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ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
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ऋषिकेश में मानकों के विपरीत भवन निर्माण को हरिद्वार विकास प्राधिकरण नोटिस तो देता है पर इस दिशा में पहल के नाम पर मौन हो जाता है। यहां प्राइवेट के साथ कई सरकारी भवनों के खिलाफ भी नोटिस जारी हुए हैं लेकिन किसी किस्म की कार्रवाई होती कहीं नहीं दिखती
 
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आखिर कौन है आशा यादव
 

उत्तराखण्ड गठन के बाद से ही प्रदेश को अमीरजादों की ऐशगाह बनने से रोकने और पहाड़ियों को उनकी ही जमीन से बेदखल करने की प्रवृति पर अंकुश लगाने की नीयत से कड़ा भू-अध्यादेश कानून बनाया गया जिसके चलते मूल उत्तराखण्डियों को छोड़ अन्य कोई राज्य में मात्र सवा नाली भूमि ही खरीद सकता है। लेकिन क्या वाकई ऐसा हो रहा है? 'पहाड़ी जमीन बाहरियों ने लूटी' श्रृंखला के

अंतर्गत हम लगातार इस पर समाचार प्रकाशित करते रहे हैं। इस बार आशा यादव नाम की एक ऐसी महिला का प्रकरण है, जो न तो उत्तराखण्ड की मूल निवासी है, न ही वहां के अभिलेखों में उसका नाम दर्ज है। लेकिन वह बाकायदा सौ नाली जमीन खरीदने में सफल हो जाती है। जाहिर है ऐसा स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते हुआ है। जब इसकी तह में जाया गया तो पता चला कि जिस खतौनी में उसका नाम था और जिसके सहारे वह १०० नाली जमीन उत्तराखण्ड में खरीद चुकी है, वह खतौनी ही नकली थी। नैनीताल जनपद के भीमताल के जिस गांव जून स्टेट में उसने अपनी जमीन होने के सबूत दिए वह राजस्व अभिलेखों से नदारद पाए गए। जून स्टेट गांव की खतौनी में नाम होने के चलते ही वह अल्मोड़ा जिले के मैणी गांव में सैकड़ों नाली जमीन की मालकिन बन बैठी। 'दि संडे पोस्ट' के पास मौजूद राजस्व अभिलेखों में इस बात की पुष्टि हो गई है कि नैनीताल के जून स्टेट गांव की जमीन मालिकों में कुमारी आशा यादव नाम की कोई महिला है ही नहीं। फिर सवाल उठता है कि उसने अल्मोड़ा में जमीन कैसे खरीद ली। जब वह जमीन खरीद रही थी क्या उस समय प्रशासन आंख बंद किए बैठा था। जिसने उसकी जाली खतौनी तथा जून स्टेट गांव के जमीन मालिकों की जांच तक करना मुनासिब नहीं समझा। यह प्रशासन की लापरवाही नहीं तो और क्या है? सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि कैसे अल्मोड़ा के अधिवक्ता और तहसील कर्मी उसकी जमीन की रजिस्ट्री के दौरान बिना जांच पड़ताल किए ही उसके गवाह बनने पर रजामंद हो गए। पिछले एक दशक के इतिहास में उत्तराखण्ड राज्य में भ्रष्टाचार से जुड़े सैकड़ों मामले प्रकाश में आए हैं। इनमें कांग्रेस सरकार के द्घोटालों के अर्द्धशतक के साथ भाजपा कीखनन नीति से लेकर ऋषिकेश के सिरगुटिया जमीन द्घोटाले तक शामिल हैं। मंत्रियों, आईएएस, पीसीएस और डेप्पुटेशन पर आए अधिकारियों में से अधिकतर ने जम कर प्रदेश को विभिन्न तरीकों से लूटा और चलते बने। लेकिन इन सब से अलग एक ऐसे मामले का पर्दाफाश हुआ है जो उत्तराखण्ड के इतिहास में अब तक नहीं हुआ है। भाजपा सरकार ने उत्तराखण्ड में जमीनों की अंधाधुंध खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के उद्देश्य से भू-अधिनियम लागू किया था। जिसमें बाहरी लोग केवल सवा नाली जमीन ही उत्तराखण्ड में खरीद सकते हैं। ऐसा नहीं है कि इस नियम के लागू होने से जमीनों के विक्रय पर रोक न लगी हो। रोक तो लगी, लेकिन उत्तराखण्ड सरकार के कायदे कानूनों के साथ एक भद्दा खेल भी शुरू हुआ। यह खेल खेलने वाली महिला कुमारी आशा यादव है। जिसने बड़ी चालाकी से जून स्टेट गांव की खतौनी में फर्जी तरीके से फेरबदल कर लिया। उसके बाद खतौनी के खाता संख्या ३८ (वर्तमान में खाता संख्या ४०) में कुमारी आशा यादव के नाम से अपना नाम चढ़वा कर वहां अपनी जमीन दिखा दी। उसी खतौनी को दिखाकर अल्मोड़ा के पटवारी क्षेत्र हवालबाग के मैणी गांव में जमीन भी खरीद ली। जमीन भी एक-दो नहीं बल्कि पूरी १०० नाली। जबकि बाहरी व्यक्ति उत्तराखण्ड में सवा नाली से अधिक एक इंच जमीन नहीं खरीद सकता। सबसे पहले कुमारी आशा यादव ने जून स्टेट गांव की खतौनी निकलवाई। उसमें से एक नाम को काटकर आशा यादव पुत्री बीआर यादव निवासी छोटी मुखानी हल्द्वानी डाला गया। इसके बाद वैसी ही नकली खतौनी कंप्यूटर के सहारे बनवाई। जिस खतौनी की हूबहू खतौनी बनाई गई वह खतौनी २९ अप्रैल २००८ में चन्द्रमोहन सेठी पुत्र बीएस सेठी के नाम से निकलवाई गई थी। जिसमें वह बाकायदा खातेदार में दर्ज है। भीमताल के जून स्टेट गांव के फसली वर्ष १४१०-१४१५ के ग्राम कुमांऊ ५००१०१०१००९ के भाग एक के युएसयु २९-४-२००८ के खाता संख्या ३८ में पूर्व में पारवती देवी पुत्री द्घनानंद के १३७४ फसली खसरा संख्या ४०८ म के प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ० ़७३० है। इसी तरह राजेन्द्र कुमार पुत्र द्घनानंद पर खसरा संख्या ४११ में ० ़०२५० हेक्टेयर, भुवन चंद पुत्र द्घनानंद पर खसरा संख्या ४१३ में ० ़१२४० हेक्टेयर, नारायण दत्त पुत्र टीकाराम पर खसरा संख्या ४१८ में ० ़६१७० हेक्टेयर, सोहन चंद पुत्र टीका राम पर खसरा संख्या ४१९ में ० ़१२३० हेक्टेयर तथा सुरेश चंद पुत्र तेजराम पर खसरा संख्या ४०२/४९१ में ० ़२२१० हेक्टेयर जमीन दर्ज है। इनके सामने खतौनी के पैरा नंबर ७-१२ पर परिवर्तन संबंधी आज्ञा में दा ख़ा ़ मि ़ न ़ ३०/३४० वर्ष (०१-०२) आदेश तह पश्चिमी जून नैनीताल के दिनांक १६/८/०२ के अनुसार खाता हाजा में विक्रेता सुभाष चंद पुत्र हरीश चंद और रेखा पत्नी सुभाष चंद के हक से ५ नाली भूमि खारिज कर क्रेता मोहम्मद साहिल पुत्र दोस्त मोहम्मद का नाम दर्ज किया गया है। ह ़ अ ़ पटवारी १२/१०/०२ इंटरनेट से निकाली गई फर्जी खतौनी में पैरा नंबर ७-१२ के उक्त सभी नामों को यथास्थान रखा गया लेकिन मोहम्मद साहिल पुत्र दोस्त मोहम्मद का नाम पूरा का पूरा हटा दिया गया। इसकी जगह पर क्रेता कुमारी आशा यादव पुत्री बीआर यादव निवासी कालोनी छोटी मुखानी हल्द्वानी का नाम चढ़ाकर कंप्यूटर से हूबहू नई खतौनी बना दी गई। यही नहीं खतौनी पर तहसील और जिला नैनीताल की फर्जी बनाई गई मुहर लगा कर उसे असली की तरह बना दिया गया। इस फर्जी मोहर के ठप्पे को पेज नंबर एक, दो, तीन पर भी लगाया गया। इसके साथ ही सत्य प्रतिलिपि चौखुटी रबड़ की फर्जी मोहर का ठप्पा भी अंत में लगाया गया जिसमें असली की तरह की पांच बिंदु बनाए गए। पहले बिंदु में दिनांक, दूसरे में प्रार्थी का नाम, तीसरे में प्रतिलिपि शुल्क, चौथे में निर्गत पृष्ठ तथा पांचवें बिंदु में निर्गत करने की तिथि का परफोरमा बनाकर रजिस्टर कानूनगो नैनीताल की मुहर का भी असली की तरह फर्जी ठप्पे लगा दिया गया। इस तरह फर्जी बनाई गई खतौनी के जरिए आशा यादव के नाम से मैणी गांव में जमीन खरीदी गई। सबसे पहले ९ मई २००९ को जमीन खरीदी गई। जिससे जमीन खरीदी गई वह चन्द्र मोहन सेठी पुत्र बीएम सेठी निवासी सीआरएसटी परिसर मल्लीताल जिला नैनीताल का है। आशा यादव पुत्री बीआर यादव निवासी छोटी मुखानी हल्द्वानी के नाम से चन्द्रमोहन सेठी से ग्राम मैणी पटवारी क्षेत्र हवालबाग तहसील एवं जिला अल्मोड़ा में खाता संख्या २१ की ५० नाली जमीन खरीदी गई। जिसका बसरह न ़ ९२ है। यह जमीन आशा ने २३ लाख ६० हजार रुपये में खरीदी। इस जमीन का विक्रय पत्र १५ मई २००८ को अल्मोड़ा की तहसील में जमा कर दिया गया। जमीन खरीदने का स्थान कोसी-दौलाद्घाट मोटर मार्ग से जुड़ा होना दर्शाया गया। जिसमें ४५ नाली जमीन सड़क से जुड़ी हुई तथा ५ नाली भूमि सड़क से लगभग १३० मीटर दूरी पर स्थित बताई गई। साथ ही इस जमीन पर ३० पेड़ चीड़ के भी थे जो छह इंच एवं आठ इंच व्यास (गोलाई) के बताए गए। इन लाखों रुपये के पेड़ों की कीमत कुल तीस हजार रुपये आंकी गई और इतने का स्टांप शुल्क अदा कर दिया गया। सेलडीड में बाकायदा यह भी दर्ज किया गया कि क्रेता (कुमारी आशा यादव) उत्तराखण्ड राज्य की निवासी है। क्रेता के नाम उत्तराखण्ड राज्य के ग्राम जून स्टेट तहसील भीमताल और जिला नैनीताल के खाता संख्या ३८ में दिनांक १२-९-२००३ से पूर्व भूमि है। यही नहीं बल्कि क्रेता को महिला होने के चलते उत्तराखण्ड राज्य में लागू निर्धारित भू-अधिनियम के तहत स्टांप शुल्क में भी छूट दी गई। इसी के साथ प्रारूप कर्ता और गवाह में बाकायदा अल्मोड़ा कोर्ट की अधिवक्ता तुलसी जौहरी तथा कचहरी परिसर अल्मोड़ा के स्टांप विक्रेता रफीक अहमद को उल्लिखित किया गया। इसी के साथ जमीन के दाखिल खारिज में रजिस्ट्रेशन अधिनियम १९०८ की धारा ३२ ए के अनुपालन के लिए क्रेता आशा यादव और विक्रेता चंद्रमोहन सेठी के दसों उंगलियों के फिंगर प्रिंट भी लिए गए। यह कुमारी आशा यादव का पहला फर्जीवाड़ा था। जिसके जरिए वह मैणी गांव में ५० नाली जमीन की मालकिन बन बैठी। इसके बाद पुनः २८ अगस्त २००८ को एक बार फिर आशा यादव के नाम से जमीन खरीदी गई। जिसमें चन्द्रमोहन सेठी से खाता संख्या सात, खाता संख्या छह और खाता संख्या दो में कुल १६ नाली जमीन खरीदी गई। कुमारी आशा यादव ने इस जमीन को चन्द्रमोहन सेठी से मात्र एक लाख २८ हजार रुपये में खरीदी। ९ सितंबर २००८ का इस जमीन का बेनामा अल्मोड़ा तहसील में किया गया। इस भूमि को कोसी-दौलाद्घाट मार्ग से १५० मीटर के ऊपर बताया गया। बताया गया कि इस जमीन पर किसी भी प्रकार के पेड़, पत्थर, इमारत नहीं हैं। क्रेता ने इस जमीन पर भी उत्तराखण्ड राज्य के लागू निर्धारित शासनादेशों के अनुकूल स्टांप शुल्क में छूट लेते हुए अपने आपको छोटी मुखानी हल्द्वानी का निवासी बताया। इसमें भी यही दर्शाया गया कि क्रेता के नाम ग्राम जून स्टेट तहसील भीमताल जिला नैनीताल के खाता संख्या ३८ में १२ सितंबर २००३ से पूर्व भूमि दर्ज है। इस बेनामा में भी प्रारूपकर्ता अल्मोड़ा की अधिवक्ता तुलसी जौहरी बनी। गवाह बने कचहरी परिसर अल्मोड़ा के स्टांप बैंडर रफीक अहमद तथा विद्या रतन आर्य। नियम के तहत इस जमीन की खरीद फरोख्त में भी क्रेता और विक्रेता के दोनों हाथों की दसों उंगुलियों के फिंगर प्रिंट लिए गए। इसी तरह तीसरी बार फिर कुमारी आशा यादव के नाम से जमीन खरीदी गई। जमीन जिससे खरीदी वह वही पुराना वाला डीलर चन्द्रमोहन सेठी पुत्र बीएम सेठी था। इस बार भी मैणी गांव में जमीन खरीदी गई। कुल खरीदी गई जमीन ३४ नाली थी। जिसको सात लाख ६० हजार रुपये में खरीदा गया। पूर्व की भांति इसमें भी प्रारूपकर्ता अल्मोड़ा की अधिवक्ता तुलसी जौहरी तथा गवाह कचहरी परिसर के स्टांप बैंडर रफीक अहमद और विद्या रतन आर्य थे। इस जमीन को खरीदते समय भी एक बार पुनः वही झूठ दर्शाया गया, जिसमें क्रेता कुमारी आशा यादव के नाम जून स्टेट गांव खाता संख्या ३८ में १२ सितंबर २००३ से पूर्व जमीन दर्ज होना बताया गया। इस तरह फर्जी तरीके से ग्राम जून स्टेट में जमीन दिखाकर कुमारी आशा यादव ने १०० नाली जमीन खरीद ली। यह जमीन मैणी गांव में है। इस फर्जीवाड़े का जब 'दि संडे पोस्ट' को पता चला तब नैनीताल जाकर इसकी छानबीन की गई। पहले ग्राम जून स्टेट के खाता संख्या ३८ को निकलवाया गया। लेकिन पता चला कि अब यह खाता ४० नंबर में तब्दील हो गया है। लेकिन जब ग्राम जून स्टेट का खाता संख्या ४० निकलवाया गया तो वहां कुमारी आशा यादव पुत्री बीआर यादव निवासी छोटी मुखानी हल्द्वानी के नाम से कोई भूमि दर्ज नहीं पाई गई। इसी के साथ 'दि संडे पोस्ट' ने नैनीताल के खाता खतौनी कक्ष को वहां के सब रजिस्ट्रार के साथ छान मारा लेकिन कुमारी आशा यादव के नाम से कोई भी जून स्टेट में जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला। नैनीताल में ही 'दि संडे पोस्ट' ने पहले रजिस्ट्री की नकल ली उसके बाद पीली गठरी वाले खाता खतौनी के गट्ठर को खुलवाकर पड़ताल की। जब उसमें भी कुमारी आशा यादव का नाम नहीं निकला तो बाद में लाल गठरी वाले खाता खतौनी के गट्ठर (आर-६) को भी खुलवाकर देखा गया लेकिन उसके रजिस्टरों में काफी खोजने पर भी आशा के नाम पर निराशा ही हाथ लगी।

 
चोपड़ा भी शामिल है फर्जीवाड़े में
 

पटवारी क्षेत्र गोविंदपुर के गांव टाडा कांडा में दिल्ली निवासी एक व्यक्ति को भी फर्जीवाड़े का शिकार बना दिया गया। सुरेन्द्र लाल चोपड़ा पुत्र सीएल चोपड़ा निवासी एस-१३२ पंचशील पार्क नई दिल्ली को भी कुमारी आशा यादव की तर्ज पर ग्राम जून स्टेट की खतौनी में फर्जी तरीके से दर्ज कराया गया। इसके बाद जून स्टेट की इस जमीन हकदारी पर अल्मोड़ा के टाडा कांडा गांव में श्री चोपड़ा को दो नाली जमीन बेच दी गई। जमीन बेचने वाला व्यक्ति वही चन्द्रमोहन सेठी है। २७ मार्च २००८ को इस जमीन की अल्मोड़ा तहसील में रजिस्ट्री कराई गई। टाडा कांडा के खाता संख्या १९ की यह दो नाली जमीन ४० हजार में सुरेन्द्र लाल चोपड़ा को बेची गई।

चोपड़ा का नाम ग्राम जून स्टेट की फर्जी खतौनी में कुमारी आशा यादव के नीचे वाले पैरा में दर्ज किया गया। इसके बाद ही वह फर्जी खतौनी असली की तरह बनाकर अल्मोड़ा सब रजिस्ट्रार कार्यालय में पेश कर दी गई। २० हजार प्रति नाली के हिसाब से खरीदी गई यह जमीन भी गोविंदपुर-दौलाद्घाटा मोटर मार्ग से १५० मीटर की दूरी पर स्थित है। अल्मोड़ा तहसील में इसकी रजिस्ट्री कराते समय प्रारूपकर्ता बनी है अधिवक्ता तुलसी जौहरी और गवाह बने हैं ६४ डीडीए फ्लैट्स जीके आई नई दिल्ली निवासी परमजोत सिंह पुत्र जे ़ सिंह। इसके अलावा दूसरे गवाह बने हैं टी ज़ी ़ ७/१४ गार्डन स्टेट गुड़गांव हरियाणा निवासी सुरेश मल्होत्रा पुत्र सोमदत्त शर्मा।

 
पहाड़ी जमीन बाहरीयो ने लूटी
 
दिल्ली के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं एवी प्रेमनाथ। उनकी पत्नी आशा प्रेमनाथ प्लीजेंट वैली फाउंडेशन नामक एक गैर सरकारी संस्था की कर्ताधर्ता हैं। इस फाउंडेशन ने कुछ जमीन रानीखेत के निकट टाडा कांडा गांव में खरीदी जो विवाद का केंद्र बनी। हमने उक्त जमीन के मूल मालिक का उत्पीड़न सामने लाने का प्रयास किया तो एडीएम दिल्ली सरकार एवी प्रेमनाथ को द्घोर आपत्ति हुई। उन्होंने प्रकाशित समाचार के प्रति गंभीर ऐतराज जताते हुए हमें फोन पर कई जानकारियां दीं जैसे वह जेएनयू बैकग्राउंड के हैं अतः जनपक्षीय सोच के हैं। उनकी पत्नी भी जेएनयू से हैं, उत्तराखण्ड की आई.ए.एस. निधिमणि त्रिपाठी उनके साथ जेएनयू में थीं। वह गरीब बच्चों के लिए कुछ सार्थक काम करना चाहते हैं, इत्यादि-इत्यादि। हमने उनसे वायदा किया कि यदि हमारे द्वारा प्रकाशित समाचार में कुछ गलत है तो बाकायदा पूरी छानबीन कर सच्चाई को समझा जाएगा। और यदि आवश्यकता हुई तो भूल-सुधार की विज्ञप्ति भी प्रकाशित की जाएगी। लेकिन इस वार्ता के बाद ही हमें लगातार अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा मानहानि के कानूनी नोटिस मिलने शुरू हो गए। एवी प्रेमनाथ के निर्देश में उनके वकीलों द्वारा भेजे गए नोटिस पूर्णतः बेतुके और अभद्र हैं। इन नोटिसों ने हमें प्रेरित किया कि इस प्रकरण के साथ-साथ उत्तराखण्ड में जमीनों की खरीद-फरोख्त के गोरखधंधे पर व्यापक काम किया जाए। 'पहाड़ी जमीन बाहरियों ने लूटी' समाचार श्र्ृंखला इसी का परिणाम है। हमारे विशेष संवाददाता आकाश नागर की मेहनत का नतीजा है इस बार इस श्र्ृंखला की पांचवीं कड़ी जिसमें एक ऐसी महिला का नाम सामने आया है जो फर्जी खसरा-खतौनी के दम पर पहाड़ की१०० नाली जमीन खरीद लेती है। जिन सूत्रों के हवाले से यह समाचार सामने आया वह बहुत प्रमाणिक तौर पर इस महिला की असली पहचान हमें बता चुके हैं। उस पहचान को हम भी स्वीकारते हैं लेकिन निर्णायक की भूमिका में आने के बजाए इस रहस्यमयी महिला का पर्दाफाश करने का काम राज्य की सरकारी मशीनरी पर छोड़ना ही हमने उचित समझा है। इस समाचार से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि पहाड़ी की जमीन को बाहरी लूट पाने में सफल केवल इसलिए हो रहे हैं क्योंकि उन्हें स्थानीय नागरिकों और अधिकारियों का पूरा सहयोग और संरक्षण मिलता है
 
 
 
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शहर के सुनियोजित विकास के लिए बने हरिद्वार विकास प्राधिकरण को देखकर लगता है कि अब यह अप्रासांगिक हो गया है। प्राधिकरण में ध्वस्तीकरण एवं काम रोको आदेश की फाइलों का अम्बार लगा है। अब उन पर धूल की परत
 
गांधीजी मुझे इसीलिए याद आए। उनके द्वारा संपादित समाचार पत्रों का प्रसार मात्र कुछ हजार होता था लेकिन उनका
 
रतन टाटा के रिटायर होने से पहले टाटा ग्रुप की शान में चार चांद लग गया है। टाटा ग्रुप भारत की सबसे अमीर कंपनी बन गई है।
 
बिहार विधानसभा चुनाव होने में चंद महीने रह गये हैं। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है।
 
उत्तराखण्ड गठन के बाद से ही प्रदेश को अमीरजादों की ऐशगाह बनने से रोकने और पहाड़ियों को उनकी ही जमीन से बेदखल करने की प्रवृति पर अंकुश लगाने
कुमाऊं मंडल के कपकोट तहसील स्थित सुमगढ़ गांव वालों के लिए १८ अगस्त को आसमान से तबाही बरसी। सुबह आठ बजे इस गांव में बादल फटने से एक
ग्रामीण क्षेत्र में खोले गए सहकारी बैंक एवं समितियां उत्तराखण्ड में किसानों को लाभ देने के बजाय राजनेताओं के
 
लगभग दो साल की जद्दोजहद के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने अपनी बहुप्रतिक्षित वॉल्वो बस सेवा शुरू कर ही दी। यह बसें
रूस के जंगलों में लगी आग दुनियाभर के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आग से अब तक करीब पचास से अधिक लोगों की जानें जा
 
हिन्दी में लद्घु पत्रिकाओं की संख्या अब सैकड़ों की सीमा पार कर गई है। मेट्रो नगरों की तो बात ही क्या मंझले और
 
बुढ़िया द्घर को बड़ा साफ रखा करती थी। इसलिये सत्या और सव्यसाची को दो जोड़ी चप्पल रखने पड़ते थे।
 
धर्म जीना सिखाता है। सच्चा धर्मगुरु जीवन को सुख-शांति और रोशनी से भर देता है। धर्म को दुकान बनाने वाले बेशुमार
 
कॉमनवेल्थ गेम्स के होने में कुछ ही दिन बाकी हैं। हमारे खिलाड़ी अपने- अपने खेल की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
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