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ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
 
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यमकेश्वर विधानसभा की दो विशेषताएं-एक इसमें सुविधाओं के नाम
 
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इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस खेमेबाजी से द्घिरी है। पार्टी में कई धड़े हैं। हर का सूबेदार है। और हर सूबेदार के कंधे पर मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा का भार है। ऐसे मुश्किल हालात में कांग्रेस की स्थिति बेहतर इसलिए दिख रही है क्योंकि उसको भाजपा की नाकामियों और कमजोरियों का लाभ मिलने वाला है। कांग्रेस अपनी खूबियों नहीं बल्कि भाजपा की खामियों के सहारे सिहांसन को पाने का सपना देख रही है
 
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  मान गए तिवारी
   
 

अपनी उपेक्षा से आहत पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने राजनीतिक दाव खेला। उनके समर्थन से निरंतर विकास समिति नामक संस्था ने चुनाव में उतरने का एलान कर दिया। इससे कांग्रेस को भारी क्षति हो सकती थी। लिहाजा पार्टी हाईकमान ने एनडी के तीन लोगों को टिकट देकर उन्हें मनाने में जुट गई

 

पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की नाराजगी से कांग्रेस पार्टी में खलबली मचना स्वभाविक है। अपनी उपेक्षा के कारण वे लम्बे समय से नाराज चल रहे थे। बेशक वे अब राजनीति में सक्रिय नहीं हैं लेकिन उनकी राजनीतिक जमीन अभी भी प्रदेश में महफूज है जिसका, अंदाजा कांग्रेस हाईकमान को भी है। इस चुनावी मौसम में तिवारी ने अपनी नाराजगी जाहिर करने का सही वक्त चुना और वे लाभ लेने से चूके भी नहीं।
एनडी ने अपने समर्थकों द्वारा बनाई गई संस्था 'निरंतर विकास समिति' को सभी ७० सीटों से चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी। उनकी इस सियासी सक्रियता ने कांग्रेस के पाले में तूफान खड़ा कर दिया। २ जनवरी को नए साल के उपलक्ष्य में तिवारी के आवास पर आयोजित टी पार्टी में कांग्रेस में टिकट वितरण से असंतुष्ट नेता और अन्य संस्थाओं के कार्यकर्ता अच्छी संख्या में उपस्थित थे। इस मौके पर तिवारी ने खुद चुनाव लड़ने से इंकार करने के साथ ही यह भी कहा कि चुनाव में उनका आशीर्वाद दलगत राजनीति से उठकर विकास को तवज्जो देने वाले अच्छे प्रत्याशी को मिलेगा। दरअसल इस बार के चुनाव में एनडी तिवारी अपने आधा दर्जन लोगों को टिकट दिलाना चाहते थे। लेकिन इस बार टिकट बंटवारे में हरीश रावत और विजय बहुगुणा का दबदबा होने के कारण उनके एक भी व्यक्ति को टिकट नहीं मिला। यहां तक कि तिवारी के दामाद और पूर्व मंत्री नवप्रभात टिकट पाने से वंचित रहे। इसके बाद ही तिवारी सक्रिय हुए। जिससे पार्टी
हाईकमान को तीन टिकट देकर समझौते का रास्ता अख्तियार करना पड़ा।
एनडी को मनाने का जिम्मा प्रदेश प्रभारी चौ वीरेंद्र सिंह को सौंपा गया। क्योंकि यदि तिवारी कांग्रेस के खिलाफ चुनाव प्रचार भी करते और वे किसी पार्टी के सर्मथन में बयान जारी कर देते तो प्रदेश में कांग्रेस की नैया डूबना तय था। इसलिए दो दिसंबर को देर रात चौ ़ वीरेन्द्र सिंह उनके आवास अनंत वन पहुंचे। इस वार्ता में तिवारी ने अपनी नाराजगी जाहिर की। तकरीबन आधे द्घंटे के बातचीत में सूबे में टिकट वितरण में तिवारी के चंद खास लोगों को तवज्जो देने पर सहमति बनी। सूत्रों के मुताबिक बैठक में श्री तिवारी को टिकट वितरण के बाबत पार्टी हाईकमान से बातचीत कराने का भरोसा दिलाया गया। चौ ़ वीरेन्द्र सिंह आश्वासन देकर चले गए। चौधरी के आश्वासन के कारण एनडी समर्थकों ने ४ जनवरी को 'निरंतर विकास समिति' प्रत्याशी फाइनल करने के बजाए इसकी तारीख आगे सात जनवरी तक खिसका दी थी।
एनडी की दबाव की राजनीति रंग लाई। ४ जनवरी को गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज के बाद चौ ़ वीरेन्द्र सिंह एक बार फिर एनडी तिवारी से मिलने उनके आवास पहुंचे। इस बार चौ ़ पार्टी हाईकमान का पत्र लेकर उनके पास पहुंचे थे। हाईकमान ने एनडी तिवारी के पसंदीदा तीन उम्मीदवारों को टिकट देने पर सहमति दे दी। जिसमें मनीष तिवारी को लाल कुआं से, तिवारी के दमाद नवप्रभात को विकास नगर से तथा उनके विवादास्पद ओएसडी रहे आर्येंद्र शर्मा को सहसपुर से टिकट दिया जाएगा। ऐसे एनडी तिवारी पार्टी से कम से कम सात टिकट मांग रहे थे। लेकिन तिवारी और कांग्रेस प्रभारी चौधरी वीरेन्द्र सिंह के बीच तीन टिकटों पर सहमति बनी।
गौरतलब है कि वीरेन्द्र सिंह के रिस्ते एनडी तिवारी से अच्छे हैं। क्योंकि वीरेन्द्र सिंह एनडी तिवारी के कांग्रेस से अलग होने के समय तिवारी कांग्रेस में राष्ट्रीय पदाधिकारी रहे हैं। इस नाते वह चौधरी का सम्मान भी करते हैं। बताया जाता है कि इस भेंट वार्ता के दौरान चौधरी ने तिवारी को अपने रिश्ते की दुहाई दी। जिस पर तिवारी थोड़े पिद्घले इसके पहले एनडी तिवारी ने चौधरी से कहा कि राहुल गांधी ने देहरादून में कांग्रेस की पांच साल चली सरकार की खूब तारीफ की परंतु तब के मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का एक बार भी नाम नहीं लिया। इतना ही नहीं कांग्रेस के किसी भी नेता ने मंच से उनका नाम नहीं लिया। इससे उनके दिल को ठेस पहुंचा।

   
  राजभवन में कलाकारों का स्वागत
   
 

विरासत उत्सव के लिए कई राज्यों से देहरादून आए कलाकारों ने २ जनवरी को राजभवन में राज्यपाल मार्गेट आल्वा से मुलाकात की। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद की ओर से राजधानी आए ३५०

  कलाकारों ने यहां आक्टेव में भाग लिया। असम, अरुणाचल, मणिपुर, मेद्घालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम से आए इन कलाकारों को राज्यपाल ने राजभवन आमंत्रित किया था। इस मौके पर मणिपुर के कलाकारों ने मणिपुर युद्ध-कला पर आधारित 'चेइनोल जगोई नृत्य' और सिक्किम के कलाकारों ने राज्य की संस्कृति का प्रतीक 'सिंद्घी छाम नृत्य' प्रस्तुत किया। कलाकारों का स्वागत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सांस्कृतिक विलक्षणता, विविधता और इनका आदान-प्रदान देश को एक सूत्र में बांधता है।
   
  वॉलीबॉल टीम रायपुर रवाना
   
 
साठवीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए प्रदेश की महिला-पुरुष वर्ग की टीम रायपुर रवाना हो गई है। यह चैंपियनशिप छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ४ से ११ जनवरी तक आयोजित होगी। उत्तराखण्ड वॉलीबाल एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश चौधरी के
  मुताबिक पुरुष वर्ग की टीम में रतीश नायर, वाई सुब्बाराव, अवनीश यादव, मनदीप सिंह, गुरचांद सिंह, रणजीत सिंह, सुरेश गोदारा, राहुल, मिथलेश कुमार, ललित कुमार, उमंग कुमार और अभिनव भटनागर शामिल हैं। मेहर सिंह टीम के मुख्य कोच, भरतवीर सिंह सहायक कोच और अरुण कुमार सूद मैनेजर होंगे। वहीं महिला वर्ग की टीम में अंजलि चौधरी, अनीता, बबीता, सीमा, श्वेता, अनीता बिष्ट, ममता, नेहा विश्वकर्मा, जयंती, रेशमा और मोनिका शामिल हैं। कमलेश काला मुख्य कोच और नितिन वालिया महिला टीम के सहायक कोच होंगे। दोनों टीेमों ने चैंपियनशिप पर कब्जा करने के लिए काफी मेहनत किया है।
   
  जनसभा के लिए अनुमति जरूरी
   
 
मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने चुनाव के दौरान बड़ी त्रजनसभा या पब्लिक डिबेट जैसे कार्यक्रमों के लिए रिटर्निग अफसर से अनुमति लेने के निर्देश दिए हैं। दरअसल हरिद्वार में दो जनवरी को एक टीवी चौनल के कार्यक्रम में दो राजनीतिक दलों
  के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट हो गई थी। इस द्घटना को मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने निर्देश जारी किए हैं कि ऐसे किसी कार्यक्रम के आयोजन के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी तथा रिटर्निग अफसर की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दोनों मंडलायुक्तों तथा सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को इस बाबत पत्र भेजा है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि संबंधित पुलिस अधिकारी यह
सुनिश्चित करेंगे कि जनसभा के शांतिपूर्ण संचालन के लिए पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था हो। लापरवाही बरतने पर निर्वाचन आयोग संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगा।

   
  बौखला गई है कांग्रेस
   
 
भाजपा चुनाव मीडिया समिति के सदस्य डॉ ़ देवेंद्र भसीन ने कहा कि पार्टी ने ४८ प्रत्याशियों की सूची गहन विचार विमर्श के बाद जारी की है। यह एक संतुलित सूची है। इसमें हर वर्ग के
  उम्मीदवारों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। पहली बार अल्पसंख्यक समुदाय को भी उम्मीदवार बनाया गया है। भाजपा की मजबूत स्थिति देखकर कांग्रेस बौखला गई है। उनके मुताबिक वह अपनी जमीन खोती जा रही है। इस कारण
आंतरिक विरोधाभास में द्घिरी हुई है। कांग्रेस की बौखलाहट का नमूना २ जनवरी को हरिद्वार में देखने को मिला। वरिष्ठ मंत्री मदन कौशिक के साथ अभद्र व्यवहार कांग्रेस की बौखलाहट का नतीजा है। कुछ विधायकों को टिकट नहीं दिया जाना परिसीमन तथा दूसरे प्रकार के असंतुलन की वजह से हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक परिवार की तरह है, जिन्हें टिकट नहीं मिला वे पार्टी के दिशा निर्देशों के अनुसार कार्य करते रहेंगे। दूसरी तरफ, राज्य मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष महेश्वर बहुगुणा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य को स्वावलंबी बनाना है। राज्य की महिलाओं के लिए जेंडर बजट में ७० प्रतिशत वृद्धि कर सरकार ने महत्वपूर्ण कार्य किया है।
   
 
 
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भाजपा अध्यक्ष की जब ताजपोशी हुई थी तब उनके गृह प्रदेश महाराष्ट्र को छोड़ कहीं किसी ने उनका नाम तक नहीं सुना था।
 
कभी बंग्लादेश की थल सेना को सलामी देने पर तो कभी जम्मू कश्मीर में तैनात आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट को
 
स्तंत्रता संग्राम और उत्तराखण्ड आन्दोलन की चिंगारी सर्वप्रथम स्याल्दे से ही शुरू हुई थी। आंदोलन की यह धरती
सहज और सरल स्वभाव वाले प्रकाश पंत के कंधों पर कई भारी-भरकम मंत्रालय का भार
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पुरौला विधानसभ क्षेत्र की बदहाली ही उसकी पहचान बन चुकी है। किसान बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। निचले
देहरादून। रक्षा मोर्चा कोटद्वार में मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी को तीन
 
अपनी उपेक्षा से आहत पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने राजनीतिक दाव खेला। उनके समर्थन से निरंतर विकास
 
पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव इस मायने में महत्वपूर्ण हैं कि इससे
 
धर्म जीना सिखाता है। सच्चा धर्मगुरु जीवन को सुख-शांति और रोशनी से भर देता है। धर्म को दुकान बनाने वाले बेशुमार
 
सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग, महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर ये वे नाम हैं
 
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