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मम्मी अभिनेत्रियों का जलवा
 

अमूमन बॉलीवुड में मां बनने के बाद नायिकाओं की पूछ कम हो जाती है लेकिन कुछ ऐसी अभिनेत्रियां भी हैं, जिन्होंने मां बनने के बावजूद न सिर्फ निर्माता-निर्देशक बल्कि दर्शकों का भी दिल जीता।

अभी फिल्म 'काइट्स' की वजह से बारबरा की काफी चर्चा हो रही है। बॉलीवुड में पहली बार कदम रखने वाली यह मैक्सिकन अभिनेत्री सिंगल होते हुए भी एक बारह वर्षीय बेटे की मां है, लेकिन फिल्म देखने पर कहीं से नहीं लगता कि वह मां होंगी। वैसे अगर बॉलीवुड

की फिल्मों पर एक नजर डाली जाए तो यह बात उभरकर आती है कि अगर लुक्स और एक्ंिटग अच्छी हो तो यहां मम्मी अभिनेत्रियों का जलवा रहा है। साठ-सत्तर के दशक में नूतन का जबर्दस्त क्रेज था। उनकी एक्ंिटग और फिल्मों के लोग दीवाने थे। १९५९ में नूतन की शादी मिलीट्री कमांडर रजनीश बहल से हो गई। शादी के कुछ ही वर्षों बाद वह मां बन गई। इसके बाद एक बारगी ऐसा लगा था कि वह फिल्म छोड़ देंगी लेकिन करियर और परिवार के बीच सामंजस्य बिठाकर नूतन ने कई बेहतरीन फिल्मों में अभिनय किया और दर्शकों से प्रशंसा भी पाईं। 'चांद की दीवार' (१९६२), 'बंदनी' (१९६३), 'दुल्हन एक रात की' (१९६६), 'महाराजा' (१९७०), 'दुनियादारी' (१९७७), 'मैं तुलसी तेरे आंगन की' (१९७८), 'साजन की सहेली' (१९८०), 'जियो और जीने दो' (१९८२), 'ये कैसा फर्ज' (१९८४) आदि ऐसी ही कुछ फिल्में हैं ।

इसी तरह वर्ष १९६३ में सत्यजीत राय की 'महानगर' से बाल-कलाकार के रूप में अपना फिल्मी करियर शुरू करने वाली जया बादुड़ी उत्कृष्ट अभिनय के बल पर बहुत जल्द बॉलीवुड में छा गई। वर्ष १९७३ में अमिताभ बच्चन से उनका विवाह हुआ। कालांतर में वह मां भी बनी लेकिन समझदारी से फिल्मों एवं द्घर-परिवार में संतुलन बनाकर वह बॉलीवुड में अपना कदम बढ़ाती रही। मातृत्व सुख प्राप्त करने के पश्चात भी जया भादुड़ी ने 'जंजीर', 'कोरा कागज', 'मीली' (१९७४), 'शोले', 'चुपके-चुपके' (१९७५), 'नौकर' (१९७९), 'सिलसिला' आदि कई बेहतरीन फिल्में बॉलीवुड को दीं। जया की समकालीन हेमा मालिनी की खूबसूरती के सभी दीवाने थे। 'ड्रीम-गर्ल' के नाम से लोकप्रिय इस अभिनेत्री ने वर्ष १९७९ में धर्मेन्द्र से प्रेम विवाह कर लिया। विवाह के बाद वह मां बनी लेकिन फिल्मों में एक्ंिटग जारी रखा। शादी के बाद हेमा ने 'दि बर्निग ट्रेन', 'राजपूत' (१९८१), 'नसीब', 'क्रांति' (१९८१), 'सत्ते पे सत्ता' (१९८२), 'अन्धा कानून', 'रजिया सुल्तान' (१९८३) जैसी अनगिनत फिल्मों में अभिनय किया।

डिंपल कपाड़िया का नाम भी उन अभिनेत्रियों में शामिल है जिन्होंने शादी एवं मां बनने के बावजूद बॉलीवुड में लंबे समय तक राज किया। डिंपल ने सुपरस्टार राजेश खन्ना से १९७३ में प्रेम विवाह किया लेकिन दुर्भाग्य ये यह शादी लंबे समय तक नहीं चली और वर्ष १९८४ में दोनों ने तलाक ले लिया। इसी बीच डिंपल मां भी बनी। खैर! तमाम पारिवारिक उलझनों को दरकिनार करते हुए उन्होंने वर्ष १९८५ में 'सागर' फिल्म से बॉलीवुड में दोबारा इंट्री की। इसके पश्चात 'इंसाफ' (१९८७), 'इंसानियत के दुश्मन' (१९८७), 'मेरा शिकार', 'बीस साल बाद', 'आखिरी अदालत', 'गंगा तेरे देश में' (१९८८) जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।

बंगाली अभिनेत्री मुनमुन सेन ने तो फिल्मी एवं टेलीविजन करियर की शुरुआत ही शादी और मातृत्व सुख प्राप्त करने के बाद किया। २० भाषाओं में अपने अभिनय एवं कला का प्रदर्शन करने वाली मुनमुन ने वर्ष १९७६ में भरत देव वर्मा से शादी कर दो बच्चियों रिया एवं राइमा सेन को जन्म दिया। वर्ष १९८४ में 'अंदर बाहर' से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मुनमुन सेन ने 'जेलखाना' (१९८९), 'जासूसी' बांग्ला फिल्म 'गजमुक्ता' (१९९१) आदि से अपनी बेहतरीन अदाकारी पेश कर बॉलीवुड में एक अलग छाप छोड़ी।
इसी तरह नब्बे के दशक में बॉलीवुड में काजोल का जलवा रहा। अजय देवगन से शादी के बावजूद काजोल की लोकप्रियता के ग्राफ में कोई गिरावट नहीं आई। 'दिल क्या करे' (१९९९), 'कुछ खट्टी कुछ मिठी' (२०००), 'कभी खुशी, कभी गम' (२००१), 'फना' (२००६) जैसी फिल्में उन्होंने मां बनने के बाद ही दीं।

शादीशुदा अभिनेत्रियों में मलाइका अरोरा खान का नाम भी लिया जा सकता है। हालांकि मलाइका की फिल्में कभी सुपरहिट नहीं हुईं लेकिन दर्शकों के बीच अपनी हॉट एवं सेक्सी इमेज को उन्होंने शादी एवं मां बनने के बाद भी कायम रखा।
धक-धक फेम माधुरी दीक्षित ने तो अपनी खूबसूरती एवं शानदार अभिनय के बल पर बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था। फिल्म इंडस्ट्री में काफी समय तक अपना परचम लहराने के बाद माधुरी एनआरआई डॉक्टर श्री राम नेने से शादी कर दो बच्चों की मां भी बनी। मगर अभिनय की भूख ने उन्हें दोबारा बॉलीवुड में आने को मजबूर कर दिया। फिर क्या था 'अजा नच ले' से बॉलीवुड में दोबारा इन्ट्री ली।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अगर अभिनय में दम हो तो शादी एवं मां बनने के बाद भी अभिनेत्रियों का जलवा बरकरार रह सकता है।

 
इमेज तोड़ने की जल्दी
 

व्यक्ति जब एक इमेज में बंध जाता है, उसे तोड़ने के लिए वह हर तरह के हथकंडे अपनाने लगता है। अगर किसी को बच्चा कहा जाए तो वह बहुत जल्दी बड़ों-सा व्यवहार करने की चेष्टा करता है। यह बातें प्रायः हर व्यक्ति पर लागू होती हैं।
हॉलीवुड की कमसिन नायिका मिली सायरस अपने साथ लगातार बच्चों-सा व्यवहार होता देख परेशान होती थी। सो इस इमेज से वह बहुत जल्दी बाहर निकलना चाहती थी। इसको ध्यान में रखकर ही उन्होंने 'एक्स-रेटेड मेकओवर' फिल्म साइन की। उम्मीद की जा रही है कि वह इस फिल्म में दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब होगी।

इसके अतिरिक्त उनकी एक फिल्म जो अभी से काफी चर्चा में आ गई है, वह है 'द लास्ट सांग'। इस रोमांटिक फिल्म की चर्चा में रहने की वजहें भी हैं। दरअसल, इस फिल्म में सायरस ने कुछ गर्मागर्म दृश्य फिल्माए हैं। इसलिए दर्शक इस फिल्म के इंतजार में है। कहा जा रहा है सायरस ने यह फिल्म अपने साथ बच्चों-सा व्यवहार होने से आजिज आकर साइन किया है। इस हॉलीवुड अभिनेत्री की उम्र अभी मात्र साढ़े सत्रह साल है। इसलिए निर्माता-निर्देशक उनके साथ बच्चों-सा व्यवहार करते हैं। इस साल नवंबर में सायरस अठारह की हो जाएगी। लेकिन वह इसके पहले ही दर्शकों के दिलो-दिमाग पर छा जाना चाहती है। इसके अतिरिक्त मिली का तीसरा एलबम 'कांट बी टेम्ड' अगले महीने बाजार में आ जाएगा। इसमें भी वह अलग रूप में ही दर्शकों के सामने होंगी। कहने का मतलब साफ है मिली अब बच्ची नहीं रही।

ऐसे में किम करदाशिया अकेली हो गई। काफी समय से अकेली रहने के बाद करदाशिया को अब लग रहा है कि कोई तो ऐसा साथी मिले, जिसके साथ जिन्दगी भर का सफर काटा जा सके।

 
 
 
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