उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय सतह के नीचे कई गुप्त हलचलें चल रही हैं जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। कुछ अर्सा पहले गाजियाबाद की लोनी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने सरकार पर गम्भीर आरोप लगाए हैं, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति स्पष्ट हुई है। मार्च में विधायक नंद किशोर गुर्जर ने एक प्रेस काॅन्फ्रेंस में राज्य सरकार को ‘अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकार’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गुमराह कर रहे हैं और सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। गुर्जर ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उनकी ‘कलश यात्रा’ को रोकने के दौरान उनके कपड़े फाड़े और उन्हें जान से मारने की साजिश रची गई। भाजपा ने गुर्जर को अनुशासनहीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें उनसे सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए? दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मुख्मंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच लम्बे समय से मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। मौर्य ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि ‘संगठन सरकार से बड़ा होता है’ और पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाना चाहिए। यह बयान मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर परोक्ष रूप से सवाल उठाता है। इसके अलावा मौर्य ने सरकार में पिछड़े वर्गों और दलितों के प्रतिनिधित्व की कमी पर भी चिंता जताई है, जिससे पार्टी के भीतर जातीय संतुलन को लेकर असंतोष बढ़ा है। प्रदेश में भाजपा सरकार के भीतर असंतोष के संकेत स्पष्ट हैं। विधायक नंद किशोर गुर्जर के आरोपों और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर मतभेद हैं। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व फिलहाल मजबूत माना जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में इन अंतर्विरोधों का समाधान करना पार्टी के लिए आवश्यक होगा।

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