Uttarakhand

बदलता स्वरूप, घटती सहभागिता और बढ़ती चुनौतियां

अल्मोड़ा विधानसभा सीट उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में पहली बार अस्तित्व में आई। राज्य पुनर्गठन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर निर्वाचन सम्पन्न हुआ और तभी से यह कुमाऊं क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सीट मानी जाती है। अल्मोड़ा विधानसभा, अल्मोड़ा जिले के अंतर्गत आती है और सांस्कृतिक, शैक्षिक तथा सामाजिक दृष्टि से प्रदेश की प्रमुख सीटों में गिनी जाती है। राज्य गठन के बाद से यहां मुख्यतः कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है जिसके कारण यह सीट राजनीतिक रूप से अत्यंत प्रतिस्पर्धी भी मानी जाती है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मनोज तिवारी ने भाजपा के उम्मीदवार कैलाश शर्मा को पराजित कर जीत दर्ज की। इस जीत के साथ कांग्रेस ने इस सीट पर पुनः कब्जा किया। चुनावी मुकाबला स्थानीय मुद्दों, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क, रोजगार, पलायन और पर्यटन विकास के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व एक बार फिर से मनोज तिवारी कर रहे हैं। लगातार बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अल्मोड़ा विधानसभा मतदाताओं की सजगता और मुद्दा-आधारित मतदान के लिए जानी जाती है। विधानसभा क्षेत्र में ढांचागत विकास के कुछ स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं, मेडिकल काॅलेज की स्थापना, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि और कुछ सड़क परियोजनाएं। किंतु विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, पलायन, ग्रामीण सड़कों की स्थिति, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और शहरी प्रबंधन की चुनौतियां अब भी गम्भीर प्रश्न बने हुए हैं। कुल मिलाकर विकास की दिशा में प्रयास हुए हैं पर संतुलित और स्थायी प्रगति के लिए विशेषज्ञ संसाधन, प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता को और मजबूत करने की आवश्यकता है


अल्मोड़ा विधानसभा उत्तराखण्ड की एक प्रमुख और ऐतिहासिक विधानसभा सीट है। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद 2002 में यह सीट अस्तित्व में आई और तब से पर्वतीय क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक मुद्दों का महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व करती रही है। इस विधानसभा क्षेत्र में नगर क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण और पर्वतीय इलाके शामिल हैं, जैसे लमगड़ा, धारानौला, दुगालखोला, कसार, चितई, भैंसोरी, खातियाड़ी, बाड़ेछीना, धौलछीना, पांडेखोला आदि।

अल्मोड़ा नगर को कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है। लोक संगीत, पारम्परिक हस्तशिल्प, धार्मिक आस्थाएं और पर्यटन गतिविधियां यहां की पहचान हैं। सांस्कृतिक विरासत और आजीविका के संतुलन का प्रश्न यहां के राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा रहा है। कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अल्मोड़ा विधानसभा उत्तराखण्ड के पर्वतीय समाज की आकांक्षाओं, चुनौतियों और सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करती है।
राज्य गठन के बाद से अल्मोड़ा विधानसभा में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच रहा है। वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मनोज तिवारी ने यहां से जीत दर्ज की थी। वर्ष 2007 में भाजपा के रघुनाथ सिंह चौहान ने यह सीट अपने नाम की। 2012 में पुनः कांग्रेस की वापसी हुई, 2017 में भाजपा ने जीत दर्ज की और 2022 में एक बार फिर कांग्रेस ने यहां वापसी की है। लगातार सत्ता परिवर्तन ने इस सीट को राजनीतिक रूप से अत्यंत प्रतिस्पर्धी बना दिया है।

उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले इस विधानसभा क्षेत्र की जमीनी पड़ताल में विकास और व्यवस्थागत कमियों की मिश्रित तस्वीर सामने आई है। शहर का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बहुमंजिला इमारतें, होटल, नए संस्थान और निर्माण कार्य बढ़े हैं लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, रोजगार, स्वच्छता और बढ़ता नशा अब भी गम्भीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
 
स्वास्थ्य ढांचा : इमारतें नई, व्यवस्था अधूरी

अल्मोड़ा में मेडिकल काॅलेज और जिला अस्पताल की नई इमारतें तैयार हैं। बाहर से देखने पर स्वास्थ्य ढांचा आधुनिक और सुदृढ़ दिखाई देता है किंतु जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मचारियों का कहना है कि भवन बनने के बावजूद विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी अब भी महसूस की जा रही है। कई विभागों में नियमित विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं जिसके कारण गम्भीर मरीजों को 88 किलोमीटर दूर हल्द्वानी रेफर करना पड़ता है। एम्बुलेंस सेवाओं और उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इस संदर्भ में अल्मोड़ा बेस अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डाॅ. अमित कुमार सिंह ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2020 के बाद सरकारी मेडिकल काॅलेज एवं सम्बद्ध चिकित्सालय की औपचारिक शुरुआत हुई। प्रारम्भ में 100 एमबीबीएस सीटों की स्वीकृति प्राप्त हुई थी। वर्ष 2022 में नए बैच की शुरुआत के बाद अब पहला बैच अंतिम वर्ष में है और मार्च-अप्रैल में पास आउट होने वाला है। उन्होंने इसे संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया कि पांच वर्षों के भीतर विभिन्न क्लीनिकल एवं नाॅन-क्लीनिकल विभागों में पीजी सीटों की स्वीकृति भी मिल चुकी है। इससे अब संस्थान में एमबीबीएस के साथ-साथ पीजी विद्यार्थी भी अध्ययन करेंगे और भविष्य में विशेषज्ञ चिकित्सक यहीं से तैयार होंगे।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में अस्पताल 420 बेड की क्षमता वाला है। 12 बेड का लेवल-3 आईसीयू, 11 बेड का मेडिकल आईसीयू तथा गम्भीर नवजात शिशुओं के लिए एनआईसीयू की सुविधा उपलब्ध है। शीघ्र ही 6 बेड का सर्जिकल आईसीयू और 6 बेड का अतिरिक्त आईसीयू प्रारम्भ किया जाएगा। यह सुविधा केवल अल्मोड़ा ही नहीं बल्कि बागेश्वर एवं आसपास के जिलों के लिए भी राहतकारी सिद्ध हुई है। अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और अन्य आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रतिदिन औसतन 8-10 डिलीवरी होती हैं, जिनमें लगभग 50 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी होती हैं। कैंसर एवं गम्भीर रोगियों के लिए हाइपरबेरिक ऑक्सीजन प्लांट जैसी आधुनिक सुविधा भी स्थापित की गई है। स्टाफ की स्थिति पर उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 50 प्रतिशत फैकल्टी उपलब्ध है और कुल मिलाकर लगभग 150 के आसपास चिकित्सा एवं अन्य स्टाफ कार्यरत हैं। पैरामेडिकल स्टाफ पर्याप्त है किंतु वार्ड बॉय, वार्ड आया तथा कुछ प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में सुपर स्पेशलिस्ट की नियुक्ति एक सामान्य चुनौती है।

अस्पताल को ‘रेफर सेंटर’ कहे जाने के संदर्भ में उनका कहना है कि मासिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 99 प्रतिशत रेफरल सुपर स्पेशलिटी की अनुपलब्धता के कारण होते हैं। यदि कार्डियोलाॅजिस्ट, न्यूरोसर्जन, यूरोलाॅजिस्ट और नेफ्रोलाॅजिस्ट जैसे विशेषज्ञ उपलब्ध हो जाएं तो रेफरल दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

दवाइयों की उपलब्धता पर उन्होंने स्पष्ट किया कि आपूर्ति राज्य स्तर की भंडारण प्रणाली से होती है और टेंडर प्रक्रिया जटिल होने के कारण कभी-कभी आपूर्ति प्रभावित होती है। चिकित्सकों को साॅल्ट नेम में दवा लिखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीजों को विकल्प मिल सके। आयुष्मान योजना के तहत भी दवा सुविधा उपलब्ध है। भविष्य की प्राथमिक आवश्यकता के रूप में उन्होंने सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की नियुक्ति को सर्वोपरि बताया।
 
संकट में 190 वर्ष पुराना कुष्ठ रोग अस्पताल

शहर से कुछ दूरी पर स्थित लगभग 190 वर्ष पुराना कुष्ठ रोग अस्पताल आर्थिक संकट से जूझ रहा है। यह संस्थान मैथोडिस्ट चर्च इन इंडिया के अधीन संचालित है और पूरी तरह दान पर निर्भर है। कर्मचारियों के अनुसार लगभग 26 महीनों से नियमित वेतन नहीं मिला है। सीमित स्टाफ के सहारे अस्पताल चल रहा है और दवाइयों की व्यवस्था दानदाताओं पर निर्भर है।
 
पलायन, शिक्षा और पर्यटन की चुनौतियां

अल्मोड़ा लम्बे समय से पलायन की समस्या से जूझ रहा है। खेती की घटती उपयोगिता और रोजगार के सीमित अवसर युवाओं को बाहर जाने पर मजबूर कर रहे हैं।

स्थानीय उद्यमी नीरा बिष्ट का कहना है कि ‘‘बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था से स्थानीय व्यापार और होटल उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने वर्षभर पर्यटन को सक्रिय बनाए रखने और पर्यावरण संतुलन के साथ विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।’’
 
स्वच्छता, शौचालय और यातायात अव्यवस्था

नगर निगम होने के बावजूद शहर के कई हिस्सों में खुले में कूड़ा फेंका जाना आम है। सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति खराब है। संकीर्ण सड़कों और बढ़ते वाहनों के कारण पार्किंग और यातायात अव्यवस्था गम्भीर समस्या बन चुकी है।
 
बढ़ता नशा : सामाजिक संकट और पुलिस की कार्रवाई

विधानसभा क्षेत्र में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय है। इस सम्बंध में तत्कालीन एसएसपी देवेंद्र पींचा का कहना था कि ‘‘अल्मोड़ा में मादक पदार्थों के विरुद्ध निरंतर और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। पिछले तीन वर्षों में नशीले पदार्थों की बरामदगी और गिरफ्तारियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है तथा तस्करी में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है।’’
 
आंगनबाड़ी : योजनाएं कागजों में, चुनौतियां जमीन पर

अल्मोड़ा विधानसभा क्षेत्र में विकास और जनकल्याण योजनाओं की स्थिति को लेकर की गई जमीनी पड़ताल में आंगनबाड़ी व्यवस्था से जुड़ी कई गम्भीर समस्याएं सामने आई हैं। विधानसभा क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय, संसाधनों और अतिरिक्त कार्यभार को लेकर असंतोष जताया। विभागीय कार्यों के साथ अन्य योजनाओं का दायित्व भी सौंपा जाता है लेकिन अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलता। पोषण आहार और किट वितरण में देरी, भवनों की कमी और परिवहन भत्ते का अभाव प्रमुख समस्याएं हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि समय पर भुगतान और आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित हों तो योजनाओं का लाभ बेहतर ढंग से मिल सकता है।

वर्ष 2009 से कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ममता बिष्ट ने विभागीय व्यवस्था, मानदेय और संसाधनों की कमी को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिरिक्त समाज कल्याण और अन्य विभागों के कार्य भी कराए जाते हैं लेकिन अतिरिक्त कार्यों का अलग से मानदेय नहीं दिया जाता। कई बार दबाव में कार्य करना पड़ता है और अवकाश की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। पंचायती चुनाव में ड्यूटी के बावजूद भुगतान लम्बित है। हाल ही में छह वर्ष तक के पंजीकृत बच्चों की देखभाल के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है जिसमें कार्यकर्ता का मानदेय 5500 रुपए और सहायिका का 3000 रुपए निर्धारित है। कुछ चयनित केंद्रों में शाम 5 बजे तक संचालन पर 1500 रुपए अतिरिक्त दिए जा रहे हैं लेकिन अल्मोड़ा जिले में यह व्यवस्था पूर्ण रूप से लागू नहीं हो सकी है।

बुनियादी ढांचे की स्थिति भी कमजोर है। अधिकांश केंद्रों के पास अपने भवन नहीं हैं। लगभग ढाई वर्ष पूर्व दरी, दो कुर्सियां और एक प्लास्टिक टेबल उपलब्ध कराई गई थी जिसकी गुणवत्ता निम्न स्तर की बताई गई।

मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के अंतर्गत प्रसूता महिलाओं को शिशु वस्त्र, तौलिया, साबुन, शैम्पू आदि की किट प्रदान की जाती है लेकिन जमीनी स्तर पर यह किट छह माह तक की देरी से पहुंच रही है। परिणाम स्वरूप कई बार सामग्री उपयोग योग्य नहीं रह जाती। गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले पोषण आहार और अंडे की आपूर्ति भी नियमित नहीं है। सेनेटरी नैपकिन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि विभागीय सामग्री, चाहे वह पोषण आहार हो या किट लाने के लिए कार्यकर्ताओं को स्वयं अपने खर्च पर परिवहन करना पड़ता है। इसके लिए अलग से कोई भत्ता नहीं दिया जाता।

अल्मोड़ा विधानसभा की जमीनी स्थिति यह संकेत देती है कि योजनाएं कागजों में सक्रिय हैं लेकिन क्रियान्वयन स्तर पर संसाधनों की कमी, भुगतान में देरी और समन्वय की कमजोर व्यवस्था के कारण अपेक्षित लाभ लाभार्थियों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। स्थानीय कार्यकर्ता सम्मानजनक मानदेय, समय पर भुगतान और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं ताकि महिला और बाल विकास की योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित हो सकें।

उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और राज्य आंदोलनकारी पी.सी. तिवारी कहते हैं कि कभी उत्तराखण्ड का बौद्धिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा अल्मोड़ा आज योजनाहीन विकास और प्रशासनिक केंद्रीकरण के कारण अपनी मूल पहचान धीरे-धीरे खोता जा रहा है।

उनका कहना है कि यह केवल भौतिक बदलाव का मुद्दा नहीं है बल्कि नागरिक सहभागिता के घटते दायरे और जनहित के प्रश्नों की निरंतर अनदेखी का परिणाम है। पारम्परिक भवन शैली, सामाजिक संवाद की संस्कृति और सार्वजनिक स्थलों का स्वरूप तेजी से परिवर्तित हो रहा है। विकास के नाम पर बहुमंजिला इमारतें, होटल और संस्थान तो खड़े हुए हैं लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं की गुणवत्ता अब भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।

पी.सी. तिवारी के अनुसार, अल्मोड़ा में सार्वजनिक स्थानों की कमी लोकतांत्रिक परम्परा के लिए गम्भीर संकेत हैं। जिन स्थलों पर कभी नागरिक संवाद और जन आंदोलनों की आवाज गूंजती थी, वे अब सीमित या नियंत्रित कर दिए गए हैं। कलेक्ट्रेट परिसर को ‘साइलेंट जोन’ घोषित किया जाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने जैसा कदम प्रतीत होता है। उनका स्पष्ट मत है कि लोकतंत्र प्रशासनिक नियंत्रण से नहीं बल्कि सक्रिय और जागरूक नागरिक भागीदारी से सशक्त होता है।

उन्होंने भूमि अधिग्रहण और बड़े पूंजी समूहों के बढ़ते हस्तक्षेप पर भी प्रश्न उठाए। उनका कहना है कि गांवों को नगर क्षेत्र में शामिल करने या किसी विकास परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय समुदायों की सहमति और सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। सौर ऊर्जा परियोजनाओं सहित अन्य योजनाओं में स्थानीय किसानों को भागीदार बनाने के बजाय बाहरी कम्पनियों को प्राथमिकता दिए जाने से सामाजिक असमानता बढ़ने की आशंका है।

उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों की कमी के लिए केवल सरकार या विपक्ष को दोषी ठहराना पर्याप्त नहीं है। जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे सत्ता पक्ष में हों या विपक्ष में, हर परिस्थिति में जनता की आवाज बनें। भूमि, संसाधन और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर मौन रहना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से विमुख होने के समान है।

भारतीय जनता पार्टी के नेता बिट्टू कर्नाटक कहते हैं कि ‘‘अल्मोड़ा विधानसभा क्षेत्र ऐतिहासिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक दृष्टि से प्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। राज्य गठन के बाद अपेक्षा थी कि यहां योजनाबद्ध और दूरदर्शी विकास होगा किंतु पूर्ववर्ती जनप्रतिनिधियों द्वारा उपलब्ध अवसरों का समुचित उपयोग नहीं किया गया। यदि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को गम्भीरता और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाता तो अल्मोड़ा आज विकास की नई ऊंचाइयों पर होता। अल्मोड़ा लम्बे समय तक शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के शिक्षित और जागरूक नागरिक क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं। आवश्यकता इस बात की है कि सक्षम, ऊर्जावान और दूरदर्शी नेतृत्व के माध्यम से शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों को सशक्त किया जाए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके। आज सबसे गम्भीर चिंता का विषय युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति है। स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में मेडिकल काॅलेज की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है किंतु केवल भवन निर्माण पर्याप्त नहीं है। आवश्यक है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, उपकरणों की उपलब्धता और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए ताकि आम जनता को वास्तविक लाभ मिल सके। पर्यटन की दृष्टि से भी अल्मोड़ा अपार सम्भावनाओं वाला क्षेत्र है। धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को निकटवर्ती क्षेत्रों जैसे बागेश्वर और बैजनाथ से जोड़कर एक समग्र पर्यटन सर्किट विकसित किया जा सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

कुल मिलाकर अल्मोड़ा विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर बहुआयामी है। एक ओर मेडिकल काॅलेज और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार जैसी उपलब्धियां हैं तो दूसरी तरफ विशेषज्ञों की कमी, पलायन, शहरी अव्यवस्था और सामाजिक चुनौतियां भी स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।

स्पष्ट है कि केवल भवन निर्माण पर्याप्त नहीं बल्कि संसाधनों की पूर्ण उपलब्धता, विशेषज्ञों की नियुक्ति, पारदर्शी प्रबंधन और सक्रिय जनसहभागिता से ही अल्मोड़ा को संतुलित और स्थायी विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

बात अपनी-अपनी

   वर्ष 2022 के बाद क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय नया विकास कार्य शुरू नहीं हुआ है। 2017 से 2022 के बीच मैं विधायक था, उस अवधि में वास्तविक विकास कार्य हुए। मेरे कार्यकाल में लगभग 27 सड़कों का निर्माण कराया गया और कई ग्रामीण सम्पर्क मार्ग स्वीकृत हुए जिनका लाभ आज भी जनता को मिल रहा है। हालांकि कुछ सड़कों का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद अब तक उनका डामरीकरण (ब्लैकटाॅप) नहीं हो पाया है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  मेडिकल काॅलेज की स्थापना अवश्य हुई है लेकिन विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी के कारण मरीजों को अब भी बाहर का रुख करना पड़ता है। देखिए केवल भवन निर्माण से काम नहीं चलता, सेवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होती है। युवाओं में शराब और ड्रग्स की समस्या गम्भीर रूप ले रही है। काॅलेज परिसरों का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है, जिस पर प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। पानी की समस्या, बंदरों का आतंक और ग्रामीण क्षेत्रों की अन्य मूलभूत दिक्कतें अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। बंदरों के स्टरलाइजेशन के लिए उनके कार्यकाल में पहल की गई थी, जिसे आगे निरंतरता की आवश्यकता है। रही बात वर्तमान विधायक मनोज तिवारी की तो लोकतंत्र में विधायक ही क्षेत्र की जनता के लिए सरकार का प्रतिनिधि होता है। व्यवहार कुशल होना अलग बात है लेकिन वास्तविक कसौटी विकास कार्यों से तय होती है। जनता अपने अनुभव के आधार पर तय करती है कि विकास हुआ है या नहीं।

रघुनाथ सिंह चैहान पूर्व विधायक अल्मोड़ा

    अल्मोड़ा विधानसभा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक दृष्टि से प्रदेश की महत्वपूर्ण सीट है। केंद्र में नरेंद्र मोदी और प्रदेश में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड में सुशासन, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता दी गई है। अल्मोड़ा भी इसी विकास यात्रा का हिस्सा है। 2007 में घोषित मेडिकल काॅलेज आज आकार ले चुका है। आधुनिक भवन, उपकरण और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है और आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाएं और सुदृढ़ होंगी। सरकार की प्राथमिकता है कि पहाड़ के लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिले। 2017-22 के बीच अल्मोड़ा विधानसभा में अनेक सड़क परियोजनाएं स्वीकृत हुईं। ग्रामीण क्षेत्रों तक सड़क पहुंचने से खेती, दुग्ध व्यवसाय और छोटे व्यापार को लाभ मिला है। उड़ान योजना के तहत हेलीपैड सुविधा से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। उच्च शिक्षा संस्थानों को सशक्त करने और रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। स्वरोजगार योजनाओं, कृषि, मशरूम, लेमनग्रास, सहकारिता ऋण के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास जारी हैं। अल्मोड़ा सांस्कृतिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है। कटारमल सूर्य मंदिर, जागेश्वर धाम और चितई गोलू देवता मंदिर जैसे स्थलों के विकास से धार्मिक पर्यटन बढ़ा है जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। राज्य सरकार मंदिर सर्किट और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। स्वास्थ्य में विशेषज्ञों की कमी, युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और शहरी नियोजन से जुड़ी समस्याएं चिंताजनक हैं। सरकार जागरूकता अभियान, पुलिस कार्रवाई और परिवार-समाज की भागीदारी के माध्यम से समाधान की दिशा में काम कर रही है। अल्मोड़ा के पारम्परिक स्वरूप पाटाल बाजार, स्थानीय मिठाइयों और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए पुनर्निर्माण की दिशा में प्रयास आवश्यक हैं। विकास और विरासत के संतुलन के साथ अल्मोड़ा को आगे बढ़ाना ही हमारा लक्ष्य है, अल्मोड़ा विधानसभा में आधारभूत ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। कुछ चुनौतियां शेष हैं, पर सरकार प्रतिबद्ध है कि क्षेत्र को समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।

कुंदन लटवाल, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, भाजपा, प्रभारी, बागेश्वर


अल्मोड़ा विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड

विधायक : मनोज तिवारी (अवधि : 4 वर्ष)

क्र. क्षेत्र                                            मुद्दा/जमीनी स्थिति                     अंक  (10 में)

  • सड़क व सम्पर्क मार्ग मुख्य मार्गों में आंशिक सुधार, कई आंतरिक व ग्रामीण सड़कों की हालत कमजोर, बरसात में दिक्कत 5/10
  • मेडिकल काॅलेज व बेस अस्पताल 420 बेड, आईसीयू, एनआईसीयू, सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं, पर सुपर स्पेशलिस्ट की कमी, रेफरल अधिक 6/10
  • सुपर स्पेशलिटी उपलब्धता कार्डियोलाॅजी, न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलाॅजी जैसे विशेषज्ञों का अभाव, नियुक्ति प्रक्रिया जारी 4/10
  • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं भवन मौजूद, पर डाॅक्टर व लोअर स्टाफ की कमी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की क्षमता सीमित 4/10
  • रोजगार व आर्थिक गतिविधि पर्यटन, होटल व्यवसाय व छोटे व्यापार सक्रिय, पर स्थायी बड़े उद्योग या रोजगार माॅडल का अभाव 5/10
  • पलायन नियंत्रण योजनाएं व घोषणाएं, फिर भी युवाओं का बाहरी शहरों की ओर रुझान जारी 4/10
  • शिक्षा व उच्च शिक्षा मेडिकल काॅलेज में एमबीबीएस एवं पीजी सीटें, कुछ निजी संस्थान सक्रिय, तकनीकी व व्यावसायिक प्रशिक्षण सीमित 6/10
  • नशा व युवा समस्या पुलिस की कार्रवाई व जागरूकता अभियान, फिर भी युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति चिंता का विषय 4/10
  • स्वच्छता व शहरी प्रबंधन नगर निगम क्षेत्र के बावजूद कचरा प्रबंधन व सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति असंतोषजनक 4/10
  • जनसम्पर्क व राजनीतिक सक्रियता राजनीतिक रूप से सक्रिय सीट, जनप्रतिनिधियों की उपलब्धता पर मिश्रित प्रतिक्रिया, संवाद की आवश्यकता 6/10

औसत :  4.8/10                    फाइनल ग्रेड : पास
 
 
‘पहचान भी बचे, प्रगति भी हो’
 
वर्ष 2002 में अस्तित्व में आई अल्मोड़ा विधानसभा सीट कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी का प्रतिनिधित्व करती है और राज्य गठन के बाद से लगातार कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा राजनीतिक मुकाबला देखती रही है। बदलते जनादेश और स्थानीय मुद्दों पर सजग मतदाताओं के कारण यह सीट उत्तराखण्ड की महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धी विधानसभा क्षेत्रों में गिनी जाती है। कांग्रेस के मनोज तिवारी पहली बार वर्ष 2012 में इस सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे और वर्ष 2022 में दोबारा जीत दर्ज कर वर्तमान में दूसरी बार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पेश है उनसे ‘दि संडे पोस्ट’ संवाददाता दिव्या भारती की विस्तृत बातचीत

मनोज जी, आप वर्तमान में अल्मोड़ा के विधायक हैं। आपके कार्यकाल में यहां कितने और किस प्रकार के विकास कार्य हुए हैं?

पूरे विधानसभा की अगर बात करूंगा बहुत सारी समस्याएं है। एक तो पूरा विधानसभा क्षेत्र पर्वतीय भूभाग में है, टोपोग्राफी ऐसी है कि यहां पर समस्याएं बहुत हैं। जब मैं पहली बार विधायक बना तो मैंने पहले पूरे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को जाना, यहां की जो विषमताएं हैं उनको जाना, समस्याओं को समझने का भ्रमण में अवसर मिला। जब 2012 से 2017 में हमारी सरकार थी और मैं दूसरी बार विधायक के रूप में था। तब हमने यहां पर जो हमारा अल्मोड़ा मेडिकल काॅलेज है जिसकी 2004 में पंडित नारायण दत्त तिवारी जी ने घोषणा की थी लेकिन इसके बाद 5 या 6 साल तक यह अस्तित्व में नहीं आया। तो हमने इस काम को शुरू करवाया। आज यह अच्छा रूप ले चुका है। इसी तरीके से हमने यहां पर नर्सिंग कॉलेज की 2016 में स्थापना की। नर्सिंग कॉलेज को खोला,
एजुकेशन के क्षेत्र में फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट की हमने स्वीकृत कराई और वर्तमान सरकार से हम लगातार आग्रह कर रहें हैं कि उसको संचालित करें लेकिन अभी तक संचालित नहीं हो पाया है। इसके अलावा यहां पर पेयजल की बड़ी किल्लत थी। जैसे ही फरवरी-मार्च के बाद गर्मी आती थी तो उसके बाद किल्लत हो जाती थी। रोज आंदोलन होते थे तो मैंने अल्मोड़ा में एक कोसी बैराज का अपनी सरकार के कार्यकाल में निर्माण कराया। आज आप देख रहे हैं कि वर्तमान सरकार हैली सेवा की वाह वाही ले रही है यह जो हेलीपैड है उसको हमने अपनी सरकार के टाइम में स्वीकृत करवाया था। हमारी कोशिश है कि यहां जो यातायात की बहुत बड़ी समस्या है। हमारे जो पर्यटक आते हैं, यहां के लोग हैं उनको सबसे बड़ी समस्या होती थी पार्किंग की तो हमने पार्किंग का निर्माण किया है। आगे और भी पार्किंग के लिए प्रस्ताव शासन को भेजने का कार्य किया है। अपने क्षेत्र में हमने पाॅलिटेक्निक काॅलेज खोले ,आईटीआई काॅलेज खोले, हाई स्कूल का उच्चीकरण किया, बहुत सारी रोड का निर्माण किया।

अल्मोड़ा मेडिकल काॅलेज में फैकल्टी की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

हमारे पूरे पर्वतीय क्षेत्र में आज स्वास्थ्य और शिक्षा दो बहुत महत्वपूर्ण विषय हैं और इसके लिए सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है। देखिए विकास एक सतत् प्रक्रिया है इसलिए जो भी सरकार हो उसे पिछली सरकार के कामों को आगे बढ़ाने का काम करना चाहिए, उसमें सुधार करने का काम करना चाहिए। हम उस व्यवस्था को अच्छा नहीं कर पाए तभी तो हम सरकार में नहीं हैं लेकिन वर्तमान में जो सरकार है उसको देखना चाहिए जिन आवश्कताओं की पूर्ति हो सकती है उसको करें। अल्मोड़ा मेडिकल काॅलेज में आज सबसे बड़ी चिंता का विषय है कि फैकल्टी हमें उपलब्ध नहीं हो पा रही है। लगातार हम सरकार से भी अनुरोध कर रहे हैं, प्रशासन पर भी दबाव बना रहे हैं कि आप जल्दी से जल्दी यहां पर फैकल्टी की व्यवस्था करें जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था अच्छी हो। भवन इत्यादि हमारे बन चुके हैं उसके लिए कोई धन की कमी नहीं हो रही है, सारे उपकरण आ चुके हैं लेकिन अभी बहुत कुछ और किए जाने की जरूरत है। स्वास्थ्य मंत्री जी से मैं लगातार अनुरोध करता रहता हूं। जब भी सदन के अंदर प्रतिपक्ष के रूप में उस प्लेटफार्म में मुझे बात उठाने का मौका मिलता है तो स्वास्थ्य और शिक्षा पर मैं अपने क्षेत्र की समस्याओं को लगातार उठाने का काम करता हूं।

सड़क निर्माण, डामरीकरण और लम्बित परियोजनाओं को लेकर क्षेत्र की जनता में असंतोष देखा जा रहा है। पूर्व विधायक का कहना है कि अधिकांश सड़कों का निर्माण उनके कार्यकाल में हुआ था लेकिन अब तक कई सड़कों का डामरीकरण नहीं हो पाया है?

देखिए मैं पहले भी कह चुका हूं विकास एक सतत् प्रक्रिया है। जो सरकार बनती है उसका काम होना चाहिए कि विकास में अपनी सहभागिता करें और मैं दावे के साथ कहता हूं कि जब मैं पहली बार विधायक, फिर दूसरी बार विधायक बना, जितना हमने अपने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में या मोटर मार्ग क्षेत्र में काम किया किसी विधायक ने, किसी सरकार ने नहीं किया। आज जितने भी मेरी विधानसभा के मार्ग हैं हमने उनको स्टेज 4 की प्रधानमंत्री सड़क योजना में भेजने का काम किया है। उसके साथ-साथ लगातर माॅनिटरिंग कर रहे हैं। नई सड़कों को स्वीकृत करने के लिए लगातार शासन पर दबाव बनाने का काम कर रहे हैं। उसके अलावा चाहे वो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना हो, चाहे वो राज्य योजना के अंतर्गत हो या चाहे पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत हो, हम प्रयासरत् हैं। मैं मानता हूं आज बहुत सारी सड़कों में डामरीकरण नहीं हो पाया है, कहीं पर द्वितीय चरण का काम नहीं हो पाया, कहीं स्वीकृति नहीं हुई है लेकिन हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। मैं अपने मित्रों से कहना चाहता हूं कि जो काम हो जाता है वो कहते हैं हमने किया और जो काम नहीं होता वो कहते हैं मनोज तिवारी ने नहीं किया है इसलिए या तो आप पूरी चीजों को अपना ले लीजिए हम तैयार हैं या फिर वो पूरा हमें दे दें।

पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार पलायन हो रहा है। इसे रोकने के लिए आपके अनुसार क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए?

देखिए ये बड़ी चिंता का विषय है। एक तरफ हमारे पर्वतीय क्षेत्र से लगातार पलायन हो रहा है तो दूसरी ओर सरकार लगातार रिवर्स पलायन की बात कर रही है। ये बड़े दुख का विषय है जो हमारे पर्वतीय क्षेत्र अल्मोड़ा, पौड़ी है, सभी में पलायन की गति तेज हो रही है। मैं सीधे-सीधे प्रदेश की सरकार पर आरोप लगाना चाहता हूं कि जब तक स्वास्थ्य और शिक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्थित नहीं होगी और उसके साथ चाहे चाय कृषि हो या अन्य बागवानी हो, जितने भी उद्योग हैं उनको मजबूत नहीं किया जाएगा तो पलायन नहीं रूकेगा। क्या अच्छी नीति बना सकते हैं, उस दिशा में इसमें विचार होना चाहिए और उसको धरातल में उतारने का काम किया जाना चाहिए। सरकार को उसमें विधिवत उसका अध्ययन करके उसे इम्पलीमेंट करना चाहिए। जो हो सकता है, सबसे बड़ी चिंता का विषय आज स्वास्थ्य, शिक्षा तो है उसके साथ-साथ बंदरों का आतंक, जंगली जानवरों का आतंक पूरे ग्रामीण क्षेत्रों में, शहरी क्षेत्र में आप देखेंगे लोग सबसे ज्यादा आज पहली प्राथमिकता जानवरों के आतंक से छुटकारा चाहती है। सरकार जिसे नजरअंदाज कर रही है।

आप पर यह भी आरोप है कि आप कह देते हैं कि राज्य या केंद्र में आपकी सरकार नहीं है, इसलिए काम नहीं हो पा रहे?

जितने भी मेरे मित्र हैं वो मेरी लोकप्रियता को देखकर बौखला गए हैं और उनको कुछ नहीं मिलता वो सीधे यह आरोप लगा देते हैं। जो मेरा एक विधायक होने के नाते दायित्व है उसका मैं निर्वहन कर रहा हूं और शासन में लगातार दबाव बनाने का काम कर रहा हूं। जो हमारा इको पार्क है उसके लिए कार्य योजना बनाकर मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से मिला। हमारा कोसी में जो बैराज है उसके लिए एक ठोस कार्य योजना के लिए मैंने जिला अधिकारी को कहा है।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि आप लोगों से मिलते तो हैं लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याओं को जानने के लिए उतना क्षेत्र भ्रमण नहीं करते, कसार देवी में आंगनबाड़ी केंद्र का भवन काफी खराब हालात में है, साथ ही अल्मोड़ा विधानसभा में जगह-जगह कूड़ा फेंका हुआ है। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

मैं जितनी सरलता से जनता के बीच में रहता हूं उतना कोई नहीं रहता होगा। मुझको अगर कोई भी फोन करता है तो मैं उससे कहता हूं आओ मिलो, आपकी समस्या को हम हल करने की कोशिश करेंगे। लगातार क्षेत्र भ्रमण भी कर रहा हूं। क्षेत्र भ्रमण के बाद से हमारी छोटी-छोटी चौपाल होती है। वहीं से विभागीय अधिकारी को निर्देश भी देते हैं और जितना हो सकता है उस काम को करते हैं। अगर तत्काल हो सकता है तो तत्काल करते हैं जो शासन स्तर का होता है उसको शासन स्तर पर करने का काम करते हैं और सदन के अंदर लगातार जितने भी ज्वलंत मुद्दे हैं उन्हें उठाने का काम किया है। जहां तक आपने कसार देवी के आंगनबाड़ी केंद्र की बात की है वो मेरे संज्ञान में अभी तक नहीं आया है। ये वहां के क्षेत्र की जनता या हमारे वहां के सम्मानित पंचायत के प्रतिनिधि जो हंै वो हमारे संज्ञान में लाते तो निश्चित रूप उस आंगनबाड़ी भवन को बनाने के लिए हम शासन से बजट पास करवाते। जो सम्भव होता विधायक निधि से भी कराते। मैं आपके माध्यम से कहना भी चाहता हूं कि इस तरह की कोई चीज होगी, हमारे संज्ञान में आएगी तो निश्चित रूप से हम उसका समाधान करने का काम करेंगे। रही बात शहर के कूड़े के निस्तारण की तो इसके लिए लगातार हमने यहां के आयुक्त को और जो हमारे मेयर हैं उनको कहा है। यह नगर निगम का दायित्व होता है कि कूड़ा प्रतिदिन उठे और कूड़ा कहीं पर भी फेंका न जाए। स्वच्छता हो पूरे शहर में, नगर निगम हमसे जहां पर भी मदद मांगेगी हम हमेशा खड़े मिलेंगे।

अल्मोड़ा में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों और होटल व्यवसाय के विस्तार के बीच आपदा जोखिम को लेकर आपकी क्या राय है?

अल्मोड़ा बहुत पुराना शहर है। हमारा तो यह कहना है और सरकार से भी गुजारिश है कि इस अल्मोड़ा को हैरिटेज सिटी के रूप में घोषित किया जाए। जितने भी हमारे पहाड़ के परम्परागत भवन हैं उनको वैसे ही रखा जाए, उसी तरीके से विकसित किया जाए। हमारे जितने भी हाईस्कूल यहां पर हैं, हमारा जीआईसी हो, चाहे जीजीआईसी हो, चाहे अल्मोड़ा इंटर काॅलेज हो इनका रखरखाव करके  हैरिटेज के रूप में विकसित किया जाए। आपदा की दृष्टि से अल्मोड़ा बहुत संवेदनशील है। जोन 6 में आता है और बहुत अच्छे संकेत नहीं हैं लेकिन मैं सीधा-सीधा आरोप लगाऊंगा सरकार पर कि एक तो जो प्राधिकरण यहां पर गठित किया वह उद्देश्यविहीन है। पहले नगर पालिका नक्शा पास करती थी नगर पालिका को जो आय अर्जित होती थी उससे विकास कार्य होते थे। आपने नगर पालिका से वो सब छीन प्राधिकरण गठित कर दिया। आज आप देख रहे होंगे कि यहां पर कितना अतिक्रमण हो चुका है, लोग बसाए जा रहे हैं, मकान, इमारतें। प्राधिकरण उसमें अंकुश नहीं लगा रहा है। नगर पालिका कहती है हमारे अधीन नहीं है और प्राधिकरण कहता है कि अगर कोई व्यक्ति अपने निजी संसाधनों से बिल्डिंग बना रहा है तो उसमें प्राधिकरण का अंकुश नहीं है। जो असंतुलित विकास हो रहा है इसको रोकने के लिए या तो नगर निगम को अधिकार दे दिया जाए या प्राधिकरण को।

अल्मोड़ा स्थित कुष्ठ रोग अस्पताल की स्थिति बेहद दयनीय है। क्या सरकार द्वारा इसे टेकओवर करने की दिशा में कोई पहल सम्भव है?


जब 12 से 17 में कांग्रेस की सरकार थी उसमें मैंने स्वयं माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलकर कोशिश करी कि हमें कुछ संसाधन उपलब्ध हो सके लेकिन हम सफल नहीं हो पाए। आज जो पूरा वहां पर संचालन हो रहा है वह लोगों के निजी सहयोग से हो रहा है। वास्तव में उनका धन्यवाद करना चाहता हूं और हमारा प्रयास है, हमारी कोशिश है कि सरकार उसको टेकओवर कर ले। गवर्नमेंट कुछ इस तरह करें कि उसको मंथली इतना पैसा दे जिससे वो संचालित हो सके। यह वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण संस्थान है और इस बात को मैं सरकार के संज्ञान में फिर पुनः लाने का प्रयास करूंगा।

अल्मोड़ा में बढ़ते नशे, विशेषकर युवाओं में स्मैक और अन्य नशीले पदार्थों के प्रसार को लेकर आपने क्या कदम उठाए हैं? पुलिस प्रशासन की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?

देखिए यह वास्तव में बहुत गम्भीर और महत्वपूर्ण विषय है। हम देख रहे हैं कि लगातार धीरे-धीरे हमारा युवा नशे की गिरफ्त में आ रहा है। चाहे उसे स्मैक या गांजा कहे लगातार यहां पर बढ़ता जा रहे हैं। मैंने विधानसभा में भी इस बात को उठाया था। मैंने तो सीधा- सीधा आरोप पुलिस प्रशासन पर भी लगाया था कि कहीं न कहीं पुलिस प्रशासन के संरक्षण में यह नशा यहां पर पांव पसार रहा है। कौन इसके पीछे है? उसमें कहीं न कहीं पुलिस के लोग भी संलिप्त हैं। जो समूह गिरोह वाला है उसको सबसे पहले पकड़ा जाए। तभी हमारे यहां पर यह नशे का प्रकोप रुकेगा। उसके साथ-साथ अवेयरनेस के प्रोग्राम लगातार चल रहे हैं और मैं तो जहां पर भी, जिन विद्यालयों में भी जाता हूं, कहीं पर भी कोई धार्मिक आयोजन में जाता हूं तो इसके लिए निश्चित रूप से बोलता हूं कि अपने बच्चों को रोज देखने की आज आवश्यकता है। इसमें संवाद करने की आवश्यकता है। आपका बच्चा क्या कर रहा है? क्या एक्टिविटी कर रहा है?

जनता आपके कार्यकाल को 50-50 मानती है, न पूर्णतः सफल, न पूर्णतः असफल। आप स्वयं अपने कार्यकाल का मूल्यांकन किस रूप में करते हैं? क्या आप अल्मोड़ा के विकास को संतोषजनक मानते हैं?

मेरे प्रयास में कोई कमी होती है तो मैं उसके लिए जिम्मेदार अपने आपको मानता हूं। हां, अगर मैंने प्रयास किया है उस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए, उसे शासन स्तर पर पहुंचाने के लिए कार्य किया है उसके बाद भी अगर सरकार नहीं कर रही है तो मैं सीधा-सीधा आरोप सरकार पर निश्चित रूप से लगाऊंगा। लेकिन यदि मेरे क्षेत्र की जनता संतोषजनक मेरे प्रति नहीं है तो मेरी कोशिश रहेगी उनकी भावनाओं, उनकी समस्याओं को समझूं और उन बातों को आगे ले जाने का पूरा प्रयास करूं, धरातल पर कार्य करने का प्रयास करूं।

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