गंगोलीहाट विधानसभा क्षेत्र उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिला में स्थित एक महत्वपूर्ण पहाड़ी विधानसभा क्षेत्र है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है। यह इलाका कुमाऊं क्षेत्र की पारम्परिक लोक संस्कृति, पर्व-त्यौहारों और पहाड़ी जीवनशैली का जीवंत प्रतिनिधित्व करता है। गंगोलीहाट कस्बा स्वयं ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से प्रसिद्ध है, खासकर यहां स्थित प्राचीन हाट कालिका मंदिर के कारण जो स्थानीय लोगों के साथ-साथ सेना के जवानों की भी गहरी आस्था का केंद्र है। भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र पहाड़ों, घाटियों और छोटे-छोटे ग्रामीण बस्तियों से मिलकर बना है जहां कृषि, पशुपालन और सेना में भर्ती परम्परागत आजीविका के प्रमुख साधन रहे हैं। राजनीतिक रूप से गंगोलीहाट विधानसभा क्षेत्र कुमाऊं की सामाजिक बनावट को दर्शाता है जहां स्थानीय मुद्दे, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पलायन और रोजगार चुनावी राजनीति के केंद्र में रहते हैं। परम्परा और आधुनिक आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाते इस क्षेत्र की पहचान एक जागरूक और राजनीतिक रूप से सक्रिय मतदाता क्षेत्र के रूप में भी है। इस क्षेत्र से वर्तमान विधायक फकीर राम टम्टा हैं जिन्होंने भाजपा के टिकट पर 2022 के चुनाव में जीत दर्ज की थी। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और कुमाऊं क्षेत्र के पहाड़ी सामाजिक ढांचे का प्रतिनिधित्व करती है। फकीर राम टम्टा लम्बे समय से स्थानीय स्तर पर सक्रिय राजनीति से जुड़े रहे हैं। बकौल टम्टा का फोकस पर्वतीय इलाकों के बुनियादी ढांचे और ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों पर रहता है
गंगोलीहाट विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आारक्षित यह विधानसभा सीट है। यहां की राजनीतिक पृष्ठभूमि में अब तक कोई भी पार्टी लगातार दो बार जीत दर्ज नहीं कर पाई थी लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने 2022 में दोबारा जीत हासिल कर इस राजनीतिक मिथक को तोड़ दिया। भाजपा प्रत्याशी फकीर राम टम्टा को कुल 31,291 मत प्राप्त हुए जबकि कांग्रेस के खजान चंद्र गुड्डू को 21,753 मत मिले। इस तरह फकीर राम ने कांग्रेस प्रत्याशी को करारी शिकस्त दी।
भाजपा ने इस चुनाव में सिटिंग विधायक मीना गंगोला का टिकट काटकर फकीर राम को मैदान में उतारा था जिसे पार्टी का बड़ा और अहम फैसला माना गया। लेकिन गंगोलीहाट क्षेत्र में आज भी सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार जैसी मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए ‘दि संडे पोस्ट’ ने पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वे किया, जैसे चैड़मन्या गांव, नैनी गांव, मौराडी, नागौर, राईआगर, बेरीनाग, भटेडी, देवीनगर, गंगोलीहाट तहसील, ग्राम जीबल पोस्ट पो. चिडगल, हनैरा रंगारोल, भांट्ट गांव, टिमटा, फुटसिल, बोराआगर, चिड़गल, पाताल भुवनेश्वर, नानीसितला, सितला, बुरशुम गांव, मौना, भुवनेश्वर, लगभग 24,25 गांवों में सर्वे के साथ ही गंगोलीहाट हाॅस्पिटल, बेरीनाग हाॅस्पिटल अन्य क्षेत्रों में विधायक फकीर राम टम्टा के विकास कार्य का जायजा लिया गया।
संतोषजनक चिकित्सा सुविधा लेकिन सड़कों का संकट
इस सर्वे में एक बात प्रमुखता से उभरी कि जनता अपने विधायक से खासी नाराज है। उसका आरोप है कि जहां स्थानीय ग्रामीणों को आवश्यकता होने पर भी एक देवदार का पेड़ उपयोग के लिए नहीं मिल पाता वहीं विधायक द्वारा देवदार के पेड़ों को कटवाकर निजी उपयोग के लिए बल्लियां तैयार कराई गई। यह विषय ग्रामीणों के बीच चर्चा और चिंता का कारण बना हुआ है। शीतला क्षेत्र में सड़क सुविधा के अभाव के कारण पूर्व में 21-22 वर्षीय युवक की मृत्यु का मामला भी सामने आ चुका है। इसके बावजूद अब तक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर ठोस कदम न उठाए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पाताल भुवनेश्वर, जो एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है, वहां दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए समुचित चिकित्सा सुविधा का अभाव बना हुआ है। किसी आपात स्थिति में तत्काल इलाज की व्यवस्था न होने से लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
बेरीनाग अस्पताल में जब डाॅक्टरों और मरीजों से बातचीत की गई तो कई आवश्यक सुविधाओं की भारी कमी से आमजन त्रस्त नजर आया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बेरीनाग में सुविधाएं हैं। मरीजों का कहना है कि ‘‘डाॅक्टर अच्छे हैं, स्टाफ भी सहयोगी है लेकिन बड़ी और जरूरी सुविधाएं न होने के कारण हमें पिथौरागढ़ जिला अस्पताल या फिर हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है।’’
इस रेफर प्रक्रिया के कारण गरीब और साधनहीन मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लम्बी दूरी, आने-जाने का खर्च और समय पर इलाज न मिल पाना उनकी समस्याओं को और बढ़ा देता है। हमारी बातचीत डिलीवरी के लिए भर्ती महिलाओं से भी हुई। उन्होंने बताया कि डिलीवरी महिलाओं के लिए न तो बेरीनाग अस्पताल में और न ही गंगोलीहाट अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को बाहर निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है जो एक गरीब परिवार के लिए बेहद मुश्किल साबित होता है। मरीजों और स्थानीय लोगों का कहना था कि अब तक इन समस्याओं को लेकर किसी विधायक या प्रशासन की ओर से ठोस और स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बेरीनाग में डिलीवरी के लिए भर्ती बेरीनाग की रंजना मेहर का कहना है कि यहां के डाॅक्टरों का व्यवहार काफी अच्छा है। उनके अनुसार अस्पताल में काफी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था थोड़ी ठीक नहीं है।
बेलकोट ग्रामसभा निवासी सुरेंद्र कुमार की मानें तो यहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के चलते बाहर से कराना पड़ता है जिससे लोगों को काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि डिलीवरी वाली महिलाओं को कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और ज्यादा परेशानी होने पर उन्हें बाहर रेफर कर दिया जाता है, जिससे आने-जाने में काफी परेशानियां होती हैं।
इस अस्पताल में वर्तमान में 5 डॉक्टर, 10 नर्स, 2 फार्मासिस्ट, एक वार्ड बाॅय और कार्यालय का स्टाफ कार्यरत है। डाॅक्टरों के दो पद और नर्सिंग स्टाफ के तीन से चार पद अभी रिक्त चल रहे हैं। अस्पताल में मरीजों के उपचार के लिए एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध है। डिलीवरी रूम पूरी तरह से संचालित है। अस्पताल में दी जाने वाली सभी दवाइयां सरकारी हैं। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र भी संचालित है, जहां मरीजों को कम दामों में दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। फिलहाल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल चैबीसों घंटे खुला रहता है और डाॅक्टरों की तैनाती भी 24 घंटे रहती है। एम्बुलेंस सेवा के अंतर्गत एक 108 एम्बुलेंस, मरीजों के ट्रांसफर के लिए एक छोटी एम्बुलेंस तथा प्रसव महिलाओं को घर छोड़ने के लिए 102 एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध है। प्रतिदिन अस्पताल में औसतन 150 से 200 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं जबकि गर्मियों के मौसम में यह संख्या बढ़कर लगभग 300 तक हो जाती है। गर्भवती महिलाओं के लिए एएनसी की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में उपलब्ध दवाइयां सभी मरीजों को निःशुल्क दी जाती हैं। बीपीएल कार्ड धारकों के लिए अस्पताल में होने वाली जांचें मुफ्त हैं जबकि अन्य मरीजों से सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार शुल्क लिया जाता है।
गंगोलीहाट में स्वास्थ्य सुविधा संकट में है। यहां डाॅक्टर हैं, न ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है और न ही ब्लड बैंक मौजूद है। टिमटाचनोरा ग्रामसभा निवासी प्रिया का कहना है ‘‘कि उनके गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण बीमार लोगों को इलाज के लिए डोली के माध्यम से अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।’’ प्रिया कहती हैं कि ‘‘गांव के स्कूलों में शिक्षकों की भी कमी है और स्कूल भी काफी दूर स्थित है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
गंगोलीहाट ब्लॉक प्रबंधक कमल के अनुसार वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगोलीहाट में 6 स्टाफ नर्स तैनात हैं, जिनमें 3 पुरुष और 3 महिला नर्स शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें डिजिटल एक्स-रे की सुविधा भी शामिल है। जांच के लिए लैब की व्यवस्था है, जिसमें एक निःशुल्क चंदन डायग्नोस्टिक लैब संचालित है। अस्पताल में ऑक्सीजन की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहती है। अस्पताल में मरीजों के लिए दवाइयां उपलब्ध रहती हैं। हर महीने लगभग 20 से 22 डिलीवरी अस्पताल में होती हैं। गर्भवती महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ भी दिया जाता है। यदि कोई महिला 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहती हैं तो उसके खाते में 2000 रुपए और यदि 48 घंटे तक भर्ती रहती है तो 3500 रुपए की धनराशि उनके खाते में स्थानांतरित की जाती है।
पाताल भुनेश्वर क्षेत्र के ग्राम नानी शीतला निवासी महिपाल सिंह भंडारी की चिंता रोड नेटवर्क को लेकर है। वे कहते हैं कि ‘‘गांव में न तो सड़क की सुविधा है और न ही किसी तरह की चिकित्सा व्यवस्था।’’ उन्होंने बताया कि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को डोली के सहारे पाताल भुनेश्वर तक लाया जाता है। रास्ते कठिन और खतरनाक होने के कारण कई बार मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही हादसे का शिकार हो जाते हैं।
महिपाल सिंह भंडारी के अनुसार बच्चों की शिक्षा की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। जंगल और खतरनाक रास्तों के कारण छोटे बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। गांव के बच्चे 2-3 किलोमीटर दूर राजकीय इंटर काॅलेज छिवड़ी में पढ़ने जाते हैं। उन्होंने बताया कि इसी मार्ग पर पहले भी हादसा हो चुका है, जिसमें 21-22 वर्ष का एक युवक फिसलकर चट्टान से गिर गया था और उसकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद सुरक्षा या सुविधा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने बताया कि चाहे ग्राम नानी शीतला हो, मोना गांव हो या पाताल भुनेश्वर, कहीं भी सड़क, स्वास्थ्य या बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं किया गया। इसी कारण क्षेत्र से लगातार पलायन हो रहा है। सड़कों का सर्वे पांच-छह साल पहले हो चुका था लेकिन आज तक कोई भी कार्य पूरा नहीं हुआ।
भाट गांव निवासी मीना देवी का कहना है कि ‘‘उनके गांव में सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है।’’ गांव के मंदिर के सामने पानी की टंकी बनाई गई है लेकिन उसमें पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। पानी कनेक्शन के लिए 20 हजार रुपए जमा करने की बात कही जा रही है जो ग्रामीणों के लिए बहुत बड़ी राशि है। जिनके पास 10 हजार रुपए भी नहीं हैं, वे 20 हजार रुपए कहां से जमा करेंगे?
पाताल भुनेश्वर के जगत सिंह रावत ने कहा कि ‘‘विधायक द्वारा उनके गांव में कोई ठोस विकास कार्य नहीं किया गया है।’’ उन्होंने बताया कि चुनाव के समय विधायक ने सड़क निर्माण का वादा किया था। सड़क का सर्वे तो कराया गया लेकिन आज तक सड़क का काम पूरा नहीं हो पाया है। जब ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर विधायक के पास जाते हैं तो यह कहकर टाल दिया जाता है कि क्षेत्र बहुत बड़ा है और हर जगह काम करना सम्भव नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी बेहद खराब है। पाताल भुनेश्वर में एक स्वास्थ्य केंद्र तो है लेकिन उसकी कोई पक्की इमारत नहीं है। एक आश्रम में ही स्वास्थ्य केंद्र संचालित किया जा रहा है जहां केवल एक फार्मासिस्ट और एक वार्ड बाॅय तैनात हैं। डाॅक्टर की कोई व्यवस्था नहीं है। गम्भीर रूप से बीमार मरीजों को गंगोलीहाट या बेरीनाग ले जाना पड़ता है।
ग्राम शीतला निवासी नरेंद्र सिंह भंडारी के अनुसार उनके क्षेत्र में अब तक कोई ठोस विकास कार्य नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि विधायक केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं लेकिन उसके बाद क्षेत्र की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। पिछले 12-13 वर्षों से सड़क निर्माण को लेकर सर्वे कराए जा रहे हैं लेकिन आज तक सड़क का काम शुरू नहीं हो पाया है। नरेंद्र सिंह भंडारी ने विधायक टम्टा पर आरोप लगाया कि क्षेत्र के ग्रामीणों को जहां एक भी देवदार का पेड़ उपयोग के लिए नहीं मिल पाता वहीं विधायक द्वारा देवदार के पेड़ कटवाकर अपने निजी उपयोग के लिए बल्लियां तैयार कराई गई हैं।
ग्राम जीबल, पोस्ट चिड़गल (गंगोलीहाट, पिथौरागढ़) निवासी पूरन सिंह माहरा ने बताया कि गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। करीब 50 वर्षों से कच्ची सड़क है लेकिन आज तक पक्की नहीं बन पाई है। उनका कहना है कि ‘‘सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य, हर क्षेत्र में विधायक का काम शून्य नजर आता है।’’ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘सरकारी स्कूल तो हैं लेकिन कहीं शिक्षक नहीं हैं तो कहीं बच्चे नहीं हैं। पढ़ाई की स्थिति बेहद कमजोर है और शिक्षा से जुड़ी कोई योजना जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं दिखती। गांव में कोई स्थायी रोजगार नहीं है। मनरेगा ही एक सहारा है लेकिन वहां भी भुगतान समय पर नहीं होता और मजदूरों को परेशान किया जाता है।’’
ग्रामसभा हानेरा (रगा रोल) निवासी जगत सिंह तल्ख स्वर में कहते हैं कि ‘‘उनके क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। क्षेत्र की सड़कों की हालत काफी खराब है जबकि इन रास्तों से रोजाना सैकड़ों लोगों का आवागमन होता है।
ग्राम चिड़गल निवासी महेश राम की मानें तो विधायक फकीर राम टम्टा गांव नहीं आते, जिससे ग्रामीण अपनी समस्याएं सीधे उन्हें बता नहीं पाते। ग्रामीण भी उनसे मिलने नहीं जा पाते हैं। इसके साथ ही गांव में
रोजगार के अवसर सीमित हैं, जिस कारण युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बोरागर गांव निवासी तारा राम के अनुसार गांव में सिर्फ एक प्राथमिक स्कूल है, जहां बच्चे कक्षा 5-8 तक पढ़ पाते हैं, उसके बाद उन्हें राईआगर स्थित स्कूल जाना पड़ता है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को बेरीनाग या गंगोलीहाट जाना पड़ता है, जिससे काफी परेशानी होती है। गांव में न तो रोजगार के अवसर हैं और न ही बच्चों के लिए किसी तरह की प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध है।
गुप्तड़ी फुटसिल निवासी महेश राम ने बताया कि ‘‘उनके गांव में बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है। गांव में आने-जाने के लिए ठीक रास्ते नहीं हैं और पेयजल की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।’’ उन्होंने बताया कि घरों में जो पानी आता है, उसका लगभग 900 रुपए का बिल आता है, साथ ही बिजली के बिल भी महंगे हैं जिससे लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
विकास खंड गंगोलीहाट की ग्राम सभा बुरसुम लगभग 500 परिवारों का एक बड़ा गांव है जो वर्षों से अपने फल-सब्जी उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है। विशेष रूप से बुरसुम के केले पुराने समय से क्षेत्र में प्रसिद्ध रहे हैं और यही गांव की आजीविका का मुख्य आधार रहे हैं। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि तमाम प्राकृतिक संसाधनों और कृषि क्षमता के बावजूद गांव आज भी बुनियादी सुविधा से हम वंचित है। गांव से करीब 5 किलोमीटर पहले ही सड़क समाप्त हो जाती है, जिसके कारण किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय कांग्रेस नेता धीरज बिष्ट का कहना है कि ‘‘क्षेत्र में अटल उत्कृष्ट विद्यालय और अंग्रेजी माध्यम विद्यालय तो खोले गए हैं लेकिन वहां पर्याप्त संख्या में शिक्षक नहीं हैं। कई स्कूलों में केवल 5-6 शिक्षक कार्यरत हैं जबकि पहले इंटर काॅलेजों में 35-40 शिक्षक हुआ करते थे। कई विद्यालय आज भी प्रधानाचार्य विहीन हैं। शिक्षकों की कमी के कारण अभिभावकों को निजी रूप से ट्यूशन की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जिसका आर्थिक बोझ उन्हें उठाना पड़ता है।’’
जब शिक्षा व्यवस्था और भविष्य के सपनों की बात आई तो हमने कुछ स्कूल के बच्चों से बात की। काजल आर्य, कक्षा 10 की छात्रा ने बताया कि ‘‘स्कूल में पढ़ाई अच्छी है लेकिन कई बार अध्यापक कम होने के कारण सभी विषयों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पाती।’’
काजल ने कहा कि उनके गांव में लड़कियों को अधिकतम 12वीं तक पढ़ाया जाता है क्योंकि घरवालों के पास इतना पैसा नहीं होता कि वे आगे की पढ़ाई करवा सकें। गांव में रोजगार के साधन भी सीमित हैं। पिता खेती या छोटे-मोटे काम करके परिवार चलाते हैं, जिस कारण बहुत से बच्चे, खासकर लड़कियां, आगे की पढ़ाई छोड़ देती हैं। काजल ने अंत में सरकार और शिक्षा विभाग से विनती की ‘‘हमारी गांव में शिक्षा की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। हमें अच्छी पढ़ाई, पर्याप्त अध्यापक और सुविधाएं मिलें ताकि हम अपने सपनों को पूरा कर सकें और समाज के लिए कुछ कर सकें। हमारी मेहनत और जज्बे का सही समर्थन करें। हमें हमारे भविष्य के लिए सही रास्ता दिखाएं।’’
काजल की बातें केवल एक छात्रा की नहीं बल्कि उत्तराखण्ड के कई दूरदराज क्षेत्रों की लड़कियों की आवाज हैं। उनका सपना, उनका संघर्ष और उनकी आशा यह बताती है कि शिक्षा ही वह सबसे बड़ी ताकत है जो उनके जीवन और गांव के भविष्य को बदल सकती है। बेरीनाग भांट्ट गांव में भी जहां पहले पानी की सबसे अधिक कमी बनी रहती थी, आज वहां पेयजल, बिजली और सड़कों की अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं। गांव में घर-घर तक रास्तों का निर्माण हो चुका है तथा शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं भी अब लोगों को सुलभ हो रही हैं।
पूर्व ग्राम प्रधान सुंदर राम के प्रयासों से बदली गांवों की तस्वीर
मौराडीं क्षेत्र के गांवों में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय विकास कार्य देखने को मिले हैं। जहां कभी पेयजल की भारी समस्या थी, न सड़क थी और न ही बिजली की कोई स्थायी व्यवस्था, आज वहीं हर घर में नल से जल पहुंच रहा है। पूरे गांव में सौर ऊर्जा की व्यवस्था की गई है और घर-घर तक सड़क का निर्माण हो चुका है। इसके साथ ही गांवों में शौचालयों का निर्माण भी कराया गया है।
इन सभी विकास कार्यों का श्रेय क्षेत्र के पूर्व ग्राम प्रधान सुंदर राम को दिया जा रहा है। सुंदर राम ने स्पष्ट किया कि ये कार्य विधायक द्वारा नहीं बल्कि उनके स्वयं के प्रयासों से सम्भव हो पाए हैं। उल्लेखनीय है कि वर्तमान विधायक इसी गांव के निवासी हैं, इसके बावजूद उनके द्वारा क्षेत्र में कोई ठोस विकास कार्य नहीं कराया गया। सुंदर राम वर्तमान में क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं और लगातार क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सक्रिय हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह जमीनी स्तर पर ईमानदार प्रयास होते रहे तो क्षेत्र में समग्र विकास संभव है।
चैंडमान्य गांव की निवासी नारायणी देवी ने गांव की वर्तमान स्थिति पर अपनी बात रखते हुए बताया कि ‘‘जितना विकास अन्य क्षेत्रों में हुआ है, उतना उनके गांव में नहीं हो पाया। कई बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।’’
नारायणी देवी ने बताया कि गांव के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति अब पहले से बेहतर हुई है। पहले बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे और इधर-उधर घूमते रहते थे लेकिन अब स्कूलों में सुविधाएं सुधरी हैं।
अध्यापक बच्चों पर ध्यान देते हैं और बच्चों का प्रदर्शन भी अच्छा हो रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर, चैंडमान्य (पिथौरागढ़) में डाॅक्टर की नियुक्ति नहीं है। यहां केवल एक फार्मेसी संचालक हैं जो केंद्र को चलाते हैं।
स्थानीय निवासी संजय रावल की मानें तो क्षेत्र की पुरानी सड़कों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। कई जगहों पर डामर उखड़ गया है, सड़कें गड्ढों से भरी हुई हैं और आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। हालात ऐसे हैं कि इन सड़कों पर सफर करना जोखिम भरा हो गया है। उनका कहना है कि कम से कम डामरीकरण या पैचवर्क जैसे बुनियादी कार्य तो किए जाने चाहिए थे लेकिन वह भी नहीं हो पा रहे हैं।
बात अपनी-अपनी
देखिए हम तो इस सरकार को जुमले की सरकार समझते हैं। अभी तक हमारे क्षेत्र में जितने भी कार्य हुए हैं, वे 2002, 2007, 2012 और 2017 की कांग्रेस सरकारों के समय हुए हैं। अभी तक हमारे डिग्री काॅलेज में भरपूर टीचर और प्रोफेसर नहीं हैं। यहां विद्यालयों में विषय तो हैं लेकिन उन विषयों के अनुसार शिक्षक नहीं हैं। हमारे क्षेत्र में फायर ब्रिगेड की सुविधा भी नहीं है। अगर कहीं आग लग जाए या कोई बड़ी घटना हो जाए तो उससे निपटने की कोई व्यवस्था नहीं है। 82 सड़कें 2007 की कांग्रेस सरकार में बनी थीं। इसके बाद 2012 से 2017 के बीच जिन सड़कों की स्वीकृति हुई थी उन्हीं सड़कों पर आज काम चल रहा है। इनके कोई नए प्रोजेक्ट नहीं चले हैं। पाताल भुनेश्वर में गांव वालों को एक भी पेड़ नहीं काटने दिया जाता लेकिन हमारे विधायक जी ने घर पर ही फर्नीचर का काम खोला है। गांव में जंगलों में लकड़ियां मिल रही हैं। उनको ला रहे हैं घर में और बल्लियां बना रहे हैं, उसी को बेच रहे हैं। उनका तो अच्छा कारोबार चल रहा हैं।
खजान चंद्र गुड्डू, कांग्रेस नेता, गंगोलीहाट
गंगोलीहाट विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक: फकीर राम टम्टा (अवधि: 4 वर्ष)क्र. क्षेत्र मुद्दा/जमीनी स्थिति अंक (10 में)
- पेयजल (ग्रामीण गंगोलीहाट क्षेत्र) कई गांवों में योजनाएं बनीं, पर गर्मियों में पानी की किल्लत] सप्लाई अनियमित 5/10
- सड़क व सम्पर्क मार्ग मुख्य सड़कों में सुधार हुआ, लेकिन दूरस्थ गांव अब भी खराब सड़क और भूस्खलन से प्रभावित 6/10
- स्वास्थ्य सेवाएं (सीएचसी/पीएचसी) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी, रेफरल पर निर्भरता ज्यादा 4/10
- शिक्षा (सरकारी स्कूल व इंटर कॉलेज) भवन सुधार हुए, लेकिन विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी बनी हुई 5/10
- उच्च व तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में व्यावसायिक व तकनीकी संस्थान सीमितय युवाओं को बाहर जाना पड़ता है 3.5/10
- बाजार व पार्किंग (गंगोलीहाट कस्बा) संकरी सड़कें, पार्किंग की कमीय सीजन में जाम की समस्या 4/10
- बिजली व संचार बिजली आपूर्ति पहले से बेहतर, लेकिन तूफान/बारिश में कटौती, मोबाइल नेटवर्क कई गांवों में कमजोर 6/10
- ग्रामीण विकास व योजनाएं आवास, शौचालय व सड़क योजनाओं का लाभ मिला, पर कार्यों की गति धीमी 5.5/10
- पलायन रोकने के प्रयास स्थानीय रोजगार के अवसर सीमित, सरकारी योजनाएं पर्याप्त असर नहीं डाल पाईं 3/10
- पर्यटन व धार्मिक विकास (हाट कालिका क्षेत्र) धार्मिक पर्यटन बढ़ाने के प्रयास हुए, लेकिन बुनियादी सुविधाएं अभी भी सीमित 6/10
औसत : 4.8/10 फाइनल ग्रेड: पास
आप अपने लगभग चार साल के कार्यकाल का आकलन किस रूप में करते हैं?
मेरे विधानसभा क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। जैसे मेरे विधानसभा में दो नगर पालिकाएं हैं और दोनों में जाम की स्थिति बनी रहती थी। इस समस्या को देखते हुए मैंने माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखा, जिसके परिणाम स्वरूप उनके द्वारा हमें एक बहुमंजिला पार्किंग की स्वीकृति मिली और एक रोडवेज बस अड्डा भी दिया गया। सड़कों की बात करें तो पीडब्ल्यूडी के माध्यम से दर्जनों नई सड़कों का निर्माण किया गया है। कई सड़कों का कार्य पूरा किया जा चुका है। उसके अलावा पीएमजीएसवाई फेज-4 का भी काम चल रहा है। इसमें मेरे विधानसभा क्षेत्र की जिन सड़कों की स्थिति ठीक नहीं थी, उनमें से 7 सड़कों के टेंडर हो चुके हैं, जिनमें 6 सड़कों पर कार्य चल रहा है और 1 पर कार्य शुरू होने वाला है। कुछ सड़कें वनभूमि से जुड़ी हुई हैं, वे भी 1-2 साल में पूरी हो जाएंगी। एक सड़क पाखू वाला रोड, मंदिर वाला रोड, उसके लिए भी माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा 22 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है, जिसमें टेंडर लगना है। इसके अलावा हमारे यहां पहले खेल मैदान नहीं थे। अब दो खेल मैदानों का कार्य चल रहा है।
‘पहाड़ के युवा काम नहीं सीखना चाहते’
गोलीहाट विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के विधायक फकीर राम टम्टा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार खजान चंद्र गुड्डू को लगभग 10,053 मतों से हराकर जीत दर्ज की थी। पहाड़ी भूगोल, सीमांत गांवों और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों वाले इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए उनसे विकास की बड़ी अपेक्षाएं जुड़ी रहीं लेकिन उनका कार्यकाल औसत माना जा रहा है। सड़क और बिजली जैसी कुछ बुनियादी सुविधाओं में आंशिक सुधार दिखा किंतु कई अहम मोर्चों पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। ग्रामीण पेयजल आपूर्ति अब भी अनियमित है, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में डाॅक्टरों और विशेषज्ञ स्टाफ की कमी बनी हुई है। उच्च व तकनीकी शिक्षा के अवसर सीमित हैं जिसके कारण युवाओं का पलायन जारी है। स्थानीय रोजगार सृजन ठोस रूप नहीं ले सका, न ही कोई बड़ा औद्योगिक या कृषि आधारित माॅडल खड़ा हो पाया है। कस्बाई क्षेत्रों में पार्किंग और ट्रैफिक प्रबंधन भी एक लगातार बनी रहने वाली समस्या है। फकीर राम टम्टा से ‘दि संडे पोस्ट’ संवाददाता कंचन आर्या की बातचीत
आप अपने लगभग चार साल के कार्यकाल का आकलन किस रूप में करते हैं?
मेरे विधानसभा क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। जैसे मेरे विधानसभा में दो नगर पालिकाएं हैं और दोनों में जाम की स्थिति बनी रहती थी। इस समस्या को देखते हुए मैंने माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखा, जिसके परिणाम स्वरूप उनके द्वारा हमें एक बहुमंजिला पार्किंग की स्वीकृति मिली और एक रोडवेज बस अड्डा भी दिया गया। सड़कों की बात करें तो पीडब्ल्यूडी के माध्यम से दर्जनों नई सड़कों का निर्माण किया गया है। कई सड़कों का कार्य पूरा किया जा चुका है। उसके अलावा पीएमजीएसवाई फेज-4 का भी काम चल रहा है। इसमें मेरे विधानसभा क्षेत्र की जिन सड़कों की स्थिति ठीक नहीं थी, उनमें से 7 सड़कों के टेंडर हो चुके हैं, जिनमें 6 सड़कों पर कार्य चल रहा है और 1 पर कार्य शुरू होने वाला है। कुछ सड़कें वनभूमि से जुड़ी हुई हैं, वे भी 1-2 साल में पूरी हो जाएंगी। एक सड़क पाखू वाला रोड, मंदिर वाला रोड, उसके लिए भी माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा 22 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है, जिसमें टेंडर लगना है। इसके अलावा हमारे यहां पहले खेल मैदान नहीं थे। अब दो खेल मैदानों का कार्य चल रहा है।
आपने 2022 में जनता से कई वादे किए थे। क्या आप उन्हें पूरा करने में सफल रहे हैं?
हमने 2022 चुनाव के दौरान जनता से एक महत्वपूर्ण वादा किया था कि गंगोलीहाट के महाविद्यालय तक सड़क पहुंचाई जाएगी। इस सड़क का प्रस्ताव हमने पीडब्ल्यूडी विभाग को दिया। पीडल्ब्यूडी विभाग द्वारा सर्वे भी किया गया लेकिन कुछ विभागीय प्रक्रियाओं के कारण सड़क का कार्य देर से शुरू हो पाया।
ग्राम सभा बुरसुम विकासखंड गंगोलीहाट का एक 500 परिवारों का गांव है जो कि अपने फल सब्जी, आम, केले उत्पादक सदियों से प्रसिद्ध हैं, बुरसुम गांव के केले पुराने जमाने से ही प्रसिद्ध है, परंतु गांव के 5 किलोमीटर ही दूर पहुंच पाई है। यदि गांव में रोड की सुविधा हो जाए तो गांव का विकास होगा, लोगों को रोजगार मिलेगा?
गंगोलीहाट के बुरसुम गांव में जो सड़क की समस्या है, उसके सम्बंध में मैंने सबसे पहले पीडब्ल्यूडी विभाग को पत्र दिया था। जब अधिशासी अभियंता से बात हुई तो उनका कहना था कि इस सम्बंध में सचिव को पत्र लिखा जाए। इसके बाद मैंने सचिव को भी पत्र लिख दिया है। मेरी समझ के अनुसार उसमें वन विभाग की भूमि शामिल नहीं है। यदि इसमें वनभूमि नहीं आती है, तो यह सड़क 1-2 वर्षों के भीतर बन सकती है।
गंगोलीहाट और बेरीनाग जैसे दूरस्थ क्षेत्र आज भी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित हैं। चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी है और मरीजों को प्राथमिक उपचार तक में परेशानी होती है। वहीं, सड़कों की स्थिति भी अपेक्षा के अनुरूप ठीक नहीं है?
वहां पर हमारा एक आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी है, जिसमें पर्याप्त सुधार किया गया है। गंगोलीहाट में अल्ट्रासाउंड के लिए हमारे पास पहले डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे, इसलिए हमने एक डॉक्टर को हायर किया है जो महीने में एक दिन आता था। मैंने उनसे यह स्पष्ट कर दिया है कि वे महीने में एक दिन नहीं बल्कि 3-4 दिन आएंगे। बेरीनाग के सरकारी अस्पताल में अभी अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है जबकि निजी अस्पतालों में यह उपलब्ध है। इस दिशा में भी हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। एक महत्वपूर्ण कार्य यह हुआ है कि गंगोलीहाट और बेरीनाग, दोनों चिकित्सालयों को उप जिला चिकित्सालय में परिवर्तित कर दिया गया है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि दोनों अस्पतालों के पास भूमि बहुत कम है। यदि आगे विस्तार करना हो तो भवन निर्माण के लिए भूमि की कमी सामने आती है। भूमि की उपलब्धता न होने के कारण हम नई बिल्डिंग नहीं बना पा रहे हैं। हम चाहते थे कि वहां डायलिसिस मशीन लगाई जाए।
स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो यहां सर्जन उपलब्ध नहीं हो पाते क्योंकि अस्पताल परिसरों में उनके रहने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। पढ़े-लिखे डाॅक्टर यहां आना नहीं चाहते और वे अपने निजी क्लिनिक खोल लेते हैं, इसी कारण यह कमी बनी रहती है। एक्स-रे मशीन गंगोलीहाट और बेरीनाग, दोनों जगह उपलब्ध है। विकास एक निरंतर प्रक्रिया है, यह एकदम से नहीं हो पाता लेकिन आने वाले समय में परिस्थितियां बेहतर होंगी। जहां-जहां सड़कें नहीं थीं, वहां मैंने अपनी विधायक निधि के माध्यम से 25 से 30 सड़कों का निर्माण कराया है। आज लोग उन सड़कों पर चल रहे हैं। जहां भी समस्या दिखाई दी, वहां सड़क कटवाई गई। हमारा अंतिम गांव ओडी सिस्तोली है। उस सड़क के लिए हमने धनराशि स्वीकृत कराकर टेंडर लगवाया और वहां लगभग 4 किलोमीटर सड़क कट चुकी है जिसे पीएमजीएसवाई में भी शामिल किया गया है।
बेरीनाग के महाविद्यालय की सड़क न तो पीडल्ब्यूडी के अंतर्गत आती है और न ही किसी अन्य विभाग के। पहले यह वन विभाग की सड़क थी और वहां वन विभाग का गेस्ट हाउस था, जिसे अब खाली कर दिया गया है। इस सड़क के लिए नगर पालिका के माध्यम से इस्टीमेट भेजा गया है। वहां पानी का बहाव बहुत अधिक है, इसलिए डामर टिक नहीं पाता। मैंने हर साल जिला योजना के अंतर्गत 2-3 बार धनराशि स्वीकृत कराई, जिससे कुछ स्थानों पर टाइल्स लगाई गई हैं लेकिन जिला योजना में पर्याप्त धनराशि नहीं मिल पाई।
अब नगर पालिका के माध्यम से लगभग 90 लाख रुपए का इस्टीमेट भेजा गया है। जैसे ही यह धनराशि स्वीकृत होगी, वहां इंटरलाॅक टाइल लगाना ही बेहतर रहेगा क्योंकि डामर वहां बह जाता है। डिग्री काॅलेज से नीचे की ओर पूरा पानी उसी सड़क से बहता है।
इसके साथ ही यह भी समस्या है कि लोगों ने नालियां और कल्वर्ट बंद कर दिए हैं। नालियां तभी बनेंगी, जब लोग अपनी भूमि सहयोग के लिए देंगे। साथ ही जो लोग वहां बसे हुए हैं उन्हें भी साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। घरों का गंदा पानी नालियों में न डालकर अलग गड्ढों में निकाला जाए या पानी के बहाव के लिए उचित पिंड बनाए जाएं।
आपके विधानसभा क्षेत्र में पलायन एक बड़ी समस्या रही है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की क्या सम्भावनाएं हैं? और सरकार व आपके स्तर पर युवाओं को खेती एवं पारम्परिक हुनर से जोड़ने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
रोजगार के लिए यहां बहुत कुछ किया जा सकता है लेकिन जो सक्षम किसान और युवा थे वे पलायन कर चुके हैं। गांवों में अब अधिकतर गरीब और मजदूर वर्ग ही रह गया है। यहां खेती में सबसे बड़ी समस्या सुअर और बंदरों के आतंक की है, जिससे फसलों को भारी नुकसान होता है। इसको देखते हुए हमने एक सुझाव दिया है कि किसान हल्दी और अदरक की खेती करें क्योंकि इन फसलों को सुअर नुकसान नहीं पहुंचाते। इससे किसानों को आय का साधन भी मिलेगा। दूसरी बात यह है कि हमारे पहाड़ के युवा काम सीखने में भी रुचि नहीं लेते। यहां स्थानीय स्तर पर कई तरह के काम उपलब्ध हैं, जैसे बेल्डिंग का काम, कारपेंटर का काम, बढ़ईगिरी का काम, नाई का काम, लेकिन इन कामों को सीखने के लिए बहुत कम लोग आगे आते हैं। यहां तमाम तरह के रोजगार के अवसर मौजूद हैं लेकिन जब तक युवा स्वयं आगे आकर हुनर नहीं सीखेंगे, तब तक पलायन की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती।

