मेरे लिए, जारा के साथ काम करना सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि एक मिशन था। हमने न केवल डिजाइन्स बनाए, बल्कि अपने भीतर की सीमाओं को तोड़कर सीखा कि कैसे वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बनाई जाती है। अमान्सियो ओर्तेगा की कहानी हम सबको सिखाती है कि कोई भी सपना, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर उसमें जुनून और मेहनत लगी हो, तो वह सच हो सकता है। जारा के 50 साल इस बात का प्रमाण हैं कि फैशन केवल रैंप पर चलने वाली माॅडल्स तक सीमित नहीं, बल्कि करोड़ों आम लोगों के सपनों का हिस्सा है और मेरा सौभाग्य है कि मैं इस कहानी की एक छोटी सी किरदार रही हूं
गीतिका क्वीरा फैशन डिजाइनर और वस्त्र निर्यातक
वर्ष 1975 में स्पेन के छोटे से शहर ला कोरोन्या के एक कोने पर एक साधारण दुकान खुली जिसका नाम रखा गया ‘जोरबा’। यही ‘जोरबा’ आज का ‘जारा’ ब्रांड है। उस समय शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह छोटी-सी दुकान आने वाले पांच दशकों में दुनिया के सबसे बड़े फैशन साम्राज्य (इंडिटेक्स) ग्रुप की नींव रखेगी। इस दुकान के मालिक थे अमान्सियो ओर्तेगा, जो शर्ट मेकर के डिलीवरी ब्वाॅय के रूप में काम करते-करते फैशन की दुनिया का एक बड़ा नाम बन गए।
‘जारा’ की सबसे बड़ी ताकत थी उस अंतर को पहचानना जो फैशन शो के रैम्प पर दिखने वाले महंगे डिजाइनर कपड़ों और आम ग्राहकों की पहुंच के बीच था। हर आम आदमी का सपना होता है कि वह किसी बड़े फैशन हाउस के डिजाइन्स पहन सके, लेकिन वह केवल एक सीमित उच्च वर्ग तक ही सिमटकर रह जाता था। अमान्सियो ओर्तेगा ने इस अंतर को देखा, पहचाना और वहीं से जन्म हुआ ‘फास्ट फैशन’ का यानी ऐसा फैशन जो रैम्प और मैग्जीन से निकलकर बहुत कम समय में स्टोर्स तक पहुंचे और हर आम ग्राहक की वार्डरोब में जगह बनाए।
‘जारा’ ने फैशन शो से इंस्पिरेशन लेकर तेजी से प्रोडक्शन कर किफायती कीमतों में डिजाइन्स तैयार किए जिससे आम ग्राहक भी वह फैशन पहन सका जो पहले उसके लिए बस सपना था।
आज (इंडिटेक्स समूह के अंतर्गत ‘ZARA, ‘Massimo Dutti’, ‘Pull & Bear’, ‘Bershka’, ‘Stradivarius’, ‘Oysho’ और Uterque’ जैसे ब्रांड्स शामिल हैं। दुनिया भर में 5,500 से ज्यादा स्टोर, 116 देशों में ऑनलाइन उपस्थिति, €38.6 बिलियन (35,000़ करोड़ रुपए) वार्षिक बिक्री और €7.6 बिलियन का लाभ, यह आंकड़े ‘जारा’ की असाधारण सफलता की कहानी कहते हैं।
भारत में जारा ने 2010 में Trent (टाटा समूह) के साथ मिलकर कदम रखा। 2025 तक इसके यहां 22 स्टोर्स हैं और 2,782 करोड़ रुपए का कारोबार है, जबकि लाभ 299 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। लेकिन इस ग्लोबल सक्सेस स्टोरी के पीछे हर बाजार में अनगिनत छोटे-बड़े सपनों और संघर्षों की कहानियां छुपी हुई हैं जैसे मेरी अपनी कहानी।
वर्ष 2007 में मैं एक वस्त्र डिजाइनर और निर्यातक के रूप में ‘जारा’ से जुड़ी। तब तक मेरी कम्पनी अच्छा काम कर रही थी, लेकिन सब पारम्परिक ढर्रे पर चल रहा था। मुझे भीतर से एक बेचैनी महसूस होती थी, क्या मैं बस इतने पर संतोष कर लूं? या मैं अपनी सीमाओं को तोड़कर कुछ बड़ा करने की कोशिश करूं? तभी मन में आया कि क्यों न ‘जारा’ जैसी ग्लोबल कम्पनी के साथ काम करने की कोशिश करूं?
मैंने अप्वाइंटमेंट मांगा और आश्चर्यजनक रूप से यह मुझे आसानी से मिल भी गया। मीटिंग स्पेन के ला कोरोन्या स्थित ‘जारा’ हेडक्वार्टर में तय हुई। मैं अपनी मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव विजयश्री के साथ चार बड़े सूटकेस लेकर वहां पहुंची। यह शहर बेहद सुंदर था, छोटी-छोटी पहाड़ियां, शांत समुद्र और सादगी से भरा माहौल। हमें एक मीटिंग रूम दिया गया, जहां हमने अपने सैम्पल्स डिस्प्ले किए।
थोड़ी ही देर में एक लेडी आईं और सैम्पल्स देखने लगीं। उन्होंने चार-पांच सैम्पल उठाए, चेहरे पर गुस्से के भाव आए और उन सैम्पल्स को गोल करके हमारी टेबल पर फेंक दिया, अगर सही शब्दों में कहूं तो हमारे मुंह पर फेंक दिया। उनका एक ही वाक्य था कि ‘‘तुम ‘जारा’ के ऑफिस में आए हो, तुम्हें पता नहीं हम पुराने डिजाइन नहीं खरीदते! अपना समय भी बर्बाद किया और हमारा भी!’’
उन पांच मिनटों में मेरी दुनिया जैसे थम गई थी। इतने सालों के व्यापार में ऐसा अपमान कभी नहीं झेला था। मन में गुस्सा था, दुख था, और एक आग थी। टैक्सी में बैठकर मैंने अपनी मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव विजयश्री से कहा, ‘‘चलो, जो यहां का सबसे बड़ा माॅल है, वहां चलते हैं।’’
हमने माॅल में जाकर सभी फैशन ब्रांड्स के नाम नोट किए। मैं काॅफी शाॅप में बैठकर एक कागज पर उन सभी ब्रांड्स के नाम लिखकर विजयश्री को बोला, ‘‘अगले दो साल में हम इन सबके साथ काम करेंगे।’’ वही पल मेरे व्यापार का टर्निंग प्वाइंट था। मुझे समझ आ गया कि अगर मुझे ‘जारा’ के स्तर तक पहुंचना है तो अपनी कम्पनी को पारम्परिक एक्सपोर्टर से डिजाइनर एक्सपोर्ट हाउस बनाना होगा। स्पेन से लौटते ही मैंने अपने ऑफिस से कहा ‘‘डिजाइनर्स के इंटरव्यू रखो, मैं खुद चुनूंगी।’’
वहीं से हमारा सफर शुरू हुआ। दो-ढाई साल में हमने उन सभी कम्पनियों के साथ व्यापार किया, जिनका नाम मैंने काॅफी शाॅप में लिखा था। बचपन से मेरी आदत थी कि मुझे सिर्फ पहले नम्बर पर आना है, दूसरा, तीसरा सब बेकार लगता था। जब हमने ‘जारा’ के साथ काम शुरू किया तब भीतर से एक ही धुन सवार थी, भारत से ‘जारा’ का नम्बर वन सप्लायर बनना है। हम ‘जारा’ किड्स के लिए काम करने लगे और 2015, 2016, 2017 में हम सचमुच भारत से ‘जारा’ के सबसे बड़े निर्यातक बन गए। हमारे डिजाइन्स बेहद पसंद किए गए और कब हम भारत में नम्बर वन सप्लायर बन गए, यह खुद हमें भी पता नहीं चला। इंडिटेक्स का बिजनेस माॅडल फैशन की दुनिया में एक मिसाल है। हर स्टोर हफ्ते में दो बार नया स्टाॅक पाता है और वहां के मैनेजर सीधे फीडबैक भेजते हैं कि ग्राहकों को क्या पसंद आ रहा है। दूसरी कम्पनियां जहां 6-12 महीने पहले डिजाइन्स फाइनल कर लेती हैं, इंडिटेक्स अपने उत्पादन में मौसम, सोशल मीडिया ट्रेंड्स और तत्काल कस्टमर डिमांड्स के हिसाब से बदलाव कर सकता है।
हाल के वर्षों में इंडिटेक्स ने अपने स्टोर्स का आकार बड़ा किया है, ‘द अपार्टमेंट’ जैसे प्रीमियम स्टोर काॅन्सेप्ट लाॅन्च किए हैं और टेक्नोलाॅजी के जरिए ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाया है। स्मार्ट आरएफ टैग्स, रोबोटिक सिस्टम्स और ऑटोमैटिक चेंजिंग रूम्स के साथ अब फैशन खरीदना सिर्फ स्टाइल का नहीं, एक अनुभव का मामला बन चुका है।
चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ‘शीन’ और ‘टेमु’ जैसी कम्पनियां बेहद सस्ते दामों में ऑनलाइन ट्रेंडी कपड़े बेचकर बाजार में हलचल मचा रही हैं। लेकिन इंडिटेक्स के सीईओ आस्कर गर्जिया मेसीरास का मानना है कि सफलता केवल कीमत पर नहीं, बल्कि ट्रेंड पकड़ने, उसे खूबसूरती से प्रस्तुत करने और ग्राहक की आकांक्षाओं को पूरा करने पर निर्भर करती है।
भारत में ‘जारा’ ने विस्तार को नियंत्रित रखा है, केवल प्रीमियम लोकेशन्स में स्टोर्स, जिससे ब्रांड की विशिष्ट पहचान, उच्च मुनाफा और परिचालन नियंत्रण बना रहे। ‘शीन’ जैसी कम्पनियां जहां डिजिटल पर केंद्रित हैं, जारा अनुभव और गुणवत्ता की लड़ाई लड़ रहा है।
मेरे लिए ‘जारा’ के साथ काम करना सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि एक मिशन था। हमने न केवल डिजाइन्स बनाए, बल्कि अपने भीतर की सीमाओं को तोड़कर सीखा कि कैसे वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बनाई जाती है। आज भी जब मैं ‘जारा’ का नाम सुनती हूं तो उस मीटिंग रूम की तस्वीर, काॅफी शाॅप का वह टेबल और विजयश्री का मुस्कराता चेहरा याद आता है, जहां से मेरे सपनों ने नई उड़ान भरी थी।
अमान्सियो ओर्तेगा की कहानी हम सबको सिखाती है कि कोई भी सपना, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर उसमें जुनून और मेहनत लगी हो तो वह सच हो सकता है। ‘जारा’ के 50 साल इस बात का प्रमाण है कि फैशन केवल रैम्प पर चलने वाली माॅडल्स तक सीमित नहीं, बल्कि करोड़ों आम लोगों के सपनों का हिस्सा है और मेरा सौभाग्य है कि मैं इस कहानी की एक छोटी-सी किरदार रही हूं।
(लेखिका एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित वस्त्र निर्यातक हैं। उन्होंने यूरोप, अमेरिका और मध्य एशिया के प्रमुख फैशन ब्रांड्स के साथ काम किया है। भारतीय पारम्परिक बुनाई और आधुनिक वैश्विक डिजाइन के समन्वय में उनकी विशेष पहचान है।)