Uttarakhand

नशीले पदार्थों के खिलाफ मुहिम

पिथौरागढ़ जनपद के युवा लगातार नशे की चपेट में आ रहे हैं। अवैध रूप से शराब, चरस, स्मैक का कारोबार जिले में खूब पनप रहा है। पिछले दिनों पुलिस ने नशे का अवैध करोबार करते हुए कई लोगों को पकड़ा। बढ़ते अवैध मादक पदार्थों की तस्करी को देखते हुए जनपद पुलिस ने पुलिस अधीक्षक आरसी राजगुरू के दिशा-निर्देशन में नशामुक्ति अभियान चलाया है जिसके तहत 26 जून से 10 जुलाई तक अंतरराष्ट्रीय ड्रग जागरूकता दिवस पखवाड़ा मनाया गया। इस दौरान चैंकिंग अभियान चलाकर बड़ी मात्रा में चरस भी बरामद की गई।

अवैधमादक पदार्थों की बढ़ती ब्रिकी को देखते हुए जनपद पुलिस ने एंटी ड्रग्स टास्क फोर्स गठित की है। जिसका मुख्य उद्देश्य अवैधमादक पदार्थों की ब्रिकी व तस्करी पर रोक लगाना रहा है। अभी तक यह टीम नशे का अवैध कारोबार करने वाले कई लोगों को पकड़ चुकी है। विगत 4 जुलाई को एंटी ड्रग्स टास्क फोर्स को तब बड़ी सफलता हासिल हुई जब उसने जनपद मुख्यालय के अस्कोट-जौलजीवी मार्ग के पास बेड़ा जंगल से 38 वर्षीय महिला लक्ष्मी ततवाल पत्नी श्री धीरेन्द्र ततवाल से 10 किलो 398 ग्राम अवैध चरस बरामद की। इससे पूर्व 3 जुलाई को जिला मुख्यालय के चंद चौराहे से विनोद सिंह कार्की पुत्र साधु सिंह कार्की से 2 .6 ग्राम स्मैक बरामद की गई। जनपद में मैदानी इलाकों से आकर स्मैक का धंधा भी जोर पकड़ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह यहां विभिन्न तरह के नशे की मांग बढ़ चुकी है। कई युवा नशे के दलदल में डूब रहे हैं। पुलिस की तमाम धरपकड़ के बाद भी इसमें पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। लेकिन अवैध मादक पदार्थों पर रोक लगाने के लिए पुलिस कप्तान आर .सी .राजगुरू ने एंटी ड्रग्स टास्क फोर्स का गठन किया हुआ है। जिसमें पुलिसकर्मी प्रकाश मेहरा को प्रभारी बनाया गया है। इस टीम में उपनिरीक्षक हेम तिवारी, हीरा सिंह डांगी, विकास कुमार, अनिल मर्तोलिया, सिपाही राज कुमार, संदी चंद, बलवंत बल्दिया, संदीप चंद, अरविंद कुमार, उमेश अधिकारी, प्रमोद कुमार, राजेन्द्र गोस्वामी, संजीत राणा, ज्योति बिष्ट के नेतृत्व में अवैध मादक पदार्थों का धंधा करने वालों की धरपकड़ जोरों से जारी है।

सवाल सिर्फ जनपद पिथौरागढ़ का ही नहीं है बल्कि आज के दौर में प्रदेश में नशा एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। नशा यहां के जनजीवन को कई तरह से प्रभावित कर रहा है। प्रदेश में पूर्व में नशा नहीं रोजगार दो, शराब नहीं स्वास्थ्य चाहिये जैसे आंदोलन चलाये गये। आज भी प्रदेश के हर हिस्से में शराब के विरोध में महिलायें आंदोलन चला रही हैं। अवैध रूप से बनने वाली शराब को नष्ट कर रही हैं तो जगह-जगह खोले जाने वाली अंग्रेजी व देशी शराब की दुकानों का विरोध भी कर रही हैं। एक दौर था जब यहां का युवा सेना में आसानी से भर्ती हो जाता था, लेकिन आज कई तरह के नशों का उपयोग करने के कारण वह शारीरिक रुप से सेना में भर्ती होने की योग्यता खो रहा है। आज प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर, कस्बे-कस्बे में कच्ची व पक्की शराब की दुकानें यहां के युवाओं सहित आम आदमी को नशे की तरफ धकेल रही हैं।

पहले शराब को लेकर प्रदेश में जमकर हंगामा कटता था। कई बार तो आंवटित दुकानों को रद्द करना पड़ता था। लेकिन शराब कारोबारियों ने इसकी काट निकाली और महिलाओं के नाम से ही शराब की दुकानें अब आंवटित होने लगी हैं। जिन क्षेत्रों में शराब की दुकानें नहीं हैं वहां पर जमकर शराब की तस्करी हो रही है। पहले सुरा, लिक्वड़, कच्ची शराब बहुतायत में मिलती थी तो अब आधा, पव्वा व बोतल लोगों को नचा रही है। अभी कुछ माह पूर्व उत्तराखण्ड व उत्तर प्रदेश में हुई मौतें इसकी साक्षी हैं। शराब व अन्य मादक पदार्थों की लत ने यहां के एक तबके के लोगों के तन, धन व मन को प्रदूषित किया है। कई तरह के अपराधों को जन्म दिया है। लेकिन इन सबके बीच यह उम्मीद तो की ही जानी चाहिये की अवैध रुप से फल-फूल रहे मादक पदार्थों के कारोबार को रोकने में पुलिस की यह मुहिम रंग लाएगी।

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