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ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
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अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों का उद्योग लगाने के लिए आवंटित जमीन लेने वालों की सूची में पूर्व मंत्री और नेता भी शामिल?
 
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कांटों भरी डगर
 

वर्ष २००९ का अगस्त महीना अभी भी नैनीताल जनपद के लोग भूले नहीं हैं। इस महीने की २२ तारीख को जब कोटाबाग के ब्लॉक प्रमुख एवं भाजपा नेता बलवंत सिंह कन्याल उर्फ मिंटू की कालाढुंगी

थाने में मौत हुई तो प्रदेश की राजनीति की जड़ें हिल गईं। पुलिस के सामने ही बसपा के एक नेता ने कन्याल को गोलियों से उड़ाकर कानून के चिथड़े- चिथड़े उड़ा दिये। अगले दिन स्थानीय जनता ने

थाने को न केवल आग के हवाले किया बल्कि खाकी वर्दीधारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इसके बाद ग्रामीणों को चिह्नित कर पुलिस ने जेल की हवा खिलाई और बेकसूरों को भी बेवजह फंसाया गया। निर्दोषों को बचाने और मामले की सीबीआई जांच के लिए कन्याल की पत्नी दीपाली कई बार धरने पर बैठीं। लेकिन सरकार उसकी अनसुनी करती रही। एक बार फिर दीपाली ने इन मामलों सहित कई मुद्दों को लेकर अभियान चलाया है और विधानसभा द्घेरने की चेतावनी दी है। इस बार वह ब्लॉक प्रमुख के रूप में लोगों के सामने हैं।

कोटाबाग के पूर्व ब्लॉक प्रमुख बलवंत कन्याल की मौत के बाद उसकी मां के साथ ही सारी जिम्मेदारी दीपाली पर आ गई है। लखनऊ में पली बढ़ी दीपाली की २००२ में बलवंत कन्याल के साथ शादी हुई। २००९ के कालाढुंगी कांड ने उसकी जिंदगी में कांटे बो दिए। पति का साथ तो छिना साथ में सास और ननद पर भी केस दर्ज हुए। अब दीपाली इनके साथ उन लोगों को जो बिना कसूर जेल में बंद हैं, बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। गत ५ मार्च को दीपाली उनके पति की रिक्त सीट बिदरामपुर से सर्वसम्मति से निर्विरोध क्षेत्र पंचायत सदस्य बना दी गईं। इसके बाद कोटाबाग ब्लॉक के सभी ९५ क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने भी दीपाली के पक्ष में एकजुटता दिखाई और सबकी आम सहमति से उन्हें ब्लॉक प्रमुख चुन लिया गया। १० मार्च को कोटाबाग की ब्लॉक प्रमुख बनने के बाद दीपाली क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सक्रिय हैं। ब्लॉक के किसी भी गांव या मोहल्ले में कोई भी समस्या होती है तो वह अपने भाई डब्बू के साथ वहां पहुंच जाती है।
ब्लॉक प्रमुख बनते ही दीपाली ने सबसे पहले क्षेत्र में पेयजल की समस्या को दूर करने के प्रयास किये। वह कहती हैं अधिकतर द्घरों में टंकियां नहीं हैं नलों की भी कमी है। इसके अलावा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को आवास उपलब्ध कराना भी दीपाली कन्याल की प्राथमिकताओं में से एक है। पति की मौत के सदमे से अभी पूरी तरह उबर नहीं पाई दीपाली कहती हैं पुलिस वालों के सामने जिस तरह से उन्हें मौत के द्घाट उतारा गया उसमें खाकी वर्दी की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके चलते ही स्थानीय जनता आक्रोशित हो उठी थी और कालाढुंगी थाने को आग के हवाले कर दिया था। लेकिन जिनका बेटा मरे, पुलिस उन्हीं को गिरफ्तार करे यह कहां का इंसाफ है। वह कहती हैं अभी भी तीन दर्जन से अधिक क्षेत्रीय लोग जेल में बंद हैं जो बेकसूर हैं। इससे पूर्व में १५ लोगों की जमानत हो चुकी है। इतने ही लोगों पर पुलिस ने गैंगस्टर लगा रखा है।

इस मुद्दे पर वह अब तक करीब तीन बार धरने पर बैठ चुकी हैं। गत अप्रैल में भी उन्होंने धरना दिया था। ब्लॉक प्रमुख दीपाली की मांग है कि कन्याल हत्याकांड की सीबीआई जांच कराई जाये इसके अलावा स्थानीय बेकसूर लोगों को जेल से रिहा किया जाए। हर बार की तरह इस बार भी उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों ने एक माह का समय देकर धरना स्थगित करा दिया। तब दीपाली ने द्घोषणा की थी कि अगर एक माह में उनकी मांगें न मानी गईं तो वे विधानसभा का द्घेराव करेंगी। द्घोषणा हुए एक माह बीत गया है। लेकिन अभी भी उनकी मांगें नहीं मानी गई हैं। ऐसे में उनके विधानसभा द्घेराव की द्घोषणा की तरफ सबकी नजर लगी हुई है।

 
 
 
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