Untitled Document
  19 &02&12 && 26&02&12
The IT Post - News in IT Industry
 
 
 
 
   
 
 
 

क्या चुनाव आयोग की सख्ती से प्रदेश में हुए चुनावों में नेताओं के खर्च पर लगाम लग सका ?

 
 
   
 
  8
  12
 
आस्था की पगडंडी पर चलने वालों
 
Check Your Weekly Forecast
वेबसाइट देखी गई 294476 बार
 
 
  Welcome
 
   
  बीमारी का बाउंसर
   
 

युवराज सिंह बीमार हैं। खेल से लेकर मीडिया जगत सभी उनके ठीक होने की प्रार्थना कर रहे हैं। बेशक कॅरियर के उफान पर युवराज का गंभीर रूप से बीमार पड़ना चिंताजनक है, लेकिन डॉक्टरों की मानें तो वे वापसी कर लेंगे। उनके पहले भी कई खिलाड़ी गंभीर बीमारी पर विजय पाकर पूरे दम-खम के साथ मैदान पर वापसी कर

 

चुके। इससे पहले ऐसी कई द्घटनाएं हो चुकी हैं। कई खिलाड़ी बीमार और चोटिल हुए हैं। मगरउन्होंने लौटकर मैदान अपना दमखम दिखाया है। टेनिस के स्टार खिलाड़ी लिएंडर पेस को ही ले लीजिए। वह भी बीमार हुए थे। वे सिस्टीसिरकोसिस से पीड़ित थे। यह मन और मस्तिष्क को झकझोर देने वाली बीमारी है। इस बीमारी का अहम पहलू यह है कि इसका उपचार दवाओं से किया जा सकता है और रोगी प्रायः चार से छह सप्ताह में ठीक हो जाता है। पेस के सिर के पिछले बाएं हिस्से में भयंकर दर्द के बाद जांच में 'गांठ' होने की पुष्टि हुई थी। वैसे पहले लोगों को लगा था कि यह ब्रेन ट्यूमर है पर सिर के पिछले बाएं हिस्से में दिखने वाली गांठ, गांठ न हो कर 'सूजन' मात्र थी। इसका कारण पैरासिटिक इंफेक्शन था। जानकारों के अनुसार इसका कारण दूषित। इससे पहले हॉकी के आक्रामक खिलाड़ी जुगराज सिंह की कहानी भी कुछ इसी तरह की है। उन्हें एक कार दुर्द्घटना में जबरदस्त चोट लगी। एक वक्त तो ऐसा लगा कि अब वे शायद ही हॉकी खेल पाएं, मगर न केवल उन्होंने वापसी की, बल्कि अच्छा प्रदर्शन भी किया। बहरहाल भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी युवराज सिंह गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनके फिजियो डॉ जतिन चौधरी ने यकीन दिलाया है कि इसे इलाज से ठीक किया जा सकता है। और युवराज मई में क्रिकेट खेलने के लिए फिट हो जाएंगे। यह असामान्य ट्यूमर है और कैंसरस भी। लेकिन इसका पता पहले चरण में ही लगा लिया गया है। डॉक्टरों को फैसला करना था कि वे दवाई जारी रखें या फिर कीमोथेरेपी कराएं। मगर ट्यूमर का हिस्सा उनके दिल की धमनी के ऊपर था, तो इसमें खतरा था, क्योंकि यह फट सकता था। कुल मिलाकर इसका पूरी तरह से उपचार किया जा सकता है। लेकिन बाद में हुए जांच में ये साबित हुआ कि यह कैंसर नहीं है और युवराज के ठीक होने की संभावना ९० प्रतिशत तक है। पिछले साल विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। विश्व कप मैचों में उन्होंने ३६२ रन बनाए थे और १५ विकेट लिए थे। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्हें चार बार मैन ऑफ द मैच चुना गया। और ये कहना गलत नहीं होगा कि भारत के विश्व कप जीतने में शायद सबसे बड़ा योगदान युवराज का ही था। युवराज ने अब तक ३७ टेस्ट मैचों में ३४.८० की औसत से १७७५ रन बनाए हैं। जबकि उन्होंने २७४ वनडे मैचों में ३७.६२ की औसत से ८०५१ रन जोड़े हैं। उन्होंने २० टी-२० मैच भी खेले हैं, जिनमें उनके नाम ५६४ रन दर्ज हैं। यह ३० वर्षीय खिलाड़ी पिछले महीने से अमेरिका में है। युवराज ने पहले लिखा था, मैं इससे लड़ूंगा और मजबूत इंसान की तरह वापसी करूंगा क्योंकि मेरे साथ देशवासियों की प्रार्थना है। मीडिया के सहयोग और मेरी निजता का सम्मान करने के लिए शुक्रिया। बहरहाल, क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें युवराज के स्वास्थ्य पर टिकी हुई हैं। बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जब वे इस बीमारी को भी छक्के मारने के अंदाज में उड़ाकर बाहर आएंगे।

   
  बॉलीवुड की विविद्यता
   
 
   
  बॉलीवुड अब सतरंगी दिखता है। यहां लव स्टोरी है, एक्शन है, रियल स्टोरीज पर बनी फिल्में हैं, थीम बेस्ड मूवी है और रीमेक भी। बॉलीवुड ने विविधता के इस देश में मल्टीटेस्ट के फंडे को समझ लिया है। यही कारण है कि भारतीय सिनेमा का नया दौर खिचड.ी जैसा दिखता है। बॉलीवुड के नजरिए से अच्छी बात यह है कि ये सतरंगी सिनेमा सिने प्रमियों को पसंद भी आ रहा है। वर्ष २०१२ की ही बात करें तो शुरूआत के दो महीनों में ६ फिल्में रिलीज हुईं जिनमें से तीन फिल्में अग्निपथ, गली-गली चोर है और एक मैं और एक तू सफल रहीं। इन तीनों फिल्मों की स्टोरी लाइन एकदम अलग थीं। अग्निपथ एक एक्शन फिल्म थी तो गली-गली में चोर है देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को दर्शाती हुई फिल्म थी और एक मैं और एक तू रोमांटिक कॉमेडी है। तीनों को अलग-अलग वर्ग के दर्शकों ने देखा और ये फिल्में हिट हुईं। इसका प्रमाण
   
 
टिकट खिड.की में हुआ कलेक्शन है।
पिछला साल बॉलीवुड के लिए बहुत अच्छा था। दर्जनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस में जम कर कमाई की। साल की शुरुआत 'नो वन किल्ड जेसिका' जैसी सोशल फिल्म से हुई और खत्म डॉन-२ से, जो कि एक एक्शन थ्रिलर थी। इस बीच कई कॉमेडी, एक्शन और सोशल फिल्में आयीं। अलग-अलग सब्जेक्ट पर बनी इन फिल्मों ने सिने प्रेमियों के उत्साह को बरकरार रखा। इसी का नतीजा था कि जेसिका लाल हत्या कांड पर बनी फिल्म के बाद लोगों ने तनु वेड्स मनु जैसी लाइट लव स्टोरी को भी पसंद किया। इसके बाद रेड्डी ने भी खूब धूम मचाई। पिछले साल डेली-बेली ने काफीआलोचनाओं के बाद
  भी दर्शकों को ल्टीप्लैक्स तक खींचा। मर्डर-२ एक रोमाटिंक थ्रिलर थी, और दर्शकों ने इसे भी बहुत पसंद किया। साल के अंत में भी कई हिट, फिल्में आईं जो रोमाटिंक ड्रामा,कॉमेडी, साइंस फिक्शन और एक्शन- थ्रिलर सभी थी। रॉ-वन, रॉकस्टार, देसी ब्वॉज, डॉन-२ सब की सब हिट लेकिन सब अलग- अलग पृष्ठभूमि पर बनीं फिल्में थीं। वर्ष २००० में भारतीय फिल्मकारों ने हॉलीवुड की तर्ज पर यहां भी रियलिस्टिक विषयों पर फिल्में बनाने का चलन शुरू किया। हॉकी पर बनी 'चक दे इंडिया', क्रिकेट पर बनी 'लगान', फुटबॉल पर बनी 'गोल'। बॉलीवुड के इस प्रयोग को दर्शकों ने पसंद भी किया। इसी दौरान साउथ के फिल्मों की तर्ज पर बॉलीवुड ने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी फिल्में बनाईं। कई फिल्मों में अंडरवर्ल्ड भी विषय बना। जेसिका लाल हत्याकांड पर बनी 'नो वन किल्ड जेसिका', फूलन देवी के जीवन पर बनी 'बैंडिट क्वीन' और आरक्षण जैसे समाजिक मुद्दे पर बनी 'आरक्षण' इसका उदाहरण है। बॉलीवुड का ये नया कलेवर हाल ही में बदला है। याद होगा कि पिछला दौर बॉलीवुड में कॉमेडी फिल्मों का था, जब अक्षय कुमार, अजय देवगन जैसे एक्शन हीरो भी कॉमेडी करने लगे थे। बॉलीवुड में हमेशा ऐसा ही रहा था। शुरुआत में यहां ऐतिहासिक और सामाजिक फिल्मों का दौर रहा। इसके बाद ५० और ६० के दशक में रोमांटिक ड्रामा फिल्मों का दौर आया। यहां राजकपूर और ख्वाजा अब्बास ने सामाजिक विषयों से जुड.ी फिल्में बनाईं। ६० के दशक में फिल्में रंगीन हुई और यही वो दौर था जब फिल्मों ने वास्तविकता से फासला कर लिया। यहीं से विदेशों में शूटिंग का दौर भी आया। चाइना टाउन, एक मुसाफिर एक हसीना, लव इन टोकियो, लव इन शिमला और बॉबी जैसी फिल्में आई। इन फिल्मों के विषय का वास्तविकता से कोई वास्ता नहीं था। सत्तर का दशक आया। अमिताभ की इंट्री और एंग्री यंग मैन की भूमिका ने एक्शन फिल्मों का दौर ला दिया। फिल्मों में डाकुओं की इंट्री का भी यही समय था। इसके बाद बॉलीवुड में एक दौर ऐसा भी आया जब सिनेमा से विषय कहीं गायब हो गए। यह नब्बे का दौर था। बड.े बैनर की एक दो हिट फिल्मों के अलावा इस दौर ने बॉलीवुड को कुछ भी नहीं दिया। लेकिन अब समय तेजी से बदलता दिख रहा है। दर्शक अब सिनेमाद्घरों और मल्टीप्लैक्स में हीरो और हिरोइन को नहीं बल्कि मनोरंजन के लिए जाने लगे हैं। फंस गए रे ओबामा, तेरे बिन लादेन और भेजा फ्राई की सफलता इसका उदाहरण है। बॉलीवुड की ये नई चाल सिनेमा और सिने-प्रेमियों दोनों को भा रही है। जो बॉक्स ऑफिस के कलेक्शन से साफ दिखाई देता है। बॉलीवुड में यह परिवर्तन बहुत अच्छा है। दर्शक इसे पसंद कर रहे है और दर्शकों का ये रुझान फिल्म निर्माताओं को कुछ नया करने के लिए प्रोत्साहित भी करेगा।
   
 
 
 
Logout  
 
 
इस देश में यदि कोई फल-फूल रहा है तो वह है हमारा सामंती लोकतंत्र। और इसका विस्तार
 
पहाड़ दरअसल वैसा नहीं है, जैसा वह सैलानियों को दिखाई देता है ...।' इस पंक्ति से टिहरी और
 
भाजपा के दो गुटों (मदन कौशिक और कमल जौरा) की आपसी प्रतिद्वंदता के कारण हरिद्वार नगर निगम कंगाली के
उत्तराखण्ड में रिकॉर्ड मतदान कराकर भले ही चुनाव आयोग सीना चौड़ा किये हुए है। मगर कई
`
जसपुर। कहने को तो बुनकर सूत पिरो कर उन्हें सुन्दर कपड.ों में तब्दील करते हैं। लेकिन उनके खुद के जीवन में सुंदरता
रात में महिलाओं का द्घर से निकलना सुरक्षित नहीं है। इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा का ख्याल खुद रखना चाहिए।' यह
 
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित राजाजी नेशनल पार्क विवादों के केंद्र में है। वजह चिला
दिल्ली में १३ फरवरी को इजराइल दूतावास के बाहर एक राजनयिक की कार में धमाका
पिछले साल विवाद में द्घिरने के बाद एंट्रिक्स-देवास करार
रद्द कर दिया गया। रद्द हुआ यह
धर्म जीना सिखाता है। सच्चा धर्मगुरु जीवन को सुख- शांति और रोशनी से भर देता है। धर्म को दुकान बनाने वाले बेशुमार
युवराज सिंह बीमार हैं। खेल से लेकर मीडिया जगत सभी उनके ठीक होने की प्रार्थना कर रहे हैं। बेशक कॅरियर के उफान पर युवराज
 
The IT Post - News in IT Industry