कालाढूंगी विधानसभा कुमाऊं के तराई और पहाड़ के संगम पर स्थित एक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसमें हल्द्वानी और भीमताल विकासखंड के हिस्सों के साथ पूरा कोटाबाग ब्लाॅक शामिल है तथा हल्द्वानी नगर निगम के कुछ वार्ड भी इसके अंतर्गत आते हैं। भाखड़ा वार और भाखड़ा पार का भौगोलिक-सामाजिक विभाजन यहां स्पष्ट नजर आता है जहां एक ओर घनी आबादी वाले इलाकों में शहरी विस्तार और नई काॅलोनियों का विकास हुआ है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में सड़क, पुल, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें बनी हुई हैं। इस विधानसभा का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ भाजपा नेता बंशीधर भगत कर रहे हैं जो 2012 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट से लगातार तीन बार निर्वाचित हुए हैं और इससे पहले भी लम्बा विधायकी अनुभव रखते हैं। ग्राम प्रधान से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर कैबिनेट मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचा लेकिन कालाढूंगी में 14 वर्षों के कार्यकाल का मूल्यांकन मिश्रित तस्वीर पेश करता है। कुल मिलाकर कालाढूंगी विधानसभा में विकास के दावे और जमीनी हकीकत के बीच अंतर दिखाई देता है, जनसम्पर्क मजबूत होने के बावजूद बुनियादी ढांचे और ग्रामीण समस्याओं के समाधान की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है लेकिन प्रदेश के अन्य विधानसभाओं के मुकाबले कालाढूंगी विधानसभा निश्चित तौर पर विकास की राह पर नजर आती है


कालाढूंगी विधानसभा का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ भाजपा नेता बंशीधर भगत करते हैं। परिसीमन के बाद 2012 में अस्तित्व में आई इस विधानसभा क्षेत्र से बंशीधर भगत 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार चुने गए। बंशीधर भगत का विधायकी जीवन बहुत लम्बा है। 1991 में पहली बार नैनीताल विधानसभा से चुनकर उत्तर प्रदेश की विधानसभा में गए बंशीधर भगत, उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार में मंत्री बनाए गए थे। नया राज्य बनने के बाद 2002 में वह हल्द्वानी विधानसभा सीट से इंदिरा हृदयेश से हार गए थे। हालांकि उन्होंने 2007 में इंदिरा हृदयेश को यहां से हरा दिया था। ग्राम प्रधान से अपने जनप्रतिनिधि होने की शुरुआत करने वाले बंशीधर भगत कैबिनेट मंत्री के साथ उत्तराखण्ड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।


कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र विकासखंड हल्द्वानी और विकासखंड भीमताल के कुछ भाग और विकासखंड कोटाबाग का पूरा हिस्सा इस विधानसभा में आता है। हल्द्वानी नगर निगम के कुछ वार्ड भी इस विधानसभा के अंर्तगत आते हैं। भाजपा के मजबूत गढ़ में भाखड़ा वार और भाखड़ा पार का विभाजन साफ नजर आता है। भाखड़ा वार के इलाके में जहां जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है, के मुकाबले भाखड़ा पार के इलाके में विकास न होने की शिकायतें ज्यादा हैं। हालांकि विधायक बंशीधर भगत इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते कि विकास के मामले में उन्होंने कोई भेदभाव किया है।
 
सड़कों की बदहाल दशा, अधर में रिंग रोड

पूरी विधानसभा में घूमने के बाद ‘दि संडे पोस्ट’ की टीम ने पाया कि 14 साल की इस विधानसभा में उतना अपेक्षित विकास नहीं हो पाया जितना की अपेक्षित था। सड़कें, स्वास्थ्य, शिक्षा इन सभी क्षेत्रों में किसी न किसी स्तर पर आम जनता को शिकायत है लेकिन बंशीधर की सहज उपलब्धता पर उनके विरोधी भी सहमत थे। लोगों का मानना है कि काम हुए हैं मगर उतने स्तर पर नहीं जितनी डबल इंजन सरकार के चलते होनी चाहिए थे। बंशीधर भगत कहते हैं कि सड़क निर्माण के लिए ही उन्होंने 100 करोड़ से ज्यादा के काम अपनी विधानसभा में करवाए हैं लेकिन जमीनी हकीकत बहुत उम्मीद नहीं जगाती।

कोटाबाग ब्लाॅक के कनिष्क प्रमुख रहे कुलदीप सिंह तड़ियाल का कहना है कि कागजी घोषणाएं बहुत हुई हैं लेकिन धरातल पर वह नजर नहीं आती। कोटाबाग के मुख्य मोटर मार्ग की सड़क का चौड़ीकरण अधर में है जबकि इसकी मांग लम्बे समय से की जा रही है। सड़कों को नए सिरे से बनाया जाना था लेकिन पेचवर्क से ही काम चलाया जा रहा है। वह कहते हैं ‘‘हमने आरटीआई से जानकारी हासिल की तो पता चला कि 10 से 15 लाख तक की राशि एक सड़क की पैच वर्क पर खर्च किए गए। कुल मिलाकर ढाई करोड रुपए सिर्फ पैच वर्क पर ही खर्च कर दिए गए जबकि कुछ और धनराशि खर्च कर सड़कों का नए सिरे से जीर्णाेद्धार किया जा सकता था। मूसाबंगर से कालाढूंगी रोड तक हर साल पैचवर्क किया जाता है लेकिन सड़क का हाल बहुत बुरा है। उस पर नए सिरे से काम करने की जरूरत है।’’
 
हालांकि भाजपा की कोटाबाग भाजपा मंडल अध्यक्ष रहे जोगा सिंह महरा का कहना है कि ‘‘इस सड़क को नए सिरे से बनाने की योजना है जिसकी प्रक्रिया चल रही है, हमारा मानना है कि इस सड़क का डामरीकरण न कर इसे सीमेंट का बनाया जाए।’’

बन्दरज्यूड़ा के मोहन सिंह बोरा का कहना है कि ‘‘मुख्य सड़कें बदहाल हैं, रतनपुर, धनपुर, बेलपोखरा समेत के क्षेत्र में आंतरिक सड़कों की हालत खराब है।’’ यही शिकायत कमोला धमोला की सड़कों की भी बताई गई।

कुलदीप सिंह तड़ियाल कहते हैं कि ‘‘इन वर्षों में सबसे कमी यह रही कि सड़कों की या कहें कि सम्पूर्ण विकास योजनाओं की प्राॅपर माॅनिटरिंग नहीं हुई और ना ही किसी की जवाबदेही तय की गई लेकिन हल्द्वानी से सटे इलाकों की तस्वीर कुछ अलग है। नई काॅलोनियां क्षेत्र में विकसित होती गई। नई काॅलोनी के चलते नई सड़कें बनी हैं।’’

विधायक बंशीधर भगत का कहना है कि नहर कवरिंग के चलते सड़कें चौड़ी हुई हैं। वो कहते हैं कि 2007 में जब मैं हल्द्वानी से विधायक था तब मैंने बड़े स्तर पर नहर कवरिंग का कार्य करवाया था। अब भी एक बड़े हिस्से में नहर कवरिंग का कार्य तेजी से चल रहा है, साथ ही नई सड़क भी बन रही है। इससे एक नया बाईपास आम लोगों को मिल जाएगा और नैनीताल रोड पर आए दिन लगने वाले जाम से निजात मिलेगी। 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रिंग रोड की घोषणा की थी जो अभी अधर में लटकी है। अब जाकर पहले चरण में 18 किलोमीटर लिए 26 लाख की स्वीकृति प्रारम्भिक प्रक्रियाओं को पूरा करने हेतु मिले हैं। कालाढूंगी विधानसभा के सुदूर गांव धापला, चौसला और ईसाई नगर से लेकर गांवों की अपनी समस्या है। धापला गांव की मुख्य समस्या है, उसकी सड़क मार्ग से कनेक्टिविटी। धापला के लिए जंगलात की रोड है।

धापला के हरीश आर्य का कहना है कि ‘‘वर्षों से सड़क की मांग कर रहे हैं लेकिन सड़क का समाधान अभी तक नहीं निकला है। उनका कहना है कि यहां के लिए जिला योजना के माध्यम से रोपवे निर्माण की बात कही जा रही है। रोपवे भी बने लेकिन यह सड़क की समस्या का समाधान तो नहीं है और बरसात के दिनों में यहां पर पूरा इलाका मुख्य भूमि से कट जाता है। वे कहते हैं बाकी बिजली पानी के लिए यहां संतोषजनक काम हुआ है। लामाचौड़ से लगे ईसाई नगर के कई गांव भाखड़ा से सटे हैं जिसमें बरसात के समय खेतों में कटान बढ़ जाता है लेकिन इसकी सुध नहीं ली गई। इसी प्रकार चौसला में विकास तो संतोषजनक है लेकिन उससे सटे गांव में उनके लिए बरसाती रपटे  सबसे बड़ी मुसीबत है।

चौसला के पूर्व प्रधान भूपाल सिंह बिष्ट का कहना है कि बरसात के समय रपटे उफान पर रहते हैं, निहाल नदी ने सड़कों पर कई गड्ढे कर दिए हैं, जनप्रतिनिधियों को इसकी ओर भी ध्यान देना चाहिए। कई लोग इस पानी में बहकर अपनी जान गवा चुके हैं। लेकिन इसका समाधान कोई सरकार नहीं निकाल सकी। 52 डांठ पर अगर पुल बन जाता तो एक बड़ी समस्या हल हो जाती। इस पुल के बनने से कालाढूंगी विधानसभा ही नहीं भीमताल विधानसभा के लोगों को भी राहत मिलती।

कामलुवागांजा रोड के गोविंदपुर गरवाल के निवासियों का कहना है कि यहां की सड़क को खुदे दो साल हो गए लेकिन अब ठीक करने की कोई सुध नहीं ले रहा है। इसी प्रकार कोटाबाग के गुरुणी नाले पर बरसात के समय कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यहां पर भी पुल की मांग लम्बे समय से की जा रही है। बंशीधर भगत का कहना है इसके लिए डिपार्टमेंट फाइनेंस कमेटी (डीएफसी) से 11 करोड़ की स्वीकृति मिल चुकी है शासन से अनुमति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।

कालाढूंगी नगर पालिका क्षेत्र में बंशीधर भगत के खिलाफ कोई खास नाराजगी नजर नहीं आती। व्यवसायी आनंद जोशी का कहना है कि ‘‘विकास योजनाओं के सम्बंध में बहुत ज्यादा शिकायत नहीं है क्योंकि इस दौरान कई ऐसी योजनाओं पर काम हुआ जो वर्षों से लम्बित थीं। एक सड़क जो पिछले 40 सालों से नहीं बन पा रही थी, उसका भी समाधान इस बार निकाल दिया गया और सड़क बननी शुरू हो गई है लेकिन कालाढूंगी के आस-पास पर्यटन की सम्भावनाओं को खोजा जाना चाहिए। कालाढूंगी एक मुख्य स्टेशन है यहां पर बस अड्डा न होने की वजह से बाजार में जाम की स्थिति बनी रहती है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह बस अड्डे के लिए कोई एक जगह निर्धारित करे। इसी प्रकार खेल के मैदान की घोषणा तो हुई लेकिन उसके विषय में कोई चर्चा नहीं होती।’’
 
स्वास्थ्य सेवा में सुधार की जरूरत

स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो हल्द्वानी से सटे क्षेत्र के लिए हल्द्वानी में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध है, चाहे वो सरकारी अस्पताल हो या फिर निजी अस्पताल लेकिन अन्य क्षेत्रों में स्वास्थ्य की समस्याएं अन्य विधानसभा क्षेत्र की तरह ही हैं। कोटाबाग के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लम्बे समय से बाल रोग विशेषज्ञ और हड्डी रोग विशेषज्ञ की मांग की जा रही है। एक्सरे मशीन तो है लेकिन रेडियोलाॅजिस्ट नहीं है हालांकि हर बृहस्पतिवार को रेडियोलाॅजिस्ट एक्सरे के लिए आते हैं लेकिन बाकी दिनों में एक्सरे के लिए बाहर ही जाना पड़ता है। बैलपड़ाव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उच्चीकरण की बाट जोह रहा है। जरूरत पड़ने पर यहां के लोगों को कोटाबाग या फिर रामनगर जाना पड़ता है। कालाढूंगी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी चिकित्सकों की कमी है। मशीनें हैं लेकिन उन्हें ऑपरेट करने वाला कोई नहीं है।

हल्द्वानी के पूर्व ब्लाॅक प्रमुख भोलादत्त भट्ट का कहना है कि हल्द्वानी से लगे भाखड़ा तक के इलाके के लिए एक नए अस्पताल की जरूरत है जिस ओर विधायक जी ने कभी सोचा ही नहीं। बंशीधर भगत स्वीकार करते हैं कि डॉक्टर की कुछ कमी जरूर है लेकिन वह कहते हैं कि यह हालत उनकी विधानसभा में ही नहीं पूरे प्रदेश में है।
 
नशे का फैलता मकड़जाल

अन्य क्षेत्रों की तरह युवाओं की समस्याओं से कालाढूंगी विधानसभा भी अछूती नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि युवा बेरोजगार होने के कारण गलत रास्ते पर जा रहे हैं। बढ़ती नशे की प्रवृत्ति ने मां-बाप की चिंता बढ़ा दी है। महानगरों से अब स्मैक, चरस जैसे नशीले पदार्थ गांव में आसानी से मिलने लगे हैं जिसके चलते अपराध बढ़ने लगे हैं। नशे की समस्या गांव की युवाओं को अपना शिकार बना रही है। नशे के तस्कर क्षेत्र में सक्रिय हैं लेकिन पुलिस उदासीन है।
 
बेरोजगारी का चौतरफा दंश

बेरोजगारी की बात विधायक बंशीधर भगत स्वीकार करते हैं लेकिन रोजगार कहां से आएगा वह इसका जवाब स्वरोजगार के रूप में देते हैं। उनका कहना है कि कोटाबाग में जंगल सफारी की शुरुआत कर दी गई है जो यहां के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा जरिया बन रहा है। इसी प्रकार पवलगढ़ क्षेत्र बर्ड वाॅचिंग का इलाका है जहां कई युवाओं को रोजगार मिला है। औद्योगिक क्षेत्र होने के चलते यहां उद्योगों में भी रोजगार के अवसर खुले हैं लेकिन कोटाबाग में एकमात्र कौशल विकास केंद्र बंद हो गया है। प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत जो 35 प्रतिशत सब्सिडी लाभार्थियों के खाते में आ जानी चाहिए थी अभी तक नहीं आई है।
 
तकनीकी शिक्षण संस्थाएं कमजोर

प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में अध्यापकों की कमी की शिकायत बहुत कम लोगों ने की। पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज में कृषि अध्यापक की कमी जरूर है। है कोटाबाग का राजकीय महाविद्यालय इस विधानसभा का एकमात्र महाविद्यालय है। हालांकि यहां विद्यालय में स्टाफ की कमी नहीं है। कृषि के विषय की मांग यहां लम्बे समय से की जा रही थी, क्योंकि यहां राजकीय इंटर काॅलेज में कृषि होने के कारण उच्च शिक्षा के लिए यहां के युवाओं को दूसरी जगह जाना पड़ता था लेकिन अब यहां पर बीएससी (एजी) को स्वीकृति मिल गई है जिसमें नए सत्र से प्रवेश शुरू हो जाएंगे। इस विधानसभा के कोटाबाग और कालाढूंगी में एक-एक पाॅलिटेक्निक हैं।
 
कोटाबाग के पाॅलिटेक्निक में दो ट्रेड हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिविल और मैकेनिकल में दो और ट्रेड खोले जाने चाहिए क्योंकि यहां व्यवस्थाएं पूरी हैं, सिर्फ नए ट्रेड खोलने की जरूरत है। इसी प्रकार नारायण दत्त तिवारी के समय स्थापित कालाढूंगी का पाॅलिटेक्निक एनटीपीसी द्वारा पोषित था लेकिन यहां भी सरकार पूरी सुविधाएं देने में नाकाम रही है, न ही ट्रेड बढ़ पाए हैं न ही स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था है।
 
दुरुस्त होती सिंचाई व्यवस्था

पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था इस विधानसभा में उतनी नजर नहीं आती। हालांकि ट्यूबवेल खराब होने के चलते पानी की समस्या आम है।  सिंचाई और पेयजल के लिए बड़ी संख्या में ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंकों का निर्माण इन वर्षों में जरूर हुआ है। 36 करोड़ की धनराशि सिंचाई नहरों की मरम्मत के लिए उपलब्ध करवाई गई हैं। कालाढूंगी में 349 लाख की लागत से बौर नदी में मिनी डैम बनाया जा रहा है जिसके चलते कालाढूंगी शहर से लगे आस-पास के गांवों को सिंचाई का लाभ तो मिलेगा ही पर्यटन की सम्भवनाएं इस क्षेत्र में बढ़ेंगी।

जजफार्म निवासी गोविंद बल्लभ जोशी कहते हैं कि इस क्षेत्र में विकास की शुरुआत स्व इंदिरा हृदयेश ने की थी जिसे बंशीधर भगत ने आगे बढ़ाया वहीं लामाचैड़ निवासी पूरन चंद्र जोशी का कहना है कि यहां विकास कार्य चेहरों को देखकर किए जाते हैं जिनकी ऊंची पहुंच है उनके काम पहले होते हैं। सरकार की योजनाओं की धरातल पर निगरानी करने वाला कोई नहीं है। कुल मिला कर इस विधानसभा के लोगों का बंशीधर भगत के पिछले 14 वर्षों का अनुभव खट्टा-मीठा दोनों प्रकार का रहा है।
साथ में हरेंद्र कुमार ‘बाॅबी’
 
बात अपनी-अपनी

    जब से कालाढूंगी नाम से नए विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ बंशीधर भगत जी तब से आज तक विधानसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वह मंत्री भी रहे लेकिन उन्होंने यहां के नागरिकों के विकास के लिए कुछ नहीं सोचा। सर्वप्रथम तो भाखड़ा से हल्द्वानी की ओर का जो हिस्सा है, यहां पर एक बड़े अस्पताल की जरूरत है खासकर सीनियर सिटिजन के लिए जो विधायक जी खुलवा नहीं पाए। जो सरकारी अस्पताल हैं भी वो न तो उनका उच्चीकरण करवा पाए न ही वहां मूलभूत सुविधाएं दे पाए। कहीं डाॅक्टरों की कमी है और जहां डाॅक्टर हैं भी तो वो समय पर नहीं बैठते। कहीं अस्पतालों में उपकरण हैं तो उनको ऑपरेट करने वाले नहीं हैं। कालाढूंगी विधानसभा में निजी स्कूलों की एक बाढ़ सी आ गई है लेकिन सरकारी स्कूल जहां निर्बल वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं, हालात बदतर हैं। विधायक जी का ध्यान इन समस्याओं की ओर गया ही नहीं। विधायक जी की प्राथमिकताओं में  शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क हैं ही नहीं। भाखड़ा के इस तरफ या उस तरफ वो एक अच्छा खेल का मैदान उपलब्ध नहीं करा पाए। जब कांग्रेस की सत्ता थी तो यहां पर पाॅलिटेक्निक, स्मार्ट आईटीआई, तहसील और एसडीएम कार्यालय का निर्माण करवाया गया था लेकिन भाजपा के शासनकाल में स्थितियां बदतर हुई हैं। वो रिंग रोड के नाम पर जनता को खाली झुनझुना पकड़ा रहे हैं। हल्द्वानी के नागरिक होने के नाते क्या उनका दायित्व नहीं था कि अंतरराज्यीय बस अड्डे जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर पहल करते चाहे वह कहीं भी बनता? लेकिन वह इस पर आज तक नहीं बोले। उत्तराखण्ड शहरी विकास एजेंसी जिसके माध्यम से सीवर और पेयजल का काम चल रहा है वो विकास न करके विनाश करने पर तुली है। प्लानिंग के तहत उसका कोई कार्य हो ही नहीं रहा है। उसकी मनमर्जी है कि जब चाहे वहां जाकर सड़क खोद दें और ऐसे ही छोड़कर चले आएं। कुल मिलाकर विधायक जी का 14 साल का कार्यकाल सिर्फ आश्वासनों और घोषणाओं में निकल गया धरातल पर कुछ नहीं हुआ।

भोला दत्त भट्ट, कांग्रेस नेता और पूर्व ब्लाॅक प्रमुख, हल्द्वानी

    मैं अगर स्वास्थ्य सेवाओं की बात करूं तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटाबाग हो, बैलपड़ाव का अस्पताल हो या फिर कालाढूंगी का अस्पताल सब अव्यवस्थाओं के शिकार हैं। विधायक जी द्वारा आश्वासन दिया गया था कि कोटाबाग सीएचसी में बच्चों के डाॅक्टर और हड्डी के डाॅक्टर की व्यवस्था की जाएगी लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि यहां पर ना बच्चों का डाॅक्टर है ना हड्डी का डाॅक्टर है। एक्सरे मशीन तो है लेकिन रेडियोलाॅजिस्ट नहीं है। एक पैथोलॉजी लैब यहां पर खोली गई थी जिसका लाभ पूरे कोटाबाग और उससे सटे पूरे पर्वतीय क्षेत्र को मिलता लेकिन सारी सुविधा होने के बावजूद टेक्नीशियन के अभाव में वो महज शोपीस बनकर रह गई है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा का हाल भी कुछ अच्छा नहीं है। कहीं टीचर नहीं है तो कहीं दूसरे विद्यालयों से टीचरों को पढ़ाने भेजकर शिक्षकों कमी को पूरा किया जा रहा है। पाॅलिटेक्निक की बात करें तो यहां पर दो ट्रेड अभी चल रहे हैं और जबकि यहां के लोगों की मांग है कि सिविल और मैकेनिकल के ट्रेड खोले जाएं लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया जबकि यहां पर सभी नए ट्रेड के लिए पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। पैचवर्क के माध्यम से सड़कों की स्थिति को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। पैच वर्क के नाम पर ढाई करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए लेकिन सड़के जस की तस हैं। रोजगार के मामले में भी यहां कुछ विशेष नहीं किया गया। प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत जो सब्सिडी 35 प्रतिशत लाभार्थी के खाते में आती थी वह अभी तक नहीं आई है जबकि पहले की सरकारों में ये सब्सिडी निश्चित अवधि के दौरान आ जाती थी। विकासखंड कोटाबाग पर्यटन
के हिसाब से बहुत अच्छा है और पैराग्लाइडिंग और पैरासेलिंग के लिए यह एशिया की सबसे सेफ साइट में गिना जाता है लेकिन उसके बावजूद यहां इनको प्रोत्साहित करने के लिए पर्यटन विभाग कुछ नहीं कर रहा है। जो पैराग्लाइडिंग का एक कम्पटीशन यहां होना था वह भी आपसी झगड़े के कारण पौड़ी चला गया। आर्गेनिक खेती के नाम पर यहां ठगी चल रही है। धरातल पर कुछ और है, हो कुछ और रहा है। धरातल पर पहले तो काम नहीं है, अगर हैं भी तो उनकी माॅनिटरिंग नहीं है, न ही किसी की जवाबदेही तय है। प्राथमिक विद्यालय से लेकर बड़े विद्यालय तक ड्रग्स की और चरस की समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्कूलों में छोटे-छोटे बच्चे चरस और स्मैक के शिकार हो रहे हैं। ड्रग्स और चरस के तस्कर यहां पर खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन पुलिस हमेशा की तरह उदासीन बनी हुई है। पशु अस्पताल के भवन हों या अन्य सरकारी आवासीय परिसर सब जीर्ण अवस्था में हैं और किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं। पिछले 14 सालों में अगर हमारे विधायक जी किसी चीज में अव्वल रहे तो वह घोषणाओं का अम्बार और जनसम्पर्क। इसके अलावा उनके द्वारा इस विधानसभा के लिए कोई विशेष
कार्य नहीं किए गए हैं।

कुलदीप सिंह तड़ियाल, समाजसेवी और पूर्व कनिष्ठ प्रमुख, कोटाबाग

कालाढूंगी विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
 
विधायक: बंशीधर भगत (अवधि: 4 वर्ष)

क्र. क्षेत्र                                              मुद्दा/जमीनी स्थिति                 अंक  (10 में)

  1. सड़क व सम्पर्क मार्ग कई जगह पैचवर्क, चौड़ीकरण अधूरा, ग्रामीण सड़कों की हालत खराब, कुछ नई काॅलोनियों में बेहतर काम 5/10
  2. रिंग रोड व बाईपास परियोजना वर्षों पूर्व घोषणा, प्रक्रिया धीमी, आंशिक स्वीकृतियां लेकिन जमीन पर प्रगति सीमित 4/10
  3. ग्रामीण कनेक्टिविटी (धापला, चैसला आदि) कई गांव अब भी पक्की सड़क से वंचित, बरसात में सम्पर्क कट जाता है 3/10
  4. पुल व आपदा समाधान (52 डांठ, गुरुणी नाला) वर्षों से मांग, स्वीकृतियां मिलीं पर निर्माण लम्बित 4/10
  5. स्वास्थ्य सेवाएं (कोटाबाग, कालाढूंगी, बैलपड़ाव) डाॅक्टर व विशेषज्ञों की कमी, उपकरण हैं पर स्टाफ नहीं 4/10
  6. रोजगार व स्वरोजगार जंगल सफारी, बर्ड वाॅचिंग जैसी पहल, पर स्थायी बड़े रोजगार माॅडल का अभाव 5/10
  7. नशा व युवा समस्या बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर ठोस नियंत्रण रणनीति नहीं 3/10
  8. शिक्षा व उच्च शिक्षा कॉलेज में BSC (Ag.) स्वीकृत, पॉलिटेक्निक में ट्रेड सीमित, स्टाफ की कमी 6/10
  9. पेयजल व सिंचाई ट्यूबवेल, ओवरहेड टैंक, मिनी डैम जैसी योजनाएं, पर कई इलाकों में समस्या कायम 6/10
  10. जनसम्पर्क व उपलब्धता विधायक की सहज उपलब्धता, विरोधी भी स्वीकारते हैं पहुंच आसान 8/10
  11. औसत:  4.8/10 फाइनल ग्रेड: पास




‘जमरानी बांध मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि’
 
वरिष्ठ भाजपा नेता बंशीधर भगत उत्तराखण्ड की सक्रिय और लम्बे समय से प्रभावशाली राजनीति का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। ग्राम प्रधान के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले भगत ने संगठन और जनसम्पर्क की मजबूत जमीन पर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। वर्ष 1991 में वे पहली बार नैनीताल विधानसभा सीट से चुनकर उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे और बाद में कल्याण सिंह सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी सम्भाली। राज्य गठन के बाद भी उनका राजनीतिक सफर जारी रहा। परिसीमन के बाद 2012 में अस्तित्व में आई कालाढूंगी विधानसभा से वे 2012, 2017 और 2022 में लगातार निर्वाचित हुए और इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे उत्तराखण्ड सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं तथा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। लम्बे विधायकी अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और सहज उपलब्धता उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है। पेश है भगत से ‘दि संडे पोस्ट’ के राजनीतिक सम्पादक संजय स्वार की बातचीत

वर्ष 2012 से अब तक के अपने कार्यकाल को आप कितना सफल मानते हैं?

मैं अपने कार्यकाल को सबसे ज्यादा सफल इसलिए मानता हूं कि जनता से मिलना और जनता का प्यार मुझे मिल रहा है। यह मेरी बड़ी सफलता है और काम की दृष्टि से भी यहां ऐतिहासिक कम हुए हैं। मेरा प्रयास रहा है कि मैं जनता के सुख दुख में उसके साथ रहूं और जो मैंने पिछले 14 साल ही नहीं जब से मैं एक जनप्रतिनिधि के ग्राम प्रधान या 1991 से विधायक या मंत्री रहा हूं, हमेशा मेरा जनता संग संवाद कभी भी कम नहीं हुआ।

तीन सबसे बड़ी उपलब्धियां आप क्या मानते हैं?


गिनाने को तो कामों की या कहें उपलब्धियों की एक बहुत बड़ी सूची है लेकिन जमरानी बांध के निर्माण को मैं अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल इसलिए करता हूं क्योंकि इसके लिए मैंने बहुत आंदोलन किए थे और जब यह 2029 में बनकर पूरा हो जाएगा तो मेरे जीवन का एक सपना साकार हो जाएगा। दूसरा कोटाबाग में मेरे द्वारा डिग्री काॅलेज खुलवाया गया था। लेकिन वहां कृषि विषय नहीं था। वहां इंटर में कृषि जरूर है लेकिन उच्च शिक्षा के लिए लोगों को बाहर जाना पड़ता था तो मैंने इस बार वहां कृषि विषय खुलवा दिया है। ये मेरे दो-तीन वर्षों के कठोर परिश्रम का परिणाम है कि मैं यहां बीएससी(एजी) लाने में कामयाब हो पाया। नए सत्र में यहां बीएससी एग्रीकल्चर में प्रवेश शुरू हो जाएंगे। मैं अपनी एक और बड़ी उपलब्धि मानता हूं नहरों को पाट सड़क का चौड़ीकरण। 2007 में जब मैं जब हल्द्वानी से विधायक था तो उस वक्त मैंने नहरों को पाटकर सड़कों का चौड़ीकरण का काम शुरू करवाया था। उस वक्त कोलटेक्स से आईटीआई तक की सड़क को बनवाया। अगर उसको मैंने नहीं बनवाया होता तो वहां आज हालत ऐसे होते कि लोग चल ही नहीं पाते। फिर मैंने पनचक्की चौराहे से चौपुला, चौपला से ऊंचा पुल और फिर ऊंचापुर से त्रिमूर्ति तक नहर को पाटकर सड़क को चौड़ा किया है। अब चौपुला से कठघरिया तक नहर पाटने का काम शुरू हो चुका है, जिसके लिए 11 करोड़ रुपए स्वीकृत हो गए हैं। इसके बाद कठघरिया से कमलुवागांजा तक आगे का काम करवाना है। इससे हल्द्वानी को एक अच्छा बाईपास मिल जाएगा। बाकी चललुवा में दो पुलों का निर्माण हो रहा है। इसमें एक का काम शुरू हो गया है, दूसरे की टेंडर प्रक्रिया चल रही है। मैंने अपनी विधानसभा में 100 करोड़ की सड़कों का निर्माण किया है। इस बीच मैंने 18 किलोमीटर का एक फोरलेन बाईपास स्वीकृत करवाया है। आप इसे रिंग रोड का पहला चरण मान सकते हैं जो लामाचौड़ से निकलकर रुद्रपुर रोड में बेल बाबा पर मिलेगा और यह एक बेहतर बाईपास साबित होगा। पहले के नक्शे बने थे तब उसकी जद में आबादी और पक्के घर आ रहे थे लेकिन इस बार नए सिरे से नक्शा बनवाया है जो भाखड़ा पुल के बगल से फायर लाइन के किनारे-किनारे जाएगा। इसमें आबादी को भी कोई परेशानी नहीं होगी। इसके लिए 26 लाख रुपए शासन से स्वीकृत हो गए हैं। साथ ही भारत पेट्रोलियम के जरिए घरेलू गैस के लिए व्यापक स्तर पर काम चल रहा है और कई उपभोक्ताओं को पाइपलाइन के जरिए गैस भी मिलने लगी है।

आप 100 करोड़ की सड़कों की बात कर रहे हैं लेकिन अगर मुख्य मार्गों को छोड़ दें तो आंतरिक मार्गों की हालत खराब है, क्या कहेंगे?

देखिए ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के टूटने का कारण जल जीवन मिशन योजना है, हमने पहले ये सब सड़के बना दी थीं  लेकिन जब जल जीवन मिशन के तहत इसमें पाइपलाइन बिछी तो सड़के खोदी गईं। कहीं पानी चला, कहीं पानी नहीं चला। इस वक्त अभी बजट की कमी है और हम 10 करोड़ नगरीय क्षेत्र और 15 करोड़ ग्रामीण क्षेत्र के लिए ला रहे हैं जिनसे 3-4 माह के अंदर इन सारी सड़कों को दुरुस्त कर दिया जाएगा। कई जगह शहरी विकास विभाग के जरिए नई पानी की लाइन और सीवरेज का काम चल रहा है। जैसे-जैसे ये काम पूरे होंगे सड़कें भी दुरुस्त होती जाएंगी।

आप जल जीवन मिशन की बात कर तो रहे हैं लेकिन इस योजना में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं, पानी का कहीं पता नहीं?

आप यह तो नहीं कह सकते कि कहीं पानी नहीं आ रहा है, कहीं समस्याएं हो सकती हैं लेकिन मोटी बात यह है कि इस योजना के लिए बजट की कमी है। भारत सरकार से इसका बजट आना है। बीच में कुछ राशि आई थी जिसमें काम भी हुआ और नलों में पानी भी आया लेकिन ऊपर से पैसा ना आने के कारण इस समय इसमें काम बिल्कुल बंद है। अब नए बजट में व्यवस्था हुई है। इस बजट सत्र में बजट भी स्वीकृत हो चुका है। जल्द ही इसके लिए राशि जारी कर दी जाएगी। माननीय मुख्यमंत्री जी इस सम्बंध में सीधे प्रधानमंत्री के सम्पर्क में हैं और इसके लिए अच्छा बजट लेकर आए हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि भाखड़ा वार और भाखड़ा पार में विकास के बाबत असंतुलन है, कितनी सच्चाई है?

हमने किसी भी क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार नहीं किया है, मैंने हर जगह पर ध्यान दिया है। आप जिस क्षेत्र की बात करना चाह रहे हैं वहां मैंने बिजली योजनाओं और सिंचाई के लिए नलकूप स्वीकृत करवाए हैं। नहरों की मरम्मत के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराई और खिचड़ी नहर जिसे सबसे बड़ी नहर कहा जाता है, उसके जीर्णाेद्धार का काम चल रहा है पवलगढ़ में मैंने अच्छी राशि दी है। नहरों के लिए तो पैसा आया ही नलकूपों के माध्यम से हमने सिंचाई की व्यवस्था की है कुछ क्षेत्रों में अभी काम किया जाना बाकी है, हम उसकी भी व्यवस्था कर रहे हैं।

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और उपकरणों की कमी है और इस कमी को दूर करने के लिए आपने क्या पहल की, क्या किसी अस्पताल का अपग्रेडेशन हुआ है?

देखिए सबसे पहली बात तो यह है कि कोटाबाग के अस्पताल की स्थापना मैंने ही की, एक्स-रे मशीन भी मैं ही लाया। बैलपड़ाव अस्पताल का उच्चीकरण की बात चल रही है और डाॅक्टर की कमी तो सिर्फ कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र की समस्या नहीं है यह पूरे प्रदेश की समस्या है लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि डाॅक्टर पूरे हो और जो भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में कमियां हैं उनको शीघ्र पूरा किया जाए।

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है क्या आपके कार्यकाल में कोई नसर विद्यालय स्वीकृत हुआ और एक विशेष समस्या विद्यार्थियों के ड्रॉप आउट की है इसके बारे में आप क्या कहेंगे?

देखिए, जहां तक ड्रॉप आउट का मामला है तो यह अभिभावकों पर निर्भर है लेकिन मेरी विधानसभा में स्कूलों में शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। न ही प्राथमिक स्तर पर, न ही माध्यमिक स्तर पर और न ही डिग्री स्तर पर। कहीं शिक्षकों की कमी नहीं है और कई विद्यालय तो ऐसे हैं कि जहां बच्चे कम हैं और टीचर ज्यादा हैं।

आज के दिन युवाओं के लिए बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। आपने अपनी विधानसभा में रोजगार और उद्योग के लिए ऐसे का क्या काम किए जिससे कि बेरोजगारी दूर करने में सहायता मिली हो?

देखिए बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है जो स्थानीय स्तर की नहीं पूरे देश की है। हमारे क्षेत्र में भी है लेकिन उसके लिए हम काम कर रहे हैं। हमने अपनी विधानसभा में पांच सात उद्योग लगाए हैं जिसमें स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और इसके लिए हमने कोटाबाग में जंगल सफारी की शुरुआत की है। पवलगढ़ में स्थानीय युवाओं को बर्ड वाचिंग प्रोजेक्ट के जरिए रोजगार मिला है। क्षेत्र में होमस्टे खुले हैं और हम पर्यटन की छोटी-छोटी योजनाओं को इस क्षेत्र में लाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे युवकों को स्थानीय रोजगार मिले पलायन रुके। अभी बौर नदी पर एक छोटा डैम बन रहा है जो स्थानीय लोगों की आय का जरिया बनेगा। पैराग्लाइडिंग के जरिए युवाओं को रोजगार दिलाने के प्रयास जारी हैं। सरकारी नौकरियां कम हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराने की मेरी कोशिश है।

किसान जो की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, क्या अपनी विधानसभा में उनकी आय बढ़ाने के लिए आपने कोई विशेष पहल की है?

देखिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि किसानों की आय बढ़े और बजट में भी इसके लिए प्रावधान किए गए हैं। आप इसे एक छोटे एंगल से सोच कर मत देखिए। किसानों को खाद, बीजों पर सब्सिडी मिलती है, पशुपालन के लिए सरकार प्रोत्साहित करती है, मुर्गी पालन के लिए सरकार, प्रोत्साहित करती है। साथ ही हमने जो गांव में सड़क की कनेक्टिविटी दी, चाहे हमने सिंचाई की व्यवस्था में बढ़ोतरी की हो, इससे कृषि की उत्पादकता बढ़ती है और जिसके चलते किसान की आय भी बढ़ती है क्योंकि खेती के माध्यम से ही सारी आजीविका नहीं पाई जा सकती। तो इसलिए जो सरकारी योजनाएं किसानों के लिए चलाई जाती हैं किसानों को उनका भी लाभ लेना चाहिए जिससे कि उनकी आय में वृद्धि हो और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो।

आपकी विधानसभा में चौसला, धापला और कोटाबाग में खतरनाक नालों, पुल और भू-कटाव की समस्या है तो आपने इस सम्बंध में क्या किया?

गुरुणी नाले की जहां तक बात है, इसके लिए 11 करोड़ की योजना मंजूर हुई है शीघ्र उसमें शासनादेश हो जाएगा और उम्मीद है हम वहां जल्द ही काम भी शुरू कर देंगे, चौसला में दो-तीन रपटे हैं तो वहां पर अभी के लिए हमने कुछ किया नहीं है, विचार करेंगे क्योंकि वह बहुत बड़े बजट का काम है और धापला गांव के लिए हमने जिला प्लान से रोपवे स्वीकृत करवाया है, जल्द उस पर काम होगा और जहां तक धापला को जाने के लिए जो रोड है वह फाॅरेस्ट रोड है। डीएफओ से कहा है इसे पक्का करने के लिए। इस रोड को बनाने में एक लम्बी प्रक्रिया है, जमीन हस्तांतरण से लेकर बहुत सारी प्रक्रियाएं हैं। हम इस मामलों में भी लगे हुए हैं।

अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में सौ करोड़ की सड़कों और अन्य परियोजनाओं की बात कही, इन खर्चों में कितनी पारदर्शिता है और इसमें कितनी निगरानी रहती है? क्योंकि आम लोगों की शिकायत है कि योजनाओं की प्राॅपर निगरानी ना होने से उसकी गुणवत्ता पर फर्क पड़ता है। साथ ही आपने अपनी विधायक निधि का कितना खर्च किया है कि आपको नहीं लगता कि इन सब में पारदर्शिता होनी चाहिए?

देखिए जहां तक विधायक निधि का प्रश्न है तो ऐसे एक-एक काम को गिनाना मुश्किल है लेकिन हां, मैंने अपनी विधायक निधि 100 प्रतिशत खर्च कर ली है बल्कि मैं तो उसको तय समय से पहले ही खर्च कर चुका हूं और जहां तक पारदर्शिता की बात है हम पूरी निगरानी करते हैं कि कामों में गुणवत्ता रहे मैं तो अपनी योजनाओं की प्रगति की जानकारी अधिकारियों की बैठक बुलाकर समय-समय पर लेता रहता हूं अधिकारियों को  सख्त निर्देश  हैं कि काम की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

पार्टी के बाहर और पार्टी के अंदर आपके विरोधी आरोप लगाते हैं कि आप घोषणाएं तो बहुत करते हैं,  लेकिन उतना काम धरातल पर कहीं दिखाई नहीं देता?

वह बताएं तो कि किस-किस घोषणा को पूरा नहीं किया। विरोध करना है तो कीजिए लेकिन कम से कम ऐसी अफवाहें तो मत फैलाइए। पार्टी के अंदर हो या विपक्ष, यह आलोचना एक फैशन सा बन गया है। पार्टी भीतर कुछ लोगों की ऐसी मानसिकता हो गई है कि मेरा हर हाल में विरोध करना है। उन्हें धरातल पर जाकर देखना चाहिए कि मैं क्या घोषणा की थी और किन घोषणाओं पर काम चल रहा है। मैं तो चुनौती देता हूं कि आकर बताएं कि मैं किसी घोषणा को पूरा नहीं किया। सिर्फ बयान बाजी से ही अपने राजनीतिक मकसद को पूरा करने की कोशिश ना करें।

अगर आपकी पार्टी 2027 में भी आपको कालाढूंगी से विधानसभा का प्रत्याशी बनाती है तो आपकी प्राथमिकताएं क्या होगी?

देखिए टिकट देना तो पार्टी का काम है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा कि यहां से कौन चुनाव लड़ेगा लेकिन अगर पार्टी मुझे मौका देती है तो मेरी प्राथमिकताएं सड़क, बिजली, पानी और चिकित्सा के क्षेत्र में जो हमने काम किए हैं, उनको आगे बढ़ाने की होंगी। मेरी विधानसभा एक माॅडल विधानसभा के रूप उभरे मैं उस दिशा में विकसित करने की कोशिश कर रहा हूं और अगर मुझे भविष्य में मौका मिला तो मैं इसको एक माॅडल विधानसभा के रूप में विकसित होते देखना चाहूंगा।

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