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ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
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ऋषिकेश में मानकों के विपरीत भवन निर्माण को हरिद्वार विकास प्राधिकरण नोटिस तो देता है पर इस दिशा में पहल के नाम पर मौन हो जाता है। यहां प्राइवेट के साथ कई सरकारी भवनों के खिलाफ भी नोटिस जारी हुए हैं लेकिन किसी किस्म की कार्रवाई होती कहीं नहीं दिखती
 
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शुरू हुआ वॉल्वो का संचालन
 

गभग दो साल की जद्दोजहद के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने अपनी बहुप्रतिक्षित वॉल्वो बस सेवा शुरू कर ही दी। यह बसें अब दिल्ली-दून के छह चक्कर प्रतिदिन लगाएगी। इससे लग्जरी सुविधा पाने वाले यात्रियों ने अब राहत की सांस ली है। 'दि संडे पोस्ट' ने अपने १८

अप्रैल २०१० के अंक-४३ में 'वॉल्वो का विकल्प नहीं यूटीसी' नामक समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें उत्तराखण्ड के
परिवहन विभाग द्वारा सालों से बंद पड़ी वॉल्वो की जगह यूटीसी (उत्तराखण्ड परिवहन निगम) की वातानुकूलित बसों का संचालन कर भरपाई करने की कोशिश को जनता ने नकार दिया था। खुद प्रदेश के उच्चाधिकारी वॉल्वो की जगह यूटीसी के परिचालन को लेकर संतुष्ट नहीं थे जबकि यात्रियों ने तो इस बस सेवा को सिरे से खारिज कर दिया था। गौरतलब है कि आज से करीब ढाई साल पूर्व प्रदेश की भाजपा सरकार ने वॉल्वो सेवा की शुरुआत करते समय इसे सड़कों की 'राजधानी एक्सप्रेस' नाम दिया था। तब सरकार के परिवहन मंत्रालय ने दावे किये थे कि यह वॉल्वो सेवा वातानुकूलित होने के साथ-साथ मनोरंजन के साधनों से भी लैस होगी। यही नहीं बल्कि इसकी आरामदायक सीटें राजधानी एक्सप्रेस टे्रन का एहसास भी दिलायेंगी। लेकिन सरकार के दावों की हवा महज छह माह बाद ही निकल गई। वॉल्वो बसों का परिचालन बंद हो गया। प्रदेश के देहरादून स्थित मुख्य कार्यालय के अफसरों ने इसके बंद होने का कारण अनुबंध होने वाली बसों का लापरवाही पूर्ण रवैया तथा समय के अनुसार आवागमन न करने से यात्रियों की हो जा रही फजीहत को मुख्य कारण बताया। इसके बाद बसों का परिचालन बंद करा दिया गया। स्मरणीय हैे कि उत्तराखण्ड सरकार के परिवहन विभाग ने वर्ष २००८ में वॉल्वो का परिचालन शुरू करते समय गुजरात की एक निजी टे्रवल्स कंपनी आरआर बनर्जी की बसों के साथ अनुबंध किया था जिसमें प्रत्येक बस को दिल्ली-देहरादून के बीच दो ट्रिप पुरी करने की भी शर्त रखी गई थी। दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित आईएसबीटी से देहरादून और देहरादून-दिल्ली तक दो बार आवागमन करने पर प्रत्येक बस को १६४ लीटर डीजल और २३ रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से देना तय हुआ था। लेकिन बसें छह माह तक चलने के बाद बंद हो गई। इसके बाद परिवहन विभाग ने यूटीसी की वातानुकूलित बसें शुरू की थी। जिसको यात्रियों ने स्वीकार नहीं किया। उत्तराखण्ड परिवहन निगम के उपमहाप्रबंधक दीपक जैन के अनुसार इस बार कोलकाता की कौशिक लोजेस्टिक फर्म से अनुबंध हुआ है। जिसमें दिल्ली से देहरादून के बीच छह बसें चलेंगी। इसमें दो बसों का संचालन तो शुरू हो चुका है जबकि चार का अभी चलना बाकी है। ये बस सुबह और शाम चलाई जायेंगी। बसों का किराया प्रति यात्री ४६० रुपये तय किया गया है। जबकि प्री बुकिंग के लिए बीस रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा। बस की प्री बुकिंग दिल्ली एवं देहरादून के आईएसबीटी स्थित काउंटर पर तीन दिन पूर्व से कराई जा सकेगी। श्री जैन के अनुसार बस में वीडियो की सुविधा के अलावा प्रत्येक यात्री को पानी की बोतल भी दी जायेगी। श्री जैन का कहना है कि दूसरे चरण में हल्द्वानी से दिल्ली के लिए भी एक-एक वॉल्वो बस सेवा शुरू की जायेगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में जब वॉल्वो बस सेवा शुरू की गई थी तो उसका प्रचार-प्रसार बड़े धुआंधार तरीके से किया गया था। तब प्रदेश के तत्कालीन परिवहन मंत्री बंशीधर भगत ने इसको हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। लेकिन इस बार वॉल्वो सेवा को परिवहन निगम प्रबंधन ने बगैर किसी तामझाम के सामान्य तरीके से सड़क पर उतारा है। संभावना जताई जा रही थी कि परिवहन मंत्री इस बार भी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
 
'विधायक-सांसद के समान हों सभासद'
 

विधायक-सांसद के समान सरकारी सुविधाएं दिए जाने की मांग को लेकर प्रदेश निकाय सभासद महासंद्घ ने एक प्रान्तीय बैठक आयोजित की। इसमें १५ प्रस्ताव पारित किये गये। साथ ही अपनी मांगों को लेकर २७ अगस्त को प्रदेश के सभी ब्लॉक, तहसील व जिला मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। नगरपालिका परिषद के सभागार में आयोजित सभासदों की प्रथम प्रांतीय बैठक में महासंद्घ के प्रदेश अध्यक्ष गुड्डू सिंह चौहान ने कहा कि विधायकों एवं सांसदों जैसे बड़े जनप्रतिनिधियों को सरकार की ओर से वेतन एवं भत्ता दिया जाता है, लेकिन पालिका तथा निकाय सभासद इससे वंचित हैं। पालिका के सभासदों को भी विधायक के समान प्रतिवर्ष निधि मिलनी चाहिए। साथ ही सत्ता के विकेन्द्रीकरण के लिए ७४वें संविधान संशोधन को लागू किया जाए। बैठक में भौगोलिक स्थिति को देखते हुए प्रदेश का अपना म्यूनिसिपल एक्ट लागू करने, सभासदों को राजकीय एवं विभागीय अतिथि गृह में आरक्षण की व्यवस्था करने, सांसद तथा विधायक निधि खर्च करने के लिए पालिका एवं पंचायतों के प्रस्ताव को आधार बनाने तथा जिला योजना में नगरपालिका एवं नगर पंचायत के विकास के लिए मानक धनराशि सुनिश्चित करने समेत १५ प्रस्ताव पारित किये गये। साथ ही निर्णय लिया गया कि सभासदों द्वारा १५ सूत्री मांग-पत्र को लेकर २७ अगस्त को प्रदेश के सभी ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किया जायेगा। राज्य के सभी जिलों के निर्वाचित सभासद बैठक में शामिल थे। ेश को परमाणु हथियार के खिलाफ नीति

 
बरसात बनी मुसीबत
 
पहाड़ में लगातार हो रही बारिश मुसीबत बनती जा रही है। बदरीनाथ मार्ग में एक जगह सड़क बह जाने तथा एक स्थान पर आँांस जाने से हजारों तीर्थ यात्री रास्ते में फंस गए। उत्तरकाशी का भटवाड़ी गांव पूरी तरह जमींदोज हो गया। संपर्क मार्ग से कट गए स्थानों में खाद्यान्न संकट भी बढ़ा
उत्तराखण्ड में बरसात का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते एक पखवाड़े से यहां हो रही मूसलाधार बारिश के चलते उत्तरकाशी जिले का भटवाड़ी गांव जमींदोज हो गया है। यात्रा मार्ग में कई स्थानों पर जमीन धंसने एवं राष्ट्रीय राजमार्ग बह जाने से साढ़े पांच हजार यात्री बदरीनाथ और हेमकुंड में फंसे हुए हैं। ऋषिकेश-बदरीनाथ तथा ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है। लेकिन यात्रियों के आने-जाने के लिए एक रास्ता बनाया गया जिसमें दो पहिया वाहन ही आ जा सकते हैं। प्रशासन यात्रियों के लिए वहां रहने, खाने की व्यवस्था में जुटा है। राष्ट्रीय राजमार्ग के बह जाने से यहां दैनिक आवश्यकता का सामान पहुंचाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। पहाड़ों में हो रही मूसलाधार बारिश इस बार राज्य के चमोली, रुद्रप्रयाग एवं उत्तरकाशी जनपदों के लिए मुसीबत बनकर आयी है। रिकॉर्ड तोड़ बरसात के चलते इन जनपदों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं लिंक मोटर मार्गों के जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो जाने से इन जनपदों में खाद्यान्न, रोजमर्रा की चीजों के साथ रसोई गैस तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो गयी है। उत्तरकाशी जनपद का भटवाड़ी गांव तो पूरी तरह बरसात के कहर की भेंट चढ़ चुका है। भू-धंसाव से पूरा गांव धराशायी हो गया है। गांव के ३० द्घर तबाह हो गये हैं। चालीस दुकानें भी जमीन धंसने से क्षतिग्रस्त हो गयी हैं। पूरा गांव अब भगीरथी नदी की ओर खिसक रहा है। सौ से अधिक मकानों में दरारें पड़ गयी हैं। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग छह मीटर नीचे खिसक गया है। इसके चलते उफान पर चल रही गंगोत्री यात्रा को रोक दिया गया है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को फिलहाल जल विद्युत निगम के खाली पड़े कमरों में शिफ्ट किया है। उधर भटवाड़ी में गंगोत्री राजमार्ग के क्षतिग्रस्त हो जाने से लगभग ८० वाहन फंसे हुए हैं। गंगोत्री एवं उससे लगे क्षेत्र में बीते एक सप्ताह से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप है। जगह-जगह लोगों की कूषि योग्य भूमि ंतबाह हो गयी है। हर्षिल का मशहूर सेब भी अतिवृष्टि की भेंट चढ़ गया है। भटवाड़ी गांव के सारे रास्ते, पानी के स्रोतें क्षतिग्रस्त हो गये हैं। सिर्फ चारों तरफ जमीदोंज हुए मकान ही दिखाई दे रहे हैं। सूबे के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने गांव का दौरा कर अपना आशियाना खो चुके लोगों को ५० ़५० हजार रुपये मुआवजा देने की द्घोषणा की है। लेकिन सरकार की राहत एवं बचाव की इस व्यवस्था से प्रभावित लोग संतुष्ट नहीं है। प्रभावित पुरुषोत्तम का कहना है कि प्रशासन ने पीड़ितों को जल विद्युत निगम की कालोनियों में तो डाल दिया है पर यहां न तो बिजली है और ना ही पीने का पानी। यह पहला मौका नहीं है जब इस गांव पर बरसात कहर बनकर बरसी हो। इससे पूर्व भी वर्ष १९९८ में ७० द्घंटे की बारिश ने भटवाड़ी बाजार में भारी तबाही मचाई थी। तब भी २७ दुकानें भगीरथी के कटाव से होने वाले भू-स्खलन की भेंट चढ़ गयी थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तब भी भगीरथी की ओर से सुरक्षा दीवार लगाने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था लेकिन सरकार बदलने के बाद यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गयी। ग्रामीण महेन्द्र पोखरियाल और पुष्कर सिंह का कहना है कि उनके गांव के करीब २०० द्घरों में इस्तेमाल होने वाले पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। गोई दायारा के जंगल, नटीण, बंद्राणी एवं रैथल से रिसने वाले बरसाती पानी का ढाल भी भटवाणी है। २९ जुलाई से शुरू हुये भू-धंसाव ने महज १६ दिनों में भटवाडी गांव को वीरान कर दिया। भारी बारिश के चलते राज्य के अंतिम जनपद चमोली में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग दो स्थानों पर बह गया है। जोशीमठ, बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर विष्णुप्रयाग के समीप ५० मीटर सड़क अलकनंदा नदी के तेज उफान में बह गई। इसी यात्रा मार्ग पर लामबगड़ में १०० मीटर सड़क एवं पुलिया भी तेज बारिश के चलते उफान पर आये गदेरे में बह गई है। सड़क बह जाने के कारण इस समय बदरीनाथ धाम, गोविन्द द्घाट तथा पाण्डुकेश्वर में पांच हजार से ज्यादा तीर्थ यात्री फसे हुए हैं। प्रशासन इन यात्रियों को निकालने के प्रयास में जुटा हुआ है। दो स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्ग बह जाने से देश के इस अंतिम सीमावर्ती क्षेत्र का संपर्क फिलहाल शेष दुनिया से कट गया है। एहतियात के तौर पर जिला प्रशासन ने बदरीनाथ एवं जोशीमठ में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को तीर्थ यात्रियों के ठहरने एवं खाने के लिए निःशुल्क व्यवस्था करने के निर्देश दिये हैं। राजमार्ग बह जाने से इन स्थानों पर खाद्यान्न पहुंचाना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बन गयी है। क्षेत्र में दूर संचार सेवाएं ठप हो गयी हैं। रसोई गैस न मिलने से लोग पेरशान हैं। तीर्थ यात्री कई स्थानों पर जान जोखिम में डाल सड़क किनारे ही खाना बना रहे हैं तो कई सड़क खुलने के इंतजार में बैठे हैं। हालांकि सीमा सड़क संगठन राष्ट्रीय राजमार्ग को खोलने की कवायद में जुटा है। पर यह कब तक खुल पाएगा इसका अंदाजा स्वयं उन्हीं को नहीं है। यहां सड़क बहने का यह पहला मौका नहीं है। बीते वर्ष भी लामबगड़ के इसी स्थान पर बादल फटने से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग सौ मीटर तक बह गया था तब सीमा सड़क संगठन एवं स्थानीय प्रशासन ने गदेरे में बल्लियों के सहारे तीर्थ यात्रियों को निकाला था। तब भी लगभग एक सप्ताह तक यात्रा अवरुद्ध रही थी। बदरीनाथ यात्रा मार्ग का लामबगड़ जोन तो हमेशा ही खतरे की दृष्टि से संवेदनशील रहा है। लामबगड़ वह क्षेत्र है जहां जय प्रकाश कंपनी की ४०० मेगावाट की विष्णुप्रयाग जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए पहाड़ों को खोद कर कई किमी ़ लंबी सुरंग बनायी गयी लेकिन स्थानीय प्रशासन यह जानते हुए कि बरसात हर साल यहां यह समस्याएं लाती है, कोई ठोस इंतजाम करने के बजाए काम चलाऊ व्यवस्था का इतिश्री कर लेता है। फिलहाल वाहनों की आवाजाही के लिए सड़क कब तक खुल पायेगी। इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। अगर जल्दी ही प्रशासन कुछ ऐहतियाती कदम नहीं उठाता है तो यहा आवश्यक वस्तुओं के साथ ही खाद्यान्न संकट बढ़ सकता है।
 

 
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शहर के सुनियोजित विकास के लिए बने हरिद्वार विकास प्राधिकरण को देखकर लगता है कि अब यह अप्रासांगिक हो गया है। प्राधिकरण में ध्वस्तीकरण एवं काम रोको आदेश की फाइलों का अम्बार लगा है। अब उन पर धूल की परत
 
गांधीजी मुझे इसीलिए याद आए। उनके द्वारा संपादित समाचार पत्रों का प्रसार मात्र कुछ हजार होता था लेकिन उनका
 
रतन टाटा के रिटायर होने से पहले टाटा ग्रुप की शान में चार चांद लग गया है। टाटा ग्रुप भारत की सबसे अमीर कंपनी बन गई है।
 
बिहार विधानसभा चुनाव होने में चंद महीने रह गये हैं। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है।
 
उत्तराखण्ड गठन के बाद से ही प्रदेश को अमीरजादों की ऐशगाह बनने से रोकने और पहाड़ियों को उनकी ही जमीन से बेदखल करने की प्रवृति पर अंकुश लगाने
कुमाऊं मंडल के कपकोट तहसील स्थित सुमगढ़ गांव वालों के लिए १८ अगस्त को आसमान से तबाही बरसी। सुबह आठ बजे इस गांव में बादल फटने से एक
ग्रामीण क्षेत्र में खोले गए सहकारी बैंक एवं समितियां उत्तराखण्ड में किसानों को लाभ देने के बजाय राजनेताओं के
 
लगभग दो साल की जद्दोजहद के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने अपनी बहुप्रतिक्षित वॉल्वो बस सेवा शुरू कर ही दी। यह बसें
रूस के जंगलों में लगी आग दुनियाभर के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आग से अब तक करीब पचास से अधिक लोगों की जानें जा
 
हिन्दी में लद्घु पत्रिकाओं की संख्या अब सैकड़ों की सीमा पार कर गई है। मेट्रो नगरों की तो बात ही क्या मंझले और
 
बुढ़िया द्घर को बड़ा साफ रखा करती थी। इसलिये सत्या और सव्यसाची को दो जोड़ी चप्पल रखने पड़ते थे।
 
धर्म जीना सिखाता है। सच्चा धर्मगुरु जीवन को सुख-शांति और रोशनी से भर देता है। धर्म को दुकान बनाने वाले बेशुमार
 
कॉमनवेल्थ गेम्स के होने में कुछ ही दिन बाकी हैं। हमारे खिलाड़ी अपने- अपने खेल की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
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