| |
| |
Welcome
|
| |
 |
| |
|
| |
शिलान्यास से आगे कुछ नहीं |
| |
|
| |
 |
| |
स्तंत्रता संग्राम और उत्तराखण्ड आन्दोलन की चिंगारी सर्वप्रथम स्याल्दे से ही शुरू हुई थी। आंदोलन की यह धरती विकास के लिए सैकड़ों बार आंदोलन कर चुकी है। लेकिन क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की अदूरदर्शिता के कारण यहां योजनाओं का शिलान्यास भर हुआ है। इतना ही नहीं अलग-अलग दल के
नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए एक ही योजना का शिलान्यास करते रहे हैं। फिर भी उक्त योजना का काम पूरा नहीं हो पाया है।
वर्ष १९८२ में स्वीकूत गैरखेत, मांसी, वल्मरा, सराईखेत
मोटरमार्ग लगभग ३० गांवों की विकास रेखा बनेगी पर यह मोटरमार्ग कब पूरा होगा किसी को पता नहीं है। मोटरमार्ग का कई बार शिलान्यास हो चुका है पर काम ३० साल बाद भी श्ुारू नहीं हो पाया है। वर्ष २००६ में तत्कालीन राज्यसभा सांसद एवं वर्तमान में केन्द्रीय राज्यमंत्री हरीश रावत ने ७० लाख की लागत से
बरकिन्दा मानिला ग्राम समूह पेयजल योजना का शिलान्यास किया था। इस योजना से करीब १७ हजार आबादी को पेयजल उपलब्ध होता। योजना का शिलान्यास तो हुआ लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। हां, इस पर
राजनीति खूब हुई। कांग्रेस-भाजपा इस योजना को अपनी उपलब्धि बताने में लगे रहे अप्रैल २०१० में इसी योजना का पुनः शिलान्यास हुआ। पूर्व के शिलान्यास स्थल से पचास मीटर की दूरी पर क्षेत्रीय विधायक की अध्यक्षता में तराई बीज निगम के उपाध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इसकी नींव रखी।
स्याल्दे को पेयजल नगरी बनाने की द्घोषणा की गई। द्घोषणा के इतर पेयजल योजना का सिर्फ शिलान्यास कर छोड़ दिया गया। इन सबके अलावा क्षेत्र में कई अन्य योजनाओं का भी यही हश्र हुआ है। योजनाओं का शिलान्यास हुआ, उसके लिए बजट भी
स्वीकूत हुई पर ६-७ वर्षों के बाद भी उसका आधा-अधूरा काम हो पाया है। कार्य पूरा हुए बिना ही कई योजनाओं का उद्द्घाटन कर दिया गया। यह सब चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया गया। वल्मरा, स्याल्दे, केदार मोटरमार्ग की स्वीकूति कांग्रेस शासन में हुई था। इसके लिए २ करोड़ ८ लाख रुपए स्वीकूत हुए। करीब ६ वर्ष बाद आज इस मोटरमार्ग का मात्र ३० फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। अधूरे काम के बावजूद चुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री खण्डूड़ी ने पिछले माह अल्मोड़ा में इसका उद्द्घाटन कर दिया।
इसी प्रकार आईटीआई स्याल्दे भवन का वर्ष २००६ में पूर्व विधायक स्वर्गीय प्रताप बिष्ट ने शिलान्यास किया। इस भवन के लिए २३८ लाख रुपए स्वीकूत किए गए थे। भवन का उद्द्घाटन भी दिसंबर में मुख्यमंत्री ने कर दिया। परंतु भवन की स्थिति ६ वर्षों में अधूरी ही नहीं बल्कि अत्यधिक दयनीय भी हो चुकी है। वर्ष २००५ में स्याल्दे में गैस गोदाम का विस्तारीकरण के लिए भाकुड़ा में कुमाऊं मण्डल विकास निगम के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ ़ प्रताप बिष्ट ने भूमि पूजन एवं गोदाम के लिए शिलान्यास भी किया था। निगम ने उक्त भूमि का भुगतान भी कर दिया था लेकिन आज न तो गैस का विस्तारीकरण गोदाम अस्तित्व में है और न ही गोदाम के लिए चयनित भूमि का शिलापट्ट ही है। वर्तमान विधायक एवं कुमाऊं बीज निगम के अध्यक्ष सुरेन्द्र मीना मामले को लटकाने की नियत से वल्मरा नामक स्थान पर गैस गोदाम बनाना चाहते हैं।
वर्ष २००८-०९ में खटल गांव, कुवरा तिगली सिंचाई पंप योजना लगभग पचास लाख की धनराशि से बनी परंतु वह आज तक सिंचाई के लिए चिह्नित क्षेत्र को एक लीटर पानी भी नहीं दे सकी। इसकी कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग डालखण्ड अल्मोड़ा थी। २००६ में स्याल्दे में मीनी स्टेडियम के खातिर खटलगांव वासियों ने निःशुल्क भूमि दिए थे। तब स्टेडियम स्वीकूत भी हो गया। पर राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में आज तक वह लटका रहा। चुनाव की आहट के साथ ही वर्तमान विधायक जीना ने पिछले साल इसका शिलान्यास कर दिया। शिलान्यास के समय जमीन में कुछ निशान बने परंतु अब वह मिट चुके हैं। सल्ट से कांग्रेस विधायक रंजीत वोरा कहते हैं कि विधायक, सांसद, मंत्री या मुख्यमंत्री संवैधानिक पद होते हैं इन्हें इस प्रकार के काम नहीं करने चाहिए। योजनाओं पर राजनीति करना अच्छी परम्परा नहीं है।
क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रमुख मांग ब्लॉक मुख्यालय को तहसील बनाने की थी। इसके लिए वर्ष २००५ में ३१ दिन और वर्ष २०१० में १९ दिन तक आंदोलन किया गया। यह मुद्दा भी
राजनीति की भेंट चढ़ गया। क्षेत्रीय विकास मंच के बैनर तले एक शिष्टमंडल कई बार मुख्यमंत्री से मिला। परंतु तहसील की द्घोषणा एवं स्वीकूति नहीं मिल सकी। दुर्भाग्य यह भी रहा कि जनप्रतिनिधियों ने तहसील के मुद्दे पर राजनीति कर जनता को क्षेत्रवाद के लिए उकसाया। मंच के अध्यक्ष हृदयेश मेहरा ने कहा कि तहसील की मांग वर्षों पुरानी है। इस मामले में सरकार ने सहमति दे दी थी। जिलाधिकारी अल्मोड़ा ने एसडीएम को सप्ताह में एक दिन यहां बैठने का लिखित आदेश दिया था। लेकिन एसडीएम बहाना बनाते रहे हैं। इसके अलावा भी यहां सड़क, स्वास्थ्य और स्टेडियम संबंधी समस्या है। जिसे जनप्रतिनिधि गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा एवं कांग्रेस के बड़े नेता भी क्षेत्र का भ्रमण कर चुके हैं लेकिन क्षेत्र की जनता मौन है। संभव है कि वर्तमान विधायक को हार का मुंह देखना पड़े। स्याल्दे ब्लॉक प्रमुख राधारमन उप्रेती इन आरोपों को गलत बताते हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस शासन में बिना बजट के सिर्फ नींव रखने का काम किया गया था। भाजपा सरकार ने बजट जारी कर शिलान्यास किया है। कई काम हैं जो पूरे हो चुके हैं। |
| |
|
| |
दिलचस्प होगी काशीपुर की चुनावी लड़ाई |
| |
|
| |
 |
चुनावी सरगर्मियों के बीच नेताओं का दल-बदल कार्यक्रम भी तेज हो गया है। दोनों प्रमुख पार्टियों (कांगे्रस-भाजपा) के अलाव छोटी पार्टियों में भी टिकट के लिए नेताओं का आना-जाना लगा है। मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद यामीन सिद्दीकी पहले सपा में थे। सपा से मोहभंग होने के बाद |
|
| |
इन्होंने बसपा का दामन थामा, वहीं इस चुनाव में ये टीपीएस रावत के सारथी बने हैं। टीपीएस रावत की पार्टी उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा में शामिल होने के बाद हाजी सिद्दीकी को काशीपुर विधानसभा सीट से
प्रत्याशी बनाया गया है। क्षेत्र में इनकी अच्छी पकड़ है। हालांकि ये पहली बार चुनाव लड़घ्रहे हैं। लेकिन सामाजिक कार्यों के कारण क्षेत्र की जनता के बीच हाजी सिद्दीकी एक जाने-पहचाने चेहरे हैं। इनका पुत्र जुबेर सिद्दीकी पिछले चुनाव में सपा के टिकट से चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहा। इससे यह उम्मीद लगाई जा रही है कि हाजी सिद्दीकी भी चुनावी मैदान में अन्य प्रत्याशियों को अच्छी टक्कर देंगे। बताया जाता है कि उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा से इनकी उम्मीदवारी को अन्य पार्टियों ने भी गंभीरता से लिया है। क्योंकि क्षेत्र में इनकी मजबूत पकड़ है। इसलिए सभी पार्टियां अब काशीपुर विधानसभा के चुनावी गुणा-भाग में बदलाव लाने में लगी हैं। सभी दलों ने अपनी-अपनी रणनीति में परिवर्तन करना शुरूघ्कर दिया है। इससे यहां का चुनाव और अधिक रोचक होता दिखाई देने लगा है।
उन्होंने बताया कि चुनाव न लड़ने की और चुनाव लड़ने पर जान से मारने की धमकी दी गई थी। उनका किसी से कोई झगड़ा या रंजिश नहीं है और वह यथासंभव सभी के काम आने की कोशिश करते हैं। फिर भी जाने से मारने की धमकी मिलती है कि चुनाव न लड़ूं। मगर मेरे समर्थक चाहते हैं कि मैं चुनाव अवश्य लड़ूं। इसीलिए उन्होंने चुनाव लड़ने का इरादा किया है। मो ़ सिद्दीकी ने काशीपुर शहरी क्षेत्र एवं देहाती क्षेत्रों के साथ-साथ प्रत्येक क्षेत्र में सामाजिक कार्य किए हैं। काशीपुर की जनता की और सेवा करने के लिए वे आगामी विधानसभा चुनाव में उतर रहे हैं।
सिद्दीकी ने द्घर-द्घर जाकर अपना चुनाव प्रचार शुरू भी कर दिया है। वे किस दिन नामांकन करेंगे यह तिथि तय नहीं हो पाई है। मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के महासचिव जावेद सिद्दीकी ने बताया कि एक-दो रोज में चुनावी कार्यालय खोल दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि जनता से मिल रहे भारी समर्थन से हाजी मोहम्मद यामीन सिद्दीकी की जीत तय नजर आ रही है। |
| |
|
| |
टिकट काटने से नाराज मंत्री |
| |
|
| |
 |
भाजपा की पहली सूची में एक मंत्री समेत आठ विधायकों के टिकट कटने के बाद पार्टी में बगावत के स्वर उठने लगे हैं। कैबिनेट मंत्री खजानदास अपने बूते चुनाव लड़ने का एलान भी कर दिया है। विधायक राजकुमार ने निर्दलीय मैदान में उतरने का मन बनाया है। टिकट से वंचित कई अन्य सिटिंग विधायक भी नाराज |
|
| |
हैं। अब देखना यह है कि भाजपा इन्हें कैसे मनाती है। या फिर बागी नेताओं से चुनाव में दो-दो हाथ करती है।
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने ३ जनवरी को प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की। इस सूची में आठ सीटिंग विधायक के नाम नहीं थे। खंडूड़ी एवं निशंक सरकार के एक
कैबिनेट मंत्री खजान दास का भी टिकट कट गया है। सूची जारी होने के बाद कई जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने गुस्से का इजहार किया। कुछ ने पार्टी छोड़ने तक की धमकी दे दी। राजधानी देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी ४ जनवरी को एक सिटिंग विधायक का टिकट कटने से क्षुब्ध उनके समर्थकों ने हंगामा किया। सहसपुर विधायक राजकुमार अपने समर्थकों के साथ मार्च करते हुए पार्टी कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि पार्टी ने ऐसे व्यक्ति को पुरौला से उम्मीदवार बनाया है जो पिछले चुनाव में पार्टी के खिलाफ लड़ा था। पार्टी का झंडा कुचला था तथा वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयानबाजी की थी।
धनौल्टी के विधायक एवं कैबिनेट मंत्री खजानदास इस बार टिकट न दिए जाने से काफी नाराज हैं। उन्होंने बताया कि मंत्री के रूप में काम अच्छा रहा फिर भी मेरा टिकट काटा गया। पार्टी को बताना चाहिए कि उनका टिकट किस आधार पर काटा गया। वे इस संबंध में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष अपनी बात रखेंगे। साथ ही यह भी कहा कि वे विधानसभा चुनाव जरूर लड़ेंगे। सहसपुर के विधायक राजकुमार भी इस बार प्रत्याशी न बनाए जाने से खासे नाराज हैं। राजकुमार ने बताया कि करीब उन्नीस हजार वोटर उनके साथ हैं। अगर समर्थक चाहेंगे तो बतौर निर्दलीय भी चुनाव लड़ेंगे।
पिंडर से विधायक जीएल शाह, कोटद्वार के विधायक शैलेंद्र सिंह रावत और कपकोट के शेर सिंह गढ़िया के साथ कर्णप्रयाग से लगातार दो बार विधायक रहे अनिल नौटियाल के सुर में साफ तौर पर विद्रोह दिखा मगर इन लोगों ने अभी निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला नहीं लिया है। यदि आलाकमान इन्हें मनाने में कामयाब होती है तो ठीक अन्यथा ये भी पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। जीएल शाह का कहना है कि वे लगातार दो बार चुनाव जीते और पहली बार की अपेक्षा दूसरी बार जीत का अंतर दोगुना रहा, फिर भी टिकट कट गया। |
| |
|
| |
 |
| |
|
|
|