वाॅशिंगटन डीसी में 26 नवम्बर 2025 को व्हाइट हाउस से कुछ ही दूरी पर दो अमेरिकी नेशनल गार्ड जवानों पर हुए हमले ने अफगान शरणार्थियों की सुरक्षा जांच, ऑपरेशन ‘अलाइज वेलकम’, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कठोर आव्रजन नीति को अमेरिकी राजनीति के केंद्र में ला दिया है। संदिग्ध हमलावरों के अफगान नागरिक होने की पुष्टि बाद 2021 से आए 77,000 अफगानों की दोबारा जांच की घोषणा ने माहौल को और ध्रुवीकृत कर दिया है जबकि सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को गम्भीर राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे के रूप में लेकर जांच में जुटी हैं
थैंक्सगिविंग से एक दिन पहले, 26 नवम्बर 2025 की दोपहर, वाॅशिंगटन डीसी के केंद्र में अचानक गोलियों की आवाज सुनाई दी। यह आवाज व्हाइट हाउस से कुछ ही दूर गूंजी और पल भर में राजधानी का माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस व्यस्त और उच्च सुरक्षा वाले इलाके में दो नेशनल गार्ड जवान, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर डीसी में बढ़ते अपराध से निपटने के लिए तैनात किए गए थे, अचानक हुए हमले का शिकार हो गए और गम्भीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। गौरतलब है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में ‘थैंक्सगिविंग’ एक राष्ट्रीय अवकाश है जो हर वर्ष नवम्बर के चौथे गुरुवार को मनाया जाता है और परिवारों के साथ मिलकर कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन माना जाता है। हमले के तुरंत बाद एफबीआई निदेशक काश पटेल और डीसी मेयर म्यूरियल बाॅजर ने पुष्टि की कि दोनों सैनिकों की हालत अभी भी क्रिटिकल है और उन्हें आपात स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना के कुछ ही घंटों बाद यह स्पष्ट हो गया कि संदिग्ध हमलावर को जवाबी कार्रवाई में घायल कर हिरासत में लिया गया है। गृह विभाग के अनुसार हमलावर की पहचान रहमानुल्लाह लकनवाल, एक 29 वर्षीय अफगान नागरिक के रूप में हुई है। यह भी सामने आया कि वह 2021 में बाइडन प्रशासन के ऑपरेशन ‘अलाइज वेलकम’ (Allies Welcome) के तहत अमेरिका लाया गया था। वही कार्यक्रम जो तालिबान के नियंत्रण के बाद अफगान सहयोगियों और जोखिम में पड़े अफगानों के लिए तैयार किया गया था।
इस खुलासे ने राजनीतिक माहौल को खासा गर्म कर दिया है। शाम होते-होते राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने वीडियो संदेश में इस घटना को नफरत, बर्बरता और आतंक का कार्य’ बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला दिखाता है कि ‘बाइडन प्रशासन की नीतियों ने अनगिनत अवांछनीय लोगों को देश में आने दिया’ और अब उनकी सरकार 2021 में आए सभी 77,000 अफगानों की दोबारा जांच करेगी। ट्रम्प ने दावा किया कि ‘20 मिलियन अनजान लोगों’ को पिछले प्रशासन ने देश में आने दिया, हालांकि यह संख्या विवादित है, पर राजनीतिक बहस में इसकी तीव्रता अब बढ़ चुकी थी।
अमेरिकी गृह सचिव क्रिस्टी नोएम ने भी हमलावर को ‘अफगान नागरिक’ बताते हुए कहा कि ‘‘ ऑपरेशन ‘अलाइज वेलकम’ ( Allies Welcome ) ने ‘हजारों अवांछनीय लोगों को देश में प्रवेश दे दिया।’’ यह बयान तेजी से वायरल हुआ, जबकि कई विशेषज्ञ इसे ‘अधूरी और भ्रामक व्याख्या’ बता रहे हैं।
इसके विपरीत, 2021 में सार्वजनिक किए गए गृह विभाग के दस्तावेज स्पष्ट रूप से बताते हैं कि अफगानों की जांच बहु-स्तरीय, कठोर और तकनीकी रूप से मजबूत थी। लगभग 400 अमेरिकी अधिकारी जिनमें एफबीआई, गृह विभाग, रक्षा विभाग, सीक्रेट सर्विस और नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर जर्मनी, कतर, स्पेन, बहरीन, इटली और संयुक्त अरब अमीरात के प्रोसेसिंग केंद्रों में तैनात थे। हर अफगान नागरिक के फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक विवरण अमेरिकी इंटेलिजेंस डेटाबेस से मिलाए गए, इंटरव्यू की बहुस्तरीय प्रक्रिया से गुजारा गया और कई लोगों को सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं भी दी गई थी। यह पूरी प्रक्रिया उस समय वैश्विक मानवीय संकट में अमेरिका की भूमिका पर आधारित थी, न कि बिना जांच किए लोगों को आने देने की इच्छा पर।
लेकिन फैक्ट और राजनीति हमेशा एक दिशा में नहीं चलते। ट्रम्प के बयान के बाद रिपब्लिकन नेताओं ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की ‘चेतावनी’ बताया और कहा है कि 26 नवम्बर का हमला यह प्रमाण है कि अफगान शरणार्थियों को बड़ी संख्या में स्वीकार करना गलती था, वहीं डेमोक्रेट नेता यह जोर देकर कह रहे हैं कि एक व्यक्ति के अपराध को हजारों सहयोगी अफगानों की पहचान से जोड़ना नैतिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से गलत है। कई डेमोक्रेट सांसदों ने यह भी याद दिलाया कि संदिग्ध रहमानुल्लाह लकनवाल ने 2024 में शरण के लिए आवेदन किया था और 2025 में ट्रम्प प्रशासन के ही कार्यकाल में उसे शरण प्रदान की गई। यह तथ्य राजनीतिक आरोपों में अक्सर गायब कर दिया गया।
26 नवम्बर की घटना के बाद एफबीआई निदेशक काश पटेल ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मामला बताते हुए कहा कि सभी एजेंसियां मिलकर इस बात की जांच कर रही हैं कि हमलावर की प्रेरणा क्या थी? क्या वह किसी नेटवर्क से जुड़ा था? क्या यह राजनीतिक हिंसा थी? मानसिक अस्थिरता का मामला था? या व्यक्तिगत कारणों से प्रेरित हमला। तकनीकी विश्लेषण, इलेक्ट्रॉनिक डेटा, यात्रा रिकॉर्ड, फोन लाॅग और सम्पर्कों की जांच अलग-अलग टीमों द्वारा की जा रही है।
इसी बीच वाॅशिंगटन डीसी में एक और कानूनी संघर्ष चल रहा है। हाल ही में जारी एक न्यायिक आदेश में नेशनल गार्ड की डीसी में तैनाती को समाप्त करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन 26 नवम्बर की घटना के तुरंत बाद व्हाइट हाउस ने अदालत में आपात मोशन दायर किया और कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में गार्ड की वापसी सुरक्षा के लिए खतरा होगी। यह मोशन अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन चुका है।
ट्रम्प प्रशासन पहले ही 12 देशों के नागरिकों जिनमें अफगानिस्तान, ईरान, यमन, सोमालिया, सूडान, लीबिया, म्यांमार और कई अफ्रीकी देश शामिल है पर पूर्ण यात्रा प्रतिबंध लगा चुका है। इसके अलावा 7 देशों पर आंशिक प्रतिबंध लागू है। 2026 वित्तीय वर्ष के लिए शरणार्थी कोटा केवल 7,500 रखा गया है और राष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इसमें ‘श्वेत दक्षिण अफ्रीकियों’ को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही म्यांमार के नागरिकों के लिए ‘टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस’ भी हाल ही में समाप्त किया जा चुका है जबकि देश 2021 से गृहयुद्ध झेल रहा है।
इन नीतिगत कठोरताओं के बीच 26 नवम्बर की घटना ने ट्रम्प प्रशासन की सुरक्षा-केंद्रित प्रवासन नीति के पक्ष में राजनीतिक हवा और तेज कर दी है। साथ ही एक बड़े नैतिक सवाल को भी जन्म दिया है कि क्या एक व्यक्तिगत हिंसक घटना की आड़ में उन हजारों अफगान परिवारों को संदेह के घेरे में खड़ा किया जाना चाहिए जिन्होंने अमेरिकी सेना के साथ काम किया, अपनी जान जोखिम में डाली और अमेरिका को अपना सुरक्षित भविष्य मानकर यहां आए?
अमेरिकी समाज अब इस द्वंद्व के बीच खड़ा है। एक ओर सुरक्षा का आग्रह है, दूसरी तरफ मानवीय दायित्व की पुकार। 26 नवम्बर 2025 की यह गोलीबारी अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि प्रवासन नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक ध्रुवीकरण और अमेरिकी पहचान को लेकर नई बहस का केंद्र बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच, अदालतों की सुनवाई, कांग्रेस की बहसें और मीडिया विमर्श यह तय करेंगे कि क्या अमेरिका इस घटना को संतुलित दृष्टि से देख सकेगा या यह घटना आने वाले वर्षों में अमेरिकी प्रवासन राजनीति की दिशा बदल देगी।

