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ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
 
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यमकेश्वर विधानसभा की दो विशेषताएं-एक इसमें सुविधाओं के नाम
 
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इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस खेमेबाजी से द्घिरी है। पार्टी में कई धड़े हैं। हर का सूबेदार है। और हर सूबेदार के कंधे पर मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा का भार है। ऐसे मुश्किल हालात में कांग्रेस की स्थिति बेहतर इसलिए दिख रही है क्योंकि उसको भाजपा की नाकामियों और कमजोरियों का लाभ मिलने वाला है। कांग्रेस अपनी खूबियों नहीं बल्कि भाजपा की खामियों के सहारे सिहांसन को पाने का सपना देख रही है
 
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  अव्वल मंत्री का मॉडल शहर!
   
 
 

सहज और सरल स्वभाव वाले प्रकाश पंत के कंधों पर कई भारी-भरकम मंत्रालय का भार रहा है। वे मुख्यमंत्री के बाद दूसरे नंबर के मंत्री माने जाते हैं। प्रदेश की जनता मंत्री के रूप में उन्हें पसंद भी करती है। इस
पसंद का कारण भी है। उन्होंने अपने क्षेत्रवासियों को कई बड़ी योजनाओं का तोहफा दिया है। जिसे पूरा होते ही पिथौरागढ़ एक मॉडल शहर बन जाएगा


दिल्ली और देहरादून के लिए शुरू होगी जल्द उड़ाने, नैनी-सैनी हवाई पट्टी का हुआ पूर्ण विस्तार, थरकोट झील से निहार सकेंगे खूबसूरती, कई झील के आकर्षण से खिचे चले आयेंगे पर्यटक, अब पानी के लिए नहीं तरसेंगे पेयजल मंत्री के शहर के वाशिंदे, बेस अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनों से होगा मरीजों का इलाज और पिथौरागढ़ को जल्द मिलेगी जाम से निजात, बाईपास (रिंग रोड) के बनने से आम आदमी को राहत।'
उक्त चंद लाईने पिथौरागढ़ के अखबारों में सुर्खियां बनी है यह सब पिछले आठ-दस साल से हो रहा है। यहां से विधायक एवं मंत्री प्रकाश पंत ने शहर को कई योजनाएं दी है। जिसे पूरा होने पर यहां की तस्वीर बदल जायेगी। शहर के अध्यापक रमेश चंद पंत कहते है कि हमें इस बात की बेहद खुशी है कि हमारे ही बीच का एक व्यक्ति भाजपा सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय का दायित्व बखूबी निभा रहा है लेकिन स्थानीय स्तर पर जो समस्याएं हैं उनकी तरफ भी उन्हें ध्यान देना चाहिए।
विधायक प्रकाश पंत ने अपने क्षेत्र में कई योजनाएं तो दी है लेकिन यदि उसके कार्यों का सही निस्तारण नहीं हुआ तो कई समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है। मसलन इंजीनियरिंग कॉलेज को आनन-फानन में शुरू करा कर प्रकाश पंत ने विकास कार्य की शुरूआत कराने का श्रेय लिया। मगर हकीकत में इसे आईटी कॉलेज की बगल में बना दिया गया है। जहां पहले
आईटीआई के बच्चों का हॉस्टल हुआ करता था वहां अब इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों की क्लास चल रही है। जो आईटीआई के बच्चे पहले
हॉस्टल में रहते थे वे अब इस हॉस्टल से महरूम हो गए हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज का फायदा तो मिला, मगर पूरा फायदा तब मिलेगा जब इसकी अपनी बिल्डिंग बन जाए। बाईपास अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इस बाईपास के बनने से शहर पर वाहनों का दबाव कम होगा डीडीहाट,
धारचूला तथा चंपावत जाने वाले लोग शहर में बिना प्रवेश किए बाहर से निकल जाएंगे। ऐसा नहीं है कि प्रकाश पंत ने बाईपास का निर्माण शुरू न कराया हो। उन्होंने बरसात के मौसम से पूर्व इस रोड के लिए कटिंग भी कराई थी। जिनमें पुनेडी, तडी तथा बजेठी के लोगों का आवागमन भी शुरू हो गया था। लेकिन बरसात होने से यह मार्ग अवरुद्ध हो गया। सड़क के किनारे बनने वाली सुरक्षा दीवार नहीं बनाई गई है। फिलहाल बाईपास की जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस वजह से इसका काम रूक गया है।
पिथौरागढ़ शहर की सबसे गंभीर समस्या है पानी की किल्लत। भाजपा सरकार में
प्रकाश पंत पेयजल मंत्री हैं। इस विभाग का मंत्रालय हाथ में आने के बाद वे शहर के वाशिंदों को द्घाट पंपिंग योजना का पुर्नगठन का तोहफा दिया जिससे शहर के लोगों की प्यास बूझ सकती हैं। शहर के निवासी रमेश ओझा कहते हैं कि सिर्फ आधा द्घंटे के लिए पानी आता है उस समय लोगों में आपा-धापी शुरू हो जाती है। प्रकाश पंत ने इस समस्या को दूर करने के लिए आवलाद्घाट पंपिंग योजना से पानी पिलाने की द्घोषणा की। इसके तहत एक पंपिंग योजना द्घाट में लगाने की द्घोषणा की गई। देखते हैं तो कब तक पूरा होगा।
मिनी कश्मीर कहा जाने वाला पिथौरागढ़ के आधे हिस्से में सीवर लाईन नहीं है। शहर के लोग बताते हैं कि उन्हें कई बार समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला कि वर्ल्ड बैंक से सीवर व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपए जारी किया गया है। जिसका एक हिस्सा पिथौरागढ़ में भी लगाने की द्घोषणा हुई। शहर के ही वाशिंदे महेन्द्र सिंह बिष्ट बताते हैं अधिकतर नगर में खुदान कार्य हो गया है, पाईप भी आ चुकी है। पता नहीं दूसरे फेज का काम कब शुरू होगा। जगह-जगह खुदे गड्ढों से शहरवासियों को परेशानी हो रही है।
पिथौरागढ़ से उड़ान शुरू कराने की द्घोषणा तब की गई थी जब उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था। १९९६ में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव खुद पिथौरागढ़ आए थे और नैनी-सैनी हवाई पट्टी का शिलान्यास करके गए थे। इसके चार साल बाद उत्तराखण्ड अलग राज्य बन गया। पिथौरागढ़ का विधायक बनते ही प्रकाश पंत ने इस मुद्दे को अपने एजेंडे में रख लिया और आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया गया। इसी दौरान ग्रामीणों ने हवाई पट्टी के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का उचित मुआवजा दिलाने के लिए आंदोलन छेड़ दिया। किसानों के आंदोलन से न केवल हवाई पट्टी का काम प्रभावित हुआ बल्कि उड़ान की बात भी टल गई। हालांकि पिछले दिनों
प्रकाश पंत के प्रयास से डेक्कन एयरवेज के जहाज ने यहां से उड़ान भरी। इस एयरवेज ने यहां से उड़ाने शुरू करने के संकेत दे दिए हैं। अब उस क्षण का इंतजार है, जब यहां से सीधे उड़ान भरकर पिथौड़ागढ़वासी देश के किसी हिस्से में जा सकेंगे।
थरकोट झील पिथौरागढ़ की सुंदरता में चार चांद लगाता है। टनकपुर-तवाद्घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित थरकोट झील को प्रकाश पंत ने उसी समय से प्राथमिकता में रखा हुआ है जब वे २००७ में पहली बार मंत्री बनकर शहर में आए थे। बेस अस्पताल का मामला दशकों पुराना है। इसे लेकर प्रकाश पर उंगली उठती रही है। बताया जाता है कि जब प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी की सरकार थी तब तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने जिला चिकित्सालय में ही बेस अस्पताल चलाने की द्घोषणा कर दी थी। जमीन न मिलने तक इसे जिला चिकित्सालय में ही चलाया जाना था तथा जगह मिलते ही नया भवन बनाकर इसे वहां स्थानांतरित किया जाना था। इस बाबत बकायादा शासनोदश भी जारी हो गया था। तब प्रकाश पंत ने जिला अस्पताल को ही बेस अस्पताल बना देने का विरोध करते हुए अलग बेस अस्पताल का मुद्दा उठाया था।
पिथौरागढ़ के धार्मिक स्थल ध्वज मंदिर तथा थलकेदार तक रोप वे की स्थापना कराना भी प्रकाश पंत के वादों में से एक है। लोग वर्षों से यहां तक रोप-वे बनाने की मांग करते आ रहे हैं। थलकेदार के लिए आठ गांव सिलिंग से रोप वे शुरू किया जाना प्रस्तावित है जबकि ध्वज मंदिर के लिए प्लेटा से रोप वे का रास्ता बनाने की योजना है। इसके लिए सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है। इस रोप वे से इन धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। जनता इसके पूरे होने का इंतजार कर रही है। सभी योजनाएं पूरा होते ही पिथौरागढ़ प्रदेश का मॉडल शहर बन जाएगा और यदि ये पूरे नहीं होते तो फिर शहरवासियों को पहले की तरह समस्याओं से दो-चार होना पड़ेगा।

   
 
 
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सहज और सरल स्वभाव वाले प्रकाश पंत के कंधों पर कई भारी-भरकम मंत्रालय का भार
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