ लोगों की जान गईं थी। बढ़ते तनाव के बीच दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के खिलाफ और कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। दक्षिण कोरिया अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से पड़ोसी देश पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग कर सकता है।
दक्षिण कोरिया का कहना है कि उसके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि उत्तर कोरिया की पनडुब्बी से टारपीडो मिसाइल दागा गया। जिससे दक्षिण कोरियाई नौ सेना के जहाज चियोनेन डुबा। उत्तर कोरिया ने उस पर हमले के आरोपों को लेकर नाराजगी जतायी है। उसने इस मामले में आयी अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्ट को मनगढंत करार देते हुए दक्षिण कोरिया के जहाज को डुबाने में अपना हाथ होने से साफ इनकार किया। उत्तर कोरिया की शांति बहाली के लिए गठित समिति ने एक बयान में कहा अब से हम इस मामले में स्थिति को देखकर बात करेंगे। इसके कारण दक्षिण और उत्तर कोरिया के रिश्तों में आ रही समस्याओं के प्रति भी हम जवाब के लिए कृतसंकल्प हैं। हालांकि समिति ने कहा अगर दक्षिण कोरिया इस मामले को लेकर बदले की कार्रवाई अथवा उसके ऊपर कोई प्रतिबंध लगाता है तो हम उसके साथ सभी रिश्ते समाप्त करके बगैर किसी हमदर्दी के उसे इसका जवाब युद्ध की तरह देंगे।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्युंग बाक ने उत्तर कोरिया द्वारा युद्धपोत को तारपीडो से नष्ट करने के बाद प्योंगयांग के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने की बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में दक्षिण कोरिया पर यदि कोई हमला किया जाता है तो वह इसका करारा जवाब देगा। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने कहा है कि उत्तर कोरिया को युद्धपोत ध्वस्त किए जाने की कीमत चुकानी होगी। ली ने साफ किया अगर उत्तर कोरिया के साथ व्यापार को रोका जाएगा और जहाजों को दक्षिण कोरियाई जलक्षेत्र में नहीं आने दिया जाएगा। राष्ट्रपति ली बाक के दो साल के शासनकाल में उत्तर कोरिया के साथ रिश्तों में तल्खी लगातार बढ़ी है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने दक्षिण कोरिया के नौसेना के जहाज को डुबाने की द्घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्ट में दक्षिण कोरियाई नौसेना जहाज पर हमले में उत्तर कोरिया का हाथ होने की बात गंभीर चिन्ता का विषय है। व्हाइट हाउस ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए चुनौती बताया। अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के मुताबिक उत्तर कोरिया की यह हरकत बर्दाश्त के काबिल नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि दक्षिण कोरिया के युद्ध पोत को डुबोने के परिणाम उत्तर कोरिया को भुगतने होंगे। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्युंग बाक का दावा है कि उत्तर कोरिया ने उनके सैन्य जहाज पर अप्रत्याशित हमला किया। इस बीच जापान, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया आदि देश इस द्घटना पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं जबकि चीन ने दक्षिण कोरिया को संयम बनाए रखने की सलाह दी।
गौरतलब है कि में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद कोरियाई प्रायद्वीप सोवियत संद्घ और अमेरिका के कब्जे वाले क्षेत्रों में बांट दिया गया। उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र संद्घ के पर्यवेक्षण में में दक्षिण में हुए चुनाव में भाग लेने से इंकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप दो कब्जे वाले क्षेत्रों में अलग कोरियाई सरकारों का गठन हुआ। उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों ही ने पूरे प्रायद्वीप पर संप्रभुता का दावा किया, जिसका परिणाम कोरियाई युद्ध के रूप में सामने आया। १९५३ में हुए युद्ध विराम के बाद लड़ाई तो खत्म हो गई, लेकिन दोनों देश अभी भी आधिकारिक रूप से युद्धरत हैं, क्योंकि शांति संधि पर कभी हस्ताक्षर नहीं किए गए। दोनों देशों को में संयुक्त राष्ट्र में स्वीकार किया गया। |