राष्ट्रीय टीम में ईशान किशन की वापसी सिर्फ क्रिकेट मैदान पर लौटने की कहानी नहीं है बल्कि यह आत्मविश्वास, धैर्य और  सीखने की प्रक्रिया की कहानी है। ईशान ने यह साबित कर दिया है कि आलोचनाएं किसी खिलाड़ी को तोड़ भी सकती हैं और बना भी सकती हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि खिलाड़ी उन्हें कैसे लेता है। ईशान पहले से ज्यादा परिपक्व, संतुलित और जिम्मेदार क्रिकेटर के रूप में सामने आए हैं। उनकी दो साल बाद वापसी भारतीय क्रिकेट के लिए शुभ संकेत है और आने वाले समय में उनसे कई यादगार पारियों की उम्मीद की जा सकती है


भारत ने साल 2025 का अंत साउथ अफ्रीका के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 सीरीज जीत के साथ किया। अब टीम का अगला टारगेट साल 2026 के सबसे पहले और सबसे बड़े इवेंट  टी-20 विश्वकप 2026 को फतह करना है जो 7 फरवरी से 8 मार्च के बीच भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा जिसके लिए सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में 15 सदस्यीय भारतीय टीम घोषणा भी कर दी गई है। खास बात यह है कि करीब दो साल बाद विस्फोटक विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन टीम इंडिया में वापसी के साथ ही ईशान का इंतजार भी खत्म खत्म हो गया है। टीम में वापसी को लेकर  एक ओर जहां ईशान ने खुलकर अपनी भावनाएं जाहिर की हैं, वहीं दूसरी तरफ खेल विश्लेषकों और पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का कहना है कि भारतीय क्रिकेट में जब भी युवा, आक्रामक और निडर बल्लेबाजों की बात होती है तो ईशान किशन का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। झारखंड के इस बाएं हाथ के विकेटकीपर बल्लेबाज ने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई। लेकिन जितनी तेजी से उनका करियर ऊपर गया, उतनी ही तेजी से वे आलोचनाओं, चयन से बाहर होने और मानसिक संघर्षों के दौर से भी गुजरे। विश्लेषक कहते हैं कि ईशान किशन की वापसी सिर्फ एक खिलाड़ी की टीम में वापसी नहीं है बल्कि यह आत्मसंघर्ष, सीख और परिपक्वता की मिसाल है।

पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म एक्स पर लिखा कि टीम काफी अच्छी दिख रही है। ईशान किशन और अक्षर पटेल को टीम में देखकर खुशी हो रही है। अक्षर पटेल ने 2024 विश्वकप की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। जाने-माने कमेंटेटर हर्षा भोगले ने टीम सेलेक्शन को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म एक्स पर लिखा, ‘‘चुनी गई टीम मुझे वाकई पसंद आई है। गिल को बाहर रखना एक बड़ा फैसला है और इससे साफ संकेत मिलता है कि ‘फायर एंड आइस’ की जगह अब ‘फायर एंड फायर’ ने ले ली है।’’

ईशान किशन जो विकल्प देते हैं, उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल था, खासकर उनके मौजूदा फाॅर्म को देखते हुए। यह एक साहसिक फैसले का स्वाभाविक नतीजा है। कमेंटेटर और खेल विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने लिखा, ‘‘विश्वकप आने से पहले टीम में काफी चेंज हुआ है। जितेश शर्मा को ये नहीं पता होगा कि उन्होंने क्या गलत किया। रिंकू जहां थे वहीं लौट आए हैं। ईशान को टीम में देखकर खुशी हुई। दोनों विकेटकीपर बैटिंग स्लाॅट के मुफीद हैं।’’ दूसरी तरफ ईशान किशन की दो साल बाद भारतीय टीम में वापसी को लेकर उनके पिता ने कहा कि पिछले दो साल का समय उनके लिए बेहद कठिन था। टीम में शामिल नहीं होने के कारण थोड़ी उदासी रही लेकिन उन्होंने हमेशा उम्मीद बनाई रखी। हम सोच रहे थे कि अब परफॉर्मेंस अच्छा हुआ तो ही वापसी का मौका मिलेगा। हालिया झारखंड टूर्नामेंट में उनके शानदार खेल ने हमें विश्वास दिलाया कि ईशान जरूर टीम इंडिया में लौटेंगे और अब उनकी टीम में वापसी से परिवार बहुत खुश है। पूरे राज्य ने इंतजार किया कि झारखंड का लाल भारत के लिए खेले जो अब सच हो गया है। हम चाहते हैं कि वह हमेशा रन बनाते रहें, टीम को जीत दिलाएं और देश के लिए गौरव का पल बनाएं, टीम में रहकर देश को ट्रॉफी जिताए।

गौरतलब है कि भारतीय टीम टी-20 विश्वकप की डिफेंडिंग चैम्पियन है। 29 जून 2024 को बारबडोस में टीम इंडिया ने फाइनल में साउथ अफ्रीका को हराकर खिताब अपने नाम किया था। अब टी-20 विश्वकप 2026 के लिए सचिव देवजीत सैकिया, चीफ सिलेक्टर अजित अगरकर और कप्तान सूर्यकुमार यादव की मौजूदगी में भारतीय टीम का ऐलान कर दिया गया है। टीम में अक्षर पटेल को उपकप्तान बनाया गया है, जबकि शुभमन गिल को टीम से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा विस्फोटक बल्लेबाज और विकेटकीपर ईशान किशन की दो साल बाद टीम में वापसी भी हो गई है। विकेटकीपर संजू सैमसन और रिंकू सिंह को भी टीम में मौका मिला है।

चीफ सिलेक्टर अजित अगरकर ने कहा कि गिल इस समय रन नहीं बना पा रहे हैं। हम जानते हैं कि वह कितने अच्छे खिलाड़ी हैं, उन्हें पिछले विश्वकप में भी मौका नहीं मिला था यह दुर्भाग्यपूर्ण था। फाॅर्म में उतार- चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन यह ज्यादातर इस बात पर निर्भर करता है कि आप उन्हें किस काॅम्बिनेशन में खिलाना चाहते हैं। किसी न किसी को तो बाहर बैठना ही पड़ता है। इसका मतलब यह नहीं है कि गिल अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं, वहीं अजित अगरकर ने ईशान किशन के सिलेक्शन पर कहा कि आपकी राय मेरी राय से अलग हो सकती है। कभी-कभी जब आप खिलाड़ियों को चुनते हैं तो यह मुश्किल होता है। हम अब भी सोचते हैं कि वे एक क्वालिटी प्लेयर हैं।

भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने गिल का चयन न होने पर कहा कि गिल को खराब फॉर्म की वजह से ड्रॉप नहीं किया गया गया है। ऐसा टीम कॉम्बिनेशन की वजह से हुआ है।  हम टॉप ऑर्डर में एक विकेटकीपर चाहते थे। उनकी काबिलियत पर कोई शक की बात नहीं है वे एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं। टीम को रिंकू सिंह और वाॅशिंगटन सुंदर की भी जरूरत थी। टीम से 6 खिलाड़ी पहली बार टी-20 विश्वकप खेलेंगे जबकि 9 खिलाड़ी ऐसे हैं जो टी-20 विश्वकप खेल चुके हैं। यह टीम विश्वकप से पहले 21 जनवरी से न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 टी-20 मैचों की सीरीज भी खेलेगी।

ईशान के क्रिकेट करियर की बात करें तो उनका जन्म 18 जुलाई 1998 को बिहार अब झारखंड में हुआ। बेहद कम उम्र से ही उन्होंने क्रिकेट को अपना जीवन बना लिया। अंडर-19 क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। 2016 में भारत की अंडर-19 टीम के कप्तान के रूप में उन्होंने नेतृत्व क्षमता भी दिखाई। यही नहीं आईपीएल ने ईशान के करियर को नई उड़ान दी। मुम्बई इंडियंस जैसी सफल फ्रेंचाइजी के साथ खेलते हुए उन्होंने खुद को एक विस्फोटक ओपनर और भरोसेमंद विकेटकीपर के रूप में स्थापित किया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी, बड़े शाॅट्स खेलने की क्षमता और आत्मविश्वास ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और अब ईशान दो साल बाद टी-20 टीम में वापसी कर रहे हैं। उन्होंने आखिरी मैच गुवाहाटी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नवम्बर 2023 में खेला था और उनके हालिया फाॅर्म की बार करें तो मुश्ताक अली ट्राॅफी में 2 शतक लगाकर उन्होंने सबसे ज्यादा 517 रन बनाए। जिसके परिणामस्वरूप उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका मिला है।
 
क्रिकेट में धमाकेदार एंट्री, गिरावट और विवाद

ईशान किशन ने भारतीय टीम के लिए जब पदार्पण किया तो उन्होंने तुरंत अपनी छाप छोड़ी। टी-20 क्रिकेट में उनका स्ट्राइक रेट और निडर अंदाज टीम इंडिया को तेज शुरुआत दिलाने में मददगार साबित हुआ। इसके बाद वनडे क्रिकेट में उन्होंने दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि उन्हें भारतीय क्रिकेट के चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में शामिल करती है। इस दौर में ऐसा लगने लगा था कि ईशान किशन भारतीय टीम के स्थायी सदस्य बन जाएंगे। युवा होने के बावजूद उनमें आत्मविश्वास था और वे बड़े मंच पर खेलने से नहीं घबराते थे। लेकिन क्रिकेट में सफलता के साथ-साथ चुनौतियां भी आती हैं। लगातार मैच खेलने, अपेक्षाओं के दबाव और मानसिक थकान ने ईशान के प्रदर्शन को प्रभावित करना शुरू कर दिया। कुछ पारियों में उनकी जल्दबाजी और गैर जिम्मेदार शॉट चयन की आलोचना होने लगी। इसके अलावा, चयन से बाहर होने, घरेलू क्रिकेट में अनुपस्थिति और अनुशासन को लेकर भी सवाल उठे। मीडिया और क्रिकेट विशेषज्ञों ने उनकी प्रतिबद्धता पर चर्चा शुरू कर दी। यह दौर ईशान किशन के करियर का सबसे कठिन समय था।
 
मानसिक संघर्ष और आत्ममंथन

ईशान किशन ने बाद में स्वीकार किया कि यह समय उनके लिए मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। एक युवा खिलाड़ी के लिए अचानक आलोचनाओं के घेरे में आ जाना आसान नहीं होता। लेकिन यहीं से उनके आत्ममंथन की शुरुआत हुई। उन्होंने खुद पर काम किया, फिटनेस पर ध्यान दिया और अपने खेल की कमजोरियों को समझा। उन्होंने यह सीखा कि सिर्फ आक्रामक खेल ही नहीं बल्कि परिस्थितियों के अनुसार संयम भी जरूरी है। यह परिपक्वता उनकी वापसी की नींव बनी।
 
घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में वापसी

ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल को वापसी का माध्यम बनाया। उन्होंने रन बनाए, जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी की और यह दिखाया कि वे केवल एक आक्रामक खिलाड़ी ही नहीं बल्कि मैच को सम्भालने वाले बल्लेबाज भी बन चुके हैं। आईपीएल में उनके कुछ अहम प्रदर्शन ने फिर से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। विकेट के पीछे उनकी चुस्ती और बल्लेबाजी में संतुलन साफ नजर आने लगा।

ईशान की भारतीय टीम में वापसी उनके लिए भावनात्मक और पेशेवर दोनों रूप से अहम थी। यह वापसी इस बात का संकेत है कि भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा के साथ-साथ सीखने और सुधारने की क्षमता को भी महत्व दिया जाता है। उनकी वापसी बताती है कि वे पहले से ज्यादा जिम्मेदार खिलाड़ी बन चुके हैं। वे अब सिर्फ बड़े शाॅट्स पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि टीम की जरूरत के अनुसार खेलते हैं।
 
युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा

ईशान किशन की कहानी उन सभी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो असफलता से डरते हैं। उनका सफर बताता है कि करियर में गिरावट आना अंत नहीं होता। अगर खिलाड़ी खुद पर भरोसा रखे, मेहनत करे और सीखने के लिए तैयार रहे तो वापसी सम्भव है। आज के दौर में जहां सोशल मीडिया और आलोचना का दबाव बहुत अधिक है, ईशान किशन का संयम और वापसी मानसिक मजबूती का उदाहरण है। ईशान अभी युवा हैं और उनके पास लम्बा करियर है। अगर वे इसी संतुलन, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ खेलते रहे तो वे भारतीय क्रिकेट के लिए लम्बे समय तक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकते हैं। टी-20, वनडे और टेस्ट तीनों फॉर्मेट में उनके लिए अवसर मौजूद हैं। विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में उनकी बहुमुखी प्रतिभा टीम इंडिया को संतुलन देती है।
 
एक ही ग्रुप में भारत-पाकिस्तान

टी-20 विश्वकप में  टीम इंडिया अपने अभियान की शुरुआत यूएसए के खिलाफ करेगी। पाकिस्तान को भी भारत के ही ग्रुप में रखा गया है। टूर्नामेंट के इतिहास में ये पहला मौका है जब 20 टीम हिस्सा ले रही हैं। चार ग्रुप में टीमों को बांटा गया है। भारत के साथ ग्रुप ए में पाकिस्तान, यूएस, आयरलैंड और कनाडा को  साथ रखा गया है। भारत और पाकिस्तान की टीमें 15 फरवरी को श्रीलंका के कोलंबो में टकराएंगी।
 
टी-20 विश्वकप के लिए भारतीय टीम

सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अक्षर पटेल (उपकप्तान), संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, इशान किशन, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, रिंकू सिंह।

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