Untitled Document
  22 &08&10 && 28&08&10
The IT Post - News in IT Industry
 
Galgotia Institute of Technology
 
 
   
 
 

ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
  47
  107
Check Your Weekly Forecast
वेबसाइट देखी गई 318536 बार
ऋषिकेश में मानकों के विपरीत भवन निर्माण को हरिद्वार विकास प्राधिकरण नोटिस तो देता है पर इस दिशा में पहल के नाम पर मौन हो जाता है। यहां प्राइवेट के साथ कई सरकारी भवनों के खिलाफ भी नोटिस जारी हुए हैं लेकिन किसी किस्म की कार्रवाई होती कहीं नहीं दिखती
 
Welcome
मुक्केबाजों की अग्नि परीक्षा
 
कॉमनवेल्थ गेम्स के होने में कुछ ही दिन बाकी हैं। हमारे खिलाड़ी अपने- अपने खेल की तैयारियों में जुटे हुए हैं। और खेलों के साथ मुक्केबाजी में भी भारत को सफलता की काफी आशा है। हाल में हुए कुछ मुकाबलों में हमारे मुक्केबाजों ने बेहतर प्रदर्शन किये हैं। हरियाणा के भिवानी जिले से निकलकर
बॉक्सर बिजेंदर ने ओलंपिक में पदक जीत कर तहलका मचाया था। उसने

मुक्केबाजी के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किए। इसके बाद देश के युवाओं में भी मुक्केबाजी का क्रेज बढ़ा। युवाओं में मुक्केबाजी का बढ़ता क्रेज देखकर इसके प्रायोजक भी मिलने लगे हैं। अब हमारे मुक्केबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं भी मिलने लगी हैं। फलतः भारतीय मुक्केबाजों ने भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। और अब राष्ट्रमंडल खेलों में भी हमारे मुक्केबाज 'नाकआउट पंच' लगाने को तैयार दिख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकदार प्रदर्शन और पटियाला में दो साल से चल रहे शिविर ने मुक्केबाजी के क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण जगाई है। वर्तमान में हमारे पास दुनिया के बेहतरीन मुक्केबाज विजेंदर सिंह हैं। राष्ट्रमंडल, एशियाड और सैफ खेलों तक तो पहले भी हवासिंह, पदम बहादुर, राजकुमार सांगवान, डिंकों सिंह, अली कमर और धर्मेंद्र यादव जैसे मुक्केबाज समय-समय पर पदक लाते रहे हैं लेकिन बीजिंग ओलंपिक में चार मुक्केबाजों के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने और फिर विजेंदर सिंह के अद्भुत प्रदर्शन से मुक्केबाजी के हालात काफी तेजी से बदले हैं। पहले जहां हमारे मुक्केबाज ओलंपिक और विश्वस्तरीय चैंपियनशिप में भाग लेकर औपचारिकता पूरी करते थे, लेकिन आज रिंग में अपने प्रतिद्वंद्वी को धराशायी कर पदक जीत रहे हैं। मेलबर्न में हुए पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में हमने सिर्फ एक स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन अगर हम अपनी क्षमताओं के मुताबिक प्रदर्शन करने में सफल रहे, तो इस वर्ष दिल्ली में हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों में निश्चित रूप से पांच स्वर्ण पदक जीत सकते हैं। गौरतलब है कि वर्ष २००२ के मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों ने तीन पदक जीते थे और वर्ष २००६ के मेलबर्न राष्ट्रमंडल में इनकी संख्या पांच हो गई थी। राजधानी दिल्ली में तीन अक्टूबर से १४ अक्टूबर तक १९वें राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन होगा। वर्ष १९८२ के एशियाई खेलों के बाद भारत पहली बार इतना बड़ा टूर्नामेंट आयोजित करने जा रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों के ब्रांड एंबेसडर चुने जाने पर खुशी जताते हुए बिजेंदर सिंह ने बताया कि मेरे लिये यह बहुत सम्मान की बात है। मुझे विश्वास है कि इन खेलों के आयोजन से भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा। और खेल प्रेमियों को भी पसंदीदा खेलों का लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए मुक्केबाजी टीम का चयन २६ से २८ अगस्त तक पटियाला में होने वाले ट्रायल के बाद किया जायेगा। हाल में पांचवीं राष्ट्रमंडल मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय मुक्केबाजी महासंद्घ (आईबीएफ) ने २०११ में होने वाले एशियाई प्री . ओलंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के लिए एशियाई मुक्केबाजी परिसंद्घ में दावेदारी पेश करने का फैसला लिया है। हाल ही में नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुई चैंपियनशिप में ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता बिजेंदर सिंह समेत भारत के छह मुक्केबाजों ने बेहतर प्रदर्शन किया। भारतीय मुक्केबाजों की सफलता को देखते हुए आईबीएफ के महासचिव कर्नल पी .के .एम .राजा ने बताया कि आईबीएफ २०११ से हर साल एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता कराने पर विचार कर रहा है, जो एआईबीए थ्री या टू स्टार रेटिंग के होंगे। वहीं भारतीय महिला मुक्केबाज ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। चार बार की विश्वचैंपियन एमसी मैरीकाम एवं एल सरिता देवी ने कजाकिस्तान की राजधानी आस्ताना में संपन्न हुए एशियन महिला मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीते। मैरीकाम का यह तीसरा एवं सरिता का चौथा एशियन खिताब है। भारत ने टूर्नामेंट में कुल दो स्वर्ण, एक रजत एवं पांच कांस्य पदक जीते और चौथे स्थान पर रहा। मेजबान कजाकिस्तान पहले, उत्तर कोरिया दूसरे एवं चीन तीसरे स्थान पर रहा। एक समय वो भी था जब सैफ खेलों में पाकिस्तान का प्रदर्शन हमसे बेहतर था लेकिन आज हमारी स्थिति काफी सुधरी है। यही कारण है कि जिन देशों में भारत कभी मुक्केबाजी की ट्रेनिंग के लिए जाता था, आज वे भारतीय मुक्केबाजों को वीजा देने में आनाकानी करने लगे हैं। उन्हें लगता है भारतीय मुक्केबाज हमसे ही दांव सीखकर हमें पटकनी दे देते हैं। ये भारतीय मुक्केबाजी के शानदार प्रदर्शन का ही नतीजा है कि पिछली बार खेल दिवस पर विजेंदर और चार बार की विश्वचैंपियन महिला मुक्केबाज एम .सी .मैरीकॉम को राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया। द्रोणाचार्य अवार्ड में भी मुक्केबाज प्रशिक्षक जयदेव बिष्ट का नाम शामिल था। इस बार अर्जुन अवार्ड में ओलंपियन मुक्केबाज दिनेश कुमार का नाम है। जिनके प्रदर्शन में निरंतरता बनी रही है। इतना ही नहीं, भारत में मुक्केबाजी के बढ़ते क्रेज के कारण ही राष्ट्रमंडल खेलों में जिन छह ब्रांड एंबेसडर को चुना गया, उनमें दो विजेंदर और मैरीकोम मुक्केबाजी से हैं। यह अलग बात है कि महिला मुक्केबाजी राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा नहीं है। इस बार राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का दावा इसलिए भी मजबूत है क्योंकि भारतीय खिलाड़ी पटियाला में लंबे समय से शिविर में प्रशिक्षण ले रहे हैैं। यहां राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप और राष्ट्रीय चैंपियनशिप के रूप में दो टेस्ट इवेंट हो चुके हैं और भारतीय खिलाड़ियों को नये तालकटोरा स्टेडियम के माहौल से परिचित होने का लाभ अवश्य मिलेगा। गौरतलब है कि राष्ट्रीय चैंपियनशिप से ही नये खिलाड़ियों का चयन करके उन्हें कोर ग्रुप में शामिल किया गया है ताकि २६ से २८ अगस्त तक पटियाला में होने वाले ट्रायल में क्षमता, फॉर्म और फिटनेस के आधार पर सही चयन हो सके। मुक्केबाजी के जानकारों को आशंका है कि आगामी राष्ट्रमंडल की लाइट वेट मुक्केबाजी प्रतियोगिता काफी कड़ी होगी। हाल ही में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लाइट वेट ४९ किलो भार वर्ग में राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता अमनदीप सिंह और फ्लइटवेट में एशियाई चैंपियन सुरंजय सिंह को उलट फेर का शिकार होना पड़ा। राष्ट्रमंडल के ट्रायल में भी उन्हें जबर्दस्त चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसी प्रकार ५६ किलो में राष्ट्रमंडल चैंपियन अखिल कुमार को 'गोल्डन पंच' लगाये काफी लंबा अरसा हो चुका है। ६० किलोग्राम वर्ग में जयभगवान को नवोदित विश्व यूथ चैंपियन विकास कृष्ण चुनौती दे रहे हैं। ६९ किलो भार वर्ग में अनुभवी दिलबाग को मौका मिल सकता है, जिनसे उम्मीद की जा रही है कि वे अपने पुराने राष्ट्रीय रुतबे को कायम रख सकेंगे। अन्य वजनों में मिडिल वेट (७५ किलोग्राम) में विजेंदर का चयन तय माना जा रहा है। गौरतलब है कि चोट के कारण राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले पाये थे। पूर्व में विजेंदर राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। लाइट हैवीवेट (८१ किलोभार वर्ग) में दिनेश कुमार फिर से राष्ट्रीय खिताब जीतकर अपना दावा ठोक चुके हैं। सुपर हैवीवेट (९१ प्लस) में परमजीत सरोग को बेहतरीन मुक्केबाज माना जाता है। राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में उन्होंने स्कारलैंड और न्यूजीलैंड के मुक्केबाजों को धूल चटाकर साबित कर दिया कि अब उनका इरादा यूरोपीय मुक्केबाजों पर कहर ढाहना है। भारतीय टीम को क्यूबा के कोच फर्नाडिस का लम्बे समय से मिल रहे अनुभव का लाभ मिल सकता है। भारत के राष्ट्रीय कोचों गुरुबख्श सिंह संद्घू, जयदेव सिंह बिष्ट के साथ कोंचिग स्टाफ का खिलाड़ियों से बेहतर ताल-मेल उम्मीद जगाती है कि हमारे मुक्केबाज आगामी राष्ट्रमंडल खेल में बेहतर प्रदर्शन कर न सिर्फ इतिहास रचेंगे बल्कि अपने प्रदर्शन से राष्ट्र को भी गौरवांवित करेंगे।
 
 
प्रकृति ने दिया, सरकार ने नहीं
 
चमोली मिले की निजमुला द्घाटी के पाणा, ईराणी, दुर्मी और पगना गांवों को देखकर सरकार के गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावों की हकीकत सामने आ जाती है। पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले इन गांवों में मूलभूत सुविधाओं के साथ पर्यटन नीति भी नहीं पहुंची है


मखमली बुग्याल, सुंदर वादियां, रंग बिरंगे फूल, बर्फली चादर ओढ़े पाणा की पहाड़ियां और दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु। प्रकूति की इतनी सारी खूबसूरती एक साथ देखी जा सकती है चमोली जनपद की निजमुला द्घाटी में। पर्यटन की अपार संभावनाओं वाली यह द्घाटी अंग्रेजों को बहुत पसंद थी। यहां का लार्ड कर्जन रोड इसका प्रमाण है। लेकिन पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करने वाली उत्तराखण्ड सरकार से द्घाटी को उपेक्षा ही मिली है। द्घाटी में स्थित पाणा, ईरानी, दुर्मी एवं पगना गांवों को देखकर तो यही लगता है। पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले इन गांवों को सरकार ने राज्य के पर्यटन मानचित्र में शामिल करना तो दूर मूलभूत सुविधाएं तक देना जरूरी नहीं समझा। सड़क, बिजली, संचार एवं चिकित्सा जैसी सुविधाएं राज्य गठन के दस साल बाद भी यहां नहीं पहुची हैं। यही वजह कि हिमालय की तलहटी में बसी यह द्घाटी आज भी पर्यटकों की आंखों से ओझल है।

चमोली से महज छह किमी ़ की दूरी पर बिरही नामक स्थान से इस द्घाटी में जाने के लिये १३ किमी ़ लिंक मोटर मार्ग है। जिसे तयकर निजमुला द्घाटी पहुंचा जाता है। एक गांव से दूसरे गांव को जाने वाले पैदल रास्ते जोखिम से भरे हैं। क्षेत्र के दुर्मी, पगना, पाणा, ईराणी सहित आधा दर्जन गांव ऐसे हैं जहां लोगों को सड़क मार्ग तक जाने के लिये एक-दो नहीं, बल्कि २६ किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। वह भी सीधी चढ़ाई चढ़कर। द्घर से अपने निकटतम छोटे से बाजार निजमुला पहुंचने में ही ग्रामीणों को पूरा दिन पैदल चलने में लग जाता है। उसी दिन वापस लौट पाना मुश्किल होता है। अलग राज्य बनने के बाद भी यहां आज तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया। संचार सुविधा यहां नहीं पहुंची है। सबसे बड़ी समस्या इन गांवों में चिकित्सा सुविधा की है। बीमार होने पर ग्रामीणों को मीलों पैदल चलकर जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया जाता है। सबसे ज्यादा कष्ट महिलाओं को प्रसव के समय उठाना पड़ता है। कई बार गर्भवती महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार लोग रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। प्राथमिक शिक्षा के बाद वही ग्रामीण युवा आगे पढ़ पाता है जो आर्थिक रूप से संपन्न हो। गरीब तबके के लोग यहीं पर अपनी शिक्षा को विराम लगा देते हैं। यही कारण है कि इस द्घाटी से पलायन एक बड़ी समस्या बन गयी है।

ग्राम पंचायत की ओर से इन सुदूरवर्ती गांवों को आपस में जोड़ने के लिए पैदल संपर्क मार्ग तो बनाये गये हैं लेकिन बारिश के चलते ये भी जगह जगह क्षतिग्रस्त हो गये हैं। बिरही से निजमुला को जाने वाला एकमात्र लिंक मोटर मार्ग भी कई दिनों से अवरुद्ध पड़ा है। यहां पहुंचने के लिए ग्रामीणों को पैदल ही चलना पड़ रहा है। गांव के बुजुर्ग सरकार की इस बेरुखी से दुखी हैं। इस द्घाटी में भारतीय स्टेट बैंक की कोई शाखा नहीं है। बुजुर्गों को २६ किमी की दूरी तयकर पेंशन लेने के लिए चमोली आना पड़ता है। ग्रामीण वीरेन्द्र सिंह एवं पान सिंह बताते हैं कि क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा तथा सड़क मार्ग की मांग को लेकर कई बार ग्रामीण शासन प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। निजमुला द्घाटी के ये गांव बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। यहां के विधायक हैं सत्ताधारी दल भाजपा के केदार सिंह फोनिया। इससे पूर्व कांग्रेस के अनुसुइया प्रसाद मैखुरी इस क्षेत्र का नेतृत्व कर चुके हैं। लेकिन न पूर्व, न ही वर्तमान विधायक ने इस क्षेत्र के विकास के बारे में सोचा। पर्यटन के लिहाज से भी अगर सरकार इस ओर ध्यान देती तो ये निजमुला द्घाटी के ये गांव भी विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकते थे।

निजमुला से बाइस किलोमीटर दूर स्थित है पाणा गांव। इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। वहीं पर तपोवन को जोड़ता लार्ड कर्जन रोड है। बर्फीली चादर से ढकी पाणा की पहाड़ियां हैरान कर देती हैं। लेकिन आज तक पर्यटन महकमे ने पाणा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के बारे में नहीं सोचा। इसी तरह निजमुला से २८ मील पैदल चलकर ईराणी गांव पहुंचा जा सकता है। ईराणी से सिम्बे बुग्याल होते हुए लगभग दस मील दूरी पर है सप्तकुंड। यहां स्थित सात कुंडों में से छह ठंडे और एक गर्म पानी के कुंड हैं। करीब पन्द्रह हजार फिट की ऊंचाई पर स्थित सप्तकुंड पहुंचने के लिए एशिया के सबसे कठिन पैदल ट्रैक को पार करना पड़ता है। सरकार इस जगह को पर्यटन के लिहाज से विकसित करती तो ईराणी गांव के दिन भी बहुरते। ईराणी के ग्राम प्रधान कहते हैं कि सप्तकुंड को पर्यटन से जोड़ा जाना चाहिए। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल सकेगा। सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि आश्वासन तो देते हैं पर करते कुछ नहीं। ऐसे में निजमुला द्घाटी के ग्रमीणों के पास विकास की बाट जोहने के सिवा कोई रास्ता नहीं है।

 
 
 
Logout  
Untitled Document
 
शहर के सुनियोजित विकास के लिए बने हरिद्वार विकास प्राधिकरण को देखकर लगता है कि अब यह अप्रासांगिक हो गया है। प्राधिकरण में ध्वस्तीकरण एवं काम रोको आदेश की फाइलों का अम्बार लगा है। अब उन पर धूल की परत
 
गांधीजी मुझे इसीलिए याद आए। उनके द्वारा संपादित समाचार पत्रों का प्रसार मात्र कुछ हजार होता था लेकिन उनका
 
रतन टाटा के रिटायर होने से पहले टाटा ग्रुप की शान में चार चांद लग गया है। टाटा ग्रुप भारत की सबसे अमीर कंपनी बन गई है।
 
बिहार विधानसभा चुनाव होने में चंद महीने रह गये हैं। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है।
 
उत्तराखण्ड गठन के बाद से ही प्रदेश को अमीरजादों की ऐशगाह बनने से रोकने और पहाड़ियों को उनकी ही जमीन से बेदखल करने की प्रवृति पर अंकुश लगाने
कुमाऊं मंडल के कपकोट तहसील स्थित सुमगढ़ गांव वालों के लिए १८ अगस्त को आसमान से तबाही बरसी। सुबह आठ बजे इस गांव में बादल फटने से एक
ग्रामीण क्षेत्र में खोले गए सहकारी बैंक एवं समितियां उत्तराखण्ड में किसानों को लाभ देने के बजाय राजनेताओं के
 
लगभग दो साल की जद्दोजहद के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने अपनी बहुप्रतिक्षित वॉल्वो बस सेवा शुरू कर ही दी। यह बसें
रूस के जंगलों में लगी आग दुनियाभर के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आग से अब तक करीब पचास से अधिक लोगों की जानें जा
 
हिन्दी में लद्घु पत्रिकाओं की संख्या अब सैकड़ों की सीमा पार कर गई है। मेट्रो नगरों की तो बात ही क्या मंझले और
 
बुढ़िया द्घर को बड़ा साफ रखा करती थी। इसलिये सत्या और सव्यसाची को दो जोड़ी चप्पल रखने पड़ते थे।
 
धर्म जीना सिखाता है। सच्चा धर्मगुरु जीवन को सुख-शांति और रोशनी से भर देता है। धर्म को दुकान बनाने वाले बेशुमार
 
कॉमनवेल्थ गेम्स के होने में कुछ ही दिन बाकी हैं। हमारे खिलाड़ी अपने- अपने खेल की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
The IT Post - News in IT Industry
Untitled Document