बाएं से दिलीप जायसवाल, सुनील कुमार पिंटू, नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा

बिहार में बड़े राजनीतिक बदलाव की इबारत लिखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाएंगे। नीतीश कुमार कई बार कह चुके हैं कि यह उनका पुराना सपना था कि वे बिहार विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा सभी चार सदनों का हिस्सा बनें, अब उनकी विदाई तय है। इस चलते बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या पीएम मोदी फिर कोई चौंकाने वाला फैसला लेंगे? कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री? राज्य की बागडोर किसके हाथ में होगी यह बड़ा सवाल है।

राजनीतिक गलियारों से लेकर मीडिया और सोशल मीडिया में यह चर्चा तेज है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है इसलिए पहली बार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनने की सम्भावना जताई जा रही है। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि नए समीकरण में भाजपा का मुख्यमंत्री होगा जबकि जनता दल यूनाइटेड के दो नेता डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम के रूप में आगे लाया जा सकता है। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सीएम पद की रेस की बात करें तो कई नाम राजनीतिक चर्चा में हैं लेकिन बिहार की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा अमित शाह के उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने चुनावी सभाओं में कुछ नेताओं को ‘बड़ा आदमी’ बनाने का भरोसा दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने अलग-अलग मौकों पर तीन नेताओं नित्यानंद राय, सम्राट चैधरी और सुनील कुमार पिंटू के लिए यह बात कही थी। अब जब बिहार की सत्ता में बदलाव की चर्चा तेज है तो इस वाले वादे को मुख्यमंत्री पद की दौड़ से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय की बात करें तो वे लम्बे समय से केंद्र सरकार में मंत्री हैं और बिहार भाजपा के मजबूत
नेताओं में गिने जाते हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उजियारपुर में आयोजित एक रैली में अमित शाह ने नित्यानंद राय के समर्थन में भाषण देते हुए उन्हें अपना जिगरी दोस्त बताया था और जनता से उन्हें भारी मतों से जिताने की अपील की थी। इसी तरह अन्य नेताओं के लिए भी उन्होंने भविष्य में बड़ी भूमिका का संकेत दिया था।

वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम भी सुर्खियों में है। बिहार की राजनीति में अब तक भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं बना है इसलिए यह सम्भावना जताई जा रही है कि सम्राट चौधरी पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। वे कुशवाहा समाज से आते हैं और संगठन तथा सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। सीतामढ़ी सीट से बीजेपी विधायक सुनील कुमार पिंटू के नाम की चर्चा भी जोरों पर है तो बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का नाम भी सियासी हलकों में घूम रहा है। दिलीप वैश्य समाज से आते हैं और सीमांचल क्षेत्र खासकर किशनगंज इलाके में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। इसके अलावा विजय कुमार सिन्हा और संजीव चैरसिया जैसे कुछ अन्य नाम भी राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे रहे हैं। ऐसे में सस्पेंस बना हुआ है कि आखिर बिहार की बागडोर किसके हाथों में सौंपी जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा की राजनीति में अक्सर अंतिम फैसला चौंकाने वाला होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई राज्यों में मुख्यमंत्री पद के लिए ऐसे चेहरे सामने ला चुके हैं, जिनकी पहले ज्यादा चर्चा नहीं थी। मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और उत्तराखण्ड में पार्टी ने इसी तरह के फैसलों से राजनीतिक पंडितों को चैंकाया है। इसलिए बिहार में भी किसी नए या अप्रत्याशित चेहरे के मुख्यमंत्री बनने की सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पिछले करीब पच्चीस वर्षों से अब तक गठबंधन कोई भी रहा हो, मुख्यमंत्री का चेहरा लगभग तय रहता था लेकिन अब पाटलिपुत्र की राजनीति में पहली बार लम्बे समय बाद नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या बिहार को पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिलेगा या फिर राजनीति कोई नया मोड़ लेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। फिलहाल नए मुख्यमंत्री को लेकर ‘सरप्राइज’ की भी सम्भावना अधिक है।

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