प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जोड़ी उत्तराखण्ड को धार्मिक, आध्यात्मिक और पर्यटन हब के रूप में विकसित करने में जुटी है। भाजपा समर्थकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री धामी के समर्पण से प्रदेश में ऐतिहासिक परिवर्तन हो रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी का दावा है कि देवभूमि आने वाले वर्षों में न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनकर उभरेगा

‘कुछ साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा केदार के दर्शन के लिए आए थे तो बाबा के दर्शन के बाद उनके मुंह से अचानक ही भाव प्रकट हुआ कि ये दशक उत्तराखण्ड का होने जा रहा है। ये भाव भले ही उनके थे, लेकिन इसके पीछे सामर्थ देने की शक्ति बाबा केदार की थी।अब बाबा के आशीर्वाद से ये शब्द धीरे-धीरे सच्चाई में बदल रहे हैं। ये दशक अब उत्तराखण्ड का बन रहा है। उत्तराखण्ड की प्रगति के लिए, नए-नए रास्ते खुल रहे हैं, जिन आकांक्षाओं को लेकर उत्तराखण्ड का जन्म हुआ था, उत्तराखण्ड नित नए लक्ष्य और संकल्प लेते हुए, उन्हें पूरा कर रहा है। डबल इंजन की सरकार उत्तराखण्ड को विकसित राज्य बनाने के लिए मिलकर काम कर रही है। राज्य में चारधाम, आॅल वेदर रोड आधुनिक एक्सप्रेसवे से लेकर रेलवे और हेली सेवाओं का विस्तार हो रहा है। केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे को मंजूरी प्रदान की गई है। केदारनाथ रोपवे के जरिए आठ से नौ घंटे की पैदल यात्रा 30 मिनट में पूरी हो जाएगी। इससे बुजुर्ग, महिलाओं और बच्चों की यात्रा सुगम हो सकेगी। उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, 2014 से पहले चार धाम यात्रा पर प्रतिवर्ष 18 लाख यात्री ही आते थे, अब हर साल 50 लाख से अधिक यात्री चारधाम यात्रा पर आ रहे हैं। इस साल के बजट में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित किए जा रहे हैं। इसके जरिए सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड के बाॅर्डर वाले इलाकों में पर्यटक पहुंचे। पहले सीमावर्ती गांवों को आखरी गांव कहा जाता, लेकिन अब उन्हें पहला गांव कहा जा रहा है। सर्दियों में जब देश के बड़े हिस्से में कोहरा होता है, तो पहाड़ों में आप धूप का आनंद ले सकते हैं। गढ़वाली में इसे ‘घाम तापो पयर्टन’ कहते हैं। काॅरपोरेट की मीटिंग, काॅन्फ्रेंस, सेमिनार, एक्जीबिशन के लिए देवभूमि से अच्छी जगह नहीं हो सकती है।’

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मां गंगा के मायके हर्षिल के मुखवा गांव पहुंचे तो उनके द्वारा उत्तराखण्ड के विकास के लिए किए जा रहे अथक प्रयासों की बाबत उक्त संदेश का प्रसारण हुआ। 6 मार्च को मोदी की मुखवा व हर्षिल यात्रा यह दर्शाती है कि उत्तराखण्ड उनकी प्राथमिकता में है और वह इस राज्य को विकास और आध्यात्मिकता का केंद्र बनाने को प्रतिबद्ध हैं। मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो भारत-तिब्बत सीमा से जुड़े उत्तराखण्ड के चमोली और पिथौरागढ़ सीमावर्ती जिलों के बाद अब उत्तरकाशी के मुखवा और हर्षिल पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री के नाम एक और रिकाॅर्ड दर्ज हुआ है वह यह कि वो देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो गंगा के शीतकालीन पूजा स्थल पहुंचे। इससे पहले 28 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने देहरादून में राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन किया था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तीन साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहाड़ प्रेम खूब छलका है। सबसे पहले वह पांच नवम्बर 2021 को केदारनाथ धाम में विभिन्न विकास कार्यों के साथ ही आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के लोकार्पण समारोह में आए थे। तब से लेकर 28 जनवरी 2025 तक वह 12 बार उत्तराखण्ड की यात्रा पर आ चुके थे।

5 नवम्बर 2021 को केदारनाथ में विभिन्न विकास कार्यों के साथ ही आदि गुरु शंकराचार्य की मूर्ति लोकार्पित करने से लेकर, 2021-22 के विधानसभा चुनावों (4, 10, 11, 12 फरवरी) और 23 मार्च 2022 को मुख्यमंत्री धामी के शपथ ग्रहण में उनकी उपस्थिति राज्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दर्शाती है। 21 अक्टूबर 2022 को केदारनाथ- बद्रीनाथ यात्रा, 12 अक्टूबर 2023 को मानसखंड (जागेश्वर -आदि कैलाश) दौरा, 8 दिसम्बर 2023 को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और 2 व 11 अप्रैल 2024 को लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी मौजूदगी इसका प्रमाण है। 28 जनवरी 2025 को राष्ट्रीय खेलों में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी ने खेलों को बढ़ावा दिया।

वर्ष 2014 में उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक केंद्र सरकार से उत्तराखण्ड को लगभग दो लाख करोड़ रुपए की परियोजनाएं मिल चुकी हैं। यही नहीं, प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में धामी सरकार ने कई ऐतिहासिक निर्णय भी राज्य में लिए हैं। जिनमें देश में पहली बार किसी राज्य में यूसीसी लागू किया गया। नकल विरोधी कानून के साथ ही सख्त भू कानून और नेशनल गेम्स का आयोजन किया गया।

प्रधानमंत्री की मुखवा हर्षिल यात्रा से एक दिन पहले ही केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम के तहत पर्वतमाला परियोजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड में सोनप्रयाग से केदारनाथ (12.9 किमी) तक रोपवे को मंजूरी दी है। परियोजना का डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और स्थानांतरण (डीबीएफओटी) मोड पर 4,081.28 करोड़ रुपए की कुल पूंजी लागत पर विकसित किया जाएगा।

रोपवे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी में विकसित करने की योजना है और यह सबसे उन्नत ट्राई-केबल डिटेचेबल गोंडोला (3एस) तकनीक पर आधारित होगा। इसकी डिजाइन क्षमता 1,800 यात्री प्रति घंटे (पीपीएचपीडी) होगी, जो प्रतिदिन 18 हजार यात्रियों को ले जाएगी। यह रोपवे परियोजना केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए वरदान होगी क्योंकि यह पर्यावरण-अनुकूल, आरामदायक और तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और एक दिशा में यात्रा का समय लगभग 8 से 9 घंटे से घटकर लगभग 36 मिनट कर देगी।

इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किलोमीटर रोपवे परियोजना के निर्माण को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना का डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मोड पर विकसित किया जाएगा, जिसकी कुल पूंजीगत लागत 2,730.13 करोड़ रुपए होगी। वर्तमान में हेमकुंड साहिब की यात्रा गोविंदघाट से 21 किलोमीटर की
चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है और इसे पैदल, घोड़ा-खच्चर, पालकी से किया जाता है।

केंद्र सरकार के सहयोग से मुख्यमंत्री धामी उत्तराखण्ड में विकास की बड़ी रेखा खींच रहे हैं। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर तेजी से काम चल रहा है। इस एक्सप्रेसवे की खासियत राजाजी राष्ट्रीय पार्क के हिस्से में निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड है, एलिवेटेड रोड का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। एक्सप्रेसवे बनने से दिल्ली से देहरादून का सफर ढाई घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। जबकि अभी इसमें पांच से छह घंटे लगते हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने गढ़वाल और कुमांऊ की भौगोलिक दूरी कम करने के लिए, नजीबाबाद-अफजलगढ़ बाईपास को भी मंजूर कर दिया है।

यह हमारा सौभाग्य है कि उत्तराखण्ड के चहुंमुखी विकास के साथ ही यहां की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में हमें सदैव प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त होता रहा है। उत्तराखण्ड में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सफल आयोजन, विश्व स्तरीय जी-20 सम्मेलन की बैठकों का आयोजन, यूसीसी जैसा कानून लागू करना हो या फिर हाल ही में उत्तराखण्ड में आयोजित हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों का भव्य आयोजन हो, प्रधानमंत्री का राज्य को हमेशा मार्गदर्शन मिला। उत्तराखण्ड पर जब भी कोई विपदा आई है, पीएम का सपोर्ट हमें मिला है। चाहे केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आई प्राकृतिक आपदा, जोशीमठ में भूधंसाव, सिलक्यारा टनल हो या फिर अभी हाल ही में माणा गांव के पास हुई हिमस्खलन की घटना हो। प्रधानमंत्री जी हमारे साथ सदैव खड़े रहे हैं। चारधाम यात्रा उत्तराखण्ड की आर्थिकी का एक प्रमुख आधार है। होटल व्यवसायियों से लेकर टैक्सी चालकों, स्थानीय दुकानदारों के साथ ही यात्रा से जुड़े हुए लाखों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। शीतकाल में उत्तराखण्ड के चारों धामों के कपाट बंद होने के बाद इन सभी लोगों की आर्थिकी प्रभावित होती थी। जिसके दृष्टिगत प्रधानमंत्री जी से मार्गदर्शन प्राप्त कर इस वर्ष से राज्य में शीतकालीन यात्रा की शुरुआत की गई है।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड

देखा जाए तो बीते तीन साल ग्रामीण सड़कों के निर्माण के मामले में बेमिसाल साबित हुए हैं। इस दौरान उत्तराखण्ड में पीएम ग्रामीण सड़क योजना के तहत कुल 1481 किमी लम्बाई युक्त 519 सड़कों का निर्माण किया गया, जिस कारण 250 से अधिक आबादी वाले 35 नए गांवों तक सड़क पहुंच चुकी है।

केंद्र सरकार ने सामरिक महत्व की ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का काम 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अब इस पर ट्रैक बिछाने का काम चल रहा है। इसके साथ ही बागेश्वर-टनकपुर, बागेश्वर-गैरसैंण, ऋषिकेश-उत्तरकाशी और देहरादून-सहारनपुर रेलवे लाइनों की डीपीआर बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने चीन और नेपाल की सीमा से सटे उत्तराखण्ड के 51 गांवों को आबाद करने हेतु महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल किया है। ये गांव तीन सीमांत जिलों के पांच विकासखंडों में स्थित हैं। 758 करोड़ रुपए की लागत इस कार्ययोजना के अंतर्गत इन गांवों में 510 कार्य संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पीएम आवास के तहत केंद्र सरकार उत्तराखण्ड के लिए 18 हजार से अधिक अतिरिक्त आवास मंजूर किए गए हैं।

 

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