Untitled Document
  08 &01&12 && 14&01&12
The IT Post - News in IT Industry
 
 
 
Galgotia Institute of Technology
 
 
 
 
   
 
 
 

ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
 
  47
  107
 
यमकेश्वर विधानसभा की दो विशेषताएं-एक इसमें सुविधाओं के नाम
 
Check Your Weekly Forecast
वेबसाइट देखी गई 318522 बार
इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस खेमेबाजी से द्घिरी है। पार्टी में कई धड़े हैं। हर का सूबेदार है। और हर सूबेदार के कंधे पर मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा का भार है। ऐसे मुश्किल हालात में कांग्रेस की स्थिति बेहतर इसलिए दिख रही है क्योंकि उसको भाजपा की नाकामियों और कमजोरियों का लाभ मिलने वाला है। कांग्रेस अपनी खूबियों नहीं बल्कि भाजपा की खामियों के सहारे सिहांसन को पाने का सपना देख रही है
 
  Welcome
 
   
  हार से आगाज
   
 
 

सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग, महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर ये वे नाम हैं जिन्होंने टेस्ट इतिहास में कई व्यक्तिगत कीर्तिमान दर्ज हैं। लेकिन बात जब कड़ी परीक्षा की आती है तो इन दिग्गजों के पांव उखड़नें में देर नहीं लगती। एक बार फिर २९ दिसंबर को यह बात साबित हो गई। विदेशी सरजमीं पर भारतीय धुरंधरों की एक न चली और आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला टेस्ट मैच १२२ रनों से हारना पड़ा। आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने मैच के चौथे दिन ही भारतीय बल्लेबाजों को द्घुटने टेकने को मजबूर कर दिया। इस तरह से आस्ट्रेलिया ने चार मैचों की सीरीज में १-० से बढ़त बना ली।
भारतीय बल्लेबाजों ने २९२ रन के मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए आस्ट्रेलियाई तेज आक्रमण के सामने नतमस्तक होने में देर नहीं लगाई। पूरी टीम ४७ .५ ओवरों में १६९ रन पर ढेर हो गई। इस तरह से भारत का मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर पिछले ३० साल से टेस्ट मैच नहीं जीत पाने का सिलसिला जारी रहा। इससे पहले, मेजबान टीम ने अपनी पहली पारी में ३३३ रन बनाए थे। जिसके जवाब में भारतीय बल्लेबाज २८० रन हीं बना पाए। इससे पहली पारी के आधार पर आस्ट्रेलिया की ५१ रन की बढ़त मिल गई। आस्ट्रेलियाई टीम ने अपनी दूसरी पारी में २४० रन और जोड़ दिया। जिसमें तीसरे दिन माइकल हसी ८९ रन बनाकर जहीर खान के शिकार बने तो रिकी पोंटिंग ने ६० रन बनाए। इसके बाद
हिल्फेनहास को १४ रनों के निजी स्कोर पर इशांत शर्मा ने पवेलियन लौटाया। ८१ गेंदों पर चार चौके जड़ते हुए जेम्स पैटिनसन ३७ रन बनाकर नाबाद लौटे थे। उनकी इस पारी की बदौलत ही आस्ट्रेलियाई टीम तेज पिच के लिहाज से भारत को चुनौतीपूर्ण लक्ष्य दे सकी।
आस्ट्रेलियाई टीम जब अपने पुछल्ले बल्लेबाजों के साहसिक प्रदर्शन से दूसरी पारी में २४० रन बनाकर आउट हुई तो भारत को लंच से पहले लगभग आधा द्घंटा क्रीज पर बिताना था। लेकिन २८ दिसंबर को ३०० रन के लक्ष्य को हासिल करने का दम भरने वाले विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के सात रन बनाकर ही पवेलियान लौट जाने से भारतीय उम्मीदों को करारा झटका लगा।
एक समय भारत का स्कोर एक विकेट पर २४ रन था लेकिन जल्द ही ८१ रन पहुंचते-पहुंचते छह विकेट हो गया। यहां कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कुछ देर तक संद्घर्ष किया लेकिन वह भी २३ रन ही भारतीय झोली में डाल पाए। भारत दूसरी पारी शुरू होने के तुरंत बाद ही बैकफुट पर चला गया। सहवाग ने हिलफेन्हास की बाहर जाती गेंद पर तेजी से कट किया लेकिन प्वांइट पर माइकल हसी ने बड़ी चुस्ती से उसे कैच में बदल दिया। गंभीर ने दूसरे सत्र के शुरू में सिडल के गंेंद पर दूसरी स्लिप में खड़े रिकी पोंटिंग को कैच थमाया। तेंदुलकर जब क्रीज पर उतरे तो दूसरी बार दर्शकों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया। उन्होंने पहली गेंद पर ही तीन रन लेकर अपने कठोर इरादे जताए। द्रविड़ दूसरे छोर से रन नहीं बना रहे थे। ऐसे में पैटिनसन ने बल्ले और पैड के बीच से गेंद निकाल कर उनके विकेटों को उखाड़ फेंका। लक्ष्मण ने सातवी गेंद पर अपना पहला रन लिया। लेकिन जल्द ही वह भी पैटिनसन की गेंद पर फ्लिक करके स्क्वायर लेग पर खड़े एड कोवान को कैच दे बैठे। कोहली हिलफेन्हास की पहली गेंद पर ही पगबाधा आउट हो गए।
भारत को सबसे करारा झटका तब लगा जब तेंदुलकर ने पीटर सिडल की स्विंग लेती गेंद को ड्राइव करने के प्रयास में गली पर खड़े हसी को आसान कैच थमाया। यहां भाग्य के सहारे आर आश्विन ने कुछ चौके जड़े और सिडल की शॉर्ट पिच गेंद पर चलते बने। जबकि जहीर खान ने पैटिनसन पर लगातार चौका और छक्का लगाने के बाद शॉर्ट लेग पर कैच उछाल दिया। ऐसे में पैटिनसन के अगले ओवर में गेंद धोनी के बल्ले को चूमती हुई विकेटों में समा गई। कुल मिलाकर ऑस्ट्रेलियाई पिच पर टीम इंडिया हांफती नजर आ रही है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में ही वह खास नहीं कर पा रही है।

 

 

हॉलीवुड का देसी तड़का

 

सिनेमा को हमेशा ही सपनों से जोड़कर देखा जाता है और इसमें शायद गलत कुछ भी नहीं है। रूमानियत के मखमली एहसास में डूबा सिनेमा इन बीते सालों में जिंदगी के हर रंग की झांकी हमारे सामने सजाता रहा। यादों के गलियारे में झांकते हुए अगर हिन्दी सिनेमा पर नजर डालें हमें बहुत कुछ मिलेगा।
यूथ बेस्ड फिल्म बनाना और देश-विदेश में उसे एक साथ हजारों स्क्रीन्स पर रीलीज करके युवाओं को आकर्षित करना निर्माता-निर्देशक का उद्देश्य बन गया है। इतना ही नहीं बॉलीवुड सिनेमा के फिल्ममेकर्स हॉलीवुड फिल्मों की चोरी करने में भी पीछे नहीं हैं। इनकी खास तौर से रोमांटिक कॉमेडी, थ्रीलर, सस्पेंस और एक्शन पर आधारित फिल्में भी अब यही रास्ता चुनती हैं। लेकिन इसका इतिहास पुराना है।
हिन्दी सिनेमा में रीमेक का सिलसिला किस फिल्म से प्रारम्भ हुआ यह कह पाना कठिन है। मगर जो बड़ी हिट फिल्म बॉलीवुड से प्रेरित थी वह है शक्ति सामन्त निर्देशित 'आराधना'। यह हॉलीवुड की फिल्म 'टू इच हिज ओन'की रीमेक है। यह वही फिल्म है जिससे राजेश खन्ना को सुपर स्टार का दर्जा मिला। इसके बाद ऐसी फिल्मों के बनने का सिलसिला शुरू हो गया। और 'शोले', 'दिल बोले हड़िप्पा', 'दोस्ताना', 'सिंह इज किंग', 'रेस', 'सलाम-ए-इश्क', 'वेलकम', 'चक दे इंडिया', 'रंग दे बसंती', 'एतराज', 'अजनबी', 'सत्ते पर सत्ता', 'कल हो ना हो' और 'पीपली लाइव' जैसी फिल्में भी इसमें शामिल हो गईं। इतना ही नहीं इसको आगे बढ़ाते हुए ६ जनवरी को अब्बास मस्तान निर्देशित फिल्म 'प्लेयर्स्‌' भी रीलीज हुई जो द इटैलियन जाब्स की रीमेक है।
निर्माता-निर्देशक हॉलीवुड फिल्मों में देशी तड़का लगाकर दर्शकों को परोसते हैं। ऐसा क्यों है यह अभिषेक बच्चन की बात से समझ में आ जाता है। अभिषेक 'प्लेयर्स' की लम्बी चौड़ी स्टारकास्ट का हिस्सा हैं। अभिषेक कहते हैं, ''अगर आप देखें तो १०० करोड़ से ज्यादा भारतीय बॉलीवुड की फिल्में देखते हैं। मुझे नहीं लगता कि इनमें से एक प्रतिशत लोगों ने भी 'द इटैलियन जॉब' देखी होगी। वैसे भी एक हिंदी कमर्शियल फिल्म में जो भी जरूरी होता है वो सब आपको 'प्लेयर्स' में मिलेगा। इसमें बॉलीवुड का तड़का लगा है.।'' अभिषेक तो यहां तक कहते हैं कि उन्हें लगता है कि जो भी 'द इटैलियन जॉब' के प्रशंसक हैं वो 'प्लेयर्स' देख कर काफी प्रभावित होंगे।
एक समय था जब एक फिल्म १३ सप्ताह चल जाये तो उसे हिट कहा जाता था, २५ पर सिल्वर, ५० पर गोल्डेन जुबली होती थी, लेकिन आज फिल्म को हिट कराने का एक ही फंडा है वो है पैसा। जिसने जितना पैसा कमाया वो उतनी हिट, फिर वो चाहे विदेश में कमाये या भारत में। सुपर डुपर हिट हुई फिल्मों में 'शोल' का नाम आता है जो हॉलीवुड के 'द
मैग्नीफिसेंट सेवेन' की रीमेक है। इसी तरह से 'सत्ते पर सत्ता', 'सलाम-ए-इश्क', 'चक दे इंडिया' जैसी फिल्में भी क्रमशः सेवेन ब्राइड्स फॉर सेवेन ब्रदर्स, लव एक्च्युअली, और द
मिराकल की रीमेक हैं। इसके अलावा दिलचस्प बात यह है कि महाराष्ट्र में विदर्भ के किसानों की समस्या और मीडिया पर बनी फिल्म भी
हॉलीवुड की कॉपी है। यह अंग्रेजी फिल्म के 'इन्वीटेशन टू ए सुसाइड' की रीमेक है। फिर भी ये फिल्में एक हद में बनाई गयी हैं। जिसमें देशी तड़का और मसाला जैसे फॉमूले को अपना कर दर्शकों को परोसा गया है। लेकिन हिन्दी सिनेमा में कुछ ऐसी भी फिल्में आई जो सारी हदों को पार कर गई। उनमें 'रॉ-वन', 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा', 'हलचल', 'अनजाना-अनजानी', 'मौसम' हैं। जिन्होंने
हॉलीवुड फिल्मों के पोस्टरों की भी कॉपी कर ली है। 'रॉ-वन', का पोस्टर वैटमैन बीगिन्स तथा 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा' का 'लॉर्ड्‌स ऑफ डॉग टाऊन' की हू-ब-हू काफी है। वैसे फिल्मों में हर दौर पर प्रयोग होते रहें हैं। आज के इस ट्रेंड को देखते हुए इतना तो कहा जा रहा है कि हिन्दी सिनेमा ने अपने पंख फैला दिये हैं और यह अब विदेशों में भी धूम मचा रही है। ऐसे में यह उम्मीद भी जगती है कि शायद वक्त के किसी मोड़ पर हॉलीवुड की नकल का सिलसिला थम जाए।

 
   
 
 
Logout  
 
 
भाजपा अध्यक्ष की जब ताजपोशी हुई थी तब उनके गृह प्रदेश महाराष्ट्र को छोड़ कहीं किसी ने उनका नाम तक नहीं सुना था।
 
कभी बंग्लादेश की थल सेना को सलामी देने पर तो कभी जम्मू कश्मीर में तैनात आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट को
 
स्तंत्रता संग्राम और उत्तराखण्ड आन्दोलन की चिंगारी सर्वप्रथम स्याल्दे से ही शुरू हुई थी। आंदोलन की यह धरती
सहज और सरल स्वभाव वाले प्रकाश पंत के कंधों पर कई भारी-भरकम मंत्रालय का भार
`
पुरौला विधानसभ क्षेत्र की बदहाली ही उसकी पहचान बन चुकी है। किसान बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। निचले
देहरादून। रक्षा मोर्चा कोटद्वार में मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी को तीन
 
अपनी उपेक्षा से आहत पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने राजनीतिक दाव खेला। उनके समर्थन से निरंतर विकास
 
पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव इस मायने में महत्वपूर्ण हैं कि इससे
 
धर्म जीना सिखाता है। सच्चा धर्मगुरु जीवन को सुख-शांति और रोशनी से भर देता है। धर्म को दुकान बनाने वाले बेशुमार
 
सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग, महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर ये वे नाम हैं
 
The IT Post - News in IT Industry