सन 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार बनने के बाद 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन से पूरे देश में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हुई। जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद झाड़ू लगाकर देश की जनता को सफाई के प्रति जागरूक किया था, एक बार फिर 2 अक्टूबर नजदीक है, दावा यह किया जा रहा है की पिछले वर्षों में जो स्वच्छता अभियान चलाए गए हैं उसके चलते हमारा शहर स्वच्छता में पहले से बेहतर है, लेकिन हक़ीक़त उलट है। नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम को खुले में शौचमुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन की ओर से निगम को खुले में शौचमुक्त निकाय क्षेत्र होने का प्रमाण पत्र दिया गया है। इस संबंध में निकायों की ओर से केंद्रीय मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी गई थी। नैनीताल जिले के आठ निकायों से प्रतिदिन चार सौ टन कूड़ा निकलता है। जिसमें कमी लाने के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण मिशन के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों को गति देना जरूरी बताया गया है। जिले में 2020 के सर्वेक्षण से पहले पचास प्रतिशत की कमी लाने की बात भी कही गयी है, स्वच्छ भारत मिशन का मुख्य उद्देश्य कचरे की मात्रा में कमी लाकर स्वच्छता को बढ़ावा देना है। जिससे मिशन का उद्देश्य पूरा हो सके। हल्द्वानी में स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के लिए अभी से कार्ययोजना तैयार कर उस पर कार्य प्रारंभ होने वाला है। दावो के उलट हल्द्वानी की तस्वीर देखे तो, जगह जगह कूड़ा, कचरा, शहर के बीचों बीच पहाड़ियों से घिरा रेलवे स्टेशन हल्द्वानी, आप नजर डालेंगे तो स्टेशन के बाहर का इलाका कूड़े कचड़े से पटा नज़र आएगा, ढोलक बस्ती के लोग, आस पास झुग्गी बस्ती के हज़ारों लोग यहां गन्दगी फैलाते हैं, खुले में शौच करते लोग स्वच्छता अभियान को पलीता लगाते नजऱ आएंगे, लेकिन सवाल यह पैदा हो रहा है की सरकार देश के भीतर जो शौचालय बनाने का दावा कर रही है वो कहाँ है, जिस सर्वेक्षण पर हल्द्वानी नगर निगम को अवार्ड मिल रहे हैं उनका आधार क्या है, जहाँ तहां कूड़े के बड़े ढेर नगम निगम और जिला प्रशासन के दावो की पोल खोलने के लिये काफ़ी हैं, स्थानीय लोग कहते हैं सब कुछ कागजी चल रहा है, धरातल पर कुछ भी नही। स्वच्छ भारत अभियान का मकसद देश के लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना था , लेकिन हल्द्वानी शहर के अलग अलग हिस्सों से सफाई की जो तस्वीरें नजर आती हैं उससे यह नही लगता कि लोग स्वच्छता के प्रति पूरी तरह सजग हैं, भले ही नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण में अनेकों पुरुष्कार जीत चुका हो, लेकिन उसके दावे तब खोखले साबित होते दिखाई देते हैं जब सैकड़ों लोग आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं ।
मोदी सरकार के दावों को तमाचा लगाता स्वच्छता अभियान…

