‘महादेव बेटिंग ऐप्य के नेटवर्क’ को लेकर उठ रही जांच की आंच ने प्रधानमंत्री कायार्लय और भाजपा को हिला दिया है। कांग्रेस संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पीएमओ के प्रभावशाली ओएसडी हिरेन जोशी पर व्यापारिक और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सहित गम्भीर सवाल उठाने में जुट गई है। प्रसार भारती चेयरमैन नवनीत सहगल और लॉ कमीशन सदस्य हितेश जैन के इस्तीफों ने पूरे प्रकरण को राजनीतिक तूफान में बदल दिया है। जांच के शुरुआती सुराग श्महादेव बेटिंग ऐप्य के संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल तक पहुंचते दिखते हैं और इस पूरे घटनाक्रम से सरकार की पारदशिज्ता पर प्रश्न खड़े हो गए हैं
दिल्ली में संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही एक बड़ा राजनीतिक मसला सामने आ गया। इसकी शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल सूचनाओं से हुई। श्महादेव्य नामक ऑनलाइन बेटिंग ऐप के खिलाफ जांच से जुड़े इस प्रकरण की आंच अब प्रधानमंत्री कायाज्लय तक पहुंच गई है। कांग्रेस ने खुले तौर आरोप लगाया है कि पीएमओ के बेहद प्रभावशाली अधिकारी हिरेन जोशी के आस-पास इस मामले के तार बंधे हुए हैं। बताया जा रहा है कि हिरेन जोशी को पदमुक्त कर दिया गया है। इसी बीच प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल का अचानक इस्तीफा और लॉ कमीशन के सदस्य हितेश जैन का पद छोडना इसी मामले से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि इस्तीफों और हटाए जाने की खबरों पर अभी तक सरकार की तरफ से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
महादेव बेटिंग ऐप – क्या हैं आरोप
‘महादेव’ नामक ऐप पर आरोप है कि यह चार-छह वर्षों में बड़े लेन-देन का केंद्र रहा है। जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों में इसे एक बड़ी ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाला बताया गया है। इसके संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि इस नेटवर्क ने हवाला चैनलों और अन्य माध्यमों से पैसे का संचालन किया और प्रमोशन के लिए हाई-प्रोफाइल कार्यक्रमों और बॉलीवुड कार्यक्रमों को स्पॉन्सर किया गया। कुछ रिपोर्टों में इस नेटवर्क के विदेश सम्बंधों और दुबई से संचालित होने के दावे भी उठे हैं। इस मामले में विदेशी धरती पर हुई गिरफ्तारियां और इंटरपोल जैसी कारज्वाइयां भी सामने आई हैं जिससे स्पष्ट होता है कि इसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तार हैं। मीडिया और जांच एजेंसियों की रिपोटोज्ं के अनुसार इस नेटवकज् की रकम कई हजार करोड़ तक अनुमानित की जा रही है जिससे मामला आथिज्क तथा राजनीतिक दोनों तरह से संवेदनशील बन गया है।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 3 दिसम्बर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी के करीबी हिरेन जोशी का नाम इस ऑनलाइन बेटिंग स्कैम से जोड़ते हुए आरोप लगा डाला। बकौल खेड़ा जोशी प्रधानमंत्री कार्यालय में ‘सबसे ताकतवर’ व्यक्ति रहे हैं और उन्हें तथा उनके आस- पास के लोगों के हटाए जाने और सरकारी घर खाली कराए जाने की घटना संदिग्ध है। खेड़ा ने सरकार से मांग की कि पूरी पारदर्शिता के साथ हिरेन जोशी से जुड़े सभी कागजात, विदेशी यात्रा और किसी भी तरह के वित्तीय हितों की जानकारी सार्वजानिक की जाए। उन्होंने यह भी पूछा कि ”क्या जोशी पीएमओ में रहते हुए कोई निजी व्यापार कर रहे थे? उनका महादेव ऐप से क्या सम्बंध है?”
नवनीत सहगल का इस्तीफा
हिरेन जोशी विवाद को ज्यादा बल प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल के अचानक इस्तीफा देने से मिला है। सहगल, जो यूपी के वरिष्ठ आईएएस रहे हैं और जिन्हें मीडिया मैनेजमेंट तथा संचार रणनीतियों में एक विशेषज्ञ माना जाता रहा है, पर भी इसी बेटिंग ऐप से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। सहगल वही व्यक्ति हैं जिन्होंने विवादित छवि के पत्रकार सुधीर चौधरी को 15 करोड़ के पैकेज में दूरदर्शन के लिए हायर किया है। सहगल के इस्तीफे के पीछे की वजहें हालांकि अभी स्पष्ट नहीं हैं पर उनकी अचानक विदाई ने संसद और सियासी गलियारों में यह शंका पैदा कर दी है कि क्या यह भी महादेव कांड से जुड़ी श्साफ-सफाई्य का हिस्सा है या फिर अलग प्रशासनिक कारण हैं। खबरों के मुताबिक सहगल को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया मगर आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।
लॉ कमीशन सदस्य हितेश जैन
कौन हैं हिरेन जोशी
हिरेन जोशी को कई मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक टिप्पणीकार ने मोदी के ‘आँख और कान’ या प्रधानमंत्री कार्यालय का ‘मदरबोर्ड’ बता रहे हैं। वे 2008 के आस-पास पीएम से जुड़कर धीरे-धीरे पहले गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय और 2014 के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के सबसे ताकतवर अधिकारी बने। वे इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर और शिक्षक रहे हैं। उन्होंने ग्वालियर के एक संस्थान से पीएचडी की और राजस्थान में लम्बे समय तक एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाया। 2014 के बाद वे दिल्ली में पीएम के संचार और सोशल मीडिया प्रबंधन में सक्रिय हुए और 2019 में उन्हें पीएमओ में विशेष कार्य अधिकारी (कम्युनिकेशन्स एवं आईटी) के पद पर तैनात किया गया। अनेक रिपोर्टों में कहा गया है कि वे रात के समय सोशल मीडिया और समाचार फीड का विश्लेषण पीएम को देते हैं। प्रचार-रणनीति तैयार करते हैं और कई बार मीडिया हाउसेस के सम्पादकों और चैनलों के साथ संचार का प्रबंध करते थे।
हिरेन जोशी पर आरोप आजकल के नहीं हैं, वर्षों से विभिन्न राजनीतिक हस्तियों और पत्रकार उन पर मीडिया दबाव डालने और ‘कोई मीडिया प्रबंधन के आरोप लगाते रहे हैं। 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि हिरेन जोशी ने चैनलों को निर्देश दिया कि वे ‘आप को कवरेज न दें और कुछ सम्पादकों को धमकी भी दी गई। इसके अलावा भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने 2023 में ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर यह लिखकर आरोप लगाया कि पीएमओ से हिरेन जोशी की धमकियों के चलते भारतीय और विदेशी मीडिया पर दबाव डाला जाता है और मीडिया को डराया जाता है। स्वामी के अनेक पुराने पोस्ट भी इस दिशा में हवाला देते रहे हैं कि जोशी पीएमओ के भीतर ‘डर्टी ट्रिक्स’ में शामिल रहे हैं। ये पुराने दावे आज की घटनाओं के संदर्भ में इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे बतलाते हैं कि जोशी के आस-पास की कवायद पर लगातार संदेह बना रहा है।
सरकार और भाजपा की चुप्पी
सरकार और भाजपा ने इस बारे में फिलहाल औपचारिक प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है। जब ऐसे आरोप और इस्तीफे सामने आते हैं तो अक्सर खामोशी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होती है या तो स्थिति को शांत करने की कोशिश या फिर जांच रिपोर्ट आने तक किसी नतीजे पर रोक। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आधिकारिक चुप्पी से अटकलें और बढ़ती हैं और विपक्ष को हथियार मिलते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मामला सच निकलता है तो यह सरकार के लिए संवेदनशील है क्योंकि यह सीधे संचार तंत्र और सत्ता के अंदरूनी नेटवर्क से जुड़ा है। हालांकि तीन अलग-अलग इस्तीफों और जबरन पदमुक्त को जोड़कर बड़ी कहानी गढना जल्दबाजी होगी, खासकर तब तक जब तक ठोस सबूत सामने न आएं। ‘महादेव’ ऐप से जुड़े आर्थिक लेन-देन, हवाला और विदेशी कनेक्शनों की गम्भीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियां पहले से सक्रिय हैं। कुछ आरोपों में इंटरपोल व विदेशी जांच की चचाएज्ं भी हो चुकी हैं। अगर चीजें आगे बढ़ती हैं तो उससे ईडी, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों की सक्रियता, रिकॉर्ड रिकवरी और ट्रांजेक्शन-ट्रेसिंग जैसे कदम अपेक्षित हैं। साथ ही राजनीतिक स्तर पर लोकसभा, राज्यसभा में सवाल और सर्वदलीय सदन में चचर्चा सम्भव है।
कुल मिलाकर यह विवाद संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आया है। विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता का मुद्दा बनाने में जुट गया है। मीडिया में भी दो तरह के खेमे दिख रहे हैं। कुछ संस्थान गम्भीर जांच की मांग कर रहे हैं और कुछ कह रहे हैं कि अफवाहों के आधार पर निंदा नहीं की जानी चाहिए। चुनावी माहौल में इस तरह के आरोप बड़ी सुर्खियां बनकर राजनीतिक धरातल बदल सकते हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि ‘महादेव बेटिंग ऐप’ के खिलाफ चल रही कार्रवाइयों और मीडिया, सोशल सर्किल्स में उठ रही चर्चाओं ने पीएमओ के भीतर कुछ नामों को सीधे लक्षित कर दिया है और जब प्रधानमंत्री के निकट ऐसे नामों पर सवाल उठें तो सार्वजानिक भरोसा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गम्भीर असर पड़ता है। अभी मामले की परतें खुलना बाकी हैं। क्या हिरेन जोशी पर व्यक्तिगत तौर पर दोष सिद्ध होगा? क्या नवनीत सहगल और हितेश जैन के इस्तीफे इस प्रकरण से जुड़े हैं? या यह सिर्फ राजनीतिक निशानेबाजी का नया अध्याय है। इन सबका फैसला आने वाली जांच और आधिकारिक जवाबों पर निर्भर करेगा। विपक्ष की मांग पारदर्शिता की है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत यह अपेक्षा स्वाभाविक भी है कि सरकार जल्द स्पष्ट करे कि स्थिति क्या है?

