केदारनाथ क्षेत्र में हैली सेवाओं के मामले में राज्य सरकार और यूकाड़ा दोनों ही संवेदनहीन नजर आते हैं। 19 हैलीकाॅप्टर दुर्घनाओं में से 17 दुर्घटनाएं केदारघाटी में ही हुई हैं बावजूद इसके आज तक केदारनाथ में एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम की स्थापना नहीं की जा सकी है। संकरी घाटी क्षेत्र होने के चलते केदारनाथ में हैलीकाॅप्टर की उड़ानें हमेशा से खतरे की जद में ही रही हैं। भारतीय सेना का एमआई 17 जैसा भारी-भरकम और कई-कई टन बोझ ले जाने वाला हैलीकाॅप्टर भी केदारनाथ में ही दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है तो साफ है कि सामान्य हैलीकॉप्टरों के लिए केदारनाथ की भौगोलिक स्थितियां कितनी संवेदनशील होंगी। यही नहीं केदारनाथ जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में राष्ट्रीय हरित अभिकरण यानी एनजीटी ने भी कठोर मानक तय किए हुए हैं जिसमें नदी तल से 600 मीटर की ऊंचाई की उड़ान का आदेश जारी किया हुआ है लेकिन कोई भी हैलीकाॅप्टर इस मानक का पालन नहीं करता है। स्थानीय लोगों की मानें तो हैलीकाॅप्टर 250 से 400 मीटर की ही उंचाई में उड़ान भरते हैं जिससे केदारनाथ क्षेत्र के पर्यावरण और वन्य जीवों को भी बड़ा खतरा पैदा हो चुका है
उत्तराखण्ड में हैली सेवाएं जहां नए-नए रिकाॅर्ड बन रही हैं तो वहीं दुर्घटनाओं के भी ‘कीर्तिमान’ बन रहे हैं। विगत दस वर्षों में 19 लोगों की हैलीकाॅप्टर दुर्घनाओं से मौत होने के बावजूद भी नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण की कार्यशैली सुधारने का प्रयास तक नहीं हो रहा है। गम्भीर बात यह है कि प्रदेश सरकार और शासन का पूरा फोकस राज्य में हैली सेवाओं को बढ़ाने के लिए तो है लेकिन इसके लिए सुरक्षा के जरूरी इंतजाम करने में पूरी तरह से नाकाम ही सबित हो रहा है। 2013 में नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकारण यानी यूकाडा की स्थापना की गई जिसका उद्देश्य राज्य में हेलीपैडों का सुदृढ़ीकरण, नए-नए हेलीपैडों का निर्माण के साथ-साथ चारधाम यात्रा और पर्यटन के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भगीदारी और निवेश को बढ़ावा देने के अलावा राज्य में हवाई सेवा सुरक्षा को बढ़ावा देना प्रमुख था। इसके साथ ही निजी और व्यवसायिक हवाई उड़ानों में भी हवाई जहाज व हैलीकाॅप्टरों के शुल्क को निर्धारित करना भी एक प्रमुख उद्देश्य था।
इसके चलते राज्य में अनेक हवाई सेवाओं को गति तो मिली लेकिन चारधाम यात्रा के लिए हवाई सेवाओं की सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया। उच्च हिमालयी क्षेत्र और
संवेदनशील क्षेत्र होन के बावजूद हैलीकाॅप्टर संचालन करने वाली कम्पनियों के आगे यूकाड़ा पूरी तरह से नतमस्तक ही रहा है। हैरत की बात यह है कि 2013 से लेकर आज तक केदारनाथ में एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम तक की स्थापना नहीं हो पाई है जिसके चलते 11 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी है जिनमें 39 लोग मारे जा चुके हैं।
हैलीकाॅप्टर दुर्घनाओं का यह भयावह आंकड़ा सिर्फ केदारनाथ का है। वर्ष 2010 में पहली हैलीकाॅप्टर दुर्घटना सामने आई जिसमें 12 जून 2010 को प्रभातम हैली कम्पनी के एक कर्मचारी की हैलीपैड में खड़े हैलीकाॅप्टर के पंखे से कटकर मौत हुई। 21 जून 2013 को केदानाथ आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्य में लगे हुए एक निजी कम्पनी के हैलीकाॅप्टर जंगल चट्टी में क्रैश हो गया जिसमें पायलट की दर्दनाक मौत हुई। 28 जून 2013 को एक निजी कम्पनी का हैलीकाॅप्टर केदारनाथ के समीप गरूड़चट्टी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में पायलट और सहायक पायलट के साथ-साथ एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हो गई।
गौर करने वाली बात यह है कि यह तीनों हैलीकाॅप्टर दुर्घटनाएं 21 जून 2013 से लेकर 28 जून 2013 के बीच सिर्फ 8 दिनों के भीतर हुई जिसमें कुल 24 लोग मारे गए। इसी तरह से 18 अक्टूबर 2019 को केदारनाथ से गुप्तकाशी के लिए उड़ान भरते समय हैलीकाॅप्टर दुर्घटना हुई जिसमें 7 लोग मारे गए तो वहीं 23 अप्रैल 2023 को हैलीपैड में ही हैलीकाॅप्टर के पिछले रोटर पंखे से टकराकर का यूकाडा के वित्त नियंत्रक की भी दर्दनाक मौत हो चुकी है।
केदारनाथ में कई ऐसी हैलीकाॅप्टर दुर्घटनाएं भी हुई हैं जिसमें कोई हताहत तो नहीं हुआ है लेकिन इन दुर्घनाओं ने साफ बता दिया कि केदारनाथ में भी हवाई सेवा नियंत्रण के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। 25 मई 2016 को गुप्तकाशी से केदारनाथ के लिए उड़ान भरते समय एक हैलीकाॅप्टर का दरवाजा अचानक से खुल गया। हालांकि इसमें किसी यात्री को कोई नुकसान तो नहीं हुआ लेकिन हैलीकाॅप्टर संचालन करने वाली कम्पनी की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल कर सामने आ गई। सुखद बात यह कि इस दुर्घटना में किसी सैनिक को कोई नुकसान नहीं हुआ। 13 मई 2023 को एक निजी कम्पनी के हैलीकाॅप्टर में तकनीकी खराबी आने के चलते आपातकाल लैंडिंग करनी पड़ी। इसमें भी किसी तरह की कोई क्षति नहीं हुई। इसी तरह से 17 मई 2025 को केदारनाथ में एक तीर्थयात्री की अचानक तबीयत खराब होने के चलते ऋषिकेश एम्स से हैलीकाॅप्टर एम्बुलेंस सेवा केदारनाथ पहुंची लेकिन हैलीपैड के समीप ही हैलीकाॅप्टर बेहद तेजी से लैंड हुआ और उसका पिछला हिस्सा टूट गया। इस दुर्घटना में भी किसी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ।
केदारनाथ के अलावा बदरीनाथ और गंगोत्री धाम के लिए भी हैलीकाॅप्टर सेवाएं चलाई जा रही हैं। विगत 12 मई को थंबी एविएशन कम्पनी का हैलीकाॅप्टर हैलीपैड से उड़ान भरते हुए दुर्घटना ग्रस्त हो गया। बताया जाता है कि तीथ यात्रियों को उतरने के बाद हैलीकाॅप्टर अन्य यात्रियों को लेने के लिए जैसे ही उड़ान भरने लगा तभी उसके पिछले पंखे एक वाहन से टकरने के कारण अनियंत्रित हो गया। बदरीनाथ में एक बड़ा हादसा होने से बच गया।
हैलीकाॅप्टर दुर्घटनाओं के इतिहास में तीसरी बड़ी दुर्घटना गत् 8 मई को हुई जिसमें पायलट सहित 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और एक व्यक्ति गम्भीर रूप से घायल हो गया। देहरादून के सहस्त्रधारा हैलीपैड से एक निजी कम्पनी के चार्टर हैलीकाॅप्टर से तीर्थयात्री गंगोत्री धाम के लिए निकले लेकिन हर्षिल के पास गंगनानी में ही एक पहाड़ी से टकरा कर हैलीकाॅप्टर गहरी खाई में जा गिरा जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना इतनी भयानक थी कि हैलीकाॅप्टर के दो टुकड़े हो गए जिसमें फंसे दो शवों को हैलीकाॅप्टर काट कर निकालना पड़ा।
केदारनाथ उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के साथ-साथ अति संवेदनशील क्षेत्र हैं इसके आस-पास की पहाड़ियों में हमेशा भूस्खलन की घटनाएं होती रही है। बादल फटना और तेजी के साथ मलवा गिरने की घटनाएं तो एक तरह से सामान्य बात ही है। वर्ष 2013 में केदारनाथ में भयानक प्राकृतिक आपदा आई जिसमें हजारों लोग मारे गए। इस सबके बावजूद प्रदेश का शासन तंत्र केदारनाथ की भौगोलिक स्थिति और उसकी संवदेनशीलता को अनदेखा करता रहा है। गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ तक का क्षेत्र रिजर्व वन क्षेत्र का भू-भाग है। केदारनाथ वन्य जीव सेंचुरी होने के बावजूद प्रदेश सरकार और यूकाड़ा दिल खोलकर केदानाथ में हैली सेवाओं का हर वर्ष न सिर्फ अनुमति देता है, बल्कि हैली कम्पनियों के हितों के लिए तत्पर भी दिखाई देता रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि अलग उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद केदारनाथ में वर्ष 2004 में पहली बार हैलीकाॅप्टर से यात्रा आरम्भ की गई। महज एक हैलीकाॅप्टर से शुरू हुई केदारनाथ की हवाई यात्रा इतनी प्रचलित हो चुकी है कि इस संवेदनशील क्षेत्र में एक साथ 13 प्राइवेट हैलीकाॅप्टर कम्पनियों को उड़ान के लाइसेंस और टेंडर आवंटित किए जा चुके हैं।
2013 की केदारनाथ आपदा के बाद राज्य सरकार का पूरा फोकस हैली सेवाओं द्वारा केदारनाथ की यात्रा पर रहा है। इसके लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा जमकर हैली सेवाओं को बढ़ावा दिया गया और इसका ही नतीजा रहा कि जहां 2006 में केदारनाथ के लिए हैलीकाॅप्टरों की संख्या महज दो ही थी वहीं 2012 में यह बढ़कर 6 हो गई। केदारनाथ आपदा से उबरने के बाद तो सरकार ने हैलीकाॅप्टर सेवाओं को इतना बढ़ा दिया कि 2015 में केदारनाथ के लिए हैली सेवाएं देने वाली 9 कम्पनियां हो गईं।
भाजपा की सरकार बनने के बाद त्रिवेंद्र रावत सरकार ने भी केदारनाथ में हैलीकाॅप्टर सेवाओं को खूब बढ़ावा दिया और 2019 में 9 हैलीकाॅप्टर कम्पनियों को हैलीसेवा देने के लिए अनुमति दी गई और वर्तमान में केदारनाथ के लिए 8 हैली कम्पनियों को केदारनाथ हवाई सेवा की अनुमति दी जा चुकी है। प्रदेश में हैली सेवाएं तीर्थयात्रियों को भी खासी पसंद आ रही हैं। चारधाम यात्रा के शुरुआती पहले 15 दिनों में ही 19 हजार से अधिक तीर्थयात्री केदारनाथ की हैलीकाॅप्टर द्वारा यात्रा कर चुके हैं। यह आंकड़ा जहां चैंकाता है तो वहीं केदारनाथ जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण और हिमालय संवेदनशीलता पर भी अनेक सवाल खड़े करता है। इस वर्ष केदारनाथ यात्रा के लिए 8 प्राइवेट हैली कम्पनियों के हैलीकाॅप्टर तेज गर्जना के साथ उड़ान भर रहे हैं। 2 मई से लेकर 16 मई तक 19820 तीर्थयात्री केदारबाबा के दर्शन को पहुंचे हैं। इन 14 दिनों में इन हैलीकाॅप्टरों के कुल 3293 शटल हो चुके हैं यानी हर एक दिन करीब 235 शटल हो चुकी है। एक तरह से केदारनाथ की घाटियों में प्रत्येक ढाई से तीन मिनट में एक हैलीकाॅप्टर उड़ान भर रहा है।
इन हैलीकॉप्टरों से केदारनाथ पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या देखें तो 2017 में 1,01,933 यात्रियों ने केदारनाथ की यात्रा हैलीकाॅप्टर से की तो वहीं 2019 में 1,88,444 तीर्थ यात्रियों ने केदार बाबा के दर्शन किए। जबकि वर्ष 2023 में 1,51,000 श्रद्धालुओं ने केदारनाथ के दर्शन हैलीकाॅप्टर सेवाओं के जरिए की। करीब 21 किमी. की खड़ी चढ़ाई के चलते केदारनाथ के लिए हवाई सेवाएं सबकी चहेती सेवा बनी हुई है। हैलीकाॅप्टर के टिकटों के लिए भी मारामारी होती है। जिसका फायदा फर्जी हवाई टिकट के तौर पर भी खूब नजर आता रहा है। साथ ही ब्लैक में हैलीकाॅप्टर सेवाओं के टिकटों के बेचे जाने के मामले भी जमकर सामने आ चुके हैं। फर्जी वेबसाइड बनाकर धोखाधड़ी करने के मामलों में कार्यवाही तो होती है लेकिन जिस तरह से हैलीकाॅप्टर सेवाओं के लिए तीर्थयात्री कुछ भी कर गुजरने की चाहत रखते हैं उससे ऐसे घोटालेबाजों को रास्ता मिलता है। 2023 में साइबर सेल द्वारा 76 ऐसी फर्जी वेबसाइटों को बंद करवाया गया जो फर्जी हैलीकाॅप्टर सेवओं के टिकट ऑनलाइन बेच रही थी। इस वर्ष अभी दो ऐसी ही वेबसाइटों को भी राज्य की साइबर पुलिस बंद करवा चुकी है जो हैलीकाॅप्टर के टिकट फर्जी तरीके से बेच रही थी। अब राज्य में हैलीकाॅप्टर सेवाओं के मामले को देखें तो खास तौर पर केदारनाथ क्षेत्र में हैली सेवाओं के मामले में राज्य सरकार और यूकाड़ा दोनों ही संवेदनहीन नजर आते हैं। 19 हैलीकाॅप्टर दुर्घनाओं में से 17 दुर्घटनाएं केदारघाटी में ही हुई है बावजूद इसके आज तक केदारनाथ में एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम की स्थापना नहीं की जा सकी है। केदारनाथ एक संकरी घाटी क्षेत्र होने के चलते यहां हैलीकाॅप्टर की उड़ानें हमेशा से खतरे की जद में ही रही है।
हैरत की बात यह है कि जहां समूचे प्रदेश में वन कानूनों और सेंचुरियों के नियमांे से आम प्रदेशवासी त्रस्त है वहीं हैलीकाॅप्टर सेवाओं के लिए केदारनाथ वन्य जीव अभ्यारण और केदारनाथ वन प्रभाग नकारा ही बना हुआ है। नियमों के उल्लंघन पर वन विभाग यूकाड़ा को पत्र देकर अपना पल्ला झाड़ देता है तो वहीं यूकाड़ा भी कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है। जानकारी के अनुसार 2019 में केदानाथ वन प्रभाग द्वारा हैलीकाॅप्टर सेवाओं के मानकों के विपरीत उड़ान भरने पर यूकाड़ा को अनेक पत्र तो लिखे ही साथ ही हैलीकाॅप्टर कम्पनियों को भी 32 बार नोटिस जारी किए लेकिन किसी एक का भी जवाब नहीं दिया गया और न ही कोई कार्यवाही की गई है, साथ ही हैलीकाॅप्टर पायलटों और उड़ानों का कोई भी डाटा साझा तक नहीं किया गया।
सबसे गम्भीर बात तो यह है कि हैलीकाॅप्टर दुर्घटनाओं के लिए नगर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए द्वारा जांच की जाती है लेकिन आज तक एक भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। विगत 12 मई को थंबी एविएशन कम्पनी का हैलीकाॅप्टर हैलीपैड से उड़ान भरते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना के बाद थंबी एविएशन कम्पनी के हैलीकाॅप्टरों की उड़ानों पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी गई थी। अब थंबी एविएशन कम्पनी को फिर से उड़ान की अनुमति मिल गई है लेकिन उक्त दुर्घटना के क्या कारण थे इसका कोई डाटा सार्वजनिक नहीं किया गया है। गंगोत्री हैलीकाॅप्टर दुर्घटना की भी जांच चल रही है लेकिन जिस तरह से पूर्व में हुई दुर्घटनाओं की जांच का पता नहीं चल पाया है, सम्भव है कि इसकी जांच भी सार्वजनिक हो पाएगी या नहीं यह कहा नहीं जा सकता।

