पर्यटन नगरी नैनीताल पेयल की समस्या से जूझता पूरा नैनीताल विधानसभा क्षेत्र बेतालघाट की बदहाल सड़कें चैतरफा खनन की मार (बेतालघाट) अस्थाई मरम्मत से सड़कों पर पहाड़ की मिट्टड्ढी आने का खतरा
नैनीताल विधानसभा उत्तराखण्ड की उन सीटों में रही है जिनका राजनीतिक चरित्र समय के साथ बदलता रहा है लेकिन यह सीट हमेशा राज्य की राजनीति में महत्व रखती आई है। इसकी वजह केवल पर्यटन या प्रशासनिक भूमिका नहीं बल्कि यहां से चुने गए प्रतिनिधियों का राज्य की सत्ता और नीति-निर्माण में प्रभाव भी रहा है। लम्बे समय तक यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी। नारायण दत्त तिवारी, इंदिरा हृदयेश जैसे दिग्गज नेताओं का राजनीतिक प्रभाव भले सीधे इस सीट से न रहा हो, लेकिन कुमाऊं की राजनीति पर उनका असर नैनीताल विधानसभा तक साफ दिखाई देता था। उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद भी शुरुआती वर्षों में यहां कांग्रेस की पकड़ मजबूत रही। सरिता आर्या पहली बार 2012 में कांग्रेस के टिकट पर नैनीताल से विधायक चुनी गईं। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले टिकट को लेकर कांग्रेस से मतभेद के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी जाॅइन की और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। वर्तमान में सरिता आर्या भाजपा की विधायक हैं और उनका कार्यकाल व्यक्तिगत सुलभता बनाम प्रशासनिक प्रभावशीलता की बहस के केंद्र में रहा है। समर्थक उन्हें मिलनसार सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय और जनता से सीधे संवाद करने वाली नेता मानते हैं जबकि आलोचक कहते हैं कि नैनीताल जैसी जटिल विधानसभा, जहां शहर, पर्यावरण और ग्रामीण समस्याएं एक साथ जुड़ी हैं, वहां मजबूत नीतिगत हस्तक्षेप और ठोस निर्णयों की जरूरत होती है


नैनीताल विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान विधायक सरिता आर्या हैं जो भारतीय जनता पार्टी से निर्वाचित हुई हैं। वे 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतकर सदन पहुंचीं जबकि इससे पहले वे लम्बे समय तक कांग्रेस की राजनीति से जुड़ी रहीं और राज्य महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस से मतभेद के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा और नैनीताल जैसी महत्वपूर्ण तथा राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीट से चुनाव जीतने में सफल रहीं। सरिता आर्या की पहचान एक सौम्य, मिलनसार और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में बनी है। क्षेत्र में यह आम धारणा है कि वे व्यक्तिगत सम्बंधों और सामाजिक उपस्थिति के स्तर पर सुलभ हैं, लोगों के सुख-दुख में शामिल होती हैं और संवाद से बचती नहीं हैं। हालांकि उनके कार्यकाल को लेकर यह बहस भी लगातार चलती रही है कि क्या उनका यह व्यक्तित्व प्रशासनिक दबाव, नीतिगत हस्तक्षेप और जटिल स्थानीय समस्याओं जैसे सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेतालघाट जैसे उपेक्षित क्षेत्रों के समाधान में उतनी ही मजबूती से परिलक्षित हो पाया है या नहीं। नैनीताल जैसी ऐतिहासिक, प्रशासनिक और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील विधानसभा में उनका कार्यकाल समर्थन और आलोचना, दोनों के बीच लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

गौरतलब है कि नैनीताल उत्तराखण्ड का केवल एक पर्यटन नगर नहीं है बल्कि इसका ऐतिहासिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक महत्व भी रहा है। अंग्रेजी शासन के दौर में नैनीताल कुमाऊं मंडल की प्रशासनिक राजधानी बना और लम्बे समय तक इसे संयुक्त प्रांत (यूनाइटेड प्रोविंसेज) के अधिकारियों की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित किया गया। 19वीं सदी में अंग्रेजों द्वारा बसाया गया यह पहाड़ी नगर योजनाबद्ध शहरीकरण, झील-केंद्रित बसावट और प्रशासनिक ढांचे के कारण विशिष्ट पहचान रखता है। आजादी के बाद भी नैनीताल जिला मुख्यालय और हाईकोर्ट की सीट के रूप में महत्वपूर्ण बना रहा। यही ऐतिहासिक विरासत और प्रशासनिक भूमिका नैनीताल विधानसभा को राज्य की अन्य विधानसभा क्षेत्रों से अलग बनाती है, लेकिन इसी के साथ इसकी समस्याएं भी अधिक जटिल और बहुस्तरीय हो जाती हैं।

नैनीताल विधानसभा क्षेत्र की सबसे गम्भीर और लगातार बनी रहने वाली समस्या बुनियादी सुविधाओं की असमान उपलब्धता है। एक तरफ नैनीताल शहर है, जहां पर्यटन के कारण सरकार और प्रशासन की नजर रहती है, दूसरी ओर बेतालघाट, ज्योलीकोट, नारायण नगर, बजून, खमारी, ओखल कांडा से लगे इलाके और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र हैं जहां विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। यही असंतुलन इस विधानसभा की मूल समस्या है, जहां शहरी नैनीताल की चमक ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को ढक देती है।

पेयजल संकट पूरे विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा मुद्दा है। नैनीताल शहर में यह संकट नैनी झील और उससे जुड़े स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण गहराता जा रहा है जबकि बेतालघाट और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गम्भीर है। कई गांव आज भी प्राकृतिक नौलों और मौसमी स्रोतों पर निर्भर हैं, जिनका जलस्तर लगातार गिर रहा है। गर्मियों में महिलाओं को कई किलोमीटर दूर से पानी ढोना पड़ता है। ‘जल जीवन मिशन’ के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है लेकिन कई जगह या तो पानी नहीं आ रहा या आपूर्ति बेहद अनियमित है। यह समस्या केवल सुविधा की नहीं बल्कि ग्रामीण जीवन की गरिमा से जुड़ा सवाल बन चुकी है।

सड़क और कनेक्टिविटी नैनीताल विधानसभा की दूसरी बड़ी चुनौती है। नैनीताल शहर तक पहुंच तो अपेक्षाकृत बेहतर है लेकिन बेतालघाट, बजून, खमारी और अन्य पर्वतीय गांवों को जोड़ने वाली सड़कों की हालत खराब बनी हुई है। कई मार्ग संकरे हैं, जगह-जगह टूटे हुए हैं और बरसात में अक्सर बंद हो जाते हैं। भूस्खलन के कारण सम्पर्क कटना आम बात है जिससे न केवल आम जनजीवन प्रभावित होता है बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी बाधित होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क केवल आवाजाही का साधन नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी जीवनरेखा है।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंता का विषय है। नैनीताल शहर में जिला अस्पताल और कुछ निजी सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन बेतालघाट और आस-पास के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। डाॅक्टरों की अनुपस्थिति, दवाओं की कमी और कमजोर रेफरल व्यवस्था के कारण मरीजों को हल्द्वानी या नैनीताल शहर की ओर जाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आपात मामलों में यह स्थिति कई बार जानलेवा साबित होती है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी विधानसभा क्षेत्र स्पष्ट रूप से दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखाई देता है। शहर के प्रतिष्ठित स्कूल-काॅलेजों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन और संसाधनों का अभाव है। बेतालघाट और आसपास के गांवों से बच्चों का शहर की ओर पलायन बढ़ रहा है जिससे गांवों के स्कूल धीरे-धीरे खाली होते जा रहे हैं। यह केवल शिक्षा व्यवस्था का संकट नहीं बल्कि सामाजिक ढांचे के कमजोर पड़ने का संकेत भी है।

पर्यटन का दबाव नैनीताल शहर के लिए जहां समस्या बन चुका है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह अवसर होते हुए भी उपेक्षित है। बेतालघाट, ज्योलीकोट और आस-पास के इलाकों में नदी, जंगल और प्रकृति आधारित पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं लेकिन बुनियादी ढांचे और सरकारी पहल के अभाव में स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। नतीजा यह है कि पर्यटन से होने वाली आय कुछ सीमित क्षेत्रों तक सिमट जाती है जबकि पूरे विधानसभा क्षेत्र को उसके दुष्परिणाम झेलने पड़ते हैं।

कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण का प्रश्न पूरे नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में गम्भीर होता जा रहा है। शहर में उत्पन्न होने वाला कचरा आस-पास के क्षेत्रों पर दबाव डालता है जबकि ग्रामीण इलाकों में कचरा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। नदियों, नालों और जंगलों में बढ़ता प्लास्टिक आने वाले समय में बड़े पर्यावरणीय संकट की चेतावनी देता है।

रोजगार और पलायन नैनीताल विधानसभा की सबसे गहरी सामाजिक समस्या है। पर्यटन आधारित रोजगार मौसमी है और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि अब पहले जैसी आजीविका नहीं दे पा रही। बेतालघाट और आसपास के गांवों से युवा बड़ी संख्या में हल्द्वानी, दिल्ली और अन्य शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। इससे गांवों में केवल बुजुर्ग और महिलाएं रह जा रही हैं जो सामाजिक और आर्थिक असंतुलन को और गहरा करता है।

कुल मिलाकर नैनीताल विधानसभा की समस्याएं केवल एक शहर तक सीमित नहीं हैं। बेतालघाट जैसे क्षेत्रों की उपेक्षा ने इस विधानसभा को भीतर से असमान बना दिया है। यहां विकास की सबसे बड़ी जरूरत संतुलित दृष्टिकोण की है जिसमें नैनीताल शहर की ऐतिहासिक पहचान और ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी आवश्यकताओं, दोनों को समान महत्व दिया जाए। जब तक नीति और संसाधनों का यह संतुलन नहीं बनेगा, तब तक नैनीताल विधानसभा की समस्याएं केवल रूप बदलती रहेंगी, समाप्त नहीं होंगी। नैनीताल विधानसभा क्षेत्र की इन्हीं जटिल समस्याओं को लेकर ‘दि संडे पोस्ट’ ने शहर, पहाड़ और बेतालघाट क्षेत्र में लोगों से बातचीत की। बातचीत के दौरान अलग-अलग सामाजिक, राजनीतिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि के लोगों ने एक सुर में माना कि समस्याएं नई नहीं हैं लेकिन अब वे असहनीय होती जा रही हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और नैनीताल समाचार के सम्पादक राजीव लोचन शाह का कहना है कि ‘‘नैनीताल शहर आज जिस स्थिति में है, वह वर्षों की अनियोजित नीतियों और इच्छाशक्ति की कमी का नतीजा है। उनके अनुसार शहर का पूरा ढांचा बढ़ते पर्यटन का बोझ उठाने की स्थिति में नहीं बचा है। पार्किंग, ट्रैफिक और सिंगल लेन सड़कों के कारण आम लोगों के साथ-साथ आपात सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। मानसून के दौरान सड़कों का टूटना और धंसना अब सामान्य बात हो गई है।’’

राजीव लोचन शाह ने नैनी झील की स्थिति को नैनीताल के अस्तित्व से जुड़ा सबसे गम्भीर सवाल बताया। उनका कहना है कि 2007 के बाद से झील का प्राकृतिक जल-जीवन लगभग खत्म हो चुका है और आज झील कृत्रिम आॅक्सीजन सिस्टम के सहारे चल रही है। उनके शब्दों में, ‘ताल वेंटिलेटर पर है।’ यदि यह व्यवस्था भी बाधित हुई तो झील से दुर्गंध उठना और शहर का रहना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने इस स्थिति के लिए अनियंत्रित निर्माण, सीवर की निकासी और प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।

विधायक सरिता आर्या को लेकर राजीव लोचन शाह कहते हैं कि व्यक्तिगत रूप से वे सौम्य और मिलनसार हैं लेकिन जनप्रतिनिधि के तौर पर जनता की समस्याओं पर ठोस हस्तक्षेप दिखाई नहीं देता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब प्रशासनिक फैसलों से शहर को नुकसान की आशंका होती है, तब जनप्रतिनिधि का दायित्व होता है कि वह जनता के पक्ष में मजबूती से खड़ा हो लेकिन ऐसा बहुत कम देखने को मिला। उनके अनुसार समस्याओं को ‘टाल देना’ समाधान नहीं है।

शाह ने विकास के नाम पर सौंदर्यीकरण की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि पेड़ काटकर म्यूरल लगाना विकास नहीं है। असली विकास पानी, यातायात, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ा होता है लेकिन इन मुद्दों पर वर्षों से ठोस काम नहीं हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नैनीताल शहर में जो सुविधाएं बची हैं, वह हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के कारण हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी और कभी प्रतिष्ठित रहे निजी संस्थानों में छात्रों की संख्या घटने को उन्होंने सामाजिक चेतावनी बताया।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप दुमका का कहना है कि ‘‘नैनीताल विधानसभा पिछले 30-35 वर्षों से लगभग एक ही ढर्रे पर चल रही है। 1947 के बाद से बुनियादी ढांचे में कोई गुणात्मक बदलाव नहीं हुआ। पर्यटन बढ़ा लेकिन उसका लाभ न स्थानीय लोगों को मिला और न ही व्यापार को। पार्किंग की कमी के कारण पर्यटक भी परेशान होकर लौट जाते हैं जिसका खामियाजा होटल और दुकानदार भुगतते हैं।’’

प्रदीप दुमका ने आरोप लगाया कि विधायक के चुनावी घोषणापत्र में शामिल शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और गांवों के विकास से जुड़े वादे जमीन पर दिखाई नहीं देते। उन्होंने कहा कि भू-विकास प्राधिकरण, सीवर व्यवस्था और सड़क निर्माण केवल कागजी विकास बनकर रह गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति के बावजूद निर्माण और निकासी व्यवस्था पर कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई।

नैनीताल की स्थानीय व्यापारी शैला नेगी ने शहर के व्यापारिक हालात पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि ‘‘नैनीताल का व्यापार पूरी तरह मौसमी है लेकिन टैक्स, किराया और प्रशासनिक सख्ती पूरे साल की है। स्थानीय व्यापारियों को भारी किराया, बिजली बिल और टैक्स देने पड़ते हैं जबकि बाहरी फड़-ठेला व्यवसायियों को छूट दी जाती है। इससे स्थानीय दुकानदारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।’’ शैला नेगी ने सत्यापन अभियान, अस्पतालों में डाॅक्टरों की कमी, शिक्षा के गिरते स्तर और युवाओं में बढ़ते नशे पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि निर्णय बिना स्थानीय लोगों से चर्चा के थोपे जाते हैं, जिससे असंतोष बढ़ता है।

बेतालघाट क्षेत्र के एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह इलाका विकास की दौड़ में सबसे पीछे छूट गया है। सड़कों की हालत खराब है, बरसात में मार्ग बंद हो जाते हैं और जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति बेहद कमजोर है जबकि रोजगार के अवसर न होने के कारण बड़े पैमाने पर पलायन हो चुका है। उन्होंने अवैध खनन और क्रेशरों से पर्यावरण और स्वास्थ्य को हो रहे नुकसान की ओर भी ध्यान दिलाया।

जिला पंचायत सदस्य संजू बोरा के अनुसार बेतालघाट क्षेत्र की स्थिति बेहद दयनीय है। स्वास्थ्य सेवाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं और दुर्गम इलाकों से मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कई इंटर काॅलेज बिना प्रधानाचार्य के चल रहे हैं और विद्यालयों के मर्जर से बच्चों को लम्बी दूरी तय करनी पड़ रही है। पलायन, बेरोजगारी और अव्यवस्थित खनन ने क्षेत्र को खोखला कर दिया है।
कुल मिलाकर शहर, पहाड़ और बेतालघाट, तीनों हिस्सों से आई आवाजें साफ बताती हैं कि नैनीताल विधानसभा की समस्याएं अलग- अलग दिखती जरूर हैं लेकिन जड़ एक ही है, नीति और जमीन के बीच की खाई। राजीव लोचन शाह, प्रदीप दुमका, शैला नेगी और संजू बोरा सभी इस बात पर सहमत दिखते हैं कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस और जवाबदेह काम चाहती है।

नैनीताल विधानसभा के लोगों की मांग साफ है कि ‘‘इतिहास और पर्यटन के नाम पर नहीं बल्कि बुनियादी जरूरतों के आधार पर विकास।’’

नैनीताल विधानसभा 2025 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक: सरिता आर्य (अवधि: 3 वर्ष, 1 कार्यकाल)
क्र. क्षेत्र                                                                                                  मुद्दा/जमीनी स्थिति अंक  (10 में)

  1. सड़कें व कनेक्टिविटी (नैनीताल शहर, बेतालघाट, कोटाबाग, ज्योलीकोट) शहर में पैचवर्क व घोषणाएं, बेतालघाट-शहीद बलवंत सिंह मार्ग जर्जर, बरसात में जलभराव, खनन से हालात बदतर 3/10
  2. शहरी प्रबंधन (पार्किंग, ट्रैफिक, माल रोड) पार्किंग संकट स्थायी, ट्रैफिक अव्यवस्थित, सीजन में शहर ठप 3/10
  3. स्वास्थ्य सेवाएं (जिला अस्पताल, ग्रामीण पीएचसी) शहर में सीमित सुधार गांवों में डाॅक्टर व स्टाफ की भारी कमी, रेफरल 4/10
  4. आपदा प्रबंधन व पर्यावरण (बलिया नाला, भूस्खलन, झील) बलिया नाला परियोजना जारी, लेकिन भूस्खलन व नालों पर ठोस रोक नहीं, झील वेंटिलेटर पर निर्भर 4 /10
  5. शिक्षा व्यवस्था (सरकारी स्कूल, काॅलेज) स्कूलों में शिक्षक संकट, बेतालघाट काॅलेज में सिर्फ बीए, विषयों का अभाव अन्य जगहों पर स्थिति बेहतर 4/10
  6. युवा, रोजगार व खेल पर्यटन आधारित अस्थायी रोजगार, खेल व स्थायी अवसर न के बराबर 2.5/10
  7. पर्यटन व धार्मिक विकास (नैना देवी, कैंची धाम) सौंदर्यीकरण पर खर्च; कैरिंग कैपेसिटी, ट्रैफिक व स्थानीय लाभ पर कोई स्पष्ट नीति नहीं 5/10
  8. ग्रामीण क्षेत्र व बेतालघाट (खनन, सड़क, पानी) अवैध/अत्यधिक खनन, टूटी सड़कें, पानी संकट, डर का माहौल 2 /10
  9. पेयजल व बुनियादी सुविधाएं ‘हर घर नल’ कागजों में, कई गांवों में 2-3 दिन पानी नहीं 2.5/10
  10. नेतृत्व, संवाद व जवाबदेही व्यक्तिगत रूप से मिलनसार, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप व ठोस समाधान कमजोर 5/10
कुल औसत: 3.3/10 फाइनल ग्रेड: पास

‘सड़क-स्वास्थ्य और पर्यटन में हुआ विकास’
 
उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में स्थित पर्यटन नगरी नैनीताल विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। सरिता आर्या नैनीताल विधानसभा क्षेत्र से 2012 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनीं। बाद में भाजपा में शामिल हो गईं। 2017 के चुनाव में कांग्रेस के संजीव आर्या से हार गई। फिर 2022 के चुनाव में संजीव आर्या को पराजित कर नैनीताल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। पेश है उनसे दिव्या भारती की विस्तृत बातचीत

नैनीताल विधानसभा को पिछले 3 वर्षों में कितना बजट मिला और उसका कितना कार्यान्वयन हुआ?


देखिए, मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करती हूं। नैनीताल की जो रीढ़ की हड्डी कही जाती है, वह बलिया नाला है। जब से उत्तराखण्ड बना है, तब से हर मुख्यमंत्री ने उसमें पैसा दिया है क्योंकि हर बरसात में वह बैठ जाता था। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने बलिया नाले के लिए लगभग 200 करोड़ रुपए दिए हैं, जिसमें काम चल रहा है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि नैनीताल की 63 आंतरिक सड़कों पर एक साथ काम चल रहा है। मंदिर माला मिशन के तहत नैना देवी मंदिर, तिब्बती मार्केट और तल्लीताल जैसे चैराहों का सौंदर्यीकरण हुआ है। एसटीपी प्लांट के लिए पैसा दिया गया है। जो एसटीपी प्लांट बैठ गया था, उसके लिए नई डीपीआर बनी है, जिसमें पटवा डांगड़ को जोड़ा गया है क्योंकि ऋषि बायपास बरसात में काफी बैठ गया था। ब्लाॅकों की सड़कों, कैंची धाम पार्किंग और मेट्रोपोल पार्किंग के लिए भी बजट आया है और लैंड ट्रांसफर हुआ है। शहीद बलवंत सिंह मार्ग (बेतालघाट) और दुनिखाल-रातीघाट मार्ग के लिए भी पैसा दिया गया है। इससे गर्मियों में कैंची धाम के जाम से निजात मिलेगी। दुनिघाट से रातीघाट बायपास भी बन रहा है।

शहीद बलवंत सिंह मार्ग (बेतालघाट) बेहद खराब है, सड़क टूटी हुई है और बरसात में पानी भर जाता है?

देखिए, उसमें खनन बहुत होता है। ट्रक और डंपर चलते हैं जिसकी वजह से सड़क पर दिक्कत आती है। काली पहाड़ी का ट्रीटमेंट भी जरूरी है। मैं खुद वहां गई थी और आपदा सचिव विनोद सुमन जी से बातचीत की। उनसे कहा कि काली पहाड़ी का ट्रीटमेंट और उस सड़क दोनों के लिए पैसा दिया जाए। आगे के हिस्से का बजट आ चुका है और रतोड़ा तक के मार्ग का पैसा भी आने वाला है। मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि जो सड़कंे प्राथमिकता में हैं, उनकी सूची दीजिए। मैंने सारी खराब सड़कों की सूची दे दी है।

तीन साल बहुत लम्बा समय होता है, लेकिन बेतालघाट की जनता कहती है कि अभी तक जमीन पर कुछ नहीं बदला?

देखिए, यह क्षेत्र आपदा-संवेदनशील है। काली पहाड़ी में बहुत दिक्कतें हैं। उसी वजह से सड़कें बार-बार खराब होती हैं। खनन क्षेत्र भी है और खनन से राजस्व मिलता है, इसलिए उसे पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। लेकिन हमने जो वादा किया था कि नहरों में पानी देंगे, वह पूरा किया है। बरसात की वजह से काम रुका था लेकिन अब नहरों में पानी चल रहा है। बेतालघाट काश्तकारी क्षेत्र है और काश्तकारों ने इसके लिए धन्यवाद भी दिया है।

जनता का कहना है कि खनन से मिलने वाला राजस्व न शिक्षा में दिखता है, न स्वास्थ्य में। अवैध खनन से डर का माहौल है?

‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना के तहत वहां पानी की योजनाएं पहुंची हैं। गर्मियों में स्रोत सूखते हैं, यह मैं मानती हूं। बरसात में पाइप टूट गए थे तो हमने रबर पाइप भी बिछवाए। कई जगह लिफ्ट योजनाएं चल रही हैं। अवैध खनन की शिकायत मिलने पर पुलिस, राजस्व और खनन विभाग को भेजा जाता है। पटवारी भेजे जाते हैं, फाइन लगाया जाता है और खनन अधिकारी चेकिंग करते हैं।

बेतालघाट के डिग्री कॉलेज में सिर्फ बीए है, न बीकाॅम, न बीएससी। स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं हैं?

डिग्री काॅलेज मैंने 2012 में खुद खुलवाया था। उसकी बिल्डिंग बन चुकी है और शिक्षक आते हैं। बीच में प्रिंसिपल नहीं थे, अब प्रिंसिपल भी आ गए हैं। विषयों का अलॉटमेंट उच्च शिक्षा विभाग करता है। बीकॉम और बीएससी के लिए छात्रों और शिक्षकों की संख्या चाहिए। मैं मानती हूं कि कुछ कमियां हैं। मुख्यमंत्री जी के दौरे में ज्ञापन दिया गया है और उसमें सुधार की घोषणा हुई है।

पर्यटन से युवाओं को रोजगार देने के लिए क्या किया गया है?

पर्यटन विभाग के साथ बैठक की गई है। युवाओं को बर्ड वाॅचिंग, राॅक क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियों की ट्रेनिंग दी जा रही है। मुख्यमंत्री जी की होम-स्टे योजना के तहत लोग अपने घरों में होम-स्टे खोल रहे हैं, जिससे स्थानीय संस्कृति और पहाड़ी भोजन को बढ़ावा मिल रहा है।

नैनीताल में पर्यटकों का दबाव बहुत बढ़ गया है, पार्किंग, ट्रैफिक और भूस्खलन?

अब पर्यटक बंट रहे हैं। कोई मुक्तेश्वर जा रहा है, कोई रामगढ़, कोई भीमताल, कोई पंगोट और कोई किलबरी। ट्रैफिक प्लान के अनुसार व्यवस्था की जा रही है और सोशल मीडिया के जरिए वैकल्पिक स्थलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बुद्धिजीवियों का कहना है कि नैनीताल झील वेंटिलेटर पर है?

नहीं, झील दूषित नहीं हुई है। उसमें वैज्ञानिक तरीके से ऑक्सीजन डाली जाती है, गाद की सफाई होती है। मछलियों को संरक्षित किया जाता है क्योंकि वे झील के लिए उपयोगी हैं। सिंचाई विभाग नियमित माॅनिटरिंग करता है और सरकार पूरी तरह अलर्ट है।

जनता का कहना है कि आप मिलनसार हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि के तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में असफल रहीं?

नैनीताल, भवाली, गरमपानी, बेतालघाट और कोटाबाग, हर जगह अस्पताल हैं। डाॅक्टरों की कमी अब काफी हद तक पूरी हो चुकी है। गम्भीर मामलों को ही रेफर किया जाता है। 63 आंतरिक सड़कों पर काम हो रहा है। बलिया नाले में पहली बार सही तरीके से काम हो रहा है। मंदिर माला मिशन, सड़क चैड़ीकरण और रोपवे जैसी योजनाएं चल रही हैं।

नैनीताल में धर्म के नाम पर माहौल खराब होने, उस्मान वाला मामला, जिला पंचायत चुनावों में अराजकता और सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर कोई कार्रवाई न होने को लेकर जनता नाराज है?

नैनीताल हमेशा से शांतिप्रिय शहर रहा है। भारत में हर धर्म के लोगों को रहने का अधिकार है। अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होती है। कुछ मामले न्यायालय में हैं और उन पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। प्रशासन और सरकार दोनों अलर्ट रहते हैं और कार्रवाई की जाती है।

2027 विधानसभा चुनाव में आप किन मुद्दों पर जनता के बीच जाएंगी?


शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली और पलायन, ये मुख्य मुद्दे रहेंगे। कोविड के बाद कुछ लोग पहाड़ लौटे हैं। स्वरोजगार, सड़क कनेक्टिविटी और गांवों को जोड़ने का काम आगे बढ़ेगा। जनता की जो मांग होगी, उसमें सुधार किया जाएगा।

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