| Welcome
|
 |
| झुलसता रूस |
| |
 |
रूस के जंगलों में लगी आग दुनियाभर के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आग से अब तक करीब पचास से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं। वहीं करीब २६ अरब यूरो का वित्तीय नुकसान हुआ है। पूर्वी हिस्से में लगी आग अगर और बढ़ती है तो चेल्याबिंस्क इलाके में ओजेस्क शहर के करीब स्थित मयाक परमाणु संयंत्र इसकी चपेट में आ सकता है |
दुनिया में जलते हुए जंगल अपने साथ कई आपदाएं लेकर आते हैं। पिछले वर्ष अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एथेंस में जंगलों की आग के कारण वहां की सरकारों को आपात स्थिति की द्घोषणा करनी पड़ी थी। प्राकृतिक कारणों, जैसे तेज हवा से पेड़ों या बासों के बीच द्घर्षण या जंगल में बिजली गिरने से इस तरह की आग लगा करती है। द्घटते जंगलों के बीच निश्चय ही आग सबके लिए चिंता का विषय है। दुखद तो यह है कि जंगलों की आग के संदर्भ में पिछली गलतियों से सीखने के संकेत भी नहीं मिलते।
इन दिनों रूस इस आग के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। रूस के जंगलों में लगी भीषण आग में ८०,हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि नष्ट हो चुकी है। आग पर काबू पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद ली जा रही है। आग बुझाने के लिए एक लाख ६५ हजार से अधिक बचावकर्मी लगे हुए हैं जिनमें ४० हजार से अधिक कर्मचारी विदेशों से भेजे गए हैं। जंगल में लगी आग से हजारों द्घर जलकर राख हो चुके हैं। हजारों लोगों को बेद्घर होना पड़ा। अब तक ५० से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं हताहतों के बढ़ने की उम्मीद है। जंगलों में लगी आग के फैलने के कारण बड़े इलाके में धुआं छाया हुआ है इससे यातायात पर भी खासा प्रभाव पड़ा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक किनिज्नी, नोवगोरोद, वोरोनेज, मास्को सहित अन्य इलाके इससे बुरी तरह प्रभावित हैं। राजधानी मॉस्को सहित कई शहरों में धुआं छाया हुआ है। जंगल में लगी आग से तापमान में काफी वृद्धि देखी जा रही है। तापमान चालीस डिग्री तक पहुंच चुका है। हादसे का जायजा स्वयं प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन ले रहे हैं। इस बीच राष्ट्रपति दमित्री मदेवदेव ने आग पर काबू पाने के लिए तात्कालिक उपाय करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान पुतिन ने मुआवजे की राशि १६५२ डॉलर से बढ़ाकर ६६१४ डॉलर करने की भी द्घोषणा की। आग से अब तक करीब २६ अरब यूरो का नुकसान हो चुका है।
बीते साल का गर्म मौसम जहां कई वजहों से खुशनुमा रहा, वहीं जंगल में आग की द्घटनाओं में बढ़ोतरी का भी कारण बना। बीते दशक में आगजनी की द्घटनाओं का औसत १८५० प्रतिवर्ष था, वहीं अकेले वर्ष २००९ में आगजनी की ३०४९ द्घटनाएं हुईं। करीब २ लाख ४२ हजार हेक्टेयर वनक्षेत्र आग की भेंट चढ़ गया जबकि आग पर काबू पाने के लिए ४० करोड़ ३० लाख डॉलर खर्च करने पड़े, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस बीच मास्को में अब तक का सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण दर्ज किया गया। कार्बन मोनो ऑक्साइड का स्तर अधिकतम सहनीय स्तर से ६़५ गुना ज्यादा पहुंच गया। हवा में जहरीले पदार्थों की मात्रा भी सामान्य से नौ गुना ज्यादा हो चुकी है।
युक्रेन स्थित चेर्नाबिल क्षेत्र के जंगलों में लगी आग के परमाणु आपदाग्रस्त क्षेत्र में पहुंचने के कारण विश्व समुदाय की चिंता बढ़ गई है। इस बीच रूसी अधिकारियों ने कहा है कि जंगलों में लगी भीषण आग से परमाणु संयंत्रों को कोई खतरा नहीं है। सारोव के परमाणु संयंत्र के आस-पास जंगलों में लगी आग बुझाने के लिए अब भी दमकल कर्मचारी संद्घर्ष कर रहे हैं। यह इलाका मास्को से करीब ५०० किलोमीटर दूर है। इस बीच रूस में लगी भीषण आग को बुझाने में मदद करने के लिए तीन अमेरिकी विमान मॉस्को पहुचे। अमेरिकी वायुसेना के दो सी-१३० विमान ने भी उड़ान भरी। ये विमान पानी के टैंकरों और अग्नि प्रतिरोधी कपड़ों से लैस हैं।
रूस के जंगलों में लगी आग से हुए नुकसान पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गहरा शोक व्यक्त किया है। रूस में लगी आग से निपटने के लिए अमेरिका अपने उपकरण भेज रहा है। दोनों दोशों के नेताओं के बीच हुई वार्ता में ओबामा ने इस द्घटना में मरने वालों को श्रद्धांजलि भी दी। ओबामा के मुताबिक संकट की इस द्घड़ी में अमेरिका रूस के साथ खड़ा है। चेल्याबिस्ंक इलाके में ओजेस्क शहर के करीब स्थित मयाक परमाणु संयंत्र की ओर बढ़ रही आग के मद्देनजर समूचे इलाके में आपातकाल लागू कर दिया गया है। जंगल में लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। इससे पहले सोझिंस्क शहर के करीब स्थित एक अन्य परमाणु संस्थान पर आग का खतरा मंडराने लगा था। १९५५ में स्थापित सोझिंस्क परमाणु संयंत्र में नाभकीय हथियारों का उत्पादन और परीक्षण होता रहा है। वैसे सोझिंस्क से खतरा टल चुका है। गौरतलब है कि इस साल जून के मध्य से ही रूस का यूरोपीय हिस्सा गर्मी से झूलस रहा था। इस क्षेत्र में पिछले तीन दशकों में सबसे भयानक सूखा पड़ा और रह-रहकर जंगलों में आग भड़क उठती रही। करीब तीन हफ्तों से २२ रूसी क्षेत्रों में लगी आग पर काबू पाने की रूस जी-तोड़ कोशिश कर रहा है।
|
| |
| राज दरबार |
| |
|
बाढ़ के बाद भुखमरी |
| |
| बाढ़ के बाद पाकिस्तान में भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पांच बच्चों ने भूख से दम तोड़ दिया। इस बीच पाकिस्तान पहुंचे संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने दुनिया से मदद की अपील की है। काराकोरम हाइवे और दूसरी सड़कें अब भी बंद हैं। संपर्क कटने की वजह से बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि अपने इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा झेल रहे पाकिस्तान को अब भी ४६ करोड़ डॉलर की जरूरत है। पाकिस्तान में आयी बाढ़ से अब तक १,४०० से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ के बाद अब महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। इसकी मार दो करोड़ लोगों पर पड़ी है। |
| |
| चीन में राष्ट्रीय शोक |
| |
| भारी बारिश और भूस्खलन के कारण पश्चिमोत्तर गानसू प्रांत में मारे गए १२०० से अधिक लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए चीन में १५ अगस्त को राष्ट्रीय शोक रहा। समूचे देश के साथ ही दुनियाभर में चीनी दूतावासों और वाणिज्यिक दूतावासों पर ध्वज आधा झुका रहा। बीते हफ्ते आये इस प्राकृतिक आपदा में १२३९ लोग मारे गए थे। राष्ट्रपति हूं जिंताओ, प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और कई अन्य शीर्ष नेताओं ने आपदा में मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया है। आपदाग्रस्त क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य अभी भी जारी है। लापता लोगों की तलाश की जा रही है। चीन के उत्तर-पश्चिमी गांसू प्रांत में और भीषण बाढ़ से मरने वालों की तादाद १२३९ तक पहुंच गई है, जबकि पांच सौ से ज्यादा लापता हैं। इस बीच, दक्षिण-पश्चिमी प्रांत सिचुआन में भारी वर्षा के बाद हुए भूस्खलन से तबाही की खबर है। वेनचुआन शहर में मई २००८ में आए भूकंप में ७० हजार लोग मारे गए थे। |
| |
| मेक्सिको में हिंसा |
| |
| अमेरिकी सीमा से सटे चिहुआहुआ प्रांत में नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ी हिंसा में २३ लोग मारे गए। चिहुआहुआ के सरकारी अभियोजकों के मुताबिक सिउदाद जुआरेज में १३ लोग मारे गए। उन्होंने कहा कि यह द्घटना चिहुआहुआ प्रांत में एक अन्य स्थान पर हुई जिसमें १० लोग मारे गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सिउदाद जुआरेज में नशीले पदार्थों से जुडे़ हमलों में वर्ष २००६ से करीब २८ हजार लोग मारे गए। सिउदाद जुआरेज में ज्यादातर हत्याएं जुआरेज और सिनालोआ गैंगों के बीच विवाद की वजह से हुई है जो इस क्षेत्र के जरिए अमेरिका में होने वाले नशीले पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण करने का प्रयास कर रहे हैं। |
| |
| नेपाल में जनजीवन ठप |
| |
| संविधान का प्रारूप समय पर तैयार करने को लेकर दबाव बनाने के लिए नेपाल में हड़ताल के कारण १५ अगस्त को जनजीवन ठप हो गया। आम लोगों और पुलिस की झड़प के कारण नेपाल के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित रहा। कठमांडु में हिंसा पर उतारू प्रदर्शनकारियों ने करीब आधा दर्जन वाहनों में आग लगा दी। करीब ४० लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। संविधान के प्रारूप को समय पर तैयार करने के लिए दबाव बनाने के लिए नेपाल के इंडीजेनस पीपुल फेडेरेशन ने देशव्यापी चक्का जाम की द्घोषणा की थी। निजी और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के नहीं चलने से यातायात व्यवस्था चरमरा गयी। एनआईपीएफ की हड़ताल के आह््वान के कारण शैक्षणिक संस्थाएं भी बंद रही। |
| |
| चुनौती देंगे फोंसेका |
| |
| लिट्टे के खिलाफ हुए जंग के नायक श्रीलंका के पूर्व सैन्य प्रमुख सरत फोंसेका सैन्य अदालत द्वारा कोर्ट मार्शल में उन्हें दोषी ठहराए जाने को आम अदालत में चुनौती देंगे। सैन्य अदालत ने फोंसेका का रैंक और पदक छीनने के साथ ही उन्हें पेंशन से भी वंचित करने का फैसला सुनाया था। फोंसेका के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक नेशनल एलायंस (डीएनए) के प्रवक्ता अनुरा कुमार दिशानायके ने कहा, हमें कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया स्वीकार नहीं है। इस फैसले के खिलाफ हम आम अदालत में अपील करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार फोंसेका का राजनीतिक करियर तबाह करने की कोशिश में है। फोंसेका को इस साल जनवरी में राष्ट्रपति चुनाव में राजपक्षे के हाथों करारी शिकस्त खानी पड़ी थी। बाद में हालांकि वह संसदीय चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। |
| |
 |
| |