यूपी की सियासत में अपना स्वर्णकाल देख चुकीं बीएसपी अब लगभग रसातल की ओर है। पार्टी को पारिवारिक कलह से भी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इस बात को बल मिला मायावती द्वारा अपने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म एक्स पर लिखी उस पोस्ट से जिसमें उन्होंने लिखा ‘बीएसपी की ओर से खासकर दक्षिणी राज्यों के प्रभारी रहे डाॅ. अशोक सिद्धार्थ, पूर्व सांसद को चेतावनी देने के बावजूद गुटबाजी, पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी से तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया जाता है।’ इसके बाद लगातार सवाल उठ रहे हैं कि सिद्धार्थ को साइडलाइन क्यों किया। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस निष्कासन के पीछे अशोक का बढ़ता रसूख भी एक वजह है। अशोक के बेटे की शादी 9 फरवरी को लखनऊ में थी जिसमें बीएसपी के पूर्वांचल और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई मंडलों के बड़े नेता शामिल हुए थे। इसके अगले दिन ही ये फैसला लिया गया।
मायावती से रिश्तेदारी के बाद अशोक सिद्धार्थ का कद पार्टी में बढ़ गया था। ये मामला पार्टी की दिल्ली में हुई बैठक में कुछ लोगों ने उठाया था। अशोक सिद्धार्थ मायावती के रिश्तेदार बनने से पहले राज्यसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा से मार्च 2023 में मायावती के भतीजे आकाश आनंद की शादी हुई थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक मायावती की नाराजगी अशोक सिद्धार्थ का अपना गुट बनाने की वजह से है। वे कुछ फैसले मायावती से इजाजत लिए बिना लेते रहे। उससे भी पार्टी के भीतर असंतोष था।

दिल्ली चुनाव मायावती ने आकाश आनंद के हवाले कर दिया था लेकिन पार्टी के उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए हैं। पार्टी का जो वोट का शेयर 2020 में तकरीबन 0.7 फीसदी था वो 2025 में कम होकर 0.5 फीसदी रह गया है। मेरठ के नितिन भी सिद्धार्थ के करीबियों में थे और दिल्ली के चुनाव में आकाश आनंद के सहायक के तौर पर काम कर रहे थे।
आकाश आनंद मायावती के भतीजे हैं। उनको मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा था। आकाश आक्रामक राजनीति के हिमायती हैं। लोकसभा चुनाव में बीजेपी पर जोरदार हमला किया था लेकिन मायावती ने उनको पद से हटा दिया था। हालांकि बाद में उनको पद पर बहाल कर दिया था। हरियाणा और दिल्ली के चुनाव में अहम जिम्मेदारी भी दी थी। आकाश आनंद के भाई और मायावती के दूसरे भतीजे ईशान आनंद सार्वजनिक तौर पर मायावती के जन्मदिन के मौके पर दिखाई दिए थे। तब से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि ईशान भी राजनीतिक पारी शुरू कर सकते हैं। खबर है कि उनके दोनों भतीजों के बीच अनबन गहरी हो गई है जिससे पार्टी से अशोक सिद्धार्थ के निष्कासन को आधार मिल गया।
दरअसल मायावती के जन्मदिन के मौके पर उनके छोटे भतीजे ईशान भी नजर आए। तब यह कयास लगाए जाने लगे कि उनकी भी राजनीतिक पारी शुरू होने जा रही है। यह भी चर्चा हुई कि आकाश आनंद पूरी तरह सफल नहीं हो पाए। इसलिए दूसरे भतीजे को जाने की तैयारी है। लेकिन तब ईशान को लेकर नकारात्मक खबरें चलाई गई। यह माना गया कि इसके पीछे अशोक सिद्धार्थ का ही हाथ है। यही नहीं अशोक पर पुराने नेताओं की अनदेखी के भी आरोप हैं। इसलिए उन पर कार्रवाई कर यह संदेश दिया गया कि फैसला लेने का अधिकार सिर्फ पार्टी प्रमुख मायावती को ही है।

अशोक सिद्धार्थ मायावती के बड़े भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं। कुछ वक्त पहले तक आकाश आनंद मायावती के आंखों के तारा थे लेकिन उनके ससुर को निकालने का फैसला कर उन्होंने बीएसपी की राजनीति पर करीबी नजर रखने वालों को चैंका दिया है। मायावती के इस सख्त फैसले के बाद अटकलें हैं कि उनके दूसरे भतीजे ईशान आनंद का पार्टी में कद बढ़ेगा हालांकि सियासत में खुद पार्टी पुराना कद बरकरार रख पाएगी ये भी बड़ा सवाल है।

