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ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
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अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों का उद्योग लगाने के लिए आवंटित जमीन लेने वालों की सूची में पूर्व मंत्री और नेता भी शामिल?
 
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  मदद के मोहताज
   
 
हाल ही में दंतेवाड़ा में हुई नक्सली हिंसा ने केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार की भी नींद उड़ा दी है। लगातार हुए नक्सली हमले से तिलमिलाए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने नक्सलियों को सबसे बड़ा आतंकवादी करार दिया। दिल्ली में मीडिया से बात

करते हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सलवाद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आप और किसे आतंकवादी कहेंगे। वे लोग सबसे बड़े आतंकवादी हैं। लोकतंत्र के लिए नक्सलवाद ही सबसे बड़ी समस्या है। वे बंदूक की नोक पर सत्ता हथियाना चाहते हैं। ये लोग देश

के जवानों को मारते हैं, नागरिकों की हत्या करते हैं। स्कूल, कॉलेज, रेलवे लाइन और बैंक उड़ाते हैं। पिछले साठ साल में उनसे नरमी बरतकर हमने क्या पाया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने आम लोगों से अपील की कि उन्हें बिना देर किए नक्सलियों के खिलाफ जंग में शामिल होना होगा।

रमन सिंह ने नक्सलियों से निपटने के लिए केंद्र से मदद की गुहार लगायी है। हालांकि नक्सल प्रभावित इलाकों में सैन्य कार्रवाई के लिए हेलिकॅाप्टर या बमबाजी करने से रमन सिंह ने असहमति जताई। मुख्यमंत्री का मानना है कि अगर बस्तर के इलाके में बमबारी की गई तो बड़ी संख्या में आम लोग मारे जायेंगे और ऐसा करना जनहित में सही नहीं होगा। नक्सलियों से निपटने के लिए उन्होंने पुलिस बल के आधुनिकीकरण और गोरिल्ला ट्रेनिंग में निपुण बनाने की आवश्यकता बताई। रमन सिंह के अनुसार नक्सली समस्या के हल के लिए बहुत ही समग्र रणनीति की जरूरत है और इसके लिए तमाम विशेषज्ञों से राय लेनी की बात कही।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने इस बीच मुलायम सिंह यादव की इस बात से सहमति जताई है कि नक्सलियों से निपटने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। इस बीच रमन सिंह ने दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर अपनी समस्या से अवगत कराया। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए राज्यों को केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की बात कही। मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि नक्सलियों के लश्कर से संबंध से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। रमन सिंह के अनुसार नक्सली जिस अंदाज में काम कर रहे हैं उससे यह तय लग रहा है कि बड़े आतंकवादी संगठनों का समर्थन उन्हें मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने दिग्विजय सिंह को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि नक्सली हिंसा से देश जल रहा है और कुछ नेता इस पर राजनीति कर रहे हैं।

रमन सिंह का जन्म १५ अक्टूबर १९५२ में हुआ। सात दिसंबर २००३ से वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं। वे पेशे से चिकित्सक हैं। भारतीय जनता पार्टी में उन्होंने युवा सदस्य के रूप में प्रवेश किया। बाद में वे पार्टी के टिकट पर विधायक बने। १९९९ का वर्ष रमन सिंह के जीवन में महत्वपूर्ण रहा। इसी वर्ष वे राजनंदगांव लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गये। वाजपेयी सरकार में उन्होंने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री के पद पर काम किया। इसके पश्चात उन्हें राज्य बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया। रमन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में शानदार सफलता पाई। बाद में राज्य के कद्दावर नेता दिलिप सिंह जूदेव के भ्रष्टचार में फंसने की वजह से उनकी जगह रमन सिंह को राज्य का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। साफ छवि वाले रमन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने वर्ष २००८ के राज्य विधान सभा चुनाव में एक बार फिर से कामयाबी हासिल की। जिसके पश्चात एक बार फिर रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के तौर पर बारह दिसबंर २००८ को शपथ ली।

पिछले दस साल में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में एक हजार से अधिक लोगों के साथ साथ करीब ६५० पुलिसकर्मियों की हत्या की है। उन्होंने करीब १३२ बिजली के खंभों को उड़ाया, १०६ स्कूलों को तबाह कर दिया। इसके साथ ही तीन अस्पतालों को नष्ट कर चुके हैं। नक्सल समस्या जिस प्रकार दिनों दिन बढ़ती जा रही है उसे देखते हुए राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आम राय बननी चाहिए। अगर नक्सली समस्या की गंभीरता को अभी नहीं समझा गया तो बहुत देर हो जाएगी। नक्सली की कोई विचारधारा नहीं है। वे बारिश से पहले बड़ी वारदात को अंजाम देना चाहते हैं। जिससे भय और आतंक का माहौल बनाकर लोगों के बीच दबदबा बना सके। जो भी हो नक्सली देश के लिए नई समस्याएं पैदा कर रहे हैं। जिस तरह से उन्होंने हाल के दिनों में सरकारी अहलकारों को निशाना बनाया है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अब वक्त आ गया है जब नक्सलियों पर नकेल कसी जाए।


   
राज दरबार
 
विरोधी ही खेवनहार
 
उत्तराखण्ड में कांग्रेस की गुटबाजी का सबसे ज्यादा फायदा अगर किसी को मिल रहा है तो वह हैं राज्य के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक। कभी हरीश रावत के दरबारी रहे हरक सिंह रावत आजकल उन्हें के निशाने पर हैं। हरक सिंह रावत इन दिनों विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं, लेकिन सरकार को द्घेर पाने में हर बार असफल हो जाते हैं। जाहिर सी बात है इसका सीधा फायदा सत्त्ाा पक्ष को ही मिलता है। अब वे उत्तराखण्ड के काम काज की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। शायद वे यह भूल गये हैं कि विपक्ष पहले से सीबीआई के निशाने पर है। सीबीआई जांच के लिए लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। विशेष आर्थिक पैकेज के मुद्दे पर उनकी बयानबाजी से निशंक सरकार को ही फायदा मिल रहा है। हरीश रावत ने थोड़ी सूझबूझ दिखाते हुए विशेष पैकेज का समर्थन कर डाला। अब कांग्रेस की इस बयानबाजी से निशंक का खुश होना स्वाभाविक है।
 

पेट में दांत

 
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों अपने विरोधियों से काफी परेशान हैं। उनका विरोध पार्टी के भीतर और पार्टी के बाहर दोनों जगह हो रहा है। लेकिन नीतीश कुमार भी खेले हुए खिलाड़ी हैं। इसलिए अपने विरोआिँायों को जवाब देने के बजाए वे जनता को लुभा रहे हैं। आखिरकार फैसला तो जनता को ही करना है। वैसे पिछले चुनाव में जिस विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा गया उस पर सीएम जनता की नजरों में खरे उतरे। साथ ही सामाजिक बदलाव लाने में भी कामयाब रहे। आजकल अपनी इन्हीं उपलब्आिँायों का बखान जनता के बीच जाकर कर रहे हैं। विरोधियों की कोई परवाह नहीं है। नीतीश अच्छी तरह से जानते हैं कि उन्हें जिनती अहमियत देंगे उनका असर उतना ही बढ़ेगा। इस रणनीति को विरोधी भी खूब समझ रहे हैं। लेकिन करें तो क्या करें। तभी तो नीतीश के धूर विरोधी लालू यादव बार-बार कहते हैं, नीतीश के पेट में दांत है।
 
ममता का मोह
 

ममता बनर्जी के मूड से सभी वाकिफ हैं। कब कहां किस पर बरस जाएं कहा नहीं जा सकता। जब विरोधी ने उन पर दिल्ली की बजाए कोलकाता में रहने का आरोप लगाया तब ममता को गुस्सा आ गया। पलटवार करते हुए कह डाला कि उनका द्घर पश्चिम बंगाल में है, दिल्ली में नहीं। अपनी जनता की सेवा के लिए वह कोलकाता में रहती है। वैसे एनडीए की सरकार में भी ममता की यही आदत थी। दिल्ली में उनका दिल नहीं लगता। हर वक्त कोलकाता की चिंता सताती रही है। दरअसल सारा खेल कुर्सी का है। वैसे ममता इन दिनों शहरी निकाय चुनाव के प्रचार में व्यस्त हैं। पर निशाना तो बंगाल विधानसभा चुनाव है। इसका वह रिहर्सल कर रहे हैं। कोलकाता में उनकी सक्रियता चुनाव के वक्त ही दिखती है। वैसे लोकसभा की कामयाबी से उत्साहित ममता इस बार विधानसभा में अपना परचम लहराने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहतीं।

 
   
 
 
   
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