बिहार चुनाव को लेकर समन्वय समिति की अध्यक्षता मिलने के बाद तेजस्वी यादव महागठबंधन में राजद के प्रभुत्व को लेकर निश्चिंत हो गए थे। अपने तौर-तरीकों से कांग्रेस ने भी कुछ ऐसा ही संकेत दिया था। लेकिन महिलाओं को लाभ की घोषणा में श्रेय लेने की मची होड़ बता रही कि अंदरखाने सब कुछ सामान्य नहीं। राज्य के विधानसभा चुनाव 2025 में सत्ता मिलने पर हर महिला को मासिक ढाई हजार रुपए देने की घोषणा तेजस्वी पहले ही कर चुके थे। इस बीच कांग्रेस ने ऐसी ही योजना (माई-बहिन मान योजना) के लिए नामांकन कराने तक की घोषणा कर दी है। कांग्रेस की इस घोषणा ने राजद की धड़कन बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल है कि महागठबंधन को तो लाभ तेजस्वी के वादे से भी मिल जाता फिर कांग्रेस आतुर क्यों हुई? राजनीतिक पंडितों का कहना है कि महागठबंधन से जुड़े समस्त निर्णय अब तक राजद ही लेता रहा है। पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव के परिणाम के साथ ही यह स्पष्ट हो गया था कि अब आगे की राह निर्विघ्न नहीं है। तब सीटों से लेकर प्रत्याशियों के चयन तक में राजद ने मनमानी की थी। कांग्रेस वह घाव आज भी सहला रही है। कांग्रेस अब इस विवशता से उबरना चाह रही है क्योंकि पिछले चुनावी वर्षों में अपने हितों से समझौते की त्रासदी वह झेलती रही है। विधानसभा चुनाव में उसे पसंद की कम-से-कम 70 सीटें चाहिए। राजद 50 के भीतर रखना चाह रहा, लिहाजा महागठबंधन के भीतर ही राजनीति होने लगी है। खास बात यह कि राजद ने भी यह घोषणा एकतरफा ही की थी। अब कांग्रेस ने हिसाब बराबर किया है। इस बहाने के लिए कांग्रेस को कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में अपनी सरकारों द्वारा महिलाओं को दिया जा रहा लाभ का आसरा भी मिल गया। झारखंड में हेमंत सोरेन की सत्ता में वापसी का मूल कारण ही ‘मईया सम्मान’ योजना रही। कांग्रेस उस सरकार में राजद से बड़ी हिस्सेदार है।
कांग्रेस ने बढ़ाई राजद की धड़कन

