Uttarakhand

सत्ता का गढ़, अव्यवस्था की जड़ें विकास के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच फंसा नरेंद्र नगर

पृथक उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद वर्ष 2002 में नरेंद्रनगर विधानसभा अस्तित्व में आई। इससे पहले यह क्षेत्र देवप्रयाग विधानसभा का हिस्सा था। पुराने परिसीमन में नरेंद्रनगर टिहरी लोकसभा क्षेत्र में शामिल था लेकिन नए परिसीमन के बाद इसे गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया। राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र लम्बे समय तक भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। राज्य बनने से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता मातबर सिंह कंडारी लगातार तीन बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। नरेंद्रनगर विधानसभा बनने के बाद पहले ही चुनाव में कांग्रेस ने यह सीट भाजपा से छीनी लेकिन इसके बाद यह सीट फिर से भाजपा के प्रभाव में आती चली गई। वर्तमान में सुबोध उनियाल नरेंद्र नगर विधानसभा से विधायक हैं। वे अब तक चार बार विधायक चुने जा चुके हैं। 2002 में उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता लाखीराम जोशी को 9798 मतों से हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। 2007 में उक्रांद के ओम गोपाल रावत ने उन्हें मात्र 4 मतों से पराजित कर दिया, यह उत्तराखण्ड के सबसे करीबी चुनावी मुकाबलों में गिना जाता है। 2012 में सुबोध उनियाल ने जोरदार वापसी की और फिर 2016 में बगावत कर भाजपा का झंडा उठाया और 2017 तथा 2022 में लगातार चुनाव जीतते हुए नरेंद्रनगर को अपना मजबूत राजनीतिक गढ़ बना लिया। वर्तमान में वे पुष्कर सिंह धामी सरकार में वन, तकनीकी शिक्षा, भाषा और निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री हैं। राजनीतिक ताकत और सत्ता में निरंतर मौजूदगी के बावजूद नरेंद्र नगर विधानसभा आज भी बुनियादी अव्यवस्थाओं से जूझती नजर आती है


करीब डेढ़ लाख की आबादी और 94 हजार मतदाताओं वाली नरेंद्र नगर विधानसभा दो नगर पालिकाओं, मुनि की रेती, ढालवाला और नरेंद्र नगर, एक नगर पंचायत तपोवन, नौ न्याय पंचायतों और पांच पट्टियों, धमान्दस्यूं, दोगी, कुंजणी, क्विली और पालकोट, में फैली हुई है। इन सभी क्षेत्रों की कुल 111 ग्राम सभाएं इस विधानसभा का हिस्सा हैं।

पिछले चार वर्षों में विशेष रूप से मुनि की रेती, ढालवाला और तपोवन जैसे नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या और अस्थायी आबादी में तेज बढ़ोतरी हुई है। चारधाम यात्रा, कुम्भ क्षेत्र और पर्यटन गतिविधियों के चलते यहां हर सीजन में स्थानीय आबादी से कई गुना अधिक लोग पहुंचते हैं लेकिन बुनियादी ढांचा आज भी स्थायी आबादी के अनुरूप ही बना हुआ है। इसका सीधा असर सड़क, सीवर, पेयजल, स्वास्थ्य और ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ रहा है।
 
भूमिधरी : 78 साल बाद भी अधूरा अधिकार

नरेंद्र नगर विधानसभा की सबसे बड़ी और पुरानी समस्या भूमिधरी अधिकार की है। ढालवाला, चैदहबीघा और शीशमझाड़ी क्षेत्रों में लगभग 70 हजार की आबादी आज भी भूमिधरी से वंचित है। यह आबादी पूरी विधानसभा की लगभग आधी जनसंख्या है और हर चुनाव में हार-जीत का निर्णायक फैक्टर रही है।

पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत के अनुसार, भूमिधरी न होने के कारण बेरोजगार युवक अपनी ही जमीन पर दुकान या स्वरोजगार शुरू करने के लिए बैंक से ऋण नहीं ले पाते। केवल नगर पालिका का हाउस टैक्स भूमि स्वामित्व का प्रमाण नहीं माना जाता।

सेवानिवृत्त पेंशनर्स संगठन ढालवाला के अध्यक्ष शूरवीर सिंह चौहान कहते हैं कि यदि भूमिधरी का अधिकार नहीं मिला तो संगठन बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा, जिसमें क्षेत्र के कई सामाजिक संगठन साथ देने को तैयार हैं।
 
सीवर लाइन : 20 साल पुरानी योजना, फायदा शून्य

ढालवाला और चौदह बीघा क्षेत्र की लगभग 30 हजार आबादी आज भी सीवर सुविधा से वंचित है। 20 वर्ष पहले सीवर लाइन बिछाई गई थी लेकिन कनेक्शन नहीं दिए गए।

वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी दिनेश व्यास बताते हैं कि कई वार्डों को आधा-अधूरा जोड़कर छोड़ दिया गया है। वार्ड 8 पूरी तरह बाहर है, वार्ड 9 अधूरा है और वार्ड 10 व 11 को जोड़ा ही नहीं गया। मजबूरी में लोग सीवर को सीधे नालियों में छोड़ रहे हैं जिसका असर गंगा नदी पर भी पड़ रहा है।
 
एक नगर पालिका, दो नियम

ढालवाला मुनि की रेती नगर पालिका में पेयजल को लेकर दो अलग-अलग नियम लागू हैं। मुनि की रेती और शीशमझाड़ी क्षेत्र में पेयजल मीटर नहीं हैं जबकि ढालवाला में मीटर आधारित बिलिंग लागू है।

पत्रकार जितेंद्र चमोली के अनुसार, जहां पर्यटन गतिविधियों के कारण सबसे ज्यादा पानी की खपत होती है, वहीं मीटर नहीं हैं। ढालवाला क्षेत्र के निवासियों को कम खपत के बावजूद ज्यादा बिल देना पड़ रहा है, जिससे जनता में गहरा असंतोष है।
 
ट्रैफिक जाम और अवैध अतिक्रमण

मुनि की रेती, कैलाश गेट, तपोवन, इंद्रमणि बडोनी चौक से ढालवाला तक रोजाना घंटों का ट्रैफिक जाम लगना आम बात हो चुकी है। सप्ताहांत और यात्रा सीजन में स्थिति और विकराल हो जाती है, जिससे बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग तक प्रभावित होता है।

पूर्व सभासद अनुराग पयाल का कहना है कि अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई होते ही राजनीतिक दबाव शुरू हो जाता है और नगर पालिका प्रशासन पीछे हटने को मजबूर हो जाता है।
 
पर्यटन कारोबारी प्रदीप राणा सीधे तौर पर कहते हैं कि जहां भी सरकारी निर्माण होता है, वहां पहले पार्किंग बनती है और बाद में उन पर अवैध खोखे और ठेलियां लग जाती हैं, जिससे सड़कें फिर संकरी हो जाती हैं और जाम बढ़ता जाता है।
 
स्वास्थ्य सेवाएं : सौ साल का अस्पताल, बदहाल वर्तमान

नरेंद्र नगर का ऐतिहासिक श्री देव सुमन चिकित्सालय 22 दिसम्बर 1929 को तत्कालीन टिहरी रियासत में हैली हॉस्पिटल के रूप में स्थापित हुआ था। यह कभी पूरे क्षेत्र के लिए आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र था और ऋषिकेश से भी मरीज यहां इलाज के लिए आते थे।

आज यह अस्पताल सरकारी रिकॉर्ड में उप जिला अस्पताल है लेकिन वास्तविकता यह है कि यहां स्थायी अधीक्षक चिकित्सक नहीं हैं। 2023 में नेत्र सर्जन की मृत्यु के बाद 2024 में नई तैनाती हुई परंतु पिछले सात महीनों से वे मातृत्व अवकाश पर हैं, जिसके चलते 2023 से अब तक एक भी नेत्र सर्जरी नहीं हो पाई। चिकित्सकों के आवास 2017 से निर्माणाधीन हैं और पुराने आवास रहने योग्य नहीं बचे, जिससे कर्मचारी रोज ऋषिकेश या देहरादून से आना-जाना करने को मजबूर हैं। हालांकि मातृत्व सेवाएं और पैथोलॉजी अपेक्षाकृत बेहतर हैं लेकिन गम्भीर मरीजों को आज भी ऋषिकेश या श्रीनगर रेफर किया जाता है जो कई बार जानलेवा साबित होता है।
 
कुम्भ क्षेत्र में शराब: सामाजिक आक्रोश का केंद्र

मुनि की रेती कुम्भ मेला क्षेत्र में शराब का ठेका खुलने से भारी जन आक्रोश है। शराब, मांस और अंडे के कारोबार पर प्रतिबंध वाले क्षेत्र में अंग्रेजी शराब की दुकान खुलने के खिलाफ स्थानीय लोग धरना-प्रदर्शन और आमरण-अनशन तक कर चुके हैं।

आक्रोश उस समय चरम पर पहुंच गया जब 26 अक्टूबर 2025 को शीशमझाड़ी निवासी 28 वर्षीय अजेंद्र कंडारी की शराब ठेके के पास चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब के कारण आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं और क्षेत्र की धार्मिक व पर्यटन छवि को गम्भीर नुकसान पहुंचा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह मुद्दा 2027 विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

दोगी पट्टी : विकास से कटे 40 हजार लोग नरेंद्र नगर विधानसभा की दोगी पट्टी क्षेत्र की 32 ग्राम सभाओं की लगभग 40 हजार आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी है, शिक्षा संस्थानों में विषयों का अभाव है और नकदी फसलों, अदरक, मिर्च, हल्दी, अरबी के लिए कोई ठोस बाजार व्यवस्था नहीं है।

पूर्व प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह कैंतुरा बताते हैं कि ‘हर घर जल, हर घर नल’ योजना केवल मुख्य गांवों तक सीमित रह गई है जबकि सैकड़ों तोक गांव आज भी इससे बाहर हैं। दोगी क्षेत्र में चयनित विकास का माॅडल लागू किया गया है, जहां हाईवे से सटे इलाकों को विकास का चेहरा बनाकर अंदरूनी क्षेत्रों की उपेक्षा की गई है।

सफेद हाथी बनी सरकारी योजनाएं

नरेंद्र नगर विधानसभा में जनहित के लिए करोड़ों की योजनाओं का निर्माण तो हुआ है लेकिन उनका जनता को लाभ आज तक नहीं मिल पाया है। उदाहरण के लिए करोड़ों की लागत से बने कृषि उत्पादन मंडी समिति और जैविक खेती और मूल्य बर्धित उत्कृष्टता केंद्र हैं। नरेंद्र नगर में निर्मित कृषि उत्पादन मंडी समिति भवन आज तक प्रयोग में नहीं आया है तो कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बनने के पांच वर्ष के बाद भी संचालित नहीं हो पाया है।

गौरतलब है कि नरेंद्र नगर के फकोट विकास खंड के सोनी सरोली गांव में 2020 में कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती और मूल्य वर्धित उत्कृष्टता केंद्र की घोषणा की गई थी। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत करोड़ों का फंड जारी किया था। इस योजना अंतर्गत किसानों के लिए उत्पादों के विक्रय हेतु मंडी स्थलों और कलेक्शन सेंटरों का निर्माण किया जाना था। साथ ही उत्तराखण्ड प्रदेश में जैविक कृषि को बढ़ावा देने और अनुसंधान के लिए जैविक खेती और मूल्य वर्धित उत्कृष्टता केंद्र का भी निर्माण होना था।

2020 में क्षेत्रीय विधायक और तत्कालीन त्रिवेंद्र रावत सरकार में कृषि मंत्री रहे सुबोध उनियाल ने नरेंद्र नगर विधानसभा में कृषि उत्पादन मंडी समिति, जैविक खेती और मूल्य वर्धित उत्कृष्टता केंद्र स्वीकृत करवाए जिनके लिए भूमि का चयन से लेकर सभी प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी कर निर्माण कार्य आरम्भ किया गया। 4 करोड़ 98 लाख 26 हजार की लगात से इस केंद्र का निर्माण किया गया जिसमें प्रशिक्षुओं के लिए 24 बेड वाली डोरमेट्री, कार्यालय और स्टाफ आवास शामिल हैं लेकिन आज तक यह केंद्र संचालित ही नहीं हो पाया है।

गौरतलब है कि 2022 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने थे और आदर्श चुनाव संहिता से पूर्व समूचे प्रदेश में निर्माण कार्यों और योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की होड़ लगी हुई थी। इसी होड़ के चलते 7 जनवरी 2022 को नरेंद्र नगर विधानसभा के खाड़ी के समीप कृषि विभाग के कार्यक्रम में एक साथ 8 योजनाओं का लोकार्पण किया गया जिसमें जैविक खेती और मूल्य बर्धित उत्कृष्टता केंद्र का भी लोकार्पण किया गया। स्थानीय जनता और किसानों को आज भी इसकी जानकारी नहीं है कि इस केंद्र का लोकार्पण हो चुका था।

जैविक खेती और मूल्य वर्धित उत्कृष्टता केंद्र का निर्माण करने वाली संस्था कोठारी एसोसिएट, जौली ग्रांट के योगेश कोठारी का कहना है कि उन्होंने इसका निर्माण कार्य 2022 मे पूरा कर दिया था और इस निर्माण कार्य का भुगतान भी उन्हें प्राप्त हो चुका है।

दिलचस्प बात यह है कि करीब 4 करोड़ 88 लाख 26 हजार का भुगतान तो कर दिया गया लेकिन अभी तक इस केंद्र को कृषि विभाग ने अपने अधीन तक नहीं लिया है। इस केंद्र के अतिरिक्त यहां निर्मित कृषि उत्पादन मंडी स्थल समिति का भी हाल ऐसा ही है। नरेंद्रनगर के समीप 9 करोड़ की लागत से मंडी भवन का निर्माण किया गया है। इसमें लाखों रुपए खर्च करके ग्रेडिंग की मशीनें भी लगाई गई हैं लेकिन इस नौ करोड़ के भवन को आज तक उपयोग में नहीं लाया जा सका है।

‘दि संडे पोस्ट’ ने जनवरी 2023 के अंक में ‘नौ करोड़ का सफेद हाथी’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था जिसमें इस बाबत विस्तार से जानकारी दी गई थी। हैरत की बात यह है कि 2023 से लेकर आज तक भी हालात जस के तस हैं। ऐसा सम्भवतः इसलिए हैं कि नरेंद्रनगर और इसके आस-पास के दर्जनों गावों में कृषि नाम मात्र की ही होती है। मंडी स्थल में फसलों की ग्रेडिंग के लिए मशीन लगी है लेकिन इस सम्पूर्ण क्षेत्र में फसलों का उत्पादन भी न के बराबर ही है। अधिकतर किसान जो भी नकदी फसलों जैसे अदरक, मिर्च, अरबी, मंडुवा और झंगोरा का उत्पादन करते हैं वह या तो अपने ही जीवन-यापन के लिए होता है या कुछ हिस्सा नजदीक के आगराखाल बाजार और आगराखाल मंडी में बेच देते हैं। नरेंद्रनगर मंडी स्थल तक फसल को ले जाने पर भाड़ा ज्यादा होने से वह मंडी तक नहीं आता। बावजूद इस क्षेत्र के लिए करोड़ों खर्च करके मंडी स्थल बना दिया गया है।

स्थानीय कारोबारी सुरेंद्र सिंह कंडारी बताते हैं कि यहां किसानों को कलेक्शन सेंटर की जरूरत है जिसमें वे अपनी फसलों को एकत्र कर सके और वहां से व्यापारी उनको खरीदे। इससे किसानों को अपनी कम मात्रा में भी फसल को बेचने के लिए भाड़े की समस्या नहीं होगी। अगर एक किसान 40 किलो आलू या अन्य कोई फसल नरेंद्रनगर मंडी में ले जाता है तो उसको भाड़ा इतना पड़ जाता है कि फसल की आधी कीमत भी वसूल नहीं हो पाती। इसलिए इस क्षेत्र के किसानों को मंडी स्थल के बजाय कलेक्शन सेंटर की जरूरत थी। आगराखाल में ही निजी मंडी वर्षों से चल रही है जिसमें छोटे किसान हर रोज अपनी फसलों को बेचने के लिए आते हैं और उनको उचित कीमत भी मिल जाती है।’’

पूर्व ब्लाॅक प्रमुख और वरिष्ठ कांग्रे\सी नेता वीरेंद्र कंडारी का कहना है कि ‘‘जिस तरह से मंडी समिति में करोड़ों रुपए बर्बाद किए गए हैं वैसे ही ऑर्गेनिक फार्मिंग के नाम पर बनाए गए केंद्र में भी करोड़ों रुपए खर्च करके सरकारी धन को ठिकाने लगाया गया है। स्थानीय किसानों के लिए दोनों ही योजनाएं सफेद हाथी बने हुए हैं।’’
 
नरेंद्र नगर के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजू राणा का कहना है कि ‘‘ज्यादातर योजनाएं चुनावी वर्ष में शुरू की गई है जिनका उपयोग सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ही किया जाता है। सरकारी धन से चुनाव में वोट पाने का सबसे बड़ा प्रमाण नरेंद्र नगर विधानसभा की करोड़ों की योजनाएं हैं जो सिर्फ ठेकेदारों को फायदा पहुचाने और कमीशनखोरी के लिए बनाई गई हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो जमीनी सच्चाई को देखकर योजनाएं बनाई जाती। पहले ही मंडी के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं फिर अनुंसधान जैविक खेती के नाम पर करोड़ों रुपए ठिकाने लगाए गए हैं। हमें आज तक यह नहीं पता कि इसका लोकार्पण किया गया है लेकिन शिलापट्ट में बताया जा रहा है कि इसका 4 साल पहले ही उद्घाटन माननीय मंत्री और विधायक कर चुके हैं। इससे आप समझ सकते हैं कि नरेंद्र नगर में कैसे सरकारी खजाने को ठिकाने लगाया जा रहा है।’’

‘बीस सालों का कुशासन है सुबोध उनियाल का कार्यकाल’
 
कांग्रेस नेता ओम गोपाल रावत से बातचीत पर आधारित

मैं तो केवल एक बार ही विधायक रहा हूं। सुबोध उनियाल जी तो चार बार से विधायक हैं और सरकार में मंत्री भी है। विकास तो एक निरंतर सतत् चलने वाली प्रक्रिया है यह तो रूकती नहीं है। हमारे विधायक और मंत्री सुबोध उनियाल जी के समर्थकों और उनके खास लोगों के एक वर्ग ने जो टैग लगा रखा है कि सुबोध उनियाल जी विकास पुरुष हैं तो हमें उनके विधायक के रूप में 15 सालांे से लगातार तीन कार्यकाल में देखने को नहीं मिला। करोड़ों की योजनाओं का निर्माण हुआ है लेकिन उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। करोड़ों खर्च करके मंडी बना दी गई है लेकिन आज तक एक भी दुकान उस मंडी में नहीं खुल पाई है। मंडी समिति का अध्यक्ष तुरंत अपने आदमी को बनाने में देरी नहीं की। आप देखिए करोड़ों रुपए लगाकर ऐसी योजना बनाई गई है जिससे एक भी किसान को लाभ नहीं मिला। ऐसे ही जैविक खेती के नाम पर करोड़ों रुपए सरकारी खजाने से खर्च करके  संेटर बना दिया गया है जिसका उद्घाटन भी कर दिया, सेंटर खड़ा है इसका उपयोग आज तक नहीं हुआ।
 
नरेंद्रन गर में 5 करोड़ खर्च करके ऑडिटोरियम बनाया गया जो पूरा भी नहीं हुआ और उद्घाटन कर दिया लेकिन उपयोग आज तक नहीं हो पा रहा है। तो ऐसे विकास का हमने क्या करना है? योजनाएं लाई गई हैं लेकिन उसका फायदा सिर्फ ठेकेदारों को ही हुआ है। भारत सरकार उत्तराखण्ड के किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपए भेज रही है लेकिन हमारे विधायक उसको ऐसी योजना में बर्बाद कर रहे हैं जिसका फायदा यहां के किसानों को नहीं हो रहा है। विधायक जी कहते हैं कि मैंने अपने क्षेत्र मंे सड़कों का जाल बिछा दिया जबकि हकीकत में ग्रामीण क्षेत्र के हालत बद से बदतर है। सड़कें टूट-फूट गई हैं, कई सड़कों पर डामरीकरण सालों से नहीं हुआ। नरेंद्रनगर से बड़े-बड़े विभाग चले गए। एससीआरटी तिवारी जी लाए थे वह भी देहरादून शिफ्ट हो गया। सेंटर स्कूल की घोषणा हुई थी लेकिन आज भी उसका कोई पता नहीं है कि कब बनेगा, कहां बनेगा, किस क्षेत्र में बनेगा? सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ही घोषणाएं हो रही हैं। नरेंद्र नगर का अस्तित्व ही खत्म किया जा रहा है। अब तो कहा जा रहा है कि पुलिस ट्रेनिंग सेंटर भी नरेंद्रनगर से शिफ्ट होगा। तो आप बताइए 15 साल के लगातार और पांच साल का एक कार्यकाल कुल मिलाकर 20 साल के कार्यकाल में यही विकास देखने को मिल रहा है।

मुनि की रेती धार्मिक क्षेत्र है कुम्भ मेला के गजट नोटिफिकेशन में होने के बावजूद कुम्भ मेला पार्किंग में ही शराब की दुकान विधायक जी ने खुलवा दी। लोग आंदोलन कर रहे हैं, हड़ताप पर हैं, धरना दे रहे हैं लेकिन उनियाल जी को शराब की दुकान से कोई परेशानी नहीं है। अरे आपने तो हमारे क्षेत्र की धार्मिक पहचान ही खत्म करके उसे शराबी क्षेत्र बना दिया। सोनी गांव में नर्सिंग कॉलेज की स्वीकृति हुई थी जिसको सुरसिंग धार ले गए।
 
अस्पताल रेफर सेंटर बने हुए हैं। टिहरी का सबसे पुराना अस्पताल श्री देव सुमन उप जिला अस्पताल की हालत बदहाल है। कई सालों से डॉक्टरों के आवास निर्माण में चल रहे हैं। कर्मचारियों के आवास रहने लायक नहीं हैं। उप जिला अस्पताल है लेकिन 3 साल से स्टाफ की कमी चल रही है। ढालवाला, चैदहबीघा, शीशमझाड़ी में हजारों लोग निवास करते हैं लेकिन उनको भूमिधरी का अधिकार ही नहीं है। ढालवाला, चौदह बीघा के लोगों को सीवर लाइन नहीं मिल पाई है। एक बात कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है कि विधायक निधि खर्च करने में उनियाल जी आगे हैं लेकिन विधायक निधि से ही विकास होता हो तो आज तक नरेंद्र नगर विधानसभा के हालात ऐसे क्यों है? सुबोध उनियाल जी को उनके लोग लोकप्रिय नेता बताते हैं जबकि वे अपने खास लोगों के क्षेत्रों में ही जाते हैं, कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें सिर्फ चुनाव में वोट लेने के लिए गए हैं लेकिन दोबारा उन क्षेत्रों में उनियाल जी कभी नहीं गए।

नरेंद्र नगर विधानसभा 2025 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक : सुबोध उनियाल (अवधि: 3 वर्ष, 4 कार्यकाल), पद : कैबनेट मंत्री (वन मंत्री)
क्र. क्षेत्र                                                                                                  मुद्दा/जमीनी स्थिति अंक  (10 में)

  1. सड़क व ट्रैफिक रोज जाम, अव्यवस्था 4/10
  2. पेयजल दोहरी नीति, संकट 3/10
  3. स्वास्थ्य सेवाएं अस्पताल बदहाल 3/10
  4. सीवर व शहरी प्रबंधन 20 साल से अधूरा 2.5/10
  5. शिक्षा काॅलेज हैं, संसाधन नहीं 3/10
  6. रोजगार व कृषि बाजार व नीति का अभाव 3/10
  7. पर्यटन प्रबंधन अनियोजित विकास 2.5/10
  8. भूमिधरी 70 हजार आज भी वंचित 2/10
  9. प्रशासनिक निगरानी योजनाएं कागजों में 3/10
  10. नेतृत्व व जवाबदेही राजनीतिक ताकत, विकास कमजोर 4/10
औसत :  3/10 फाइनल ग्रेड : फेल

‘विकास कार्यों में अव्वल है मेरी विधानसभा’
 
नरेंद्रनगर से लगातार चार बार से विधायक सुबोध उनियाल के खाते में अनेक उपलब्धियां दर्ज हैं। सड़कों का जाल और उनके विस्तार के मामले मे भी नरेंद्रनगर विधानसभा सबसे आगे नजर आती है। अनेक बड़ी योजनाएं भी नरेंद्रनगर में स्थापित हुई हैं जिनमें किसानों के लिए मंडी स्थल और मंडी समिति, जैविक खेती के लिए अनुसंधान केंद्र के अलावा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, ऑडिटोरियम जैसी करोड़ों की योजनाएं विकास के विजन को सामने रखती हैं। हालांकि कई मामलों में योजनाओं को लेकर विरोधाभास भी देखने को मिला है। विधानसभा में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अन्य क्षेत्रों के मुकाबले विकास कार्य उतने नहीं दिखाई दिए जिससे जनता के एक बड़े वर्ग में उनकेे प्रति नाराजगी भी है। इन्हीं तमाम सवालांे और उनियाल के 20 वर्ष के कार्यकाल में विकास यात्रा पर ‘दि संडे पोस्ट’ विशेष संवाददाता कृष्ण कुमार ने सुबोध उनियाल से बातचीत की

आपके बीस वर्ष का कार्यकाल होने वाला है। लगातार तीन बार से आप क्षेत्र के विधायक हैं। अपने कार्यकाल में क्षेत्र में क्या-क्या विकास कार्य करवाए हैं?

आप अगर 2002 से तुलना करेंगे तो आप ढालवाला को लें, तपोवन को लें, मुनि की रेती को ले, नरेंद्रनगर को लें या पूरी विधानसभा क्षेत्र को लें, जहां पहले कुल 321 किलोमीटर सड़कंे थीं। आज पूरी विधानसभा क्षेत्र में 3 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ है। जहां केवल एक भरपूर पम्पिंग योजना से पेयजल की आपूर्ति होती थी वहां हमने आज 16 पम्पिंग योजनाओं का निर्माण करवा कर पेयजल की आपूर्ति की है। पहले नरेंद्र नगर में एक भी डिग्री कॉलेज नहीं था आज चार डिग्री कॉलेज की स्थापना करवाई हैं। पहले कुल 22 हाईस्कूल और इंटर कॉलेज थे आज 22 हाईस्कूल और 44 इंटर कॉलेज हैं। जहां एक आईटीआई था वहां आज 5 आईटीआई खोले गए हैं। पहले सिर्फ एक पाॅलिटेक्निक था वहां आज 3 पाॅलिटेक्निक काॅलेज खोले गए हैं जो बेहतर चल रहे हैं। पूरे प्रदेश में 70 पाॅलिटेक्निक है तो नरेंद्र नगर में सबसे ज्यादा 3 पाॅलिटेक्निक काॅलेज हैं। पहले बिजली का एक सब स्टेशन था आज 10 सब स्टेशन स्थापित हो चुके हैं। पहले मेरे क्षेत्र में 15 प्रतिशत गांव ही विद्युत से जुड़े थे। मैंने अपने पहले पांच वर्ष के कार्यकाल में ही 100 प्रतिशात गांव में विद्युतीकरण कर दिया था। इसके अलावा नरेंद्र नगर में पुलिस ट्रेनिंग काॅलेज, मुनि की रेती में जानकी सेतु, लक्ष्मण झूला में बजरंग सेतु, ऋषिकेश से लेकर रामझूला तक आस्था पथ का निर्माण, तपोवन में सच्चाधाम घाट, छठ पूजा घाट का निर्माण करवाया है।
साथ ही मंडी समिति का निर्माण, जैविक कृषि के लिए सेंटर, ऑडिटोरियम का निर्माण करवाया है। लाॅ काॅलेज की स्वीकृति, सेंटर स्कूल की स्वीकृति, पावकी देवी क्षेत्र में तहसील की स्वीकृति, डिग्री काॅलेज का निर्माण करना राजीव नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की स्थापना करना आदि मेरे द्वारा करवाए गए कामों में शामिल हैं। कभी नरेंद्र नगर एक मृत शहर हुआ करता था लेकिन आज नरेंद्र नगर पूरे प्रदेश में अकेला ऐसा क्षेत्र है जहां सर्वाधिक फाइव स्टार होटल हैं, कई निर्माणाधीन हैं जिससे नरेंद्र नगर पर्यटन के क्षेत्र में सबसे बड़ा क्षेत्र बन चुका है। कृषि मंत्री के रूप में मैंने किसानों और दुर्गम क्षेत्र के लोगों को जहां कृषि उपज को बाजार तक लाने में परेशानियां होती थी, उन क्षेत्रों में 100 सड़कों का निर्माण करवाया है। कृषि के क्षेत्र में अनेक योजनाएं पूरे प्रदेश के साथ-साथ अपने क्षेत्र को दी है। वन मंत्री के रूप में किसानों को सोलर लाइटें बंटवाई गई हैं, सोलर फेसिंग के माध्यम से जंगली जीवों से फसलों की सुरक्षा पर काम किया जा रहा है।

सबसे बड़ी बात है कि मुनि की रेती नगर पंचायत को नगर पालिका बनवाना जिसका विस्तार करके ढालवाला को भी नगर पालिका क्षेत्र में जोड़ा गया है। तपोवन को नगर पंचायत क्षेत्र बनवाया। नरेंद्र नगर पालिका का सीमा विस्तार करवाया। गजा में उप तहसील दी जिसे बाद में तहसील बनाया और उसका निर्माण करवाया। ये इतने काम हैं जो मैंने अपने कार्यकाल में अपनी विधानसभा में करवाए हैं। आप किसी भी विधानसभा से तुलना कर लीजिए नरेंद्र नगर से ज्यादा काम किसी में नहीं हुए हैं। ढालवाला शीशमझाड़ी में बाढ़ की बड़ी समस्या थी इसके लिए बाढ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए तटबंधों का काम करवाए। चंद्रभागा नदी के तट पर तटबंधों का निर्माण शीशमझाड़ी में गंगा नदी के तट पर तटबंध आस्थापथ का निर्माण करवाया। जनता से आप कितना जुड़ते हैं आपका कितना जुड़ाव है यह देखा जाता है। मेरे विरोधी भी तो विधायक रहे हैं जरा उनसे तो पूछिए कि उन्होंने कितना काम अपने कार्यकाल में करवाया है। लेकिन आपको नेगेटिविटी ही देखनी है, पाॅजिटिव तो आप देखते नहीं। मेरे कार्यकाल में मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि 40 साल के राजनीतिक जीवन में एक बार भी मुझ पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा। मैं इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता हूं।

नरेंद्र नगर में आप कई योजनाएं और विभाग लाए जरूर लेकिन उनमें से कई शिफ्ट भी हो गईं?

2002 से मुझे कोई एक ऐसा विभाग का कार्यालय बता दो जो यहां से गया हो। नरेंद्र नगर में जो योजनाएं लाई गई हैं उसके पीछे मेरी यह सोच थी कि आने वाले पचास सालों में नरेंद्र नगर एक महानगर के रूप में स्थापित हो। इसी सोच को लेकर नरेंद्र नगर नगर पालिका का विस्तार किया गया। ऐसे ही सोच के साथ सोनी गांव में जैविक खेती के अनुसंधान का केंद्र खोला गया। जितनी भी योजनाएं हैं उनका फायदा आने वाले समय में नरेंद्र नगर को मिलेगा।

आपकी ही विधानसभा का दोगी पट्टी क्षेत्र में बहुत-सी समस्याएं हैं वहां विकास क्यों नहीं पहुंच पाया?

दोगी क्षेत्र में मैंने जितने काम करवाए हैं उतने किसी ने कभी नहीं करवाए होंगे। दोगी के ही पावकी देवी में डिग्री कॉलेज खुलवाया, पावकी देवी को तहसील बनवाया। पहले दोगी क्षेत्र को सुदूर क्षेत्र कहा जाता था। पहले कोई अधिकारी-कर्मचारी दोगी क्षेत्र में जाना पंसद नहीं करता था। आज मैंने इतने काम करवाए हैं कि अब हर कोई दोगी क्षेत्र में काम करने को तैयार है। पहले यहां सड़कंे नहीं थी अब हर गांव तक सड़क पहुंच चुकी है। आज हर कोई दोगी में काम करके शाम को आसानी से अपने घर में पहुंच जाता है। पूरा क्षेत्र पर्यटन का एक हब बन चुका है। अनेक होटल, रिसोर्ट इस क्षेत्र में बन गए हैं और कइयों का निर्माण चल रहा है। इनसे स्थानीय लोगों को ही रोजगार मिल रहा है। शिवपुरी क्षेत्र तो राफ्टिंग का प्रमुख स्थान बन चुका है।  जाजल शिवपुरी रोड का निर्माण चल रहा है जो कि जल्द ही पूरा हो जाएगा। गूलर-गजा नई रोड का निर्माण किया है। मेरा मकसद है कि हर गांव हर क्षेत्र को आपस में कनेक्टिविटी मिले। भरपूर को दोगी से जोड़ने के मिंडाथ घेरगांव होते हुए सड़क का निर्माण करवाया जो भरपूर को दोगी से जोड़ रही है। मेरा प्रयास है कि आने वाले समय में हर क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े। गांवांे को शहरी क्षेत्र से जोड़ने का प्रयास किया है, इसी के कारण ढालवाला जो ग्रामसभा थी उसे मुनि की रेती नगर पालिका क्षेत्र में जोड़ा। दोगी के बागी में पावकी देवी में डिग्री काॅलेज, अस्पताल, पशु अस्पताल आईटीआई का निर्माण करवाया गया ताकि भविष्य में दोगी और इसके जैसे क्षेत्रों के लिए विकास का रास्ता बने। खाड़ी में सीएससी का निर्माण डिग्री काॅलेज का निर्माण किया गया जिससे भविष्य में कुंजणी पट्टी में भी एक खाड़ी को एक नगर के रूप में विकसित किया जाए। आज शिवपुरी जिस तरह से एक नगर के रूप में तेजी से बढ़ रहा है तो भविष्य में इसको कैसे नगर के क्षेत्र में विकसित करें इसकी भी योजना पर काम किया जा रहा है। आने वाले समय में बागी, पावकी देवी या शिवपुरी हो यह सभी भविष्य में एक बड़े शहर के रूप में विकसित हो जिससे इन क्षेत्रों का समुचित विकास हो और रोजगार के साधन विकसित हो, पलायन रूके।

ढालवाला और चौदह बीघा में भूमिधरी की मांग वर्षों से चली आ रही है लेकिन अभी भी भूमिधरी की मांग क्यों पूरी नहीं हो पा रही है?

देखिए, सिर्फ ढालवाला मुनि की रेती शीशमझाड़ी  हो या चैदह बीघा का मामला नहीं है पूरे प्रदेश में ऐसे तमाम मामले हैं जिनकी मांग वर्षों से हो रही है। 2002 से 2007 तक तिवारी जी मुख्यमंत्री थे तो मैं अकेला ऐसा विधायक था जिसको उन्होंने चकबंदी समिति में रखा। हमने वर्ग चार की भूमि को भूमिधरी का निर्णय लिया। मुझे भी ज्ञान नहीं था और ढालवाला में जो लोग वर्षों से रह रहे थे किसी ने भी मुझे यह नहीं बताया कि वर्ग चार के अलावा भी भूमि होती है। मेरे तो धन्यवाद के होर्डिंग तक लग गए थे कि मैंने ढालवाला को भूमिधरी का अधिकार दिलवा दिया। बाद में ज्ञात हुआ कि वर्ग चार की तो बहुत ही सीमित भूमि प्रदेश के पास है। अब हमें इसका ज्ञात हो गया। अब सरकार ने कैबिनेट की मेरी अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है जिसमें अतिक्रमित जमीन को नियमितीकरण करने पर काम कर रही है। कमेटी द्वारा पूरे प्रदेश के जिलाधिकारियों से अतिक्रमित भूमि की सूची मांगी गई है। कमेटी का निर्णय लेने का अधिकार है कमेटी इस पर जो भी निर्णय लेगी वह जनता के हित में ही होगा।

ढालवाला, मुनि की रेती, तपोवन क्षेत्र में ट्रैफिक जाम एक विकराल समस्या बन चुकी है?

मेरे विधायक बनने के बाद इन क्षेत्रों में सौ से ज्यादा सड़कों का निर्माण हुआ है लेकिन जिस तरह से इन क्षेत्रों को टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने का काम कर रहे हैं, कौड़ियाला और शिवपुरी को अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित किया गया है। उससे पिछले साल सर्वाधिक 65 लाख टूरिस्ट और यात्री इन्हीं क्षेत्रों में आए। इसके लिए भारत सरकार द्वारा ऑल वेदर रोड का निर्माण किया गया। बाईपास निर्माण की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे बाहर ही बाहर टूरिस्टों, यात्रियों को निकाला जाए। इसके लिए नया प्लान भी लागू किया गया। जिनको टिहरी जाना है वे नेपाली फार्म से छिद्दवाला होते हुए रानी पोखरी से नरेंद्र नगर के रास्ते टिहरी जा सकते हैं इसीलिए रानीपोखरी-नरेंद्रनगर जैसी अतिमहत्वपूर्ण सड़क का निर्माण किया गया। इससे जिस टूरिस्ट को शिवपुरी जाना है वह नरेंद्रनगर से पीटीसी होते हुए सीधा शिवपुरी निकल जाएगा। इससे मुनि की रेती, तपोवन पर ट्रैफिक का बोझ नहीं पड़ेगा।

मुनि की रेती कुम्भ मेला पार्किंग क्षेत्र में शराब की दुकान को लेकर आंदोलन चल रहा है। एक धार्मिक क्षेत्र में शराब का कारोबार क्यों?

ऐसा है, मुझे ये बताएं कि जब वहां शराब की दुकान नहीं थी तो क्या कोई शराब नहीं पीता था? ये सब शराब माफियाओं द्वारा ही विरोध किया जा रहा है ताकि उनकी अवैध शराब इस क्षेत्र में बिक सके और वे नम्बर दो की शराब बिकवा कर अपना कारोबार पहले जैसे कर सके और लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर सकें।

करोड़ों की मंडी और जैविक कृषि अनुसंधान केंद्र आपके कार्यकाल में बनवाया गया। लेकिन आज तक मंडी में दुकानें नहीं खुली और जैविक कृषि अनुसंधान केंद्र बन गया लेकिन वह अभी विभाग को हैंड ओवर ही नहीं हुआ। इसका फायदा क्षेत्र की जनता को नहीं मिल पा रहा है?

मंडी बनी, उसका संचालन हुआ, समिति के अध्यक्ष ढाई साल तक बीर सिंह रावत रहे, दुकानों का भी आंवटन किया गया क्योंकि मंडी स्थल शहर से दूर होने के कारण लोगों को असुविधा महसूस हो रही है। मैं समझता हूं कि जिस तरह से लाॅ काॅलेज का निर्माण डागर में किया जा रहा है, माली ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण डागर में किया जा रहा है। डागर में ही नरेंद्रनगर बस अड्डा बनाया जा रहा है, ये सभी काम होने के बाद निश्चित रूप से लोगों का आवागमन बढ़ेगा तो मंडी चलेगी। जैविक कृषि अनुसंधान केंद्र में हैंडओवर में कुछ कमियां हैं जिसके लिए मैंने डायरेक्टर को कहा है कि बहुत जल्द ही इस सेंटर में काम आरम्भ किया जाए।

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