शिवसेना चाहती है कि इस बार मुख्यमंत्री पद शिवसेना को हर हाल में मिलना चहिए। लेकिन भाजपा अपनी स्पष्ट नीति पर अडिग दिख रही है। भाजपा ने दो टूक बोल दिया है कि मुख्यमंत्री सिर्फ भाजपा का होगा। इसका मतलब ये है कि “जब भी झुकेगी शिवसेना ही झुकेगी।”
प्रदेश की राजनीतिक गलियों में सिर्फ यही चर्चा है कि शिवसेना को झुकना चाहिए या नहीं।
अब तक के राजनीतिक इतिहास को देखे तो महाराष्ट्र में शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद कभी नहीं लिया, या यूँ कहिए कि इस लायक सीट कभी नहीं जीत पाई। लेकिन 2019 के चुनावों में मोदी सरकार का सबसे बड़ा दोष (निर्भरता) उभर कर सामने आ गया और शिवसेना को मजबूती मिल गई।
महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा में भाजपा अपने ही उतावलेपन का शिकार हो गई। आवश्यकता से अधिक विश्वास ने भाजपा को आइना दिखा दिया और दोनों प्रदेशों में उम्मीद से बहुत पीछे रह गई।
अब शिवसेना को तय करना है कि उसका भविष्य क्या होगा।
यदि इस बार शिवसेना अपनी माँग पर झुक जाती है तो भविष्य में भी भाजपा शिवसेना को गंभीरता से नहीं लेगी। और प्रदेश की जनता के सामने शिवसेना की छवि भी कमजोर होगी।
इसलिए शिवसेना को अपने राजनीति भरोसे और छवि के लिए अपनी जिद पर अड़े रहना ही फायदेमंद होगा।

