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  20-05-12 -- 26-05-12
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ऐसे जनादेश के बाद क्या अगली सरकार दबावमुक्त होकर स्वेच्छा से कार्य कर सकेगी?

 
 
   
 
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उत्तराखण्ड के हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय
 
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  मंत्री पर भारी नौकरशाह
   
 
उत्तराखण्ड में नौकरशाहों पर लगाम लगाना किसी भी सरकार के लिए कठिन चुनौती रहा है। पूर्व न्यायधीश के मुख्यमंत्री बनने पर उम्मीद जगी है। लेकिन जिस प्रकार से उनके कैबिनेट के दो मंत्रियों के आदेश को अधिकारियों ने नजरअंदाज किया उससे वह उम्मीद धूमिल पड़ने लगी है
  प्रदेश में अब तक प्रत्येक सरकार में नौकरशाह हावी रहे हैं। वह चाहे अनुभवी एनडी तिवारी सरकार हो या कड़क फौजी तेवर वाले खण्डूड़ी की सरकार। मुख्यमंत्री कोई भी हो लेकिन नौकरशाहों ने कभी भी विधायिका की चलने नहीं दी। वर्तमान में भी कुछ ऐसा ही दिख रहा है। इस बार सरकार के मुखिया रिटायर्ड जज हैं। कानून की हर पेचीदगी से वाकिफ विजय बहुगुणा से उम्मीद थी कि वह नौकरशाही पर लगाम लगा कर रखेंगे, लेकिन ऐसा कुछ होता
 
 
नहीं दिख रहा। अधिकारी मंत्रियों की भी अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे में ये अफसर आमजनों के महत्व को समझेंगे इसकी उम्मीद कम ही है। अधिकारी मंत्रियों की तो नहीं सुन रहे हैं पर कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री के 'किचन कैबिनेट' की भूमिका निभा रहे हैं। सूबे में सरकार का विधिवत गठन हुए दो माह हो चुके हैं। सरकार के कार्यों में किसी प्रकार का उत्साह नहीं दिख रहा है। नौकरशाह पहले
की भांति अपनी मनमानी कर रहे हैं। हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि कैबिनेट मंत्रियों की आहूत बैठकों को भी नौकरशाह कोई महत्व नहीं दे रहे है। इसका ताजा प्रमाण समाज कल्याण मंत्री सुरेन्द्र राकेश की अनुसूचित जाति एवं जनजाति उपयोजना की समीक्षा बैठक में सामने आया। इसमें कई विभागों के सचिवों और उप सचिवों को आना था। लेकिन अधिकांश अधिकारियों ने बैठक में आना उचित नहीं समझा। जिस कारण मंत्री सुरेन्द्र राकेश ने खफा होकर बैठक का बहिष्कार कर दिया। काबीना मंत्री सुरेन्द्र राकेश ने ७ मई को अनुसूचित जाति एवं जनजाति उपयोजना की समीक्षा बैठक बुलाई थी। जिसमें तमाम विभागों के सचिवों, उपसचिवों तथा प्रमुख सचिव को बुलाया गया। बैठक में निर्धारित समय तक सात विभागों के ही सचिव पहुंचे जबकि अन्य विभागों के उपसचिवों ने इस बैठक में आना ही जरूरी नहीं समझा। एक भी प्रमुख सचिव बैठक में नहीं पहुंचा। जिससे मंत्री का पारा चढ़ गया और फटकार लगाते हुए उन्होंने बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय लिया और इसकी शिकायत मुख्य सचिव आलोक जैन से पत्र लिख कर की। पूर्व में भी शहरी विकास और पशुपालन मंत्री प्रीतम सिंह पंवार के मामले में ऐसा ही हुआ है। इन्हें यमुना कालोनी में सरकारी आवास का आवंटन हुआ है। जिसमें मरम्मत का काम होना था। विभाग द्घटिया और निम्न गुणवत्ता का कार्य कर रहा था। इसे मंत्री ने रुकवाया और सही काम करवाने के लिए विभागीय अधिकारियों को कहा। सूत्र के मुताबिक इस बारे में मंत्री प्रीतम पंवार ने कई बार सक्षम अधिकारियों को आदेश भी दिया। लेकिन वे मंत्री के आदेशों को नजरअंदाज करते रहे। थक हार कर मंत्री ने इस मामले की शिकायत मुख्य मंत्री से की है। उन्होंने लिखा कि आवास में अपेक्षित कार्यों व गुणवत्ता में सुधार के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये गये थे, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी स्थिति असंतोषजनक पाई गयी है। आवास में निम्न गुणवत्ता और पुरानी सामाग्री उपलब्ध करवाई गयी है। मंत्री प्रीतम पंवार ने अपने शिकायती पत्र में यह भी लिखा है कि राज्य बनने के बाद से ही राज्य की नौकरशाही इतनी लापरवाह है कि उसे मंत्री के आदेशों और निर्देशों की भी परवाह नहीं है। एक काबीना मंत्री का इस तरह के पत्र लिखना इस बात का द्घोतक है कि वास्तव में सूबे की नौकरशाही का क्या हाल है। एक ओर जहां काबीना मंत्री सुरेन्द्र राकेश समीक्षा बैठक बुलाते हैं और अधिकारी बैठक को गम्भीरता से ही नहीं लेते वहीं दूसरी ओर मंत्री के आवास में हो रहे कार्यों के सुधार के लिए मंत्री के आदेशों और निर्देशो को अधिकारी कोई तवज्जो नही दे रहे हैं। अधिकारी बेशक मंत्रियों एवं आम जनों की बातों को अनसुना करते रहे हों लेकिन ये सभी अधिकारी मुख्यमंत्री के सामने अपने अंक बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करते रहे हैं। जिस कारण सरकार बदलते ही कुछ अधिकारी कमजोर स्थिति में आ जाते हैं तो कुछ मजबूत हो जाते हैं। वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं जो सभी सरकारों में मजबूत स्थिति में रहते हैं। प्रशासन के गलियारों में इन्हें 'किचन कैबिनेट' कहा जाता है। राकेश शर्मा, डीके कोटिया जैसे अधिकारी हर सरकार में प्रमुख भूमिका में नजर आते हैं। ये लोग इस बार भी मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारियों में शुमार हैं।
 
आवास योजना की जांच
 
प्रदेश के मुख्यमंत्री से की गई शिकायत काम करती हैं, इसका एक उदाहरण पिछले दिनों देखने को मिला। नेहरू आवास योजना के तहत उधमसिंह नगर के दिनेशपुर के लिए आवंटित किए गए ३८७ मकानों के बनने और आवंटन में हो रही बंदरबाट की जांच के लिए यहां ११ मई को देहरादून से एक टीम आई। जिसने विभिन्न बिंदुओं पर जांच प्रारंभ
कर निर्माण कार्य का निरीक्षण भी किया। कुछ दिनों पहले नगर पंचायत के सभासद अनादी रंजन मंडल एकजनप्रतिनिधि मंडल एवं रुद्रपुर के पूर्व विधायक तिलकराज बेहड. के साथ मिलकर देहरादून पहुंचे। इस दल ने मुख्यमंत्री से अपनी बात कही और इस मामले में बंदर बांट का आरोप लगाते हुए जांच की मांग भी की। इसके बाद मुख्यमंत्री के आदेश हुए। फिर इस पर आगे बढ.ते हुए बाहरी विकास योजना के निदेशक के निर्देश पर दो सदस्यीय टीम नगर पंचायत पहुंची और सभी बिंदुओं पर जांच प्रारंभ की। टीम में नगर निगम देहरादून के अधिशासी अधिकारी रवि पांडे एवं परियोजना अधिकारी राजीव पांडे शामिल थे। उन्होंने सबसे पहले नगर पंचायत के अधिकारी पीके बंसल से कार्य की जानकारी ली। रवि पांडे ने बताया कि यह जांच कुछ बिंदुओं पर चल रही हेै, लेकिन धीरे-धीरे इस जांच के दायरे बढ़ते जायेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के मकान अधूरे पड.े हैं विभाग उन्हें भी गंभीरता से लेते हुए जल्द ही उसे पूरा करेगा। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लग रही सामग्री का समस्त ठेका एंव देखरेख नगर पंचायत चेयरमैन सीमा सरकार ने अपने चहेते को दी है। इसके चलते निर्माण कार्य में द्घटिया सामग्री का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। यदि कोई लाभार्थी इसका विरोध करता है तो कथित ठेकेदार उस व्यक्ति को धमकाते हुये योजना का पूर्ण लाभ ना मिलने की धमकी देता है। पूरे मामले पर नगर पंचायत अध्यक्ष सीमा सरकार ने बताया कि रुके हुए र्निमाण कार्य के लिए कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल जिम्मेदार है। जो स्थिति दिनेशपुर के मकानों की है वही स्थिति पूरे जिले में हो रहे नेहरू आवास के मकान र्निमाणो की है क्योंकि कार्यदायी संस्था पूरे जिले में एक ही है। इसकी निष्पक्षता के साथ जांच होनी चाहिए।
 
गैस एजेंसी खुली
 
दिनेशपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस वितरण के लिए १२ मई को
भारत पेट्रोलियम की ओर से नई एजेंसी खोली गई। 'आरके देवी भारत गैस एजेंसी' का शुभारंभ टेरीटरी मैनेजर पवन कुमार एवं सेल्स मैनेजर राजीव ने किया। मुख्य अतिथि पवन कुमार ने कहा कि इस गैस एजेंसी के खुलने से ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की किल्लत खत्म हो जायेगी। वितरक
स्वामी नीलम कुमार चौधरी ने कहा कि उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की पूर्ण कोशिश की जाएगी। ग्राहकों को किसी भी प्रकार की शिकायत का मौका नहीं दिया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं में 'भारत गैस' के प्रति विश्वास बढ़ेगा। प्रथम चरण में १८०० कनेक्शन दिए जायेंगे। इस मौके पर क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग मौजूद थे। इस गैस एजेंसी के खुलने से स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि अब क्षेत्र में रसोई गैस की कालाबाजारी रुकेगी।
 
पर्यटन पुलिस केंद्र
 
विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से पर्यटन पुलिस केंद्र खोला गया है। इसके माध्यम से पर्यटकों को पर्यटन से संबंधित सारी जानकारियां मिल सकेंगी। बिजरानी टूरिज्म जोन कॉर्बेट पार्क के प्रवेश द्वार आमडंडा में खोले गए पर्यटन पुलिस बूथ का उद्द्घाटन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
(नैनीताल) डॉ सदानंद दाते ने किया। उन्होंने पर्यटन को बढ.ावा देने की दृष्टि से भी इसे बहुत महत्वपूर्ण बताया। यहां पत्रकारों से बात करते हुए सदानंद दाते ने कहा कि इस केंद्र में पर्यटन स्थलों, आवागमन के साधनों और उनकी दूरियों के अलावा कुमाऊं के अन्य पर्यटन स्थलों के बारे में भी जानकारी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि नैनीताल में जितने सैलानी आते हैं, उसके आठ प्रतिशत इस पार्क में भी आते हैं। दाते ने होटल स्वामियों व जिप्सी स्वामियों से भी अपेक्षा जताई। कॉर्बेट द्घुमाते समय पर्यटकों को बेवकूफ बनाने की कोशिश यहां कई बार झगड.ों का कारण बनती है। ऐसे में पर्यटकों को इस तरह की जानकारी देना बेहद अच्छा कदम है। ध्यान रहे कॉर्बेट पार्क एक बड.ा क्षेत्र है, बिजरानी एवं सीतावनी सहित कई क्षेत्र इसके हिस्से हैं। लेकिन लगभग सभी पर्यटक कॉर्बेट का मुख्य भाग ढिकाला क्षेत्र देखने आते हैं। यहां बिना आज्ञा प्रवेश लिया जा सकता। इस मौसम के दौरान यहां पर्यटकों की संख्या बहुत ज्यादा होती है। जिस कारण पर्यटकों को परमिशन रिजर्व कराना आसान नहीं होता। इस जानकारी के अभाव में अकसर बाहर से आने वाले पर्यटक कभी-कभी ऐसे जिप्सी चालकों का शिकार बन जाते हैं, जो पर्यटकों को भ्रमित कर ठगी करने की कोशिश करते हैं। अब यहां पुलिस केंद्र बनने के बाद ऐसी ठगी की द्घटनाओं पर अंकुश लगने की पूरी उम्मीद है।
 
 
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भ्रष्टाचार रूपी दीमक खास और आम, दोनों को अपनी चपेट में ले चुका है। सरकारी दफ्तरों के चपरासी, बाबू से लेकर अफसर हों
 
प्रेम और युद्ध एतिहासिक होते है। उनको करने वाला भी। लेकिन कोई चुम्बन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाए, ऐसा
 
उत्तराखण्ड में नौकरशाहों पर लगाम लगाना किसी भी सरकार के लिए कठिन चुनौती रहा है। पूर्व न्यायधीश के मुख्यमंत्री बनने
आय के कोई नए साआँान नहीं, बकायेदारों से वसूली की कोई योजना नहीं। कर्मचारियों को तीन माह से वेतन नहीं, मगर नगर
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भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से चौतरफा द्घिरे पूर्व सीएम निशंक उत्तराखण्ड विआँाानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पाना
नैनीताल। जिले में स्थित मोहान दवा फैक्ट्री में श्रमिक अपने हक के लिए पिछले डेढ. माह से संद्घर्ष कर रहे
 
डॉ अजीज कुरैशी ने १५ मई को राजभवन में राज्यपाल पद की शपथ ली। उत्तराखण्ड के मुख्य न्यायाधीश बारन द्घोष ने
ऊआँामसिंहनगर के रामनगर (रुद्रपुर) में स्वतंत्रता सेनानी पंडित रामसुमेर शुक्ला के द्घर जन्मे राजेश
कर्नाटक भाजपा सरकार पर जारी संकट पर फिलहाल विराम लग गया है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने १४ मई को
भारत के मशहूर कार्टूनिस्ट शंकर पिल्लई ने ६३ साल पहले १९४९ में एक कार्टून 'स्नेल्पेस' (द्घोंद्घे की
आँार्म जीना सिखाता है। सच्चा आँार्मगुरु जीवन को सुख, शांति और रोशनी से भर देता है। आँार्म को दुकान बनाने वाले बेशुमार
फिलहाल इंडियन प्रीमियर लीग की चमक-दमक और ग्लैमर का जादू देश के सिर चढ़ कर बोल रहा है। इसी बीच लंदन में जुलाई से
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