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Welcome
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राज्यपाल ने ली शपथ |
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डॉ अजीज कुरैशी ने १५ मई को राजभवन में राज्यपाल पद की शपथ
ली। उत्तराखण्ड के मुख्य न्यायाधीश बारन द्घोष ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद उन्होंने प्रदेश के चौथे राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया। इससे पहले डॉ अजीज कुरैशी १३ मई को प्रदेश पहुंचे। देहरादून रेलवे स्टेशन पर प्रदेश के नियोजन, सूचना प्रौद्योगिकी, खेल एवं युवा कल्याण |
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मंत्री दिनेश अग्रवाल ने उनका स्वागत किया यहां से कुरैशी राजभवन पहुंचे जहां प्रमुख सचिव राज्यपाल अशोक पई तथा मुख्य सचिव आलोक कुमार जैन के साथ प्रदेश के लगभग सभी बड.े अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। |
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| वित्तीय संसाधनों की कमी पर चिंता |
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प्रदेश में वित्तीय संसाधनों की कमी है। राज्य की वित्त
और संसदीय कार्य मंत्री इंदिरा हृदयेश ने इस संबंध में चिंता व्यक्त की। उन्होंने १४ मई को प्रदेश में वित्तीय संसाधनों की कमी को लेकर शासन स्तर की एक बैठक बुलाई। इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों से इस संबंध में सुझाव मांगे। राज्य में वित्तीय संसाधनों की कमी प्रदेश गठन के |
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| बाद से ही चिंता का विषय है। कई बार इस पर विचार किया गया लेकिन स्थिति में कोई खास परिवर्तन नहीं दिखा। वर्तमान में प्रदेश के पास निगम और पंचायत कर्मचारियों को वेतन देने में भी कई बार मुश्किलों का सामना करना पड.ता है। |
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| बुद्धि-शुद्धि यज्ञ |
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क्षन्नप्र.ह्विद्रन्नप्रि क्रद्र
त्तराखण्ड ऊर्जा कामगार संगठन ने अधिकारियों तक
अपनी आवाज पहुंचाने का नया तरीका ढूंढ निकाला है। उन्होंने ऊर्जा निगम प्रबंधन पर उनकी मांगों पर ध्यान न देने का आरोप लगाया और अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए १४ मई को बुद्धि-शुद्धि यज्ञ किया। उन्होंने कहा कि निदेशक मंडल की बैठकों |
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| में उनकी मांगों को नहीं उठाया गया, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड.ा। संगठन के अध्यक्ष दीपक बेनीवाल ने बताया कि कर्मचारी समयबद्ध वेतन, करियर ग्रोथ, विभिन्न भत्तों का पुनरीक्षण, पदोन्नति, स्टॉफ स्ट्रक्चर आदि की मांग कर रहे हैं। |
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| विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री |
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अपने व्यस्तम कार्यक्रम बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री
विजय बहुगुणा ने १४ मई को आईसीएफआरई सभागार मे वन पंचायत सम्मेलन में उपस्थित हुए। यहां विभिन्न जनपदों से आए वन पंचायत प्रतिनिधियों ने शिरकत की। इन प्रतिनिधियों ने वन पंचायतों को ज्यादा सक्रिय और प्रभावशाली बनाने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने जल्द ठोस कार्य योजना तैयार करने का आश्वाशन |
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| दिया। इससे पहले १३ मई को मुख्यमंत्री ने सहसपुर आयोजित एक अभिनंदन कार्यक्रम में भी भाग लिया। यहां उन्होंने प्रदेश के लिए कई करोड. रुपए की योजनाओं की द्घोषणा भी की। इन योजनाओं में बोक्सा जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए एनआईटी की स्थापना, इस जाति के परिवारों को स्वरोजगार के लिए अल्पकालीन व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना शामिल है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसानों को उनके बेहतर प्रदर्शन पर किसान भूषण पुरस्कार भी दिया। जिसमें २५ हजार रुपए का चैक तथा सम्मान पत्र दिया गया। फसल में सूर्य प्रकाश, पशु पालन में अब्दुल गफ्फार, सब्जी उत्पादन में भरत सिंह, फल उत्पादन में प्रेम शर्मा तथा मत्स्य पालन में गौरव नेगी को पुरस्कृत किया गया। ११ मई को मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास में प्रदेश के मनोनीत राज्यपाल डॉ अजीज कुरैशी से शिष्टाचार भेंट की। |
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| सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक धरना |
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| उत्तराखण्ड की राजनीतिक दुर्दशा को देखते हुए देहरादून स्थित गांधी पार्क में बीते सप्ताह
विश्वप्रकाश थपलियाल सांकेतिक धरने पर बैठे। वह विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री बनने के बाद किए गए कुछ कार्यों से बेहद असंतुष्ट थे। थपलियाल का इस तरह सरकार के विरोध में धरने पर बैठना इसलिए महत्पूर्ण है क्योंकि वे वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता हैं और वर्ष १९६९-७० तक इंदिरा गांधी के राजनीतिक सचिव रहे हैं। उन्होंने बहुगुणा पर आरोप लगाया है कि विगत भाजपा सरकार के साथ मिल कर भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों को शरण दी है। सरकार अपने खुद के संकल्पों से हट गई है। राज्य के महत्वपूर्ण पदों पर उत्तराखण्ड के ईमानदार अफसरों को नकार कर दागी, द्घोटालों में संलिप्त अफसरों को बैठाया जा रहा है। प्रदेश की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। |
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| धन्ने से धनवान |
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ये राजनीति भी अजीब होती है। नेता शाम को किसी का साथ देते हैं तो सुबह उसे भुला देते हैं। टिहरी के निर्दलीय विआँाायक दिनेश धन्ने के बारे में कुछ ऐसा ही हो रहा है। निर्दलीय चुनाव जीते तो कांग्रेस सरकार को समर्थन देने की एवज में 'वेल्यू' बन गई। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के खास हो गए। तब धन्ने आश्वस्त थे कि मंत्रालय का ११वां पद जो खाली है वह उनको ही मिलेगा। लेकिन महीनों तक भी यह संभव नहीं हुआ। अब खबर है कि धन्ने ने पाला बदल दिया है। विजय बहुगुणा का दामन |
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| छोड़ वे अब केंद्रीय राज्यमंत्री हरीश रावत के साथ आ गए हैं। रावत ने भी धन्ने को न केवल हाथों-हाथ लिया बल्कि उनको ११वें स्थान पर नियुक्त कराने का वादा कर डाला। बताया जा रहा है कि रावत ने धन्ने की मुलाकात कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी से भी करा दी है। |
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| राग गैरसैंण |
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आजकल प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा उत्तराखण्ड की स्थाई राजआँाानी गैरसैंण का जमकर राग अलाप रहे हैं। वे जहां भी जाते हैं गैरसैंण मुद्दे को सबसे पहले उठाते हैं। पिछले ग्यारह सालों में कभी भी बहुगुणा इस मुद्दे पर इतना मुखर नहीं हुए है। इसके पीछे सांसद सतपाल महाराज का उनको समर्थन बताया जा रहा है। एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री पहाड़ में बड़े बाधों के पक्षधर हैं वहीं दूसरी तरफ प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैंण में बनने का उनका यह दाव आगामी |
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| लोकसभा तथा विधानसभा सीट के उप चुनाव को लेकर तो है ही। साथ ही उनके निशाने पर एक नेता भी है। यह नेता है केंद्रीय राज्यमंत्री हरीश रावत। रावत की पहाड़ समर्थक छवि बनी हुई है। इस मुद्दे को उठाकर वे रावत की छवि में सेंध लगा रहे हैं। इससे बहुगुणा लोगों को यह दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि पहाड़ के हित चिंतक हरीश रावत ही नहीं, वे भी है। |
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| .... ़ ़ ़फिर कुछ हुआ तो |
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योग गुरु स्वामी रामदेव आजकल दिल्ली में ३ जून को आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तैयारी में है। इसके लिए उन्होंने प्रदेश के कोने-कोने से ऐसे नेताओं का साथ मांगा है जो या तो छोटी पार्टियों से हैं या क्षेत्रीय दलों का नेतृत्व करते हैं। गत् १३ मई को दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में ऐसे नेताओं के साथ उनकी मीटिंग चल रही थी। दूर-दराज से आए नेता प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए अपनी- अपनी राय मशविरा दे रहे थे। उत्तराखण्ड से भी कुछ लोग आए थे। मीटिंग |
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| अपने अंतिम पड़ाव पर थी लेकिन इसी दौरान एक
नेताजी कुछ ज्यादा ही भावुक हो गए। दिल्ली में ही स्वामी जी के साथ हुई पूर्व की द्घटना को याद दिलाते हुए वह नेता बोले-बाबा जी अगर आपको कुछ हो गया तो फिर ़ ़ ़। अचानक सब चुप हो गए। लगा कि जैसे सभी अनचाहे भय से ग्रसित हो गए हैं। सभी को पिछले वर्ष पांच जून को दिल्ली के रामलीला मैदान का दृश्य एक बार फिर याद आ गया। |
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| टम्टा का माइक मोह |
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अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के सांसद प्रदीप टम्टा यूं तो आंदोलनकारी रहे हैं लेकिन जब से उन्होंने राजनीतिक पारी शुरू की है तब से उन्हें लोग दूसरे नजरिए से देखने लगे हैं। टम्टा की एक खासियत यह है कि वे जिस मुद्दे पर बोलते हैं तो फिर द्घंटों तक माईक नहीं छोड़ते। वह भी ऐसे मौके पर जब वक्ताओं को समयावआिँा निश्चित कर दी जाय उनका बोलना लगातार जारी रहता है। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में 'उत्तराखण्ड की दशा, |
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| दुर्दशा और दायित्व' पर जोरदार बहस चल रही थी। वहां प्रदेश के पर्यावरणविद्, चिंतक तथा आंदोलनकारी भी मौजूद थे। सभी की चाहत यह थी कि उनको भी माइक पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का मौका मिले, वक्ता ज्यादा थे और समय कम। ऐसे में प्रदीप टम्टा का लगातार बोलना जारी था। जबकि समय १० मिनट का निश्चित हुआ था। प्रदीप को बोलते हुए १० मिनट की बजाय आधा द्घंटा और जब एक द्घंटा होने को हुआ तो 'उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी' के मास्टर प्रताप सिंह से नहीं रहा गया। वे खड़े हुए और बोले मैं भी एक द्घंटा बोलूंगा और टम्टा जी के ही भाषणों पर सवाल करूंगा। इतना कहने भर की देरी थी कि टम्टा ने माईक छोड़ने में ही भलाई समझी। जब वे स्टेज से नीचे उतर रहे थे एक वक्ता ने चुटकी ली-सांसद जी आंदोलनकारी के तौर पर बोलने और जनप्रतिनिआिँा बनकर बोलने में बड़ा अंतर है। इस अंतर को बरकरार रखिए। |
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