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कैमरून नहीं बने ग्रीन सिग्नल

आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स और कैमरून ग्रीन की कहानी उम्मीदों और निराशा के बीच झूलती नजर आती है। जहां टीम ने बड़े सपनों के साथ शुरुआत की थी वहीं अब तक का प्रदर्शन उन सपनों के अनुरूप नहीं रहा। ग्रीन का निराशाजनक प्रदर्शन इस कहानी का केंद्र बिंदु रहा है। उन्होंने अब तक वह प्रभाव नहीं छोड़ा है, जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी। हालांकि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है और यहां कभी भी परिस्थितियां बदल सकती हैं। अगर ग्रीन आने वाले मैचों में अपनी फाॅर्म हासिल कर लेते हैं, तो कहानी पूरी तरह बदल सकती है। फिलहाल की स्थिति यही कहती है कि केकेआर और उसके सबसे महंगे खिलाड़ी का यह सीजन शुरुआती सात मुकाबलों में उम्मीदों के विपरीत रहा है

इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का सीजन जहां कई टीमों और खिलाड़ियों के लिए नई ऊंचाइयां लेकर आया वहीं कुछ टीमों और स्टार खिलाड़ियों के लिए यह सीजन उम्मीदों के विपरीत साबित होता दिख रहा है। कोलकाता नाइट राइडर्स और उसके सबसे महंगे खिलाड़ी कैमरून ग्रीन का प्रदर्शन शुरुआती सात मुकाबलों में निराशाजनक रहा है जिसने टीम के संतुलन और नतीजों दोनों पर असर डाला है। इस सीजन में सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी की बात करें तो वो कैमरून ग्रीन ही हैं। उन्हें शाहरुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स ने 25.20 करोड़ रुपए की रिकाॅर्ड बोली लगाकर खरीदा है। यहां तक कि वे आईपीएल इतिहास के अब तक के सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी भी बन चुके हैं। उनसे पहले ये खिताब ऑस्ट्रेलिया के ही मिचेल स्टार्क के पास था जो 2024 सीजन में 24.75 करोड़ में बिके थे। हालांकि इतनी कीमत देने के बावजूद केकेआर को अब तक ग्रीन से कुछ खास हासिल नहीं हुआ है। हालांकि अभी टूर्नामेंट का बड़ा हिस्सा बाकी है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले मैचों में वह बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन सोशल मीडिया और मीडिया में सवाल उठ रहे हैं कि क्या केकेआर ने अपनी रणनीति में गलती कर दी? क्या अभी भी है वापसी की उम्मीद? ग्रीन का असल रोल क्या है? बल्लेबाज? फिनिशर? ऑलराउंडर या सिर्फ एक महंगा प्रयोग? क्या यह फैसला गलत था? आधे फिट खिलाड़ी पर पूरा दांव क्या ये रणनीति थी या जल्दबाजी? जैसे तमाम सवाल दागे जा रहे हैं।

गौरतलब है कि आईपीएल 2026 की नीलामी में केकेआर ने कैमरून ग्रीन को भारी रकम में खरीदकर यह साफ कर दिया था कि वे इस ऑस्ट्रेलियाई ऑल राउंडर को टीम का मुख्य स्तंभ बनाना चाहते हैं। ग्रीन की ऑल राउंड क्षमताएं और अंतरराष्ट्रीय अनुभव उन्हें एक आदर्श टी-20 खिलाड़ी बनाते हैं लेकिन जब निवेश बड़ा होता है तो अपेक्षाएं भी उसी अनुपात में बढ़ जाती हैं। केकेआर को उम्मीद थी कि ग्रीन बल्ले और गेंद दोनों से मैच जिताने वाले खिलाड़ी साबित होंगे लेकिन अब तक के प्रदर्शन ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

कैमरून ग्रीन की बल्लेबाजी अभी तक सबसे बड़ी चिंता का विषय रही है। उन्होंने कुछ मैचों में शुरुआत तो अच्छी की लेकिन उसे बड़ी पारी में बदलने में बार-बार असफल रहे। टी-20 क्रिकेट में जहां तेजी और
निरंतरता दोनों जरूरी होते हैं वहीं ग्रीन का प्रदर्शन इन दोनों पैमानों पर खरा नहीं उतरा सिवाय एक अर्धशतकीय पारी के। कई मौकों पर वे गलत शॉट खेलकर आउट हुए, जिससे टीम दबाव में आ गई। खासकर मिडिल ऑर्डर में उनकी भूमिका बेहद अहम थी लेकिन वे उस जिम्मेदारी को निभाने में सफल नहीं हो पाए। उनका स्ट्राइक रेट भी अपेक्षाओं से कम रहा जो टीम के रन रेट पर असर डालता है। जब टीम को तेज रन की जरूरत होती थी, तब ग्रीन की धीमी बल्लेबाजी आलोचना का कारण बनी तो वहीं एक ऑलराउंडर के तौर पर ग्रीन से गेंदबाजी में भी योगदान की उम्मीद थी लेकिन यहां भी उनका प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है। ग्रीन एक अच्छे फील्डर माने जाते हैं, लेकिन इस सीजन में उनका फील्डिंग प्रदर्शन भी खास नहीं रहा। कुछ कैच छोड़ना और रन-आउट के मौके गंवाना टीम के लिए महंगा साबित हुआ। आधुनिक क्रिकेट में छोटी-छोटी गलतियां भी बड़े परिणाम ला सकती हैं और केकेआर ने इसका खामियाजा भुगता है।

अगर आंकड़ों को थोड़ा और गहराई से देखें तो तस्वीर और साफ होती है। केकेआर इस वक्त पाॅइंट्स टेबल में सबसे नीचे है। टीम ने शुरुआती सात मुकाबलों में 1 अंक बारिश के कारण मैच रद्द होने के चलते मिला तो एक जीत से कुल तीन अंक ही जुटा पाई है। टीम का पूरा प्लान ही पटरी से उतर गया है और उसमें ग्रीन का रोल छोटा नहीं बल्कि बड़ा है। आंकड़े की बात करें तो ग्रीन ने इस सीजन की शुरुआती 7 पारियों में 27.00 की औसत से सिर्फ 1अर्द्धशतक के साथ 162 रन बनाए हैं। यानी 25.20 करोड़ का खिलाड़ी और 7 मैचों में 162 रन, मतलब हर रन की कीमत लाखों में है। क्रिकेट के मैदान पर ये आंकड़ा सिर्फ कम नहीं बल्कि सीधे टीम के संतुलन को तोड़ देता है। मामला सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है। ग्रीन ने गेंद से भी उम्मीदें तोड़ीं हैं। चेन्नई के खिलाफ उन्होंने 2 ओवर में 30 रन लुटाए और एक भी विकेट नहीं लिया। जिस खिलाड़ी से दोहरी
भूमिका निभाने की उम्मीद थी, वो दोनों ही मोर्चों पर बेअसर दिख रहा है।

आईपीएल 2026 में खेले गए 28 मैचों के बाद रिकॉर्ड बुक ये कहती है कि टूर्नामेंट में रन बनाने की लिस्ट में कैमरून ग्रीन टॉप 20 में भी शामिल नहीं हैं। गेंदबाजी के मामले में तो ग्रीन कहीं नजर ही नहीं आते हैं। शुरुआती मैचों में कुछ समस्याओं के चलते वो बाॅलिंग के लिए उपलब्ध नहीं थे। फिर बीते 4 मैचों में गेंदबाजी के लिए आए जरूर, मगर उन्हें 1 विकेट नसीब हो सका। ग्रीन की गेंदबाजी को लेकर अभी भी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। केकेआर के पहले ही मैच के बाद उनकी गेंदबाजी को लेकर अमूमन शांत रहने वाले कप्तान अजिंक्य रहाणे की झल्लाहट भरी बात सुनकर ये साफ हो गया था कि पर्दे के पीछे कुछ ऐसा खेल हो रहा था जिसने केकेआर को परेशान करके रखा हुआ था।

खेल विश्लेषकों और पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का कहना है कि लगता है केकेआर और ग्रीन के प्रदर्शन की चाबी कहीं खो गई है। इसके पीछे एक बड़ी वजह  ग्रीन चोट से वापसी कर रहे हैं और आईपीएल से पहले ज्यादा क्रिकेट नहीं खेल पाए थे। ऐसे में केकेआर ने एक अनफिट या आधे फिट खिलाड़ी पर पूरा दांव लगा दिया। एक और चीज ये है कि 25.20 करोड़ रुपए में बिके खिलाड़ी पर दबाव किस स्तर का होता होगा ये ग्रीन में  देखा जा सकता है। लगभग हर आंख, दबी जुबान में ही सही, उनसे सवाल पूछती नजर आ रही होगी। ये कहा जा सकता है कि कैमरून ग्रीन की शुरुआती असफलता ने जिसमें एक गोल्डेन डक भी शामिल है, उन पर दबाव दाल दिया है और इस दबाव का मूल्य है 25 करोड़ 20 लाख रुपए। जब टीम हार रही हो और सबसे महंगा खिलाड़ी योगदान न दे पाए तो निशाना वही बनता है।

कुल मिलाकर केकेआर का यह सीजन फिलहाल गलत फैसलों और खराब प्रदर्शन का मिश्रण बनता जा रहा है। कैमरून ग्रीन पर लगाया गया 25.20 करोड़ का दांव अब टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गया है। अगर जल्द ही उनके प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ तो यह महंगा निवेश केकेआर के पूरे सीजन को डुबो सकता है क्योंकि क्रिकेट में जीत और हार खिलाड़ी की कीमत से नहीं बल्कि उसके प्रदर्शन से तय होती है और फिलहाल ग्रीन इस कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए हैं। हालांकि आईपीएल 2026 का सफर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और केकेआर के पास अब भी वापसी का मौका है लेकिन इसके लिए ग्रीन को अपने प्रदर्शन में बड़ा बदलाव लाना होगा। उन्हें अपनी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास दिखाना होगा, गेंदबाजी में सटीकता लानी होगी और फील्डिंग में भी सुधार करना होगा। अगर वे ऐसा करने में सफल होते हैं तो आलोचकों को जवाब दे सकते हैं। गौरतलब है कि शाहरुख खान के स्वामित्व वाली कोलकाता नाइट राइडर्स ने अब तक कुल 3 बार 2012, 2014 और 2024 में आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की है। इस टीम ने अपना आखिरी खिताब श्रेयस अय्यर की कप्तानी में जीता था।

कप्तानी और रणनीति पर सवाल
टीम मैनेजमेंट और कप्तानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रीन को बार-बार अलग-अलग पोजीशन पर खिलाना, उन्हें स्पष्ट भूमिका न देना और उनकी गेंदबाजी का सही इस्तेमाल न करना ये सभी फैसले आलोचना के घेरे में आए हैं। कभी उन्हें टॉप ऑर्डर में भेजा गया तो कभी मिडिल ऑर्डर में। कभी उन्हें कम ओवर दिए गए तो कभी ज्यादा। इस अस्थिरता ने ग्रीन के आत्मविश्वास को भी प्रभावित किया। जब कोई खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं करता तो उस पर दबाव बढ़ता जाता है।  ग्रीन के साथ भी यही हुआ। ग्रीन में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन आईपीएल जैसे बड़े मंच पर प्रदर्शन करने के लिए मानसिक मजबूती और निरंतरता जरूरी होती है जो इस सीजन में उनके खेल में नजर नहीं आ रही है।

महंगे खिलाड़ियों का सस्ता प्रदर्शन
  1. आईपीएल के इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है जब भारी-भरकम कीमत पर खरीदे गए खिलाड़ियों ने मैदान पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। वर्तमान में आईपीएल इतिहास में सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी कैमरून ग्रीन को 2026 सीजन में 25.20 करोड़ रुपए में केकेआर ने खरीदा लेकिन ग्रीन अभी तक 7 मैचों में सिर्फ 162 रन बना पाए हैं।
  2. ऋषभ पंत जो आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे 27 करोड़ रुपए में पिछले सीजन 2025 में खरीदे गए उन्हें उनकी टीम ने 2026 सीजन में भी इतनी ही कीमत में रिटेन किया गया बावजूद इसके वे अपनी कीमत के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। 2025 में 10 पारियों में मात्र 12.80 की औसत से 128 रन बना पाए तो 2026 के शुरुआती 7 मैचों में भी संघर्ष जारी है और 1 अर्द्धशतक के साथ केवल 147 रन बनाए हैं।
  3. निकोलस पूरन भी 21 करोड़ में लखनऊ की टीम से रिटेन किए गए लेकिन पूरन ने 7 पारियों में केवल 73 रन बनाए हैं यानी हर रन की कीमत 50 लाख रुपए के करीब है।
  4. आईपीएल 2025 में 23.75 करोड़ रुपए के वेंकटेश अय्यर का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था। 8 मैचों में केवल 135 रन बनाए थे।
  5. हेनरिक क्लासेन को पिछले सीजन 2025 में सनराइजर्स हैदराबाद ने 23 करोड़ रुपए में खरीदा लेकिन वे 7 मैचों में केवल 210 रन बनाकर अपनी भारी कीमत को सही साबित नहीं कर सके।
  6. मोहम्मद शमी 2025 सीजन के लिए हैदराबाद ने 10 करोड़ में खरीदे गए लेकिन 9 मैचों में केवल 6 विकेट ही ले सके और 11.23 की खराब इकोनाॅमी रेट से रन लुटाए।
  7. सैम करन को पंजाब ने 2023 सीजन के लिए 18.50 करोड़ में खरीदा मगर करन का प्रदर्शन भी उनकी कीमत के मुकाबले औसत ही रहा है।
  8. पवन नेगी 2016 में सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ियों में से एक, लेकिन उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए।
  9. युवराज सिंह को 2015 में 16 करोड़ (दिल्ली डेयरडेविल्स) और 2014 में 14 करोड़ (आरसीबी) ने खरीदा था, लेकिन दोनों ही बार वे अपनी साख के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए थे।
  10. ग्लेन मैक्सवेल 2013 में मुम्बई के लिए महंगे लेकिन असफल रहे।

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