उत्तरकाशी जनपद की पुरोला विधानसभा सीट (एससी, आरक्षित) गढ़वाल हिमालय के जौनपुर रवांई-भटवाड़ी क्षेत्र की सीमा पर स्थित आदिवासी -ग्रामीण बहुल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है। यह सीट सामाजिक रूप से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और यहां के चुनावी मुद्दों में आम तौर पर सड़क, संचार, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, रोजगार, आपदा, भूस्खलन, पलायन, सेब बागवानी, कृषि तथा पयज्टन प्रमुख रहते हैं। भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण विकास योजनाओं का क्रियान्वयन, कनेक्टिविटी और आपदा प्रबंधन यहां की राजनीति के केंद्र में रहते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के दुर्गेश्वर लाल पुरोला सीट से विधायक चुने गए। उन्होंने कांग्रेस के मालचंद को 6,296 वोटों के अंतर से हराया। दुर्गेश्वर लाल को 27,856 वोट और मालचंद को 21,560 वोट मिले थे। इस विधानसभा का हाल बदहाल है और विधानसभा यात्रा के दौरान हमारे विशेष संवाददाता कृष्ण कुमार को जनता में विधायक को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला
जनपद उत्तरकाशी की खूबसूरत और उपजाऊ रवांई घाटी के नाम से विख्यात पुरोला विधानसभा पृथक उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद अस्तित्व में आई और तभी से यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यह विधानसभा पुरोला, मोरी और आधी नौगांव विकासखंड के क्षेत्र में सिमटी हुई है। पुरोला नगर पालिका और नौगांव नगर पंचायत इस विधानसभा में शामिल हैं। राजनीतिक तौर पर यह क्षेत्र अविभाजित उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा दखल देता रहा है। स्वर्गीय बलदेव सिंह आर्य 6 बार, स्वर्गीय बर्फ़ियालाल ज्वांठा और ज्ञानचंद तीन-तीन बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बलदेव आर्य और बफिज्यालाल ज्वांठा उत्तर प्रदेश में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं।
वषज् 2022 में भाजपा ने दुर्गेश्वर लाल को उम्मीदवार बना कर चुनाव में उतारा जिन्होंने कांग्रेस के मालचंद को 6 हजार से ज्यादा मतों से पराजित कर जीत दर्ज कराई। इस सीट पर राज्य गठन के बाद तीन बार भाजपा और दो बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है।
समस्याओं का अंबार है पुरोला विधानसभा
पुरोला विधानसभा में बुनियादी सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। स्वास्थ्य, चिकित्सा, रोजगार, शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा यानी कमोवेश हर क्षेत्र में आज भी पिछड़ा हुआ है। इस विधानसभा में बेरोजगारी चरम पर है। दुर्गेश्वर लाल पर इन दिनों एक आरोप खासी चर्चा में है कि उनके द्वारा 2021 से 2025 तक विधायक बनने के बाद भी मनरेगा मजदूरी के नाम पर सरकारी धन लेते हैं। आरोप यह भी है कि उनकी पत्नी भी मनरेगा मजदूर के नाम पर मजदूरी प्राप्त करती रही है। विधायक दुर्गेश्वर लाल ने इस मामले में विडियो जारी कर कहा है कि वह पहले मनरेगा मजदूरी करते थे लेकिन किसी ने उनके जॉब कार्ड का दुरुपयोग करके उनके नाम से धोखाधड़ी की है। इस मामले में विधायक ने पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया है साथ ही इस प्रकरण में जांच करने के लिए प्रशासन को लिखा है।
बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं
इस विधानसभा में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से बदहाल है। मोरी विकास खण्ड के बंघाड़ क्षेत्र के हालात तो सबसे बदतर हैं। जिलेन, मैंडा, बलावर, च्यूवां, बरनाली, जागटा, जोराड़ी,कोगुल, डगोली, माकोड़ी और टिकोची, किरानु दुचाणु, धुनारा, डामटी तथा मलाणा,ऐराड़ा,नकोट व सलौण तथा दो दर्जन तोक गांवो की करीब 12 हजार की आबादी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक की सुविधा नहीं है। इन गांवों के लिए 118 किलोमीटर दूर आराकोट में केवल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है जो कि चिकित्सक के बजाय फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। इस कारण स्थानीय नागरिकों को हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू में अपना इलाज करवाने के लिए जाना पड़ता है। विभागीय मानकों के अनुसार 10 हजार की आबादी में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होना जरूरी है बावजूद इसके 12 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मयस्सर नहीं हो पाई हैं।
स्थानीय निवासी और कास्तकार महेंद्र चौहान कहते हैं कि “राज्य बनने के बाद उम्मीद थी कि कम से कम बांगाड़ क्षेत्र के निवासियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं होगीं लेकिन 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी हम लोगों को कोई सुविधा नहीं मिल पाई है। हमें आज भी हिमाचल प्रदेश के रोहडू में अपने इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति ऐसी नहीं है कि वहां हमें इलाज मिल सके। कहीं डॉक्टर नहीं है तो कहीं स्टाफ नहीं है। कई बार हमें लगता है कि हम हिमाचल प्रदेश के निवासी होते तो हमारे हालात ज्यादा बेहतर होते।”
पुरोला नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति भी बदहाल है। भवन है लेकिन स्टाफ और डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। हालांकि पुरोला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उप जिला अस्पताल बनाए जाने की घोषणा स्वयं मुख्यमंत्री के द्वारा की जा चुकी है और बजट भी अवमुक्त कर दिया गया है।
मोरी विकास खण्ड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत भी कुछ ज्यादा बेहतर नहीं है। इमारत तो भव्य बनी है लेकिन बुनियादी सुविधाएं हमेशा से ही कमतर रही हैं। राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा 108 की एम्बुलेंस को बीते कई वषोज्ं से सड़क पर ही कबाड़ बनने के लिए छोड़ दिया गया है जबकि इस एम्बुलेंस को मरम्मत करवा कर उपयोग में लाया जा सकता था।
पुरोला विधानसभा के दूसरे नगरीय क्षेत्र नौगांव नगर पंचायत का 30 बिस्तरों वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समूचे विधानसभा के स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का आइना है। 1987 में स्थापित यह अस्पताल इतने वर्षों के बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के समय में यह अस्पताल बेहतर काम करता था लेकिन राज्य बनने के बाद सबसे ज्यादा बुरा असर इस अस्पताल पर पड़ा। लम्बे समय से इसमें गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई है जबकि प्रतिमाह इस अस्पताल में 40 से भी ज्यादा प्रसव के मामले आते हैं। इसी तरह से एक्सरे की तैनाती भी नहीं हुई है। इन हालातों में दुर्घटनाओं में घायलों का उपचार किस तरह से किया जाता है यह अच्छी तरह से समझा जा सकता है। इसी तरह से गर्भवती महिलाओं के प्रसव आदि मामलों में भी उपचार कैसे होता होगा यह भी गम्भीर सवाल बना हुआ है।
ग्रामीण सड़कों की भी दुर्दशा
इस विधानसभा के तीनों ही विकास खंडों में ग्रामीण सड़कों के हालात बहुत ही खस्ता हैं। मोरी ब्लॉक के बांगाड़ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के निवासी आज भी किसी तरह से इन खस्ताहाल सड़कों से ही आवागमन करने को मजबूर हैं। इस क्षेत्र के करीब 3 दर्जन गांवों को जोडने के लिए आराकोट कलीच मोटर मार्ग वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत द्वारा स्वीकृत किया गया था। इसका बजट भी स्वीकृत कर दिया गया था। 2021 में सड़क को कलीच गांव तक ले जाया गया। तब से लेकर आज तक इस सड़क का न तो डामरीकरण किया जा सका है और न ही इसका मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य किया गया। लोक निर्माण विभाग के मानकों के अनुसार सड़क की चौड़ाई का निमाज्ण 5 मीटर किया जाता है लेकिन यह सड़क 4 मीटर ही बनाई गई है जबकि अनेक स्थानों पर तो 3 मीटर से भी कम है। आज भी यह सड़क समूचे बांगाड़ क्षेत्र के फल उत्पादक किसानों के लिए अपनी फसल को बाजारों में ले जाने का एक मात्र साधन है।
इसी बांगाड़ क्षेत्र के सर्वोच्च धार्मिक स्थल चलदा महासू खडियार गांव के लिए एक संपर्क मार्ग तो वना हुआ है लेकिन यह इतना संकरा है कि इसमें एक साथ दो वाहनों का आवागमन होने पर जाम लग जाता है। इतना ही नहीं चलदा महासू मंदिर के लिए वर्षों पुराना लोहे का पुल बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस पुल पर पैदल आवागमन होने पर पुल की लोहे की प्लेटें बुरी तरह से हिलने लगती हैं। प्रशासन ने इस पर चेतावनी का बोर्ड लगाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है।
स्थानीय निवासी वजीर जयपाल बताते हैं कि “खडियार क्षेत्र सबसे बड़े महासू देवता चलदा महासू का क्षेत्र है। मंदिर के दर्शकों के लिए श्रद्धालुओं का तांता वर्ष भर लगा रहता है। लेकिन सड़क का चौड़ीकरण नहीं हो पाने के कारण समस्या बनी रहती है। झूला पुल इस क्षेत्र के कई गांवों के लिए एक मात्र आवागमन का माध्यम है जिसमें घोड़े-खच्चरों से सामान लाने-ले जाने के लिए इसी पुल का उपयोग करते हैं लेकिन पुल के हालात खराब होने से सभी के लिए खतरा बना हुआ है।”
इसी तरह से नौगांव प्रखंड में भी ग्रामीण सड़कों के हालात बदतर बने हुए हैं। नौगांव बाजार से मटियाली, बिंगसी, नैणी, कुड किसणी, कसाउं आदि गावों के लिए संपर्क मार्ग बनाया गया है लेकिन इस मार्ग पर छोटे वाहनों का चलना भी मुश्किल से हो पाता है। यह सभी गांव स्यूली फल पट्टी क्षेत्र में आते हैं जिसमें सेब के अलावा अन्य फलों के बागीचे हैं लेकिन इस क्षेत्र के किसानों के लिए अपनी फसल को बाजार में ले जाने के लिए बेहद कठिनाइयां आती रही है। बरसात में तो इस सड़क पर आवागमन एक तरह से ठप्प हो जाता है।
स्थानीय निवासी जितेंद्र नेगी कहते हैं कि “कई बार इस सड़क की मरम्मत के लिए विधायक, जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है लेकिन इसकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। अगर सड़क कहीं से टूट जाए तो दो-दो हप्ते तक सड़क बंद ही रहती है जिसके कारण नकदी फसलों को बाजार में ले जाना मुश्किल हो जाता है। फसल सड़ जाती है और उसे औने-पौने दामों पर बेचने को हमें मजबूर होना पड़ता है।”
उच्च शिक्षा के लिए तरसते युवा
उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के नाम पर भी अभी तक कोई खास प्रगति पुरोला विधानसभा क्षेत्र में नहीं देखी गई है। हालांकि राज्य के सर्वाधिक चर्चित भर्ती घोटाले में मोरी विकास खंड चर्चाओं में रहा है। भर्ती घोटाले का मास्टर मांइट हाकम सिंह मोरी क्षेत्र का निवासी रहा है। हैरत की बात यह है कि तीनों ही विकास खंडों में तकनीकी शिक्षा का कोई संस्थान नहीं है। पुरोला नगर 20 हजार की आबादी वाला क्षेत्र है लेकिन यहां एक भी तकनीकी शिक्षा का केंद्र नहीं है। मोरी क्षेत्र में कई दर्जन गावों के छात्रों के लिए एक महाविद्यालय भवन का निर्माण आज तक पूरा नहीं हो पाया है। इस चलते छात्र मंदिर परिसर में पढने को मजबूर हैं।
गौरतलब है कि मोरी विकास खंड के अति दुर्गम गांव जखोल में राजकीय इंटर कॉलेज का पुराना भवन जीर्ण-शीर्ण होने के चलते 2021 में 3 करोड़, 30 लाख, 32 हजार की लागत से नए भवन का निर्माण कार्य आरम्भ हुआ था लेकिन पांच वर्ष बीतने के बाद भी यह निर्माणाधीन ही है जबकि दिसम्बर 2024 तक इसके पूर्ण होने की धरत टेंडर में रखी गई थी। यही नहीं इस के निर्माण में भारी अनियमितता का भी आरोप लग रहा है। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी के चलते जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी के द्वारा जांच भी की गई लेकिन आज तक इसका भवन पूरा नहीं हो पाया है और न ही कोई कार्रवाई की गई है।
स्थानीय निवासी और पत्रकार आंनद परमार का कहना है कि “विभाग द्वारा पूरा भुगतान भी कर दिया गया है लेकिन कार्य अभी भी 70 फीसदी ही हुआ है। शिक्षा विभाग के अधिकारी मामले में बेहद सुस्त रहे हैं। जब मुख्यमंत्री के शिकायत पोर्टल पर इसकी शिकायत की गई तो विभागीय अधिकारी नींद से जागे और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच की गई। जांच के बाद निर्माणदायी संस्था उत्तराखण्ड पेयजल संसाधन विकास और निर्माण निगम को पत्र लिखकर निर्माण कार्यों का भौतिक प्रमाण पत्र और वित्तीय प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई, लेकिन कार्यवाही क्या हुई? और यह स्कूल कब बनेगा? इसकी आज भी कोई स्पष्ट जानकारी विभाग नहीं दे रहा है। जिस तरह से निर्माण कार्य चल रहा है उससे तो लगता नहीं है कि 2026 में भी इस इंटर कॉलेज का भवन पूरा हो पाएगा।”
हालांकि वर्नीगार्ड क्षेत्र में एक महाविद्यालय की घोषणा भी हुई है जिसकी डीपीआर भी बन चुकी है साथ ही डामटा में केंद्रीय विद्यालय की भी घोषणा हो चुकी है जिसकी भूमि चयन आदि की प्रक्रिया चल रही है।
वर्षों पुरानी पेयजल योजना के भरोसे जनता
पुरोला नगर क्षेत्र के लिए 1980 में ‘कुठारा-पुरोला पेयजल योजना’ के जरिए जल आपूर्ति की व्यवस्था की गई थी लेकिन आज तक उसका विस्तारीकरण या पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है। स्थानीय निवासी और कारोबारी बलदेव असवाल बताते हैं कि “जब पुरोला नगर की आबादी सिर्फ दो हजार थी तब यह योजना बनी थी लेकिन आज नगर पालिका क्षेत्र बन गया है और बीस हजार की आबादी हो चुकी है बावजूद इसके पेयजल योजना का पुनर्निर्माण नहीं हो पा रहा है। दो हजार लोगों के लिए जो पाइप लाइन बिछाई गई थी और जो जलस्रोत दो हजार की आबादी के लिए पर्याप्त थे वही जलस्रोत आज 20 हजार की आबादी को पानी आपूर्ति कर रहे हैं। इसके कारण पेयजल की भारी कमी बनी हुई है।”
यही नहीं पुरोला क्षेत्र विख्यात लाल चावल के उत्पादन का एक बड़ा क्षेत्र रहा है। सम्पूणज् रवांई क्षेत्र खेती-किसानी से आज भी जुड़ा हुआ है बावजूद इसके सिंचाई की सुविधाएं आज भी अपग्रेड नहीं हो पाई हैं। जो पुरानी नहरें थी वह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। नौगांव और मोरी क्षेत्र में भी सिंचाई की सुविधा सिर्फ कुछ ही ऐसे खेतों तक है। बांगाड़ खेत्र में सेब का उत्पादन होता है। स्थानीय किसानों ने क्षेत्र में दर्जनों जलस्रोतों से स्वयं सिंचाई के साधन बनाए हुए हैं आज तक सरकारी स्तर पर जल ोितों को सिंचाई से नहीं जोड़ा जा सका है।
आपदा प्रभावितों को राहत नहीं
पुरोला विधानसभा में आपदा के बाद राहत कायों में ढिलाई के आरोप पूरे क्षेत्र की जनता लगा रही है। नौगांव में आपदा से हुई क्षति का आकलन करने के लिए जिला अधिकारी उत्तरकाशी और विधायक दुर्गेशर लाल पर स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात नौ बजे आपदा क्षेत्र का निरीक्षण करके आकलन किया गया लेकिन एक भी आपदा प्रभावित को आकलन और निरीक्षण के समय साथ में नहीं रखा गया।
आपदा पीडि़त अनुज रावत अन्ना कहते हैं कि “गांव में बड़ी आपदा आई करीब एक दर्जन लेाग प्रभावित हुए। उसका आकलन करने के लिए विधायक जी जिलाधिकारी के साथ रात नौ बजे आए। उनके साथ आपदा प्रभावितों की बजाय भाजपा के पदाधिकारियों और समर्थकों की फौज थी। सिर्फ एक घंटे में ही आपदा का निरीक्षण कर दिया गया। दूसरी तरफ मोरी में विधायक जी तीन दिनों तक रहे लेकिन नौगांव के लिए सिफज् एक ही घंटे का समय उनके पास था। इससे नाराज होकर आपदा पीड़ितों ने जब नौगांव बाजार में धरना दिया तब जिलाधिकारी दोबारा आए और आपदा पीड़ितों की सूची बनाई गई। आपदा राहत के लिए मामूली धनराशि 6 हजार का चेक आपदा पीड़ितों को आज तक नहीं मिला है।”
मोरी क्षेत्र में 16 अगस्त 2025 को आई आपदा के बाद आपदा पीड़ित से मुआवजे के लिए घूस मांगे जाने का मामला भी सामने आया था। मोरी विकास खंड के रमाल गांव के रविंद्र महर का भवन, रास्ते और खेत बुरी तरह से तबाह हो गए थे। एक महीने के बाद उनको आंशिक आपदा राहत के नाम पर मात्र 6 हजार का चेक दिया गया जिसे उन्होंने लेने से ही इंकार कर दिया। इस मामले में आरोप लगाया गया कि पटवारी द्वारा महर के घर को पूणज् रूप से क्षतिग्रस्त बताने पर घूस मांगी गई नहीं तो आंशिक क्षतिग्रस्त की रिपोर्ट देने की बात कही गई।
हालांकि सरकार का पक्ष रखते हुए मोरी तहसीलदार ने रविंद्र महर के आरोपों को यह कहकर खारिज कर दिया कि उनके द्वारा स्वयं ही अपने भवन की छत को गिरा दिया जिससे उनका भवन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त के मानकों में आ जाए और बड़ा मुआवजा मिल पाए। दोनों ही आरोप की सत्यता का मामला अभी तक संशय में ही है लेकिन इतना तो साफ हो गया है कि सरकारी सिस्टम आज भी आपदा राहत के नाम पर गम्भीर
लापरवाही बरत रहा है।
पुरोला विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक : दुर्गेश्वर लाल (अवधि: 4 वर्ष, 1 कार्यकाल)
क्र. क्षेत्र मुद्दा/जमीनी स्थिति अंक (10 में)- स्वास्थ्य सेवाएं (कुल मिलाकर) पीएचसी और सीएचसी में डाॅक्टर-स्टाफ की कमी, कई जगह सुविधाएं नाममात्र 3/10
- बांगाड़ क्षेत्र-स्वास्थ्य आपात 12 हजार आबादी के लिए समुचित पीएचसी नहीं, इलाज हेतु रोहड़ू (एचपी) तक निर्भरता 2/10
- पुरोला सीएचसी , उप जिला अस्पताल घोषणा मुख्यमंत्री घोषणा। बजट (43 करोड़) सकारात्मक, पर जमीनी बदलाव अभी अधूरा 5/10
- मोरी सीएचसी व 108 एम्बुलेंस 108 एम्बुलेंस वर्षों से कबाड़, स्वास्थ्य सिस्टम की लापरवाही उजागर 2/10
- नौगांव सीएचसी (यमुनोत्री रूट पर) 38 साल पुराना, गायनोकोलाॅजिस्ट/हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं, संसाधन कमजोर 3/10
- ग्रामीण सड़कें व सुरक्षा आराकोट-कलीच सड़क मानक से कम, 6 दुर्घटनाएं, डामरीकरण/निर्माण अधूरा 3.5/10
- धार्मिक/पर्यटन इंफ्रा. (चलदा महासू, झूला पुल) झूला पुल क्षतिग्रस्त, सड़क संकरी, मास्टर प्लान की बात पर जोखिम बना हुआ 4/10
- उच्च शिक्षा/तकनीकी शिक्षा तकनीकी संस्थान सीमित, मोरी काॅलेज भवन निर्माणाधीन, छात्र मंदिर परिसर में पढ़ने को मजबूर 3/10
- स्कूल भवन निर्माण/गुणवत्ता (जखोल आई.सी.) 3.30 करोड़ के बावजूद देरी/गुणवत्ता पर सवाल, काम अब भी अधूरा 2.5/10
- पेयजल व सिंचाई (नगर$ग्रामीण) 1980 की योजना 20 हजार आबादी पर बोझ, सिंचाई अपग्रेड नहीं, नहरें क्षतिग्रस्त 3/10
‘मैं सबसे बेस्ट विधायक हूं’
भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक बने दुर्गेश्वर लाल उच्च शिक्षित हैं। बीबीए, बीसीए और टूरिज्म डिप्लोमा के साथ-साथ मास कम्युनिकेशन का डिप्लोमा भी किया है। अपनी विधानसभा क्षेत्र में अधिकारियों के स्थानांतरण के मामले में अपनी ही सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के आवास में धरना देकर दुर्गेश्वर लाल खासी चर्चाएं बटोर चुके हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ ने पुरोला विधानसभा क्षेत्र में हुए विकास कार्यों और समस्याओं को लेकर दुर्गेश्वर लाल से विस्तृत बातचीत की
आपका विधायक के रूप में चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इन चार वर्षों में आपने अपने क्षेत्र में क्या-क्या विकास कार्य करवाएं हैं?
मेरी विधानसभा प्रदेश की सुदूरवर्ती विधानसभा है। उत्तराखण्ड राज्य बने हुए पच्चीस साल हो गए हैं और अगर मैं अपने पूर्ववर्ती विधायकों के बारे में कहूं तो चार कार्यकाल निकाल, इन चार कार्यकओं में पुरोला विधानसभा में दस प्रसेंट काम भी नहीं हुआ। आप इसे इस तरह से भी लिख सकते हैं कि चार कार्यकाल बनाम चार साल। मेरे चार साल के कार्यकाल को आप स्वयं देख सकते हैं। मेरे क्षेत्र में राज्य बनने से पहले और राज्य बनने के बाद भी सड़कों के हालात सही नहीं थे। कई-कई गांवों तक सम्पर्क मार्ग नहीं था, जो थे वह सभी कच्चे ही थे। स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से खराब ही थीं। अस्पताल थे लेकिन डॉक्टर नहीं थे। इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज की स्थितियां खराब थीं। सभी के भवन पुराने और जीर्ण-शीर्ण हो गए थे। अब मोरी में पांच करोड़ की लगात से महाविद्यालय का नया भवन बन चुका है, इसी महीने उसमें कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। दुर्गम गांव जखोल में इंटर काॅलेज का नया भवन बन कर तैयार हो चुका है।
पुरोला हो या नौ गांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हो या बांगाड़ क्षेत्र। हजारों लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं जबकि आप दावा कर रहे हैं कि आपने सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सेवाओं पर काम किया है?
वर्ष 2022 मार्च में मैं जैसे ही विधायक बना, मैंने अपनी विधानसभा के हालात देखे। इस विधानसभा का मुख्यालय पुरोला है जहां पुरोला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात बेहद खराब थे। डॉक्टर नहीं थे,
गायनेकोलॉजिस्ट नहीं थी। स्टाफ भी पूरा नहीं था। मैंने सबसे पहले अपने क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए काम किया। माननीय मुख्यमंत्री जी का सबसे पहला भम्रण मैंने मेरी विधनसभा के दुर्गम क्षेत्र जखोल में करवाया और वहीं से मैंने मुख्यमंत्री जी से पुरोला कम्युनिटी हेल्थ सेंटर को उप जिला अस्पताल बनाने की घोषणा करवाई। पहाड़ों में किसी अस्पताल को उप जिला अस्पताल बनाना मानकों पर बहुत कठिन है लेकिन माननीय मुख्यमंत्री जी ने जनहित में यह काम कर दिया। 43 करोड़ की लगात से नई बिल्डिंग बन रही है। साथ ही डाॅक्टर, गायनोकोलाॅजिस्ट, चाइल्ड स्पेश्लिस्ट की तैनाती कर दी गई है। अब यह उप जिला अस्पताल हो गया है। नौगांव के सीएसी अस्पताल में भी स्थितियों में बड़ा सुधार किया है। वहां भी डाॅक्टरों की तैनाती करवा दी है।
बांगाड़ क्षेत्र में तो स्वास्थ्य सेवा, सड़क और स्कूलों की स्थिति बहुत ही खराब है। स्वास्थ्य सेवाएं तो इतनी बदतर हैं कि लोगों को अपना इलाज करवाने के लिए हिमाचल प्रदेश के रोहडू में जाना पड़ रहा है। वहां हालात क्यों नहीं सुधारे जा सके?
बांगाड़ क्षेत्र में 2019 में भयानक आपदा आई थी जिसने पूरे क्षेत्र की रीढ़ तक हिला दी। स्कूल, अस्पताल, खेत और बगीचे इत्यादि सभी तबाह हो गए। तब कांग्रेस के विधायक थेे। 2019 से 2022 तक उन्होने एक भी काम बांगाड़ क्षेत्र के लिए नहीं किया। कुर्थी में इंटर काॅलेज बह गया। सड़कें तबाह हो गई थी, टिकोची में पीएचसी भी बाढ़ में बह गया। इन सब के बावजूद एक भी रुपए का बजट इस क्षेत्र के लिए नहीं दिया गया। जैसे ही मैं विधायक बना, मैंने सबसे पहले बांगाड़ क्षेत्र के लिए काम करवाना शुरू किया और टिकोची के पीएसी के लिए 1 करोड़ 75 लाख स्वीकृत करवाया। बांगाड़ एक बागवानी क्षेत्र है तो इसके लिए 40 करोड़ की योजनाओं के लिए स्वीकृत करवाया। 5 करोड़ रुपए टिकोची कुर्थी के इंटर काॅलेज की नई बिल्डिंग बनाए जाने के लिए स्वीकृत करवाए, च्यूवां में हाई स्कूल की बिल्डिंग बाढ़ मे बह गई थी उसके लिए साढ़े तीन करोड़ रुपए स्वीकृत करवाए।
मोरी में डिग्री काॅलेज का भवन 2024 में पूरा होना था वह आज भी निर्माणाधीन ही है जिससे छात्र मंदिर परिसर में पढ़ने का मजबूर हैं। जखोल का इंटर काॅलेज के निर्माण में गुणवत्ता पर गम्भीर सवाल उठाए जा रहे हैं?
जखोल इंटर कॉलेज की नई बिल्डिंग आठ-दस साल पहले स्वीकृत हुई थी। लेकिन घटिया निर्माण और गुणवत्ता की कमी और गलत लोगों की सांठ-गांठ के कारण घोटाला किया गया जो एक तरह से हमारे लिए गले की फांस बन गया था। हमने उस कॉन्ट्रैक्ट को टर्मिनेट किया और नए कॉन्टैक्ट को काम दिया। अब जाकर काम पूरा हो रहा है। मुझे लगता है कि दो महीने में नई बिल्डिंग बनकर तैयार हो जाएगी और उसी में छात्र पढ़ेंगे। मोरी डिग्री काॅलेज की मैंने स्वयं डीपीआर बनावाई, उसके लिए पैसे स्वीकृत करवाए। एक बात बताओ जब बच्चा पैदा होता है उसके लिए भी तो नौ महीने लगते हैं, एक दम से तो पैदा नहीं हो जाता। डिग्री कॉलेज का काम चल रहा है। निर्माण जल्द से जल्द पूरा हो जाएगा।
पूरे क्षेत्र में एक भी तकनीकी शिक्षा का केंद्र नहीं है। पॉलिटेक्निक नहीं हैं, सेंटर स्कूल भी नहीं बन पाया है ऐसा क्यों?
हमारे क्षेत्र में बड़कोट में एक पाॅलिटेक्निक है, बड़कोट का आधा भाग पुरोला विधानसभा का है और आधा यमनोत्री का। डामटा में मैंने माननीय मुख्यमंत्री जी से पाॅलीटेक्निक की घोषणा करवाई है जिसकी प्रक्रिया गतिमान है। बर्नीगाड़ में डिग्री काॅलेज स्वीकृत करवा दिया है जिसकी डीपीआर बन चुकी है, बजट भी स्वीकृत हो चुका है। यह पहला डिग्री कॉलेज होगा जिसमें बीबीए, बीसीए, बीटीएस की डिग्री छात्रों को मिलेगी। मोरी में एक केंद्रीय विद्यालय स्वीकृत हो चुका है जिसकी भूमि चयन और अन्य प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, जल्द ही इसका भी निर्माण शुरू हो जाएगा।
पुरोला विधानसभा में आपदा के बाद राहत कार्यों में ढिलाई के आरोप लगाए जा रहे हैं। आपदा राहत की महज 6 हजार की राहत भी पीड़ितों को नहीं मिल पाई है?
मैं आपको बताना चाहूंगा कि चंद लोगों की तो दलाली मैंने बंद करवा दी है। जो भी आपदा राहत के मामले में ऐसे मनगढंत आरोप लगा रहे हैं यह वही लोग हैं जिनकी दलादी मैंने बंद करवा दी है जिससे यह मेरे खिलाफ उलूल-जुलूल बातें करते हैं। मैंने हर आपदा पीड़ित को राहत दिलावने का काम किया है। मानकों के अनुसार मुआवजा मिल रहा है और मिलगा लेकिन इसमें कोई षड्यंत्र करके आपदा राहत का खेल करेगा वह मैं नहीं होने दूंगा। नौगांव चारधाम यात्रा का पड़ाव है, मैं नौगांव में दस करोड़ की लगात से पार्किंग का निर्माण करवा रहा हूं। साढ़े चार करोड़ की तो आलरेडी बन चुकी है। आपदा में जो भी सड़कें टूटी हैं उनकी मरम्मत का काम हो रहा है। हर आपदा पीड़ित के साथ हमारी सरकार खड़ी है, उसके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दूंगा।
आपके क्षेत्र में कई सम्पर्क मार्ग खत्म हो चुके हैं। आराकोट कलीच मार्ग का डामरीकरण आज तक नहीं हो पाया है जबकि वह पीएमजीएसवाई में है। नौगांव की फल पट्टी क्षेत्र के सम्पर्क मार्ग बुरी तरह से खस्ताहाल हो चुका है। इन पर काम क्यों नहीं हुआ?
मैंने आपको कहा न कि चार विधायकों का कार्यकाल और मेरे चार साल के कार्यकाल की तुलना कर लीजिए। मेरे कार्यकाल में मैंने सड़कों की दशा सुधारने का सबसे बड़ा काम किया है। कई सालों से नौगांव गढखटल-अम्बेडकर गांव सड़क मार्ग जो हल्का वाहन मार्ग बनाया गया था, की किसी ने सुध नहीं ली थी। इस सड़क को बने 35 साल हो गए। कितने विधायक आए, कितने चले गए? मायावाती जी जब मुख्यमंत्री बनी तब यह सड़क कटी थी। मैंने विधायक बनते ही इस सड़क के लिए 5 करोड़ स्वीकृत करवाए और मोटर मार्ग में तब्दील करवा दिया। आराकोट कलीच मोटर मार्ग हो या जितनी भी सड़कें प्रधानमंत्री सड़क योजना में स्वीकृत हो गई है, सभी के टेंडर लग चुके हैं। आराकोट कलीच, आराकोट सुनारा हो चाहे ब्रह्माी भूटानू हो यह सभी सड़के पीएमजीएसवाई में टेकओवर हो गई हैं और इनके टेंडर भी हो गए हैं, जल्द ही इन सड़कों पर काम शुरू होने वाला है।
खडियार में चलदा महासू मंदिर के लिए जाने वाला एकमात्र लोहे का झूला पुल क्षतिग्रस्त हो रहा है?
हमने इस क्षेत्र के लिए 120 करोड़ का मास्टर प्लान स्वीकृत करवा दिया है। इस प्लान में सभी काम किए जाएंगे जिसमें सड़क और नया पुल भी स्वीकृत है। इस मास्टर प्लान में बहुत से काम होने हैं जिससे इस क्षेत्र में कोई समस्या नहीं रहेगी।
आप पर आरोप लग रहा है कि आप और आपकी धर्मपत्नी ने मनरेगा से मजदूरी प्राप्त की है जबकि आप विधायक हैं बावजूद आपके बैंक खाते में मनरेगा से मजदूरी आई है। सोशल मीडिया में भी यह मामला बेहद चर्चाओं में है?
यह मेरी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए मेरे खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र किया गया है। जब मैंने दलालों की दुकानें बंद कर दी और उनके कहे अनुसार काम करने से मनाकर दिया तो मेरे खिलाफ कई मामले खोजे गए। मेरी कुंडली खंगाली गई, जब मुझे बदनाम करने के लिए इनको कुछ नहीं मिला तो अचानक से मुझ पर मनरेगा की मजदूरी लेने का आरोप लगाया गया। मैं ग्रामीण आदमी हूं, एक सामान्य व्यक्ति हूं, कोई ठेकेदार नहीं। मैं अपने परिवार और रोजी-रोटी के लिए दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता था। गांव में मेरा और मेरी पत्नी का जॉब कार्ड ग्राम सभा में बना हुआ है, जैसे हर आदमी का बनता है। किसी ने मेरे खिलाफ षड्यंत्र करके मेरे जाॅब कार्ड का दुरुपयोग करके यह काम किया है। गांव में मनरेगा में साठ-चालीस का रेश्यू होता है। साठ जाता है लेबर काॅस्ट में और चालीस जाता है मैटेरियल कॉस्ट में। ठेकेदार इस चालीस प्रतिशत के लिए फर्जी मनरेगा जॉब कार्ड लगाकर घपला करते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। ब्लाॅक में कम्प्यूटर ऑपरेटर, ग्राम पंचायत और जेई की गलती है। इन सभी की संलिप्ता से ठेकेदार ने चालीस प्रतिशत को निकालने के लिए मेरा और मेरी पत्नी का जाॅब कार्ड लगा दिया। मैंने इस मामले में पुलिस को भी मुकदमा दर्ज करके जांच करवाने को कहा है। इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि मेरे खाते में कोई पैसा नहीं आया है। जब तक केवाईसी नहीं होती है, तब तक भुगतान हो ही नहीं सकता और बैंक में पैसे आ ही नहीं सकते। मनरेगा में प्रारूप 6 होता है, जब तक इसे नहीं भरा जाता तब तक आपके खाते में पैसे नहीं जाते। मैंने कभी कोई प्रारूप 6 भरा ही नहीं तो मेरे खाते में कैसे पैसे आ सकते हैं? यह सब मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया है। 2021 के बाद 2022-23 और 24 में मेरे नाम मनरेगा का मामला नहीं आया। 2025 में मनरेगा मजदूरी का मामला मेरे खिलाफ बनाया गया। मैं जानता हूं कि इसके पीछे कौन है? स्वयं मेरी पार्टी भाजपा के कुछ लोग लगे हुए हैं। प्रदेश के एक राज्यसभा सांसद के खास लोगों द्वारा मेरे खिलाफ यह काम किया गया है जिसमें एक देहरादून जिले के रिटायर्ड अधिकारी जो कि चुनाव लड़ने के लिए क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बना रहा है, की भी बड़ी भूमिका है। मैं नाम नहीं लेना चाहता लेकिन इसकी पूरी जांच होगी तो सब कुछ आइने की तरह साफ हो जाएगा।