दिल्ली विधानसभा चुनाव में करीब तीन दशक बाद भाजपा की जीत बाद दिल्ली नगर निगम में भी आप की सत्ता पर खतरा मंडराने लगा है। बीते दिनों तीन पार्षदों के भाजपा में जाने से आप और भाजपा के पार्षदों की संख्या बराबर हो गई है। आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। एंड्रयूज गंज से पार्षद अनिता बसोया, हरि नगर से निखिल चपराना और आरकेपुरम से धरमवीर सिंह ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस दल-बदल के बाद 250 सदस्यों वाले सदन में आप के 116 पार्षद बच गए हैं तो भाजपा के पार्षदों की संख्या बढ़कर 115 हो गई है। दोनों संख्या बल में अब लगभग बराबरी पर हैं। जल्द ही 12 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं जिसके नतीजे तय करेंगे कि एमसीडी में आप की सत्ता रहेगी या फिर दिल्ली में भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार होगी। कांग्रेस के पास सात पार्षद हैं। ऐसे में कांग्रेस की भूमिका भी अहम हो गई है। यदि उपचुनाव के नतीजे आप के हक में नहीं गए या कुछ और पार्षद भाजपा में गए तो आप के हाथ से एमसीडी निकल सकती है। द्वारका बी वार्ड से भाजपा की पार्षद कमलजीत सहरावत पश्चिमी दिल्ली से सांसद बन चुकी हैं। उनके लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से ही यह पद खाली है। अब विधानसभा चुनाव में भी 17 पार्षद मैदान में उतरे थे। इनमें से भाजपा के 8 और आप के 3 पार्षद विधायक बन चुके हैं। इस हिसाब से कुल 12 सीटें खाली हो गईं हैं। एमसीडी में मौजूदा समीकरण को देखते हुए यह उपचुनाव अब बेहद दिलचस्प हो गया है।
एमसीडी से भी साफ होगी आप!

