पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का नया अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के समर्थक पूर्व क्रिकेटर बृजेश पटेल से हालांकि उन्हें कड़ी टक्कर मिल रही है।दादा आज औपचारिक रूप से अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करेंगे। वहीं गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह का निविर्रोध सचिव चुने जाने की बात भी सामने आ रही है। केंद्रीय मंत्री और पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के छोटे भाई अरुण धूमल कोषाध्यक्ष का पद संभालेंगे!
बीसीसीआई का इतिहास
बीसीसीआई का पूरा नाम है। यानि क्रिकेट की वह सर्वोच्च संस्था जो देश में खेले जाने वाले क्रिकेट मैच का आयोजन या उसे नियंत्रित करती है। आसान शब्दों में अगर कहें तो BCCI भारतीय क्रिकेट को पोषित करता है और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट की भागीदारी सुनिश्चित करता है।
बीसीसीआई का गठन 1928 में हुआ था। बोर्ड का मुख्यालय मुंबई में है। यही वह संस्था है, जो राज्य क्रिकेट संघों का प्रतिनिधित्व करती है और इसे इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की भी मान्यता प्राप्त है। यह अजीब सी बात है कि भारत में एक स्वायत्त संस्था (या सोसाइटी, जैसा कि भारतीय कानून में बीसीसीआई है) को महज इसलिए एक खेल का आधिकारिक प्रशासक मान लिया गया है क्योंकि एक अंतरराष्ट्रीय संस्था इसकी टीम को ही भारतीय टीम की मान्यता देती है।
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आईसीसी की नींव 1907 में लंदन में इम्पीरियल क्रिकेट कान्फ्रेंस के रूप में पड़ी थी, जिसके ठीक 21 साल बाद बीसीसीआई का (गठन) हुआ। साल 1965 में इम्पीरियल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस का नाम बदलकर इंटरनेशनल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस हो गया, जो बाद में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंंसिल के नाम से जानी गई। आईसीसी के स्थापना काल से लेकर आज तक इसका मुख्यालय लंदन में ही है। बीसीसीआई का इंग्लिश कनेक्शन यहीं खत्म नहीं हो जाता।बीसीसीआई के लोगों में भी इंग्लिश कनेक्शन मिलता है। इसका लोगो उस ब्रिटिश प्रतीक चिन्ह से प्रेरित है, जिसकी स्थापना 1861 में ब्रिटिश हुकूमत के साथ दोस्ती रखने वाले भारतीय राजा-महाराजाओं-युवराजों के साथ ही उन भारतीय व ब्रिटिश प्रशासकों को सम्मानित करने के लिए की गई थी, जिन्होंने ‘क्राउन’ की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
यही वह संस्था थी, जिसने विश्व में क्रिकेट को लेकर बनी-बनाई मान्यता और ढर्रे को न सिर्फ तोड़ा, बल्कि विश्व में सबसे ताकतवर और संपन्न क्रिकेट संस्था बनकर दिखा दिया। बीसीसीआई की इस उपलब्धि के पीछे कई कारण थे। एक तो भारतीय खिलाड़ी काफी अच्छा क्रिकेट खेलते थे, दूसरे देश के लाखों-करोड़ों लोगों में इस खेल के प्रति जबरदस्त दीवानगी थी।बीसीसीआई खेलो में होने वाले प्रदर्शन के साथ-साथ खेल की भावना को सुरक्षित रखने के लिए दूसरे निगरानी जैसे काम भी करती है, जिसमें क्रिकेट के ऊपर होने वाले सट्टेबाजी को रोकना भी शामिल है और ऐसे खेल से जुड़े नियमो को भंग करने वाले खिलाड़ियों पर बोर्ड अक्सर फैसले लेती रहती है और मैच फिक्सिंग जैसे मामलो में दोषी पाए जाने पर आजीवन प्रतिबंध जैसे फैसले भी बोर्ड ही लेती है।
1928 से अब तक बने बोर्ड अध्यक्षों की सूची
बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष सीके खन्ना हैं, जिन्होंने 2017 में इस पद को संभाला था।
| अध्यक्ष का नाम | कब से कब तक |
| ग्रांट गोवन | 1928-1933 |
| सर सिकंदर हयात खान | 1933-1935 |
| हमिदुल्लाह खान | 1935-1937 |
| केएस दिग्विजय सिंह | 1937-1938 |
| पी. सुब्बरायन | 1938-1946 |
| एन्थॉनी एस डी’मैलो | 1946-1951 |
| जेसी मुखर्जी | 1951-1954 |
| महाराजकुमार विजय आनंद | 1954-1956 |
| सरदार सुरजीतसिंह मजीठिया | 1956-1958 |
| आरके पटेल | 1958-1960 |
| एमए चिदंबरम | 1960-1963 |
| फतहसिंह राव गायकवाड़ | 1963-1966 |
| जेड आर ईरानी | 1966-1969 |
| एएन घोष | 1969-1972 |
| पीएम रुंगटा | 1972-1975 |
| रामप्रकाश मेहरा | 1975-1977 |
| एम चिन्नास्वामी | 1977-1980 |
| एसके वानखेड़े | 1980-1982 |
| एनकेपी साल्वे | 1982-1985 |
| एस श्रीरमन | 1985-1988 |
| बीएन दत्त | 1988-1990 |
| माधवराव सिंधिया | 1990-1993 |
| आईएस बिंद्रा | 1993-1996 |
| राज सिंह डूंगरपुर | 1996-1999 |
| एसी मुथैया | 1999-2001 |
| जगमोहन डालमिया | 2001-2004 |
| रणबीर सिंह महेंद्रा | 2004-2005 |
| शरद पवार | 2005-2008 |
| शशांक मनोहर | 2008-2011 |
| एन. श्रीनिवासन | 2011-2013 |
| जगमोहन डालमिया (अंतरिम) | 2013-2013 |
| एन. श्रीनिवासन | 2013-2014 |
| शिवलाल यादव (अंतरिम) | 2014-2014 |
| सुनील गावसकर (अंतरिम, आईपीएल) | 2014-2014 |
| जगमोहन डालमिया (निधन) | 2015-2015 |
| शशांक मनोहर | 2015-2016 |
| अनुराग ठाकुर | 2016-2017 |