आगामी विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट सत्र 9 से 13 मार्च तक भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में आयोजित होगा। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों, विकास योजनाओं और बजट प्रस्तावों पर चर्चा के लिए यह सत्र अहम माना जा रहा है। गैरसैंण में सत्र आयोजन को जहां एक ओर जनभावनाओं का सम्मान बताया जाता है, वहीं दूसरी तरफ सीमित दिनों की कार्यवाही को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि पहाड़ी जनप्रतिनिधियों को यहां सत्र आयोजित कराने में ठंड से डर लगता है। आगामी सत्र में गैरसैंण की पहाड़ियों में लोकतंत्र की गूंज सुनाई देती इससे पहले ही लैंसडाउन के विधायक महंत दिलीप रावत और धर्मपुर के विधायक विनोद चमोली के विवादास्पद बयानों से एक बार फिर सियासत गर्म हो गई है
 
4 दिसम्बर 2019


दिसम्बर के महीने में ठंड अधिक होती है और हमारे विधायक इतनी ठंड में गैरसैंण में काम नहीं कर पाएंगे।
तीरथ रावत, तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड

18 मार्च 2023


बजट सत्र 13 मार्च से 18 मार्च तक गैरसैंण में सम्पन्न किया जाना था लेकिन चार दिन में ही सत्र सिमट गया। ठंड का बहाना बनाकर सभी विधायक लौट आए।

 
13 फरवरी 2024

लगभग 40 से अधिक विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी को पत्र लिखकर बजट सत्र देहरादून में कराने का अनुरोध किया था जबकि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गांधी पार्क में इसका मौन उपवास रखकर विरोध किया।
 
23 फरवरी 2026

लैंसडाउन के विधायक महंत दिलीप रावत ने गैरसैंण में सत्र आयोजित करने का विरोध किया है और कहा कि विधानसभा भवन ऊंचाई पर है। वहां ऑक्सीजन का स्तर कम महसूस होता है और ठंड बहुत अधिक रहती है। इससे विधायकों और कर्मचारियों को दिक्कतें होती हैं। अगर वहां बेहतर सत्र चलाना है, तो पहले वहां की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाए।

महंत दिलीप रावत के गैरसैंण में बजट सत्र कराने के विरोध में दिए गए बयान ने राज्य की सियासत और भावनाओं को भड़का दिया है। इसके विरोध में कई जगह धरना-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। विरोध स्वरूप मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के सदस्यों ने देहरादून स्थित विधायक हाॅस्टल का घेराव किया। उन्होंने अपने साथ लाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर और गर्म कपड़ों के साथ सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।

लोगों का कहना है कि पहाड़ के दुर्गम क्षेत्र से चुनकर आने वाले विधायक द्वारा गैरसैंण में ऑक्सीजन की कमी की बात करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस जनता ने उन्हें पहाड़ की आवाज बनाकर विधानसभा भेजा, अगर वही जनप्रतिनिधि पहाड़ की परिस्थितियों को असहज बता रहे हैं तो यह पूरे उत्तराखण्ड का अपमान है। हालांकि ज्यादा विरोध होता देख महंत दिलीप रावत ने अपने बातोंsu
से पलटी मारी और कहा कि यह उनका पुराना बयान है। लेकिन बात तब ज्यादा बढ़ गई जब धर्मपुर के विधायक विनोद चमोली ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान इस मुद्दे पर तल्ख टिप्पणी कर दी। जब पत्रकारों ने उनसे इस मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने मीडिया से ही उल्टा सवाल कर दिया और कहा कि आपको ठंड नहीं लगती है क्या, जो आपने जैकेट पहनी हुई है? आप राहुल गांधी हैं क्या? ये कहते हैं कि वो ठंड से लड़ते हैं, इसलिए आजकल वो इस गर्मी में भी फुल बाजू पहनकर घूम रहे हैं।

चमोली यही नहीं रुके बल्कि उन्होंने पत्रकारों से आगे कहा कि ये क्या नाॅन-प्रैक्टिकल बात करते हैं भाई। हमारे सदन में 80 साल और 75 साल के विधायक हैं। क्या आप अपने पिताजी को बर्फ में बिना गर्मी के इंतजाम के बैठा देंगे? वो भी किसी के पिता हैं, उनका भी परिवार है। चुनाव लड़ना कोई अपराध नहीं है। क्या जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए उनको मर जाना चाहिए? ये विचार कहां से आ रहा है?

उत्तराखण्ड युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आनंद रावत ने चमोली के बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ‘‘विनोद चमोली सत्ता की चकाचौंध में हैं। ऐसे लोगों को उत्तराखण्ड का राशन कार्ड कटवा देना चाहिए और किसी अन्य राज्य का सदस्य बन जाना चाहिए। जनता को ऐसे जनप्रतिनिधियों से पल्ला झाड़ना चाहिए। उत्तराखण्ड में पहले ऐसे हिमवीर दिखाई दिए हैं जो हिमालय की चोटियों से डरते हैं। उनके विचारों में मिलावट और जज्बे में अब उत्तराखण्डियत नहीं रही।’’ आनंद कहते हैं कि आज भी हिमाचल प्रदेश के व्यक्ति शिमला में सत्र कराते हुए नहीं कहते कि उन्हें ठंड लग रही है। यहां तक कि पूर्वोत्तर के राज्यों में किसी भी जनप्रतिनिधि को ठंड नहीं लगती। ऐसे में पहाड़ी प्रदेश के पहाड़ी जनप्रतिनिधियों को ठंड से इतना डर क्यों लगता है?

गौरतलब है कि गैरसैंण में सबसे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2014 में 9 से 11 जून तक विस सत्र आयोजित किया था। तब यह सत्र टेंट में सम्पन्न किया गया था। इसके बाद नवम्बर 2015 में गैरसैंण और फिर इसके बाद भराड़ीसैंण में दिसम्बर 2016, नवम्बर 2017 और मार्च 2018 में विधानसभा सत्र हुए। इनमें मार्च 2018 का बजट सत्र ही ऐसा था जो सबसे अधिक छह दिन चला। बाकी सत्र दो या तीन दिन में ही सिमट गए।
आंकड़े बताते हैं कि अब तक हुए विधानसभा सत्रों में 2014 में 3 दिन, 2015 में 2 दिन, 2016 में 2 दिन, 2017 से 2 दिन, 2018 में 6 दिन, 2020 में 5 दिन, 2021 में 6 दिन, 2023 में 4 दिन और 2024 में 3 दिन सत्र आयोजित किया गया। इसके साथ ही 2025 में 19 से 20 अगस्त तक महज 1 सदन की कार्यवाही भराड़ीसैंण में चली।

आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2025 के बीच कुल 10 सत्र आयोजित हुए, जिनमें कुल 35 दिन कार्यवाही चली। गैरसैंण को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने के बाद यहां सत्र बुलाने की शुरुआत की गई लेकिन हर वर्ष नियमित रूप से सत्र नहीं हो सके। अब एक बार फिर आगामी मार्च माह में प्रस्तावित बजट सत्र के मद्देनजर भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में ठंड की सियासत ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

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