हरक सिंह रावत की एक निजी विशेषता यह हे कि वो चाहे किसी भी दल में रहें उनकी नजर स्वार्थ-सिद्धि की उस मीनार पर रहती है जहां वो खुद को आसीन देखना चाहते हैं। भाजपा-बसपा से होते हुए वे आज कांग्रेस तक पहुंचते हैं। जिस दल में भी रहते हैं, ऊंचा ओहदा उनका नसीब न जाता है। उनका विवादों से गहरा नाता रहा है। अध्यक्ष पद, नेता प्रतिपक्ष के लिए अपने ही दल के लोगों से सेटिंग करने में गुरेज नहीं करते। लेकिन सब कुछ के बावजूद विश्वसनीय नहीं |