बाईस अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत ने भारत-पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने कश्मीर विवाद को एक बार फिर सुलगा दिया है। नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तनाव और गोलीबारी के बीच भारत पाकिस्तान पर आतंकियों को समर्थन देने का आरोप लगा रहा है, जबकि पाकिस्तान सम्भावित भारतीय हमले की चेतावनी देकर शिमला समझौते से पीछे हटने की धमकी दे रहा है। 1947 से अब तक चले आ रहे इस संघर्ष में तीन युद्ध, अनुच्छेद 370 का हटना और अब पहलगाम हमला जैसे पड़ाव यह दर्शाते हैं कि कश्मीर मसला आज भी दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है
बाईस अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले ने भारत और पाकिस्तान के सम्बंधों को एक बार फिर युद्ध की दहलीज पर ला खड़ा किया है। इस हमले में 26 आम नागरिकों की जान गई, जिससे भारत की जनता और सरकार में गहरा आक्रोश है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसे ‘भारत की सैन्य कार्रवाई’ की पुख्ता आशंका है, जबकि भारत इसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का सीधा परिणाम मान रहा है।
कश्मीर विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1947 में भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्र होने के बाद जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने प्रारम्भ में स्वतंत्र रहने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलों के बाद भारत में विलय कर लिया। इसके साथ ही भारत-पाकिस्तान के बीच पहला युद्ध हुआ और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से नियंत्रण रेखा (एलओसी) की स्थापना हुई।
चीन की भूमिका और क्षेत्रीय उलझाव
कश्मीर का अक्साई चिन क्षेत्र, जिस पर अब चीन का नियंत्रण है, भारत उसे अपना भाग मानता है। 1963 में पाकिस्तान ने कश्मीर का एक हिस्सा चीन को सौंप दिया, जिसे भारत अवैध मानता है। इससे यह विवाद अब त्रिपक्षीय बन गया है – भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच। भारत और पाकिस्तान के बीच 1947, 1965 और 1999 (कारगिल) में तीन युद्ध हो चुके हैं। 1971 में हुए युद्ध के बाद शिमला समझौता हुआ, जिसमें नियंत्रण रेखा को बनाए रखने और सभी मुद्दों का शांतिपूर्ण हल निकालने की सहमति बनी। आज वही समझौता फिर खतरे में दिख रहा है।
अनुच्छेद 370 और राजनीतिक भूचाल
2019 में भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर उसे विशेष राज्य का दर्जा छीन लिया। इस कदम के बाद घाटी में व्यापक विरोध-प्रदर्शन, कर्फ्यू और इंटरनेट बंदी देखने को मिली। पाकिस्तान ने इस कदम को शिमला समझौते और अंतरराष्ट्रीय सहमति का उल्लंघन बताया।
आतंकवाद और अलगाववाद की पुनरावृत्ति
1980 के दशक में अलगाववादी भावनाओं के साथ हथियारबंद आंदोलनों की शुरुआत हुई। भारत ने तब आरोप लगाया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां इन संगठनों को समर्थन दे रही हैं। पाकिस्तान का दावा है कि वह केवल नैतिक और कूटनीतिक समर्थन करता है। 2019 में पुलवामा हमले में 40 भारतीय जवानों की शहादत के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट क्षेत्र में एयर स्ट्राइक की थी। अब 2025 का पहलगाम हमला फिर से उसी विभाजनकारी तनाव की याद दिला रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिका सहित वैश्विक शक्तियों ने दोनों देशों से संयम बरतने और युद्ध से बचने की अपील की है। अमेरिकी विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री ने भारत और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं से बातचीत कर तनाव कम करने पर बल दिया है।
कश्मीर का मुद्दा केवल क्षेत्रीय सीमा विवाद नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जटिलता है, जिसे समय-समय पर युद्ध, समझौते और निर्णयों ने केवल और उलझाया है। पहलगाम हमला इस बात की गवाही देता है कि जब तक कश्मीर पर स्पष्ट, न्यायसंगत और संवादपूर्ण हल नहीं निकलता, तब तक ‘गहराते युद्ध का संकट’ पूरे उपमहाद्वीप को अस्थिर करता रहेगा।
पहलगाम की आतंकी घटना के बाद भारत ने न केवल पाकिस्तान संग राजनायिक स्तर को कम किया है, बल्कि सिंधु जल संधि को स्थगित करने, अटारी-बाघा बाॅर्डर बंद करने, सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करने, पाक विमानों के लिए भारतीय हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित करने, पाकिस्तान से आने वाली सभी डाक और पार्सल सेवाओं को रोकने सरीखे कड़े कदम उठा यह स्पष्ट संकेत देने का काम किया है कि यदि जरूरत पड़ी तो भारत पाकिस्तान के खिलाफ जंग का ऐलान भी कर सकता है। भारतीय सेनाओं का माॅक ड्रिल करना तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर तेज होती सैन्य गतिविधियों ने इस आशंका को गहरा दिया है कि युद्ध कभी भी शुरू हो सकता है।
चरम पर पहुंचा तनाव
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की आशंका गहराती जा रही है। पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर किए गए सटीक हमलों ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। सीमा पर सैनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘युद्ध का आह्वान’ करार देते हुए भारत को गम्भीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। वहीं भारतीय सुरक्षा बलों ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के विरुद्ध किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस कायराना हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। इस घटना के बाद भारत सरकार ने एक सख्त और निर्णायक कदम उठाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाक अधिकृत कश्मीर में हमला कर आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया है। यह ऑपरेशन पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के उद्देश्य से चलाया गया। 07 मई को शुरू किए गए ‘ ऑपरेशन सिंदूर’ का लक्ष्य पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 प्रमुख आतंकवादी ठिकानों को समाप्त करना था। इनमें प्रमुख रूप से बहावलपुर, मुरीदके, सियालकोट, कोटली और मुजफ्फराबाद के क्षेत्र शामिल थे। ये सभी ठिकाने आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे। इन स्थानों पर लम्बे समय से आतंकवादी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं और पहलगाम हमले के तार भी इन्हीं संगठनों से जुड़े थे।
इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना की भूमिका निर्णायक रही। राफेल और सुखोई-30 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का उपयोग कर अत्यधिक सटीक हवाई हमले किए गए। इसके साथ ही लोइटरिंग म्यूनिशन (कामिकेज ड्रोन) का इस्तेमाल किया गया, जिससे लक्षित स्थानों पर अचूक हमले किए गए। इसके अतिरिक्त प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलें भी प्रयोग में लाई गईं, जिससे सीमित क्षेत्र में अधिकतम क्षति पहुंचाई जा सके। भारतीय सेना की रिपोर्ट के अनुसार इस ऑपरेशन में 90 से अधिक आतंकवादी ढेर हुए और सभी 9 आतंकी ठिकाने पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए। ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना ने बयान जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया, ताकि क्षेत्रीय तनाव को और न बढ़ाया जाए। भारतीय वायुसेना के हमलों के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘युद्ध का आह्वान’ करार दिया है। पाकिस्तान की सेना ने दावा किया कि उन्होंने दो भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया, हालांकि भारत ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया। पाकिस्तानी सेना ने अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी और भारतीय कार्रवाई का जवाब देने की चेतावनी भी दी।
भारत की इस निर्णायक कार्रवाई के बाद विश्व समुदाय की प्रतिक्रिया मिली-जुली देखने को मिल रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से शांति बनाए रखने और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कूटनीतिक समाधान की जरूरत पर जोर दिया है। रूस और फ्रांस ने भारत के कदम को आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में देखा है और आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के भारतीय प्रयासों की सराहना की है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति बेहद सख्त और स्पष्ट है। किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह देश के भीतर हो या सीमा पार। यह ऑपरेशन भारत की ‘जीरो टाॅलरेंस’ नीति का एक प्रत्यक्ष प्रमाण है और आने वाले समय में आतंकवादी संगठनों के लिए एक कड़ा संदेश भी। ‘ ऑपरेशन सिंदूर’ ने भी यह सिद्ध कर दिया कि भारत अब किसी भी प्रकार के आतंकवादी हमले का जवाब देने में सक्षम है और उसकी सैन्य शक्ति किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। पहलगाम हमले के दोषियों को नष्ट करके भारत ने न सिर्फ अपने नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश भी दिया कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत का रुख अब और अधिक सख्त और निर्णायक है।