Uttarakhand

देवभूमि की आराध्य रू नंदा देवी/भाग-2 : श्रद्धा, शक्ति और संस्कृति का प्रतीक

कितनी अद्भुत बात है कि आदियोगी और माता पार्वती के दाम्पत्य में भी मानव दाम्पत्य सरीखी ही डायनामिक्स देखने को मिलते हैं। सती माता प्रसंग के बाद शायद शिव जी भी इस बात को समझ गए थे कि उनका साथ सुहाते हुए भी कुछ दिन मां पार्वती अपनी ऊर्जा के लिए अपने माता-पिता का सानिध्य चाहती हैं। इस विषय पर मैं जितना सोचती हूं मुझे यही समझ आता है कि भावनाएं तो हर स्थान पर एक सा बंधन प्रगट करती हैं। पूरे ब्रह्माांड का निर्वहन करने वाले ईश्वर भी इस बंधन से पूर्णतया मुक्त नहीं हो सकते। मैं बहुत व्यथित भाव से कहना चाहती हूं कि कुमाऊं भर के नंदा देवी मंदिरों के दर्शन मैंने अवश्य किए हैं लेकिन एक पृथक हिमालय राज्य होने के बावजूद मुझे इस बात का क्षोभ है कि इस विषय में जितने विस्तार से कहा जाना चाहिए, उतने प्रयास नहीं हुए हैं और हमारी पीढ़ी तक आते-आते तो ये कथा विलुप्त सी होती जा रही है

 

  • श्वेता मासीवाल
    सामाजिक कार्यकर्ता

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