Country

दिव्यता पर फिर लगा दाग

महाकुम्भ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपराओं का अद्भुत संगम होता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन में शामिल होने आते हैं, लेकिन इस बार 29 जनवरी को हुई त्रासदी ने महाकुम्भ की भव्यता पर एक गहरा दाग लगा दिया। महाकुम्भ की त्रासदी के ठीक दो हफ्ते बाद, 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बड़ा हादसा हुआ, जिसमें 18 लोगों की जान चली गई। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना स्टेशन पर यात्रियों की अत्यधिक भीड़ और अव्यवस्थित रेलवे प्रबंधन का परिणाम थी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की कार्यशैली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है

देश में बीते 13 जनवरी से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुम्भ की धूम मची हुई है। अभी तक करोड़ों श्रद्धालु कुम्भ में डुबकी लगा चुके हैं। लेकिन लगातार भगदड़ में हो रही लोगों की मौतों ने शासन-प्रसाशन की तैयारियों की पोल खोल दी है। फिर चाहे वो 29 जनवरी मौनी अमावस्या के पहले दिन संगम के पास मची भगदड़ हो जिसमें 30 लोगों की जान चली गई या फिर कुम्भ क्षेत्र में हुई आगजनी या 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कुम्भ जाने वाले 18 श्रद्धालुओं की मौत। इस घटना में सबसे अधिक बिहार के 11 लोग हताहत हुए हैं। वहीं  दिल्ली के 8 और हरियाणा के 1 व्यक्ति की मौत हुई है। बताया जा रहा है कि  प्रयागराज एक्सप्रेस प्लेटफाॅर्म 14 पर आने वाली थी। महाकुम्भ जाने के लिए यात्री प्लेटफाॅर्म पर इंतजार कर रहे थे। गाड़ी आने में कुछ देर थी लेकिन इसी बीच प्लेटफाॅर्म 12 पर स्पेशल ट्रेन की घोषणा हुई और यात्रियों के बीच प्रयागराज जा रही दो ट्रेनों के रद्द होने की अफवाह फैल गई। प्लेटफाॅर्म 14 से यात्री प्लेटफाॅर्म 12 की तरफ जाने लगे इससे सीढ़ियों पर भगदड़ मची और दर्दनाक हादसा हुआ। रेलवे ने घटना की हाई लेवल जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुख व्यक्त किया वहीं रेलवे ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और मृतक यात्रियों के परिजनों और घायल यात्रियों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। लेकिन इन घटनाओं से सरकार की चारों तरफ किरकिरी हो रही है। एक ओर जहां विपक्षी राजनीतिक पार्टियां केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं वहीं सवाल उठ रहे हैं कि इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? इतने बेकाबू हालात कैसे बने? भारतीय रेलवे जिम्मेदार है या नहीं?

जानकारों का कहना है कि कुम्भ स्नान के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है और रेलवे स्टेशनों पर हालात कई बार बेकाबू हो जा रहे हैं। इसी अफरा-तफरी में घटनाएं सामने आ रही हैं। लगातार पुलिस प्रशासन लोगों से संयमित रहकर यात्रा करने की अपील कर रहा है, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण आम यात्रियों को भी काफी मुश्किलें आ रहीं हैं।  ट्रेन में न तो रिजर्वेशन मिल रहा है और न ही जनरल सीट। ऐसे में प्रयागराज जाने की होड़ में लोग परेशान हो रहे हैं। श्रद्धालुओं का बस यही लक्ष्य है कि 144 साल बाद प्रयागराज में लगे इस महाकुम्भ में कैसे डुबकी लगा ली जाए। ऐसे में यह घटना न केवल भारतीय रेलवे की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासन की लापरवाही और नागरिकों की जिम्मेदारी पर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त करती है।
जहां तक इन मौतों का जिम्मेदार कौन है का सवाल है तो रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ की स्थिति को नियंत्रित करने में विफलता, सुरक्षा प्रोटोकाॅल का पालन न करना और आपातकालीन प्रतिक्रिया की कमी यह सब भारतीय रेलवे के जिम्मेवार विभागों की लापरवाही को दर्शाते हैं। रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी भारतीय रेलवे की होती है लेकिन इस घटना में साफ दिखता है कि उपयुक्त योजना और प्रबंधन की कमी थी। यदि रेलवे प्रशासन ने समय रहते उपाय किए होते तो इस तरह के भयानक परिणाम से बचा जा सकता था।
हमलावर हुआ विपक्ष
 
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मचने से कई लोगों की मृत्यु और कइयों के घायल होने की खबर अत्यंत दुखद और व्यथित करने वाली है। शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। यह घटना एक बार फिर रेलवे की नाकामी और सरकार की असंवेदनशीलता को उजागर करती है। प्रयागराज जा रहे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए स्टेशन पर बेहतर इंतजाम किए जाने चाहिए थे। सरकार और प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि बदइंतजामी और लापरवाही के कारण किसी को अपनी जान न गंवानी पड़े।

राहुल गांधी, लोकसभा में नेता विपक्ष

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ रेलवे की बदइंतजामी की वजह से हुई। इस घटना को लेकर मुझे काफी अफसोस है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव इस हादसे की जिम्मेदारी लें।

लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार

देश में कहीं भी कोई घटना होती है तो उसमें हताहत होने वाले ज्यादा लोग बिहार के ही होते हैं और दिल्ली में भी वैसा ही हुआ है जो बेहद दुखद है।

प्रशांत किशोर, संस्थापक, जनसुराज पार्टी

 
स्टेशन से लेकर कुम्भ घाट तक मौतें हुई हैं, सरकार को कोई चिंता नहीं है। सरकार सिर्फ अपने पीआर में लगी हुई है। इंतजाम सिर्फ वीवीआईपी टेंट तक सीमित हैं। हर जगह बदइंतजामी है। हादसे के लिए किसी को तो जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। मरने वालों में ज्यादातर बिहार के हैं। बिहार सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। पूरा देश और बिहार जानना चाहता है कि इसका जिम्मेदार कौन है?

तेजस्वी यादव, आरजेडी नेता

इस हादसे के लिए रेलवे जिम्मेदार है ऐसे में बिना देर किए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। सरकार ने लोगों को कुम्भ में बुला लिया लेकिन व्यवस्था नहीं कर पाई जिसकी वजह से लगातार इस तरह के हादसे हो रहे हैं।  

अजय राय, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश कांग्रेस

रेलवे स्टेशन पर असामान्य रूप से भारी भीड़ होने से यह स्पष्ट था कि व्यवस्थाएं पहले से ही दबाव में थीं। जब एक साथ बड़ी संख्या में यात्री एकत्र होते हैं तो यात्री प्रवाह  का सही तरीके से प्रबंधन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि ऐसा प्रबंधन नहीं किया जाता तो ऐसी घटनाएं होना लाजमी हैं। इस घटना में भी भारी भीड़ के कारण भगदड़ मचने की सम्भावना बहुत बढ़ गई थी। यह घटना दर्शाती है कि रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस योजना और उपाय नहीं थे। गेटों और प्लेटफार्मों पर पर्याप्त पुलिस या सुरक्षा बल की कमी ने भगदड़ को और बढ़ावा दिया। इसके अलावा सही तरीके से बैरिकेड्स का न होना और आपातकालीन निकासी रास्तों की समस्या भी एक महत्वपूर्ण कारण था।
ट्रेन की समय पर या देर से आने की स्थिति भी यात्रियों को अराजकता की ओर ले जाती है। यात्रियों को ट्रेन के समय का सही तरीके से निर्धारण और सूचना मिलने पर वे अपने स्थान पर बने रह सकते थे लेकिन जब ट्रेन के समय में कोई अनिश्चितता या देरी होती है तो यात्री जल्दी में होते हैं और यह स्थिति संघर्ष और भगदड़ को बढ़ाती है।
कुल मिलाकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ की घटना एक गम्भीर चेतावनी है कि हमें अपनी यात्री सुरक्षा व्यवस्था को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है। यह घटना हमें यह समझाती है कि प्रशासन रेलवे और नागरिकों को मिलकर इस तरह की आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इससे न केवल भविष्य में होने वाली घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि भारतीय रेलवे प्रणाली को भी एक सुरक्षित और व्यवस्थित रूप दिया जा सकता है।
रेलवे ने किया मुआवजे का ऐलान
भगदड़ में हुई मौतों को लेकर भारतीय रेलवे ने पीड़ितों के लिए  मुआवजे का ऐलान किया है। जिसके अनुसार मृतकों के परिजनों को 10 लाख, गम्भीर रूप से घायल लोगों को 2.5 लाख और मामूली रूप से घायलों को 1 लाख रुपए दिए जाएंगे।
नीतीश ने भी की मुआवजे की घोषणा
भारतीय रेलवे की ओर से जारी सूची में सबसे ज्यादा बिहार के लोगों की मौत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी घटना को दुखद बताया है और मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए परिजनों के प्रति संवेदना जताई, वहीं बिहार सरकार की ओर से मृतकों के आश्रितों को 2 लाख रुपए एवं घायलों को 50 हजार रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष से देने की घोषणा की है।

इसमें मोदी, योगी या भाजपा सरकार की क्या गलती?

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म फेसबुक पर व्यंगात्मक शैली में लिखा कि ‘रेलवे स्टेशन पर अफरा-तफरी और भगदड़ मचने से प्रयागराज कुम्भ मेले को जा रहे कई दर्जन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, इसमें मोदी, योगी या भाजपा सरकार की क्या गलती? क्योंकि भगदड़ तो रेलवे स्टेशन पर मची। 2013 में रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में प्रयागराज कुम्भ से लौट रहे 35 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। वह सपा सरकार की बड़ी गलती थी क्योंकि भगदड़ रेलवे स्टेशन पर मची थी। 2025 में रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे में सरकार की क्या गलती क्योंकि ऐन समय पर प्लेटफार्म बदलने की सूचना से मची अफरा-तफरी के कारण भगदड़ मची और हादसा हो गया। 2013 में रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के लिए पूरी तरह उस समय की सपा सरकार जिम्मेदार थी क्योंकि ऐन टाइम पर प्लेटफार्म बदलने की सूचना के कारण मची अफरा तफरी से भगदड़ मची थी। 2025 में श्रद्धालुओं की हुई मौत के लिए मुख्यमंत्री से प्रश्न क्यों पूछा जाए क्योंकि वे लोग कुम्भ के लिए जा रहे थे। 2013 में हुई मौतों पर तब के मुख्यमंत्री से सवाल बनता था क्योंकि वे लोग कुम्भ से लौट रहे थे। 2013 में हुए हादसे पर मीडिया ने तब की सरकार, मुख्यमंत्री और मेला प्रभारी से कड़वे सवाल पूछे थे क्योंकि उस समय मीडिया था। 2025 में हुए हादसे के लिए मीडिया बिल्कुल भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, सरकार और मेला प्रभारी से सवाल नहीं पूछेगा क्योंकि अब मीडिया नहीं है।’

हादसे के मुख्य कारण

  • नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ के पीछे सबसे बड़ा कारण स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ थी। उसे सम्भालने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। यहां तक कि हर घंटे 1500 जनरल टिकट भी बेचे गए। प्रयागराज जाने वाली तीन ट्रेनों के लेट होने से हजारों यात्री स्टेशन पर जमा हो गए, लेकिन भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं थे।
  • जांच में सामने आया कि भगदड़ की एक बड़ी वजह ट्रेन के अनाउंसमेंट में हुई गड़बड़ी थी। जब प्लेटफार्म नम्बर 16 पर प्रयागराज स्पेशल ट्रेन के पहुंचने की अनाउंसमेंट हुई तो यात्री भ्रमित हो गए क्योंकि पहले से ही प्लेटफार्म-14 पर प्रयागराज एक्सप्रेस खड़ी थी। कई यात्रियों को लगा कि उनकी ट्रेन बदल गई है जिससे अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ शुरू हो गई।
  • जांच में यह भी सामने आया है कि कुम्भ मेले के चलते वीकेंड पर प्रयागराज जाने वाले यात्रियों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, लेकिन इसके बावजूद रेलवे प्रशासन ने कोई अतिरिक्त व्यवस्था के नाम पर न तो अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की और न ही यात्रियों को सही सूचना देने के लिए कोई कंट्रोल रूम बनाया गया।

You may also like

MERA DDDD DDD DD