Uttarakhand

सवालों में स्मार्ट मीटर

केंद्र सरकार ने देश में बिजली वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना (Revamped Disttribution Sector Scheme) की शुरुआत करते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का निर्णय 30 जुलाई 2021 में लिया था। उत्तराखण्ड में भी लाखों प्रीपेड मीटर लगवाने की योजना है। इस योजना के शुरू होते ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ ने सड़कों पर मीटर तोड़कर इस मुद्दे को राजनीतिक रूप दे दिया है। फिलहाल यह मामला कांग्रेस बनाम भाजपा की लड़ाई में तब्दील होता नजर आ रहा है। इससे जनता भ्रम की स्थिति में है। सत्तारूढ़ पार्टी और विद्युत विभाग का दावा है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए बहुत लाभदायक है। बिल सम्बंधित समस्याओं सहित कई मामलों में उपभोक्ताओं को राहत की बात कही जा रही है तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे जन धन की लूट करार दे रहा है
बारह फरवरी का दिन था जब किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ सड़क के बीचोंबीच बिजली के प्रीपेड मीटर तोड़ रहे थे। इस दौरान वह बहुत गुस्से में नजर आ रहे थे। साथ ही वे भाजपा सरकार के खिलाफ बयानबाजी भी करते दिखे। आखिर क्या वजह रही कि तिलकराज बेहड़ जो काफी दिनों से बीमारी से जूझ रहे थे वे अचानक इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए और सुर्खियों में आ गए? आखिर क्या है वह प्रीपेड मीटर प्रणाली जिससे बेहड़ के विरोध प्रदर्शन बाद प्रदेश में भ्रम की स्थिति बन गई है? इससे जनता को फायदा होगा या नुकसान इसे जानने के लिए इस मामले की तह में जाना होगा।
जानकारी के अनुसार किच्छा के कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़़ को सूचना मिली थी कि उनकी विधानसभा क्षेत्र में स्थित शंकर फार्म में ठेकेदार की ओर से बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की कार्रवाई की जा रही है। जिस पर ग्रामीणों ने विरोध किया। साथ ही ग्रामीणों ने विधुत विभाग के कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि उन्हें धमकाया जा रहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर न लगाने पर 10 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। अगर नहीं माने तो मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
यह सूचना मिलते ही विधायक बेहड़़ तत्काल मौके पर पहुंचे। जहां उन्होंने गांव में ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा रहे कर्मचारियों की मोटरसाइकिल से स्मार्ट मीटर उतार कर उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई। विधायक बेहड़़ यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने गुस्से में आकर डिब्बे से स्मार्ट प्रीपेड मीटर निकाल कर उन्हें सड़क पर पटक कर तोड़ना शुरू कर दिया। बेहड़ की इस दौरान किसी ने वीडियो बना ली। जिसे वायरल कर दिया गया। इस वीडियो में  बेहड़़ साफ-साफ कहते सुनाई दे रहे हैं कि जहां भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे वहीं पर विरोध होगा। किसी भी कीमत पर मीटर लगने नहीं दिया जाएंगे। किसी भी गरीब का खून चूसने नहीं दिया जाएगा। जहां-जहां विरोध होगा, वहां-वहां पर तिलक राज बेहड़़ पहुंचेंगे और जनता के साथ खड़े नजर आएंगे। आज उन्होंने इसके विरोध में मीटरों को तोड़ा है। अगर उनके खिलाफ मुकदमा भी होता है तो वह इसके लिए तैयार हैं।
प्रीपेड मीटर के मुद्दे को उठाने पर सरकार ने मेरी दुकानों पर छापा मारकर मुझे प्रेशर में लेने की कोशिश की है। मैं किसी भी प्रेशर में नहीं आऊंगा। विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाऊंगा। गरीब जनता के हितों से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
तिलकराज बेहड़, विधायक किच्छा
इसके अगले दिन इस मुद्दे पर किच्छा के विधायक तिलकराज बेहड़ ने अपने साथ खटीमा के विधायक और उप नेता सदन भुवन कापड़ी, जसपुर विधायक आदेश चौहान और रुद्रपुर से कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी रहे मोहन लाल खेड़ा को लेकर एक संयुक्त प्रेस काॅन्फ्रेंस कर स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध का ऐलान किया। बेहड़़ ने ऐलान किया कि वह 19 फरवरी को विधानसभा में स्मार्ट मीटर लेकर जाएंगे और विरोध जताएंगे। यहीं नहीं बल्कि रुद्रपुर में अपने आवास के पास पार्क में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद विधायक बेहड़़ ने किच्छा, रुद्रपुर और गदरपुर में स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध जताते हुए अडानी कम्पनी की सांकेतिक शव यात्रा निकाली। श्मशान घाट में पुतले का संस्कार भी किया गया। बेहड़ ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता को गुमराह कर उन्हें डराकर, चोरी-छिपे प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर बड़ा खेल हुआ है। कुमाऊं में स्मार्ट मीटर लगाने का काम अडानी की कम्पनी को मिला है। उन्होंने कहा कि अडानी की कम्पनी अपने मीटर नहीं बना रही है। वह दूसरी कंपनियों से मीटर खरीद रही है और उस पर अपनी मार्किंग कर रही है। अडानी की कम्पनी के पास सिर्फ स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका है, अपनी कम्पनी का नाम लिखने का नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली को निजीकरण की ओर ले जाया जा रहा है और यह इसकी शुरुआत है।
बेहड़ से शुरू हुई स्मार्ट मीटर की यह लड़ाई भाजपा बनाम कांग्रेस की हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस लड़ाई में बेहड़ की काफी तारीफ की और अपनी फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि ‘बिजली के प्रीपेड मीटर लगाने के विरोध करने का, कांग्रेस का निर्णय सराहनीय है। विद्युत अब अति आवश्यक वस्तु है और यह प्रीपेड मीटर, विद्युत वितरण व्यवस्था के प्राइवेटाइजेशन की दिशा में एक मजबूत और महत्वपूर्ण पहल है। एक बार यदि अति आवश्यकता की आपूर्ति यदि प्राइवेट हाथों में आ जाएगी तो फिर सामान्य उपभोक्ता का तो भगवान मालिक है, बैकअप कांग्रेस।’
प्रीपेड स्मार्ट मीटर की व्यवस्था पूरी तरह स्वैच्छिक है। हां, यह जरूर है कि जो स्वेच्छा से अपने मीटर प्रीपेड स्मार्ट मीटर में तब्दील कराएगा उसे बिजली के बिलों में मासिक तीन से चार प्रतिशत तक छूट दी जाएगी। स्मार्ट मीटर राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है और पूरे देश में इसे लागू किया जा रहा है।
आर. मीनाक्षीसुंदरम, प्रमुख सचिव ऊर्जा
खटीमा के विधायक और उप नेता सदन भुवन कापड़ी ने कहा कि प्रीपेड मीटर चोरी- छिपे लगने शुरू हो गए हैं। यह मीटर वहां लगाए जा रहे हैं, जहां सबसे गरीब जनता रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि डरा-धमकाकर मीटर लगाए जा रहे हैं। सबसे पहले सरकार ने कहा कि कनेक्शन उन्हीं के घर लगाए जाएंगे, जिनके पास भूमिधरी अधिकार हैं। वहीं जो लोग भूमिधरी नहीं हैं और स्टाम्प की जमीन पर काबिज हैं, उनके शुल्क को तीन से चार गुना कर दिया। यह तैयारी सिर्फ बिजली विभाग को निजीकरण की ओर ले जाने की है।
क्या है स्मार्ट मीटर
स्मार्ट मीटर दो तरह के होते हैं एक पोस्टपेड तो दूसरे प्रीपेड। पोस्टपेड में बिजली प्रयोग करने के बाद आपका बिल आएगा तो वहीं दूसरी तरफ प्रीपेड मीटर उस तरह होगा जैसे मोबाइल डेटा के लिए रिचार्ज किया जाता है उसी तरह बिजली के लिए भी रिचार्ज किया जाएगा। विद्युत विभाग द्वारा दावा किया जा रहा है कि इससे उपभोक्ताओं को कई तरह से राहत मिलेगी। साथ ही विभाग लोगों को स्मार्ट मीटर के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने की शुरुआत ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर सबसे पहले प्रदेश के मंत्री और वह खुद स्मार्ट मीटर लगवाएंगे।
ऊर्जा विभाग स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं के बीच स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को शुरू कर चुका है। विशेष बात यह है कि आम उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के घर से स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत की गई है। उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक से लेकर बाकी अधिकारियों के घरों पर भी स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और तमाम दूसरे मंत्रियों के साथ ही सरकारी विभागों में भी स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। जिससे आम लोग भी इसके लिए प्रोत्साहित हो सकें।
बताया जा रहा है कि उत्तराखण्ड में करीब 16 लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने हैं। उपभोक्ता न्यूनतम 100 का स्मार्ट मीटर में रिचार्ज कर सकते हैं। विद्युत विभाग का दावा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की इस नई व्यवस्था से बिजली के बिलों की समस्या से छुटकारा मिलेगा। गलत मीटर रीडिंग और बिजली के बिलों की समस्या भी खत्म होगी। इसके अलावा बिजली चोरी की बड़ी समस्या भी इससे काफी हद तक रोकी जा सकेगी। यहां यह भी बताना जरूरी है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की योजना केंद्र की है। देशभर में इसी तरह स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। स्मार्ट मीटर का फायदा यह रहेगा की अपने घरों में खर्च होने वाली बिजली की पल-पल रिपोर्ट मोबाइल के माध्यम से उपभोक्ता को मिलती रहेगी। उपभोक्ता बिजली के इस्तेमाल को लेकर इन्हीं जानकारी के आधार पर पूरा नियंत्रण कर सकेगा। उपभोक्ता जितनी चाहे उतनी बिजली ले सकता है।
उपभोक्ता को यह होगा फायदा
 बिलों की अवधि या शुल्क सम्बंधी सभी विवाद खत्म हो जाएंगे। उपभोक्ताओं को प्रतिभूति राशि भी नहीं देनी होगी। जो प्रतिभूति राशि पहले से जमा है, वह लौटा दी जाएगी। रिचार्ज खत्म होने के बाद एक अवधि तक बिजली आपूर्ति होगी और इसके बाद स्वतः कट जाएगी। बिजली कनेक्शन जोड़ने, काटने, मीटर रीडिंग लेने, बिल पहुंचाने, बिल भुगतान देरी पर जुर्माने की सभी परंपराएं भी इसके साथ ही खत्म हो जाएंगी।
विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
गत विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल के दौरान राज्य में प्रीपेड बिजली मीटरों पर चर्चा हो चुकी है। इस चर्चा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदस्यों को यह समझाने का प्रयास किया कि राज्य में प्रस्तावित व्यवस्था राज्य और उपभोक्ताओं के व्यापक हित में है। धामी ने यह टिप्पणी कांग्रेस विधायक ममता राकेश द्वारा पूछे गए प्रश्न पर चर्चा के दौरान की।
ममता राकेश ने दावा किया था कि यह प्रीपेड मीटर प्रणाली किसानों के हित में नहीं है, क्योंकि उनके पास आय के नियमित और मासिक स्रोत नहीं हैं। वे इसके कारण या बकाया राशि मिलने की प्रतीक्षा में मीटर रिचार्ज नहीं करा पाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आम किसानों और गन्ना किसानों को उनकी उपज का बकाया समय पर नहीं मिलता है और इसलिए उनके लिए मासिक आधार पर अपने बिजली मीटर रिचार्ज कराना सम्भव नहीं होगा और परिणामस्वरूप, उनका कनेक्शन काट दिया जाएगा या बिजली आपूर्ति नहीं होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि यूपी जैसे कुछ राज्यों में किसानों को 24 घंटे मुफ्त बिजली मिल रही है। साथ ही उन्होंने यह भी आशंका जताई कि राज्य में हाल ही में शुरू की गई मासिक बिलिंग प्रणाली के कारण उपभोक्ताओं को द्विमासिक बिलिंग की तुलना में अधिक महंगी बिजली मिलती है।
मुख्यमंत्री धामी जो कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री भी हैं, ने अपने जवाब में कहा कि बिजली दरें उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) द्वारा तय की जाती हैं और मासिक आधार पर बिलिंग चक्र बदलने से उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उपभोक्ता का रिचार्ज रात के समय या छुट्टी के दिन खत्म हो जाता है, तो बिजली आपूर्ति नहीं काटी जाएगी और उपभोक्ता अगले कार्य दिवस पर अपना मीटर रिचार्ज करा सकता है। बीच की अवधि में खपत की गई बिजली की लागत रिचार्ज के बाद उपभोक्ताओं के खाते से स्वचालित रूप से समायोजित हो जाएगी। उपभोक्ताओं के पास मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपने मीटर रिचार्ज करने का विकल्प होगा। प्रीपेड उपभोक्ताओं को घरेलू कनेक्शन के मामले में 4 प्रतिशत की छूट भी मिलेगी।

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