Untitled Document
  22 &08&10 && 28&08&10
The IT Post - News in IT Industry
 
Galgotia Institute of Technology
 
 
   
 
 

ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
  47
  107
Check Your Weekly Forecast
वेबसाइट देखी गई 318533 बार
ऋषिकेश में मानकों के विपरीत भवन निर्माण को हरिद्वार विकास प्राधिकरण नोटिस तो देता है पर इस दिशा में पहल के नाम पर मौन हो जाता है। यहां प्राइवेट के साथ कई सरकारी भवनों के खिलाफ भी नोटिस जारी हुए हैं लेकिन किसी किस्म की कार्रवाई होती कहीं नहीं दिखती
 
Welcome
आसमान से बरसी तबाही
 

कुमाऊं मंडल के कपकोट तहसील स्थित सुमगढ़ गांव वालों के लिए १८ अगस्त को आसमान से तबाही बरसी। सुबह आठ बजे इस गांव में बादल फटने से एक ही स्कूल के १८ बच्चे मौत के मुंह में समा गए। पानी की तेज धार में बह रहे दो शिक्षकों और आधा दर्जन बच्चों को किसी प्रकार बचाया जा सका। आपदा प्रबंधन टीम और पुलिस के जवान द्घंटों बाद द्घटनास्थल पर पहुंचे। इस द्घटना ने एक बार फिर से आपदा प्रबंधन विभाग को कठद्घरे में खड़ा कर दिया है। पिछले एक सप्ताह से प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश हो रही है। जिस कारण इन दिनों यहां बादल फटने और भूस्खलन की द्घटना आम हो गई है। इससे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है लेकिन १८ अगस्त की द्घटना ने आपदा प्रबंधन में जुटे विशेषज्ञों को भी सोचने के लिए मजबूर कर दिया। आखिर इस प्रकार की आपदा से प्रदेशवासियों को कैसे निजात दिलाया जा सके। अभी आपदा से निजात दिलाना तो दूर समय पर राहत दल भी नहीं पहुंच पाता है। हर दिन की तरह १८ अगस्त की अहले सुबह सुमगढ़, बांसे, तप्तकुंड और सौंग गांव के २५ बच्चे पढ़ने के लिए सुमगढ़ स्थित प्राथमिक सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचे। मां सरस्वती की वंदना कर ये बच्चे अपने-अपने कक्षा में चले गए। तभी मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बारिश इतनी तेज थी कि स्कूल के ऊपर का पहाड़ दरक कर स्कूल भवन पर गिरने लगा। तबाही का यह मंजर इतनी तेज गति से आया कि स्कूल की बिल्ंिडग को मलबे में तब्दील होने में समय नहीं लगा। पढ़ाई कर रहे बच्चों को भागने तक का मौका नहीं मिला। आस-पास के लोगों को कुछ समझ में आता इससे पहले विद्यालय भवन मलवे में तब्दील हो गया। गांव वालों ने मलबे को हटाना शुरू किया था कि कुछ लोगों ने स्कूल के शिक्षक और कुछ बच्चों को पानी में बहते देखा। तब कुछ ग्रामीणों ने उन लोगों को पानी से बाहर निकाला। सुमगढ़ गांव के कैलाश जोशी ने बताया कि कई लोगों के आंखों के सामने यह द्घटना हुई लेकिन इस को देखते रहने के अलावा लोग कुछ न कर सके। पहाड़ गिरना बंद होने के बाद बह रहे बच्चों को निकाला गया। उन्होंने आगे कहा कि उस वक्त किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क काम नहीं कर रहा था। जिस कारण पुलिस को सूचना पहुंचाने में देरी हुई। गांव वाले खुद बचाव कार्य में जुट गए। करीब आठ द्घंटे बाद पुलिस का बचाव दल द्घटनास्थल पर पहुंचा। कपकोट थाना के प्रभारी चंचल शर्मा ने बताया कि करीब साढ़े दस बजे पुलिस के पास फोन आया। द्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम, पीएसी, फायर ब्रिगेड सहित आपदा राहत दल के जवान सुमगढ़ के लिए रवाना हो गए। कुछ दूरी तय करने के बाद सुमगढ़ गांव जाने वाली सड़क को बंद पाया गया। जिसके बाद पुलिस टीम और आपदा प्रबंधन दल के जवान सात किलोमीटर पैदल दूरी तय कर द्घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्य में जुट गये। कपकोट तहसील सहित पूरे प्रदेश में बारिश से तबाही मची हुई है। यहां की अधिकतर सड़कें टूट गई हैं। उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली सहित सभी जिलों में कई एकड़ खेत बह गए हैं। सुमगढ़ गांव पिंगारी ग्लेशियर मार्ग पर पड़ता है। यहां के सरस्वती शिशु मंदिर में पांचवीं तक की पढ़ाई होती है। विद्यालय भवन सुमगढ़ और सोंग गांव को जोड़ने वाले पुल के पास है। जिला मुख्यालय से करीब ७४ किलोमीटर दूर इस गांव में लगभग सभी सुविधाएं थी। लेकिन कई दिनों से टेलीफोन और लाइट व्यवस्था ठप पड़ी है। यही स्थित पूरे प्रदेश की है। फिर भी सरकार कागजों पर आपदा प्रबंधन टीम बनाकर खुश हो रही है। यह तहसील एवं थाना स्तर से आगे नहीं बढ़ पाई है। जिस कारण आपदा के दौरान बचाव कार्य न होने के कारण कई मौत होती हैं। सुमगढ़ द्घटना में भी ऐसा ही हुआ। यदि इस टीम का गठन ग्राम सभा स्तर पर किया गया होता तो शायद कुछ बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। सरकार कई बार इस प्रकार के मामले पर कहती रही है कि आपदा प्रबंधन टीम अकेले ऐसी द्घटनाओं से नहीं निपट सकती। इसके लिए ग्रामीणों को सहयोग करना होगा। सरकार के इस बयान पर कई समाजसेवी संस्थानों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि सरकार आपदा प्रबंधन के तहत गांव के लोगों को प्रशिक्षित क्यों नहीं करती? स्थानीय लोग अपने इलाके के भौगोलिक परिस्थितियों से पूरी तरह वाकिफ होते हैं। वे ऐसे वक्त पर ज्यादा कारगार ढंग से बचाव कार्य कर सकते हैं। ऐसे भी प्रत्येक द्घटनास्थल पर सर्वप्रथम स्थानीय लोग ही पहुंच कर बचाव कार्य शुरू करते हैं। आपदा प्रबंधन राज्य मंत्री खजानदास कहते हैं, 'हमने आपदा प्रबंधन टीम बनाई है। इसे विस्तार दिया जा रहा है। हमें उम्मीद है इसे गांव तक पहुंचा देंगे।' कपकोट क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद भगत सिंह कोश्यारी का विधानसभा क्षेत्र है। द्घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण द्घटना है। सरकार हर सम्भव मदद कर रही है। बारिश के समय बादल फटने या भूस्खलन की सबसे ज्यादा द्घटना उत्तराखण्ड में होती है। आपदा टीम को मजबूत करने के लिए केन्द्र को मदद करनी चाहिए। ताकि प्रदेश सरकार इस टीम को सभी गांव में गठित कर सके। प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को ५०-५० हजार रुपये देने की द्घोषणा की है। राज्य पुलिस के अलावा आईटीबीपी के १५० जवान को मौके पर भेजा गया। जो बच्चों के शव निकालने से लेकर बचाव कार्य में जुटे रहे।

 
 
Logout  
Untitled Document
 
शहर के सुनियोजित विकास के लिए बने हरिद्वार विकास प्राधिकरण को देखकर लगता है कि अब यह अप्रासांगिक हो गया है। प्राधिकरण में ध्वस्तीकरण एवं काम रोको आदेश की फाइलों का अम्बार लगा है। अब उन पर धूल की परत
 
गांधीजी मुझे इसीलिए याद आए। उनके द्वारा संपादित समाचार पत्रों का प्रसार मात्र कुछ हजार होता था लेकिन उनका
 
रतन टाटा के रिटायर होने से पहले टाटा ग्रुप की शान में चार चांद लग गया है। टाटा ग्रुप भारत की सबसे अमीर कंपनी बन गई है।
 
बिहार विधानसभा चुनाव होने में चंद महीने रह गये हैं। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है।
 
उत्तराखण्ड गठन के बाद से ही प्रदेश को अमीरजादों की ऐशगाह बनने से रोकने और पहाड़ियों को उनकी ही जमीन से बेदखल करने की प्रवृति पर अंकुश लगाने
कुमाऊं मंडल के कपकोट तहसील स्थित सुमगढ़ गांव वालों के लिए १८ अगस्त को आसमान से तबाही बरसी। सुबह आठ बजे इस गांव में बादल फटने से एक
ग्रामीण क्षेत्र में खोले गए सहकारी बैंक एवं समितियां उत्तराखण्ड में किसानों को लाभ देने के बजाय राजनेताओं के
 
लगभग दो साल की जद्दोजहद के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने अपनी बहुप्रतिक्षित वॉल्वो बस सेवा शुरू कर ही दी। यह बसें
रूस के जंगलों में लगी आग दुनियाभर के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आग से अब तक करीब पचास से अधिक लोगों की जानें जा
 
हिन्दी में लद्घु पत्रिकाओं की संख्या अब सैकड़ों की सीमा पार कर गई है। मेट्रो नगरों की तो बात ही क्या मंझले और
 
बुढ़िया द्घर को बड़ा साफ रखा करती थी। इसलिये सत्या और सव्यसाची को दो जोड़ी चप्पल रखने पड़ते थे।
 
धर्म जीना सिखाता है। सच्चा धर्मगुरु जीवन को सुख-शांति और रोशनी से भर देता है। धर्म को दुकान बनाने वाले बेशुमार
 
कॉमनवेल्थ गेम्स के होने में कुछ ही दिन बाकी हैं। हमारे खिलाड़ी अपने- अपने खेल की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
The IT Post - News in IT Industry
Untitled Document