झारखंड की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजरती दिख रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिल्ली प्रवास और वहां बीजेपी नेताओं से कथित गुप्त मुलाकात की खबरों के बाद सत्ता समीकरण बदलने की चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सवाल उठ रहे हैं कि क्या झारखंड में नया खेल शुरू होने वाला है? क्या झारखंड मुक्ति मोर्चा और बीजेपी मिलकर सरकार बना सकती है?

गौरतलब है कि बिहार चुनाव के दौरान महागठबंधन और झामुमो के बीच सीट बंटवारे पर हुई खींचतान ने पहले ही सम्बंधों में आई खटास को उजागर कर दिया था। बिहार सीमा से सटी 12 सीटों पर लड़ने का झामुमो का दावा और महागठबंधन द्वारा उसे नजरअंदाज किया जाना झारखंड की राजनीति में सम्भावित बदलाव की पृष्ठभूमि तैयार कर चुका था। झामुमो का बिहार चुनाव से हटना और बाद में गठबंधन की समीक्षा का बयान पहले ही संकेत दे चुका था कि सब कुछ ठीक नहीं है। बिहार में महागठबंधन की करारी हार ने इन शक-संदेहों को और गहरा किया। इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक की पोस्ट ने झारखंड में राजनीतिक कयासों को और हवा दे दी।

पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी भी चर्चा का विषय रही है। ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति और कई कार्यक्रमों का रद्द होना भी संकेत दे रहा था कि कुछ बड़ा पक रहा है। अब सीएम हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी व विधायक कल्पना सोरेन का दिल्ली दौरा और इधर गृहमंत्री अमित शाह की झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से दिल्ली में मुलाकात की खबरों ने राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ा दिया है।

सूत्रों के मुताबिक झामुमो के कुछ नेता बीजेपी नेतृत्व के सम्पर्क में हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि दिल्ली में हेमंत सोरेन और कल्पना सोरने की बीजेपी के एक बड़े नेता से मुलाकात भी हुई है। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि अगर सोरेन चाहे तो एनडीए के साथ मिलकर नई सरकार बनाना उसके लिए मुश्किल नहीं होगा। हालांकि इन तमाम अटकलों के बीच जेएमएम ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में कहा ‘‘झारखंड झुकेगा नहीं।’’ इस पोस्ट से यह साफ नहीं हो पाया कि यह बिहार चुनाव के दौरान मिली अनदेखी के बारे में उसके ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगियों को संदेश था या भाजपा के लिए था। जेएमएम नेता विनोद पांडे ने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन का दिल्ली दौरा निजी था। भाजपा को साजिश रचने की आदत है। इस बार भी कुछ अलग नहीं है। वहीं प्रदेश भाजपा ने अटकलों को खारिज कर कहा कि जेएमएम भाजपा कभी एक नहीं हो सकते।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि झारखंड की राजनीतिक फिजा में अटकलों की गूंज है। लेकिन यह सिर्फ अफवाहें हैं या सच में सत्ता परिवर्तन की बुनियाद रखी जा चुकी है, इसका खुलासा आने वाले कुछ दिनों में हो सकता है। नेता भले ही पब्लिकली कह रहे हैं कि जेएमएम और बीजेपी के बीच अलायंस की बातचीत की चर्चा में कोई सच्चाई नहीं है। लेकिन हेमंत सोरेन और कल्पना का हाल ही में दिल्ली के दौरे ने आग में घी डालने का काम किया है। बिहार चुनावों में जेएमएम और उसके ‘इंडिया’ गठबंधन के साथियों के बीच भी कड़वाहट बढ़ती देखी गई।

संख्या बल के हिसाब से देखें तो झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए 41 की जरूरत होती है। वर्तमान महागठबंधन की स्थिति, जेएमएम 34, कांग्रेस 16, आरजेडी 4 और वाम दल के 2 विधायकों मिलाकर कुल 56 सुविधाजनक बहुमत की सरकार है। यदि जेएमएम एनडीए में शामिल हो जाए तो नया समीकरण, जेएमएम 34, भाजपा 21,एलजेपी 1, एजेएसयू 1 और जेडीयू के 1 विधायक को मिलाकर कुल 58 विधायकों का स्पष्ट बहुमत बनता है। ऐसे में महागठबंधन सरकार गिर जाएगी और झारखंड की राजनीति में नई पटकथा लिखी जा सकती है। फिलहाल इतना साफ है कि झारखंड में कुछ बड़ा होने की आहट जरूर है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD