खेल जगत के सितारों की चमक पद्म पुरस्कारों में भी देखने को मिली है जहां रोहित शर्मा और हरमनप्रीत कौर को पद्मश्री के लिए चुना गया है वहीं टेनिस दिग्गज विजय अमृतराज को पद्म भूषण तो कई अन्य खिलाड़ियों को उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। पद्म पुरस्कारों में खेल सितारों की मौजूदगी यह साबित करती है कि संघर्ष को जब सम्मान मिलता है तो वह प्रेरणा बन जाता है। ये नाम सिर्फ विजेता नहीं हैं बल्कि उस देश की पहचान हैं जो खेल को आत्मसम्मान और राष्ट्र गौरव से जोड़कर देखता है। सम्मान जब संघर्ष के साथ जुड़ता है तभी खिलाड़ी और खेल दोनों का कद ऊंचा होता है
पद्म पुरस्कार उन लोगों को दिए जाते हैं जिन्होंने किसी भी क्षेत्र में असाधारण सेवा की हो। पद्म भूषण भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है जो भारत रत्न और पद्म विभूषण के बाद आता है। पद्मश्री चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। हर साल की तरह इस साल भी पद्म पुरस्कारों की घोषणा हो गई है लेकिन सम्मान की सूची में खेल जगत की मौजूदगी खास रही। क्रिकेट, हाॅकी, टेनिस और कुश्ती जैसे खेलों से जुड़े दिग्गजों को उनके संघर्ष, समर्पण और देश के लिए दिए गए योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा और महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को पद्म श्री जबकि भारतीय टेनिस के अंतरराष्ट्रीय चेहरे विजय अमृतराज को पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा ने खेल प्रेमियों का ध्यान खींचा है। खास बात यह कि इस बार पद्म पुरस्कारों ने यह भी संदेश दिया कि खेल केवल मैदान पर खेले जाने वालों से नहीं बनता बल्कि मैदान से बाहर रहकर भी सम्मान अर्जित किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि खेल और सम्मान का रिश्ता क्या है? खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार जरूरी क्यों? क्या कोच भी सम्मान के हकदार हैं? क्या यह युवाओं के लिए प्रेरणा और भविष्य की तैयारी है?
भारत के खेल इतिहास में ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जहां खिलाड़ियों ने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बनाया। कई खिलाड़ी आर्थिक तंगी, सामाजिक दबाव और सुविधाओं की कमी के बावजूद मैदान में उतरे और अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया। यही संघर्ष जब सफलता में बदलता है तो वह सिर्फ व्यक्तिगत जीत नहीं रहती बल्कि पूरे समाज की प्रेरणा बन जाती है। जब खिलाड़ियों को पद्म पुरस्कार और राष्ट्रीय सम्मान मिलते हैं तो यह उनके खेल कौशल के साथ-साथ उनके संघर्ष की भी स्वीकृति होती है। यह सम्मान बताता है कि देश अब केवल जीत को नहीं बल्कि उस मेहनत और धैर्य को भी पहचान रहा है जिसने जीत की नींव रखी। संघर्ष से सफलता तक की यह यात्रा युवाओं के लिए सबसे बड़ा संदेश है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो तो सफलता निश्चित है। खेल इसी उम्मीद का दूसरा नाम है जहां हर हार एक सबक है और हर जीत एक नई शुरुआत।
गौरतलब है कि पद्म पुरस्कारों की घोषणा हर साल 26 जनवरी को की जाती है और मार्च-अप्रैल में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में ये पुरस्कार दिए जाते हैं। साल 2026 के लिए राष्ट्रपति ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी है। इस सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं वहीं इस बार अकेले खेल जगत में 9 पुरस्कार दिए जाएंगे। इस लिहाज से वर्ष 2026 भारतीय खेल जगत के लिए कई मायनों में खास साबित होता दिख रहा है। ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और विश्वस्तरीय टूर्नामेंटों के बीच सरकारों और खेल संस्थाओं द्वारा खिलाड़ियों को पुरस्कार देने की घोषणाएं खेलों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही हैं। इन घोषणाओं का उद्देश्य सिर्फ पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करना ही नहीं बल्कि खेल संस्कृति को मजबूत करना, युवाओं को प्रेरित करना और खिलाड़ियों के संघर्ष को सामाजिक मान्यता देना भी है। ऐसे में सबसे पहले बात करते हैं लोकप्रिय खेल क्रिकेट की।
रोहित शर्मा : मुम्बई की गलियों से विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंचे रोहित की कप्तानी में भारत ने टी-20 विश्व कप 2024 और चैम्पियंस ट्राॅफी 2025 जैसे बड़े खिताब जीते। बल्लेबाज के रूप में 20 हजार से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन और 50 शतकों का आंकड़ा उन्हें भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ियों की कतार में खड़ा करता है। पद्म श्री सम्मान उनके नेतृत्व और निरंतरता की मुहर है। रोहित ने 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था लेकिन वनडे क्रिकेट में वह भारत के अहम खिलाड़ी बने रहे। पिछले साल उन्होंने वनडे प्रारूप में 650 रन बनाए और टीम के लिए लगातार योगदान दिया। रोहित अब उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिन्हें पद्म श्री का सम्मान मिला है। बीते वर्षों में उनकी कप्तानी ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाई दी। बल्लेबाजी में भी वे निरंतर चमके और इंटरनेशनल लेवल पर 20,109 रन, 50 शतक और 111 अर्धशतक बनाए। टी-20 और टेस्ट से संन्यास के बाद वे अब वनडे पर फोकस कर रहे हैं।
हरमनप्रीत कौर : साल 2025 भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर के लिए बेहद खास रहा, जब उन्होंने घरेलू सरजमीं पर टीम को विश्वकप जिताने में अहम भूमिका निभाई और देश का नाम रोशन किया। वहीं अब 2026 में हरमनप्रीत कौर को उनके शानदार नेतृत्व और उपलब्धियों के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। कौर ने भारतीय महिला क्रिकेट को नई पहचान दी। घरेलू सरजमीं पर पहला वनडे विश्व कप जीतना सिर्फ एक ट्राॅफी नहीं बल्कि भारतीय महिला खेल इतिहास का निर्णायक मोड़ था। उनका पद्म श्री सम्मान उस बदलाव की मान्यता है जिसमें महिला खिलाड़ी अब हाशिए पर नहीं बल्कि केंद्र में हैं।
सविता पुनिया : भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया को भी पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। टोक्यो ओलम्पिक 2020 में उपकप्तान रहीं सविता के नेतृत्व में भारत ने ऐतिहासिक चैथा स्थान हासिल किया। वे 300 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर हैं और उनके नेतृत्व में भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में कांस्य, एफआईएच नेशंस कप और लगातार दो एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी खिताब जीते। सविता ने लम्बे समय तक भारतीय महिला हाॅकी टीम की रक्षा पंक्ति को मजबूती दी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया।
प्रवीण कुमार : पेरिस ओलम्पिक 2024 में स्वर्ण पदक और 2020 में पैरालम्पिक टोक्यो में रजत पदक हासिल करने वाले प्रवीण कुमार का कहना है उन्हें आशा थी कि इस बार उनको पदम श्री पुरस्कार मिलेगा। उन्होंने सरकार का धन्यवाद किया है कि वह खिलाड़ियों को प्रोत्साहन दे रही है। अब उनका अगला टारगेट एशियन पैरालम्पिक और विश्व पैरालम्पिक चैम्पियनशिप है।
विजय अमृतराज : भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज को इस वर्ष पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया है। वह इस साल पद्म भूषण पाने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं। पद्म भूषण भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। अमृतराज को इससे पहले 1983 में पद्मश्री और 1974 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है जो भारतीय खेलों में उनके दीर्घकालिक योगदान को दर्शाता है। विजय का पद्म भूषण सम्मान भारतीय टेनिस के स्वर्णिम अध्याय की याद दिलाता है। 1970 और 80 के दशक में जब भारत का नाम टेनिस की वैश्विक सूची में विरले ही लिया जाता था तब अमृतराज ने ग्रैंड स्लैम कोर्ट पर भारतीय तिरंगा लहराया। बोर्ग और मैकेनरो जैसे दिग्गजों पर उनकी जीतें आज भी भारतीय खेल इतिहास का गौरव हैं।
इस बार पद्म पुरस्कारों ने यह भी संदेश दिया कि खेल केवल मैदान पर खेले जाने वालों से नहीं बनता। कुश्ती कोच व्लादिमेर मेस्तविरिश्विली को मरणोपरांत पद्म श्री और हाॅकी के दिग्गज खिलाड़ी-कोच बलदेव सिंह को मिला सम्मान उन गुरुओं की भूमिका को रेखांकित करता है जिनके बिना पदक सम्भव नहीं होते।
पद्म पुरस्कार केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं बल्कि उस कठिन रास्ते की पहचान हैं जिसे खिलाड़ी बचपन से तय करता है। सीमित संसाधन, चोटों का दर्द, असफलताओं का दबाव और लगातार खुद को साबित करने की चुनौतियों के बीच जब कोई खिलाड़ी देश के लिए खड़ा होता है तब उसका सम्मान पूरे समाज का सम्मान बन जाता है।
वर्ष 2026 के लिए घोषित कुल 131 पद्म पुरस्कारों में खेल जगत की मजबूत उपस्थिति यह संकेत देती है कि भारत में खेल अब मनोरंजन भर नहीं रहे। यह सम्मान युवाओं को संदेश देता है कि खेल भी उतना ही सम्मानजनक और सुरक्षित करियर है जितना कोई और क्षेत्र।
पुरस्कारों की घोषणा सिर्फ मौजूदा खिलाड़ियों तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के लिए संदेश भी हैं। जब कोई बच्चा देखता है कि खिलाड़ी को सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा मिल रही है तो वह खेल को करियर विकल्प के रूप में अपनाने का साहस करता है।
खिलाड़ी राज्य/देश पद्म सम्मान
विजय अमृतराज संयुक्त राज्य अमेरिका पद्म भूषण
बलदेव सिंह पंजाब पद्मश्री
भगवान दास रैकवार मध्य प्रदेश पद्मश्री
हरमनप्रीत कौर भुल्लर पंजाब पद्मश्री
के. पाजनिवेल पुडुचेरी पद्मश्री
प्रवीण कुमार उत्तर प्रदेश पद्मश्री
रोहित शर्मा महाराष्ट्र पद्मश्री
सविता पूनिया हरियाणा पद्मश्री
व्लादिमीर मेस्तविरिश्विली जाॅर्जिया पद्मश्री
(मरणोपरांत)

