entertainment

लंदन में अमर हुई ‘डीडीएलजे’ की मोहब्बत

ऑनस्क्रीन जोड़ी की स्टैच्यू का अनावरण करते काजोल एंड शाहरुख
लंदन के प्रतिष्ठित लीसेस्टर स्क्वायर में शाहरुख खान और काजोल की प्रतिष्ठित फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के आइकाॅनिक सीन को समर्पित स्टैच्यू स्थापित किया गया है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय रोमांटिक जोड़ी की ऑनस्क्रीन  केमिस्ट्री को ब्रिटेन ने इस तरह स्थायी सम्मान दिया है। इससे पहले भी दुनिया के कई देशों में भारतीय कलाकारों जैसे अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर, नीतू कपूर, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, अनिल कपूर, प्रभास, दीपिका पादुकोण आदि के पुतले और मूर्तियां लगाई जा चुकी हैं जो भारतीय सिनेमा के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती हैं


लंदन ने एक बार फिर भारतीय सिनेमा के प्रति अपना सम्मान दिखाते हुए बाॅलीवुड की सबसे लोकप्रिय ऑनस्क्रीन जोड़ी शाहरुख खान और काजोल को स्थायी रूप से अमर कर दिया है। प्रतिष्ठित लीसेस्टर स्क्वायर में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के आइकाॅनिक सीन को दर्शाता यह स्टैच्यू न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर में बसे उन करोड़ों प्रशंसकों के लिए भावनात्मक क्षण बन गया है, जिन्होंने 1995 में रिलीज हुई इस फिल्म को सिर्फ एक कहानी नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव माना। भारतीय फिल्मों के लिए विदेशों में सम्मान की परम्परा नई नहीं है लेकिन रोमांस के प्रतीक बने राज-सिमरन को इस तरह स्मारक के रूप में स्थापित करना यह साबित करता है कि बाॅलीवुड का स्वर्णिम दौर और उसका असर आज भी वैश्विक लोकप्रियता की ऊंचाइयों पर कायम है।

इस स्टैच्यू का अनावरण ब्रिटिश फिल्म संस्थान के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर किया गया, जहां सीन्स इन द स्क्वायर (Scenes in the Square) परियोजना के अंतर्गत दुनिया की कई प्रसिद्ध फिल्मों के यादगार पलों को मूर्त रूप दिया जा रहा है। इसी श्रृंखला में शाहरुख-काजोल का यह पुतला शामिल किया गया है। दिलचस्प यह है कि जहां हाॅलीवुड के अनेक महान कलाकारों की प्रतिमाएं पहले से ही इस इलाके में मौजूद थीं, भारतीय सिनेमा का यह प्रतिनिधित्व अपने आप में एक अनूठी उपलब्धि माना जा रहा है। इस स्टैच्यू को उस दृश्य की शैली में बनाया गया है जब राज और सिमरन यूरोप की यात्रा के दौरान एक-दूसरे के करीब आते हैं जो फिल्म की रोमांटिक आत्मा को दर्शाता है।

गौरतलब है कि लंदन ने शाहरुख खान को हमेशा विशेष सम्मान दिया है। किंग खान के नाम से मशहूर अभिनेता की फिल्मों का ब्रिटेन के बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रहा है। लेकिन यह सम्मान केवल लोकप्रियता को ही नहीं बल्कि सिनेमा की सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है। काजोल और शाहरुख की जोड़ी ने 90 के दशक में रोमांस को नई परिभाषा दी थी। ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ दुनिया की सबसे लम्बे समय तक चलने वाली फिल्मों में से एक है और इसे भारत सहित कई देशों में आज भी याद किया जाता है। लंदन में लगा यह स्टैच्यू उन यादों को पुनर्जीवित कर देता है, जहां भारतीय प्रवासी समुदाय खुद को इस कहानी का हिस्सा महसूस करता था।
भारतीय कलाकारों के पुतले और मूर्तियां पहले भी कई बार विदेशों में लगाई जा चुकी हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा की लोकप्रियता और प्रभाव को दिखाती हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे देशों में भारतीय हस्तियों को समर्पित इस तरह के स्मारक न सिर्फ कला के प्रति आदर का भाव जगाते हैं बल्कि यह भी बताते हैं कि भारत की सांस्कृतिक विरासत की पहुंच कितनी व्यापक है। यदि इन उदाहरणों को विस्तार से देखा जाए तो सबसे पहले नाम आता है राज कपूर का जिनकी लोकप्रियता सोवियत रूस में किसी भी भारतीय अभिनेता से कहीं अधिक रही। माॅस्को के फिल्म स्टूडियो परिसर में राज कपूर की मूर्ति लगाई गई थी जिसे आज भी रूसी दर्शकों के बीच सम्मानपूर्वक देखा जाता है। राज कपूर की फिल्मों ने रूस के दर्शकों के दिलों में ऐसा स्थान बनाया था कि उन्हें ‘हिन्दुस्तानी चार्ली चैपलिन’ कहा जाने लगा।

अमिताभ बच्चन विश्व भर में भारतीय सिनेमा के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक हैं। उनकी ऊंचाई, व्यक्तित्व और अभिनय की क्षमता ने उन्हें वैश्विक स्तर पर एक ब्रांड बना दिया। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के दौरान उनका एक जीवंत पुतला स्थापित किया गया था जो अमिताभ के करियर की लोकप्रियता का प्रतीक माना जाता है। इतना ही नहीं, विश्वप्रसिद्ध मैडम तुसाद म्यूजियम में भी अमिताभ बच्चन का वैक्स स्टैच्यू उन पहले भारतीय कलाकारों में शामिल है जिन्हें ये सम्मान प्राप्त हुआ। आज यह संग्रहालय दुनिया के अलग-अलग शहरों में फैला हुआ है और जहां-जहां यह मौजूद है, वहां अमिताभ का पुतला भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

मैडम तुसाद ने बाद के वर्षों में भारतीय हस्तियों की बड़ी संख्या को अपने संग्रह में शामिल किया। लता मंगेशकर, ऐश्वर्या राय बच्चन, दीपिका पादुकोण, करीना कपूर, सलमान खान, रितिक रोशन, शाहरुख खान और यहां तक कि क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, इन सभी को स्टैच्यू के माध्यम से विश्व के सामने प्रस्तुत किया गया। इन पुतलों की लोकप्रियता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि लोग टिकट लेकर सिर्फ अपने पसंदीदा कलाकार के साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए घंटों कतार में खड़े होते हैं।

दक्षिण भारतीय सिनेमा का प्रभाव भी इस मामले में पीछे नहीं रहा। ‘बाहुबली’ की सफलता के बाद प्रभास का वैक्स स्टैच्यू बैंकॉक में लगाया गया, जिसे दक्षिण एशियाई पर्यटकों के बीच भारी लोकप्रियता मिली। दक्षिण भारत के सुपरस्टार रजनीकांत का सम्मान भी कई देशों में अलग-अलग रूपों में किया गया है। जापान में उनके प्रभाव का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि उनकी फिल्मों की रिलीज पर जापानी सिनेमाघरों में त्यौहार जैसा माहौल होता है। हालांकि औपचारिक मूर्तियां कम हैं लेकिन उनकी छवि को लेकर कई कला संस्थानों ने स्थायी
इंस्टॉलेशन बनाए हैं।

हाल के वर्षों में दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी का स्टैच्यू दुबई में स्थापित किया गया जिसने भारतीय समुदाय को भावुक कर दिया। श्रीदेवी को भारतीय सिनेमा की सबसे बहुमुखी अभिनेत्री माना जाता है। उनकी लोकप्रियता उत्तर और दक्षिण दोनों में बराबर थी। इस तरह के स्मारक कलाकार के प्रति सम्मान ही नहीं, बल्कि भारतीय प्रवासियों की उस पीढ़ी की स्मृतियों को भी सम्भाल कर रखते हैं जो उन फिल्मों के साथ बड़ी हुई।

काजोल स्वयं भारतीय फिल्मों की उन अभिनेत्रियों में से एक हैं जिनकी छवि दुनिया भर में प्रिय रही है। लंदन में शाहरुख-काजोल का स्टैच्यू इसलिए भी खास है क्योंकि यह रोमांटिक भारतीय सिनेमा की स्वर्णिम परम्परा को मान्यता देने जैसा है। भारतीय फिल्मों ने 90 के दशक में यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया में जिस तरह का सांस्कृतिक सम्बंध स्थापित किया उसका असर आज भी महसूस किया जा सकता है। पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नजरिए से भी भारत की पहचान को इन स्मारकों ने विश्व भर में मजबूत बनाया है।

लंदन का यह नया स्टैच्यू केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की सार्वभौमिक कथा यानी प्रेम, परिवार, रिश्ते और भावनाओं का एक अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज है। यह स्टैच्यू उन सभी भारतीय कलाकारों के लिए भी प्रेरणा है, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत करके फिल्मों को देश की सीमाओं से बाहर तक पहुंचाया। सबसे बढ़कर यह उन दर्शकों की भावनाओं का सम्मान है जिन्होंने भारतीय फिल्मों को केवल मनोरंजन नहीं बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माना।

शाहरुख खान और काजोल की जोड़ी पिछले तीन दशकों से दुनियाभर के दर्शकों के दिलों पर राज कर रही है। यह स्टैच्यू उनके योगदान को उसी ऊंचाई पर रखता है, जहां प्रेम सिर्फ कहानी नहीं बल्कि एक साझा अनुभूति बन जाता है। आने वाले समय में ऐसे और कई सम्मान भारतीय कलाकारों के हिस्से में आएंगे क्योंकि दुनिया अब भारत की कला, संस्कृति और सिनेमा की शक्ति को पहले से कहीं अधिक स्वीकार कर रही है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD