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देश की सुरक्षा औैर परिवार की जंग फिर होगी तेजलौट रहा है ‘फैमिली मैन’

देश की सुरक्षा औैर परिवार की जंग फिर होगी तेज लौट रहा है ‘फैमिली मैन’

भारतीय ओटीटी जगत में ‘द फैमिली मैन’ ने खुद को सिर्फ एक थ्रिलर सीरीज के रूप में नहीं बल्कि एक भावनात्मक यात्रा के रूप में स्थापित किया है जो एक ऐसे व्यक्ति की कहानी सुनाती है जिसे रियल लाइफ में हम रोज देखते हैं, बस हमें उसके पेशे का अंदाजा नहीं होता। उसकी टेंशन, उसकी जिम्मेदारियां, उसके टूटते रिश्ते और फिर भी देश के लिए लड़ने का जुनून, यही श्रीकांत तिवारी का संघर्ष है और यही वजह है कि दर्शक इस सीरीज से खुद को जोड़कर देखते हैं। पहले दो सीजन में दर्शकों ने देखा कि श्रीकांत सिर्फ गोलियां चलाने वाला अधिकारी नहीं है बल्कि वह पिता है, पति है और एक इंसान है जो हर सुबह अलार्म बजने पर वही
सोचता है जो आम भारतीय सोचता है ‘‘आज आॅफिस कैसे संभलेगा?’’ लेकिन उसके ऑफिस की दुनिया साधारण नहीं है। वह वहां आतंक के साए से लड़ रहा होता है, सुरक्षा एजेंसियों के दबाव से निपट रहा होता है और देश की सीमाओं को बचाने की रणनीति बना रहा होता है। फिर भी जब वह शाम को घर लौटता है तो बच्चों के होमवर्क की चिन्ता, पत्नी की नाराजगी और खुद के लिए समय न निकाल पाने की ग्लानि उसका पीछा करती है। दूसरा सीजन जहां समाप्त हुआ था, वहीं से दर्शकों के सवाल शुरू हो गए थे। क्या श्रीकांत और सुचित्रा का रिश्ता ठीक होगा? क्या वे अपने बच्चों को वह स्थिरता दे पाएगा जिसकी बात हमेशा करता है? उससे भी बड़ा सवाल क्या उसका दिमाग और दिल दो अलग मोर्चे सम्भालने की क्षमता रखते हैं?

अब इस बहुप्रतीक्षित तीसरे सीजन की तरफ बढ़ते हैं तो साफ दिखता है कि दांव पहले से बड़ा है। इस बार कहानी उत्तर-पूर्व भारत और चीन से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों तक फैली है। आज के दौर में जहां साइबर जासूसी, ड्रोन निगरानी, डिजिटल हैकिंग और हाइब्रिड वाॅरफेयर वास्तविक खतरे बन चुके हैं, ‘फैमिली मैन 3’ इन्हें अपनी कहानी में शामिल कर रहा है। यह सिर्फ गोली-बम का खेल नहीं होगा, यह युद्ध अब डेटा, तकनीक, इंटरनेट नेटवर्क और मानसून जैसे क्षेत्रों में भी फैलने वाला है। पोस्टर ने बता दिया है कि श्रीकांत अब अकेला नहीं, बल्कि चारों तरफ से घिरा हुआ है। उसकी आंखों में इस बार सिर्फ चिंता नहीं, बल्कि एक भारी जिम्मेदारी का अहसास है। हथियारबंद मास्कधारी चेहरों के बीच अकेला खड़ा श्रीकांत दर्शकों को बता देता है कि इस बार का युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि उसकी आत्मा के भीतर भी चलेगा।

पहले दो सीजन की एक सबसे बड़ी खूबी रही है यथार्थवादी एक्टिंग और मिडिल-क्लास जीवन का जीवंत चित्रण। यह सीरीज ग्लैमर या हाॅलीवुड स्टाइल हीरोइज्म पर नहीं, बल्कि थकावट, पसीने, ऑफिस के कंप्यूटर स्क्रीन, सरकारी मीटिंग्स और घरेलू नोक-झोंक पर बनी है। यही वजह है कि दर्शक इसे अपने दिल से लगाते हैं। जब श्रीकांत अपनी पत्नी से बहस करता है, जब बेटी उससे सवाल करती है, जब वह कार में अकेला बैठकर सोचता है, दर्शक उसमें स्वयं को पहचान लेते हैं। जेके तलपड़े का किरदार भी इस बार अहम रहने वाला है। हंसी-मजाक में भी मौत के मुंह से निकल जाने वाले इस किरदार की अपने दोस्त श्रीकांत से भावना ऐसी है जैसी पुराने जमाने की फिल्मों में होती थी- मजबूत, ईमानदार और भरोसे पर टिके रिश्ते। सोशल मीडिया पर फैन्स मजाक में कहते हैं, ‘‘श्रीकांत का लाइफ-सेवर कोई है तो वो जेके है।’’ अब नए ऐंगल और ताजा तथ्यों पर आते हैं जो आपने जोड़ने को कहा था।

तीसरे सीजन के पहले पोस्टर और फस्र्ट- लुक में खास बात यह है कि इस बार टीम ने ‘पैनिक टेंशन एनवायरनमेंट’ को हाईलाइट किया है। बैकग्राउंड में जो नक्शे और रेड मार्किंग दिखाई देती हैं, वे सिर्फ डिजाइन नहीं बल्कि संकेत हैं कि कहानी डिजिटल इंटेलिजेंस, सीमा विवाद और स्टेट-लेवल ऑपरेशन से जुड़ने वाली है। यह भी दिख रहा है कि दिल्ली और गुवाहाटी जैसे लोकेशन इस बार मुख्य भूमिका निभाएंगे और नाॅर्थ-ईस्ट की भौगोलिक जटिलताएं कहानी को गहराई देंगी। इसके अलावा कुछ बीटीएस फोटो में टीम को पहाड़ी इलाकों में शूट करते देखा गया है। यह साफ संकेत है कि कहानी फील्ड मिशन पर ज्यादा आधारित होगी और सिर्फ कंट्रोल रूम तक सीमित नहीं रहेगी। मनोज बाजपेयी के शब्दों में- ‘‘इस बार शूटिंग फिजिकली भी और इमोशनली भी चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन श्रीकांत रुक नहीं सकता।’’ एक और अहम् पहलू यह है कि इस बार ‘इंटरनल टेंशन’ उतनी ही खतरनाक होगी जितना बाहरी दुश्मन। सुचित्रा का किरदार इस सीजन में निर्णायक हो सकता है। बहुत से दर्शक दूसरे सीजन के बाद इस रिश्ते पर बहस करते रहे। क्या सुचित्रा सही थी? क्या श्रीकांत सही था? यह बहस अब कहानी में एक नया मोड़ बनकर लौटेगी। बच्चों की तरफ देखें तो वे अब बड़े हो रहे हैं और श्रीकांत की अनुपस्थिति तथा तनाव उनके मन पर और असर डालेगा। यह क्रूशियल हिस्सा होगा, क्योंकि एक एजेंट के लिए असली युद्ध अक्सर अपने घर में होता है।

एक और नया पहलू, इस बार एजेंसी में अंदरूनी राजनीति और शक्ति संघर्ष भी देखने को मिल सकता है। नौकरशाही और इंटेलिजेंस विंग के बीच के तनाव, फाइल्स, आदेश और जमीनी हकीकत के बीच का टकराव कहानी को और प्रामाणिक बनाएगा। दर्शक अब सिर्फ एक्शन नहीं चाहते। वे गहराई चाहते हैं और ‘फैमिली मैन’ हमेशा यही देता आया है। यह सीरीज दिखाती है कि कभी- कभी बंदूक से ज्यादा खतरनाक होता है एक गलत फैसला, एक गलत विश्वास, एक गलत धागा पकड़ लेना। फैन कल्चर भी पूरे शबाब पर है। सोशल मीडिया पर मीम्स, संवाद, थ्योरीज और फैन- एडिट्स की बाढ़ आ चुकी है। लोग पोस्टर देखकर लिख रहे हैंµ ‘‘ये शो आएगा तो पूरा देश इसे देखेगा।’’ अंत में बात एक ही है ‘फैमिली मैन’ लौट रहा है और इस बार कहानी सिर्फ देश बचाने की नहीं, खुद को बचाने की भी है। श्रीकांत की थकान, उसके संघर्ष, उसका रोका हुआ गुस्सा और उसकी जिम्मेदारी। इस कहानी की आत्मा है। जब वह फिर से अपनी फटी आवाज में कहेगा, ‘‘मैं ठीक हूं… बस थक गया हूं’’, तब दर्शक समझेंगे कि असली नायक वही होता है जो अपने डर के साथ जीता है और फिर भी आगे बढ़ता है। यही वजह है कि इस सीरीज के लौटने का मतलब सिर्फ मनोरंजन नहीं, यह वापसी है उस किरदार की जो हमारा ही अक्स है, बस उसका रणक्षेत्र बड़ा है और युद्ध ज्यादा खतरनाक।

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