मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दबाव में हैं। प्रदेश में पांच कैबिनेट पद खाली हैं और कई विधायक लम्बे समय से उम्मीद लगाए बैठे हैं। धामी दिल्ली जाकर हाईकमान से मंत्रियों के नामों पर चर्चा कर चुके हैं, लेकिन फैसले में देरी से नाराजगी बढ़ रही है। खबर गर्म है कि जल्द ही नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। उत्तराखण्ड मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर यह भी गपशप तेज है कि इस बार युवा और महिला चेहरों को खास तवज्जो दी जाएगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दो से तीन महिला विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। यह फैसला सामाजिक समीकरण साधने के साथ-साथ 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए महिला वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विधायकों में असंतोष बढ़ रहा है। कुछ पुराने विधायक जो पहले भी मंत्री पद की दौड़ में थे, अब खुलकर लाॅबिंग कर रहे हैं। पहाड़ बनाम मैदान, गढ़वाल बनाम कुमाऊं अनुसूचित जाति-जनजाति प्रतिनिधित्व और महिला प्रतिनिधित्व जैसे समीकरणों ने मामला उलझा दिया है। अब सबकी नजरें धामी पर टिकी हैं। वे कब और कैसे इस विस्फोटक मंत्रिमंडल विस्तार को साधते हैं?
उत्तराखण्ड में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट

